This document outlines a revised scheme for the redeployment of surplus employees in government departments. The key changes include the removal of the provision for retrenchment after six months of non-deployment. The revised scheme emphasizes the transfer of surplus employees to a surplus staff pool and their subsequent redeployment. It also introduces provisions for retraining, placement in equivalent or lower-level posts, and an attractive voluntary retirement package. The document details the identification process for surplus employees, the role of the Central Redeployment Cell, and the procedures for notification and absorption into vacant positions. Specific guidelines are provided for handling cases involving staff from closed organizations, employees on deputation, and the participation of scheduled castes and tribes. The scheme aims to streamline the process of managing surplus personnel, minimize revenue loss, and ensure efficient utilization of human resources within the government.
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संख्या-1/18/89-सी.एस.-III
भारत सरकार
कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय
कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग
6/618, निर्वाचन सदन, नई दिल्ली, दिनांक 01.04 .1989
विषय : अधिशेष कर्मचारियों की पुन: तैनाती – संशोधित योजना को लागू किया जाना।
जैसा कि वित्त मंत्रालय इत्यादि इससे अवगत है कि भारत सरकार के तत्कालीन गृह मंत्रालय द्वारा दिनांक 25.02 .66 के कार्यालय जापन संख्या-3/27/65-सी.एस.-II के अंतर्गत अधिशेष कर्मचारियों की पुन: तैनाती के लिए एक योजना जारी की गई थी। तदुपरांत इस योजना के प्रावधानों को लागू करने और अधिशेष कर्मचारियों की आगे की श्रेणियों को इस योजना के दायरे में लाने के लिए समय-समय पर नियम और आदेश जारी किए गए थे।
2. मौजूदा योजना का एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि कोई भी अधिशेष कर्मचारी जिसे 6 महीने की समाप्ति पर किसी भी कारण से पुन: नियोजित नहीं किया जाता है, उस पर लागू समुचित नियम के अंतर्गत उसे नोटिस देकर उसकी छटनी कर दी जाती है। अब यह निर्णय लिया गया है कि मौजूदा योजना के इस प्रावधान को विलोपित कर दिया जाए।
3. मूल योजना के’अंतर्गत विहित प्रक्रिया में पहले से ही किए गए विभिन्न परिवर्तनों और इसके संचालन से हुए अनुभव और उपर्युक्त निर्णय के मद्देनजर एक संशोधित योजना तैयार की गई है। संशोधित योजना की एक प्रति जानकारी के लिए संलग्न है। यह योजना तत्काल प्रभाव से लागू होगी और यह दिनांक 25.02 .66 को जारी की गई योजना का स्थान ले लेगी। पूर्व योजना के अनुक्रम में जारी विभिन्न आदेश और अनुदेश, इस संशोधित योजना के प्रावधानों के परस्पर विरोधी होने की सीमा पर अधिक्रमित हो जाएंगे तथापि, पूर्व योजना के अंतर्गत पहले ही ले लिए गए निर्णय पुन: नहीं खोले जाएंगे।4. इस संबंध में, यहां यह उल्लेख करना प्रासंगिक होगा कि संशोधित योजना, फरवरी, 1966 जारी की गई योजना से मुख्य तौर पर निम्नलिखित क्षेत्रों में भिन्न है:-
4.1 संशोधित योजना में यह अभिकल्पित है कि अधिशेष घोषित कर दिए गए कर्मचारी, अपने पुन: नियोजन तक, प्रत्येक मंत्रालय/विभाग में बनाए जाने वाले अधिशेष कर्मचारी स्थापन में स्थानान्तरित कर दिए जाएंगे। अधिशेष कर्मचारियों द्वारा धारित अस्थायी पद, उपर्युक्त स्थापन में स्थानांतरित कर दिए जाएंगे। जहां कहीं अधिशेष कर्मचारियों द्वारा धारित पद स्थायी हैं तो ये पद समास कर दिए जाएंगे और इनके स्थान पर अधिशेष कर्मचारी स्थापन में अधिशेष कर्मचारियों के लिए अधिसंख्य पद सृजित किए हुए समझे जाएंगे। ये पद, अन्य पदों पर कार्यभार ग्रहण करने, अथवा सेवानिवृत्त होने, त्यागपत्र देने इनमें से जो भी पहले हो, के परिणामस्वरूप संबंधित अधिशेष कर्मचारियों द्वारा कार्यमुक्त होने पर ये पद तत्काल समास कर दिए जाएंगे।
4.2 संशोधित योजना में उन अधिशेष कर्मचारियों की सेवा की समयबद्ध समाप्ति/छंटनी का कोई प्रावधान नहीं है जिन्हें छ: माह की अवधि के भीतर पुन: नियोजित नहीं किया जा सकता। तदनुसार भविष्य में छ: माह की अवधि के पभात् अधिशेष कर्मचारियों की कोई छंटनी नहीं की जाएगी। इसके अलावा संशोधित योजना में यह अभिकल्पित है कि कम से कम प्रथम तीन माह के लिए अधिशेष कर्मचारी को निम्नतर वेतनमान के पद पर संविलियन के लिए नामित नहीं किया जाएगा। संशोधित योजना में यह भी निर्धारित है कि संबंधित पुन: नियोजन अभिकरण नामजद किए गए अधिशेष कर्मचारी को पद का कार्यभार ग्रहण करने के लिए निदेश दे सकता है यदि प्रासकर्ता संगठन से एक महीने के भीतर कोई अनापत्ति प्राप्त नहीं होती है और प्रासकर्ता संगठन ऐसे कर्मचारी को स्वीकार करने के लिए बाध्य होगा।
4.3 पूर्व योजना में उस व्यक्ति के पुन: समायोजन कोई प्रावधान नहीं है जिसे पहले ही पुन: नियोजित किया गया है। संशोधित योजना में इस आशय का एक प्रावधान किया गया है कि वे अधिशेष कर्मचारी जिन्हें निम्नतर वेतनमान अथवा निम्नतर वर्गीकरण वाले पदों पर पहले ही पुन: नियोजित किया जा चुका है, उन्हें उनके विक्लप पर समतुल्य पदों पर पुन: नियोजित किया जाए। इसी प्रकार कम वेतन वाले कर्मचारी भी कतिपय विनिर्दिष्ट हालात में उके पसंदीदा राज्यों में पुन: समायोजन की सुविधा के पाई होंगे। पुन: नियोजन कर दिए गए अधिशेष कर्मचारियों के पुन: समायोजन संबंधी नियम अलग से जारी किए जा रहे हैं।4.4 मौजूद स्थिति के अनुसार संशोधित योजना में, अधिशेष कर्मचारियों को विशेष छुट्टी दिए जाने का प्रावधान नहीं है जैसा कि गृह मंत्रालय के दिनांक 26.12 .66 के कार्यालय ज्ञापन संख्या-4/1/66-सी.सी. में प्रावधान किया गया है। छ: महीने के अंत तक नियोजित न किए गए कर्मचारियों की छंटनी के प्रावधान को विलोपित किए जाने के मद्देनजर, पुनः नियोजन के अंतर्गत चल रहे अधिशेष कर्मचारियों को कोई विशेष छुट्टी प्रदान करना आवश्यक नहीं समझा गया है।
4.5 संशोधित योजना के पैरा 8 में, उन कर्मचारियों के लिए समुचित प्रशिक्षण की व्यवस्था किए जाने पर बल दिया गया है जिन्हें भविष्य में अधिशेष घोषित किया जाना है ताकि उनका उन पदों पर पुनः नियोजन किया जा सके जहां वे उपयोगी सिद्ध हो। संशोधित योजना में उल्लेख किए अनुसार, इस बारे में कार्रवाई संबंधित मंत्रालयों/विभागों द्वारा अग्रिम रूप से शुरू की जानी है।
5. अधोहस्ताक्षरी को वित्त मंत्रालय इत्यादि से यह अनुरोध करने का विदेश हुआ है कि वह संशोधित योजना के प्रावधानों को, अपने नियंत्रणाधीन सभी पदों और सेवाओं के नियंत्रक प्राधिकारियों के ध्यान में ला दें।
ह०/-
(ए.एस. तनेजा)
उप-सचिव (एस.आर.)# केन्द्र सरकार के विभागों/कार्यालय में स्थापनाओं में हुई कमी के कारण अधिशेष हुए कार्मिकों के निपटान की संशोधित योजना
प्रस्तावना
- आधुनिक, विकासशील कल्याणकारी राष्ट्र के परिपेक्ष्य में, एक निश्चित सरकारी स्थापना का सिद्धान्त वैध अथवा संभव नहीं रहा। किसी अल्प अधिमानतः की सरकारी गतिविधि से मानव ऊर्जा का किसी उच्च अधिमानतः के क्षेत्र में स्थानांतरण आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, स्थापनाओं पर होने वाले व्यय में कमी लाने के तथा लोक सेवाओं में कार्य कुशलता में सुधार लाने की दृष्टि से मौजूदा संगठनात्मक ढाँचा तथा कार्य-प्रणाली की सतत समीक्षा की जाती तथा संबंधित तकनीक तथा प्रबंध और वित्तीय नियंत्रण के सिद्धान्त तथा आधुनिक अथवा अधिक व्यापक तकनीकी सहायता को लागू करते हुए उनका पुर्तसमायोजन अपेक्षित है। इस उद्देश्य हेतु, काम-काज की माप तथा मौजूदा कार्यप्रणाली की संगतता तथा कार्यकुशलता का मूल्यांकन और संगठनात्मक ढाँचे का अध्ययन वित मंत्रालय (व्यय विभाग), प्रशासनिक सुधार तथा लोक शिकायत विभाग, आंतरिक कार्य अध्ययन एककों आदि जैसे विशिष्ट अभिकरणों के माध्यम से किया जाना अपेक्षित है। इन कार्यों तथा शुन्य आधारित बजट के माध्यम से कतिपय मामलों में अनुमोदित स्थापनाओं में कटौती किया जाना तथा किसी संगठन अथवा विभाग में होने वाली गतिविधि समाप्त किया जाना अपेक्षित हो सकता है। कतिपय मामलों में कोई संगठन विल्कुल ही अनावश्यक पाया जा सकता है तथा उसे समाप्त किया जाना पड़ सकता है। सभी मामलों में उनमें कार्यरत कर्मचारी प्रभावित होते हैं। सरकार का यह सुविचारित मत है कि यदि प्रभावित कर्मचारियों की सतत सेवा प्रभावित हो तो, यह कार्मिक प्रबंध और प्रशासनिक तथा वित्तीय प्रबंध में सुधार के सिद्धान्त के विल्कुल विपरीत होगा। विशेषकर, क्योंकि यदि उनको कार्य से हटाना हो तो सरकार उनके बहुमूल्य अनुभव के लाभ से बंचित हो जाएगी। 25.2.66 से ही ऐसी आकस्मिकताओं के कारण अधिशेष हुए कर्मचारियों की वैकल्पिक तैनाती हेतु एक योजना चलाई जा रही है। उपर्युक्त योजना, मोटे तौर पर अधिशेष कर्मचारियों की पात्र श्रेणी की तैनाती की व्यवस्था में कारगर सिद्ध हुई है। फिर भी, अब तक प्राप्त अनुभव के आधार पर तथा मौजूदा योजना के कार्यान्वयन में हुए परिवर्तन के मद्देनजर मौजूदा योजना में इन आकस्मिकताओं के कारण अधिशेष हुए कर्मचारियों की छंटनी की संभावनाओं को समाप्त करते हुए उसे संशोधित किया जाना अपेक्षित है।
मूलभूत अवधारणाएं
2.0 उपर्युक्त योजना निम्न अवधारणाओं पर आधारित है :-
2.1 किसी संगठन में अधिशेष कर्मचारियों की उपस्थिति केवल उसकी प्रगति बाधित करती है और उसकी कार्य कुशलता और उसमें कार्यरत कर्मचारियों के हितों पर भी प्रतिकूलप्रभाव डालती है तथा जैसे ही ऐसे अधिशेष कर्मचारियों का पता चले उसकी छंटनी की जाने की सलाह दी जाती है।
2.2 यदि सरकारी संगठनों में अधिशेष कर्मचारियों की छंटनी के कार्य में सफलता प्राप्त करती है तो अधिशेष कर्मचारी के रूप में पहचान किए गए लोगों की तत्काल वैकल्पिक तैनाती की प्रभावी प्रक्रिया होनी चाहिए।
2.3 अधिशेष कर्मचारियों की तत्परता से तैनाती सुलभ बनाने हेतु केन्द्रीय पुनर्नियोजन अभिकरणों में रिक्तियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना अनिवार्य है तथा यह भी सुनिश्चित किया जाए कि ऐसे पुनर्नियोजन अभिकरणों द्वारा प्रस्तावित तैनाती को अन्य सरकारी विभाग/कार्यालय जहाँ संगत रिक्ति स्थित हो, बिना हिचकिचाये स्वीकृत कर ले।
2.4 अधिशेष कर्मचारियों के संविलयन का आसानी से स्वीकृत किया जाता तथा जिन संगठनों में उनका उपयोगी सदस्य के रूप में पूर्वनियोजन करने के लिए, जब कभी जरूरत हो, उन्हें अपेक्षित कार्य में कार्य कुशलता का प्रशिक्षण दिया जाना आवश्यक है।
2.5 यह परामर्श दिया जाता है कि अधिशेष कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति लाभ हेतु आकर्षक प्रस्ताव दिए जाते रहे ताकि जो वैकल्पिक कार्य पर काम करने में रुचि नहीं रखते हों अथवा नए परिवेश/तथा कार्य की माँगों के साथ सही समायोजन करने के योग्य नहीं हो वे खुशी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले सकते हैं।
- योजना का कार्यान्वयन :
3.1 यह योजना केन्द्रीय सिविल सेवकों पर लागू होगी (तदर्थ, आकस्मिक, कार्य आधारित अथवा संविदा आधार पर कार्य करने वालों को छोड़कर)
(क) स्थायी अथवा अर्ध स्थायी है अथवा यदि अस्थायी हो तो नियमित निरंतर सेवा के पाँच वर्ष से कम कार्य नहीं किया हो, तथा भारत सरकार के मंत्रालयों/विभागों/कार्यालयों में अपने पद सहित निम्न कारणों से अधिशेष हुए हों और
(ख) जो निम्न कारणों से मंत्रालयों/विभागों/सरकारी कार्यालयों में अपने पद सहित अधिसंख्य्य हो गए हैं :-
(i) अन्य बातों के साथ-साथ किसी संगठन की पुनर्संरचना सहित प्रशासनिक सुधार किसी गतिविधि के राज्य सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम अथवाअन्य स्वायत निकायों में स्थानंतरित होना किसी मौजूदा गतिविधि का सम होना, तकनीक में हुए परिवर्तनों का कार्यान्वयन; अथवा
(ii) वित मंत्रालय अथवा केन्द्र सरकार से संबंधित किसी मंत्रालय/विभाग के स्टाफ निरीक्षण एकक द्वारा किया गया कार्य अध्ययन
(iii) केन्द्र सरकार के किसी संगठन का समास अथवा व्ययगत (पूर्ण अथवा आंशिक)।
3.2 उपर्युक्त अधिशेष कर्मचारियों की तैनाती सामान्यतः केन्द्रीय सिविल सेवा में सीधी भर्ती द्वारा भरी जानी वाली रिक्तियों पर तथा केन्द्र सरकार में विभिन्न मंत्रालयों/विभागों/कार्यालयों, संघ लोक सेवा आयोग द्वारा प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से सेवाओं/पदों पर होने वाली भर्ती को छोड़कर की जाएगी।
फिर भी, किसी स्वायत संगठन अथवा केन्द्र सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम की रिक्तियों पर उस समय लागू शर्तों के अधीन, यदि संबंधित अधिशेष कर्मचारी द्वारा ऐसा विकल्प दिया गया हो, पुनर्नियोजन किया जा सकता है।
3.3 यह योजना निम्न पर लागू नहीं होगी :
(i) रेल मंत्रालय (मुख्यालय, रेलवे बोर्ड के कर्मचारी तथा पदों को छोड़कर)
(ii) रक्षा मंत्रालय के फील्ड-फॉरमेशन (रक्षा अनुसंधान तथा विकास विभाग के अंतर्गत आने वालों को छोड़कर)
(iii) कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग द्वारा निर्धारित कार्मिक नीतियों तथा भर्ती प्रक्रिया के अधिकार क्षेत्र से विवर्जित ऐसे मंत्रालयों/संगठनों को छोड़कर (उदाहरणार्थ अंतरिक्ष विभाग, इलैक्ट्रॉनिकी विभाग, परमाणु ऊर्जा विभाग आदि) के अंतर्गत आने वाले वैज्ञानिक तथा अन्य पदों पर नियुक्तियां, ऐसे मंत्रालयों/संगठनों द्वारा अन्यथा चाहे गए मामलों में छोड़कर।
(iv) नियमों/आदेशों के अंतर्गत विनिर्दिष्ट पदों की कोई अन्य श्रेणी।
4.0 अधिसंख्य कर्मचारियों की पहचान
4.1 प्रशासनिक सुधार तथा लोक शिकायत विभाग अथवा एस.आई.यू. अथवा आई.डब्ल्यू.एस.यू. अथवा अन्य कोई समिति अथवा संबंधित मंत्रालय अथवा सरकार द्वारा गठित अध्ययन दल की रिपोर्ट में निहित अधिसंख्य कर्मचारी से संबंधित निष्कर्षों पर उपयुक्त स्तर पर चर्चा तथा सहमति होजाती है तो यह दायित्व प्रशासनिक मंत्रालय/विभागाध्यक्ष को होगा कि कर्मचारियों की अनुमोदित संख्या को कम करना औपचारिक रूप से लागू किया जाए तथा रिपोर्ट के प्राप्त होने की तीन माह के भीतर अधिसंख्य कसचारी की अधिकता: तथा उनकी पहचान लिए जाने की घोषणा की जाए।
4.2 इसी तरह से, जहाँ चरणबद् रूप से किसी संगठन को समास करने के. बारे में मंत्रिमंडल के अनुमोदन से कोई निर्णय ले लिया गया है, प्रशासनिक मंत्रालय, जब तक की सरकार द्वारा कोई अन्य समय-सीमा नहीं निर्धारित की गई हो, ऐसे निर्णय की प्राप्त की तारीख के तीन माह की अवधि के भीतर कर्मचारियों की संख्या में कटौती करेगा।
4.3 इस परिपेक्ष में, प्रशासनिक मंत्रालय/विभागाध्यक्ष रिपोर्ट अथवा उपर्युक्त उप पैरा 4.1 में संदर्भित निर्णय के आधार पर समास किए जाने वाले पदों का निर्धारण करेगा तथा उपर्युक्त रिपोर्ट अथवा निर्णय की प्राप्ति की तारीख के एक माह के भीतर ऐसे पदों की पहचान की प्रक्रिया पूरी करेगा।
4.4 (क) समास किए जाने हेतु अपेक्षित अधिसंख्य पदों के निर्धारण के तत्काल बाद किसी अधिसंख्य कर्मचारी, यदि कोई हो, की पहचान करने हेतु कार्यवाही की जाएगी तथा सामान्यतः कम हुई संवर्ग संख्या के विरुद सबसे कनिष्ठ अस्थायी व्यक्ति को अभ्यर्पित कर दिया जाएगा, इसके बाद यदि अपेक्षित हो सबसे कनिष्ठ अर्ध अस्थायी तथा उसके बाद स्थायी कर्मचारी को। ‘सबसे कनिष्ठ’ के नियम का सबती से पालन किया जाएगा तथा कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग को केन्द्रीय एकक तथा रोजगार तथा प्रशिक्षण महानिदेशालय इस नियम के तत्परता तथा सबती से पालन किए जाने हेतु प्राधिकारी होंगे। फिर भी, इस कार्य हेतु वरिष्ठता सीढ़ी में स्वैध्या से आगे आने वाले लोगों पर कोई पाबंदी नहीं होगी। विशेषकर, यदि वे अधिसंख्य कर्मचारी उपलब्ध स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति प्रसुविधाओं का लाभ उठाने चाहते हों।
(ख) जहाँ श्रेणीबद् रूप से कोई संगठन समास किया जाना हो अधिसंख्य कसचारी को वरिष्ठता के उलटे क्रम में अधिसंख्य घोषित नहीं किया जाएगा बल्कि नियमित वरिष्ठता का सबती से पालन करते हुए। ऐसे मामलों में वरिष्ठ लोगों को अभ्यर्पण हेतु बाद की किसी तारीख तक रूके रहने के विकल्प की अनुमति होगी। तथा उनसे कनिष्ठ को अभ्यर्पित कर दिया जाएगा परंतु उन्हे यह स्पष्टतः बता दिया जाए कि बाद तक रूके रहने के उनके विकल्प के कारण ने नए कार्यालय में वरिष्ठता के मामले में पिछड़ जाएंगे जहाँ उनसे कनिष्ठ व्यक्ति पहले तैनाती पा लेगा।(ग) उपर्युक्त नियम, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों, दंपतियों के सेवा मामले आदि के संबंध में समय-समय पर जारी विशेष अनुदेशों के अध्यधीन लागू किए जाएंगे ।
(घ) अधिशेष कर्मचारियों की पहचान और संबंधित केन्द्रीय प्रकोष्ठ में पुनर्नियोजन हेतु पात्रता की दृष्टि से उन्हें उपयुक्त मानने संबंधी विस्तृत कदम और समय-सीमा इस योजना के अनुबंध-। में दी गई है और इनका उन प्रशासनिक मंत्रालयों/विभागों द्वारा कड़ाई से अनुपालन किया जाए जहाँ पर अधिशेष कर्मचारी हैं ।
(ड.) एक कर्मचारी जिसे सामान्यतया अधिशेष घोषित किया जाना है, यदि वह निलम्बनाधीन है अथवा उसके विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही चल रही है, उसे अधिशेष घोषित न किया जाए और उसका पुनर्नियोजन प्रस्थमित्त रखा जाए जब तक कि वह बहाल न हो जाए/अथवा उसके विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही का निर्णय न हो जाए। तथापि, ऐसे प्रत्येक मामले की सूचना संबंधित प्रकोष्ठ को दी जाए ।
(च) पुनर्नियोजन हेतु किसी कर्मचारी की पात्रता के संबंध में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग का निर्णय अंतिम होगा।
5.0 अधिशेष कर्मचारियों के पुनर्नियोजन हेतु अभिकरण
5.1 कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय का केन्द्रीय (अधिशेष कर्मचारी) प्रकोष्ठ, नियमों में प्रावधान किए गए अनुसार केन्द्रीय सिविल सेवाओं में और समूह क, ख और ग पदों में होने वाली रिक्तियों पर और समूह ‘क’ और ‘ख’ पदों पर नियुक्तियों के संबंध में संघ लोक सेवा आयोग के परामर्श से अधिशेष कर्मचारियों के पुनर्नियोजन की व्यवस्था के लिए उत्तरदायी है ।
5.2 केन्द्रीय सिविल सेवाओं में और समूह ‘घ’ पदों में होने वाले अधिशेष कर्मचारियों का पुनर्नियोजन, अब से श्रम मंत्रालय के अंतर्गत रोजगार तथा प्रशिक्षण महानिदेशालय के विशेष प्रकोष्ठ द्वारा संचालित किया जाएगा तथापि, जहां कहीं आवश्यक हो, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग का केन्द्रीय (अधिशेष कर्मचारी) प्रकोष्ठ, जहाँ तक संभव हो,रोजगार तथा प्रशिक्षण महानिदेशालय के तहत विशेष प्रकोष्ठ को अग्रिम सूचना देते हुए समूह ‘घ’ के किसी पद/सेवा में रिक्ति पर समूह ‘ग’ के अधिशेष कर्मचारी को नामित करेगा ।
(टिप्पणी : दो प्रकोष्ठ इसके बाद से ‘केन्द्रीय प्रकोष्ठ/प्रकोष्ठों के रूप में उद्धिखित किए गए है)
5.3 मंत्रालय/विभाग का अध्यक्ष अपने अधिशेष कर्मचारियों को ऐसे कर्मचारियों से संबंद्ध केन्द्रीय प्रकोष्ठ के परामर्श से अपने मंत्रालय/विभाग के अधीन किसी संवर्ग या अन्य कार्यालय में उपलब्ध किसी रिक्त पद पर समायोजित कर सकता है।
6.0 पुनर्नियोजन की, प्रतीक्षा कर रहे अधिशेष कर्मचारियों की व्यवस्था
6.1 कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग अथवा रोजगार तथा प्रशिक्षण महानिदेशालय, जैसा भी मामला हो, की पूर्व सम्मति से अधिशेष घोषित कर दिए गए कर्मचारियों को ‘अधिशेष कर्मचारी स्थापना’ में स्थानांतरित कर दिया जाएगा जो कि संबंधित मंत्रालय/विभाग च कार्यालय, जैसा भी मामला हो, में ऐसे अधिशेष कर्मचारियों को समायोजित करने के लिए सृजित किया जाएगा। अधिशेष घोषित कर दिए गए स्थायीवत् और स्थानापन्न रूप से कार्यरत कर्मचारियों सहित अस्थायी कर्मचारियों द्वारा धारित पद, उसी तारीख से ऐसी स्थापना में स्थानांतरित कर दिए जाएंगे जिस तारीख से उनके पदधारी अधिशेष घोषित किए गए हैं। स्थायी पदों पर कार्यरत अधिशेष कर्मचारियों के मामले में उनके नियमित पद उसी तारीख से समाप्त कर दिए जाएंगे, जिस तारीख को वे अधिशेष घोषित कर दिए गए और उनके स्थान पर उपर्युक्त अधिशेष कर्मचारी स्थापना में साथ ही साथ समान वेतनमान और समान पदनाम वाले अधिसंख्य पद सृजित किए जाएंगे ।
6.2 अधिशेष कर्मचारी स्थापना में स्थानांतरण हो जाने पर अधिशेष कर्मचारी अपने पूर्व वेतनमान में, तब तक वेतन और भत्ते प्राप्त करते रहेंगे जब तक कि उन्हें किसी अन्य पद पर कार्यभार ग्रहण के लिए कार्यमुक्त नहीं किया जाता अथवा उनकी सेवानिवृत्ति, त्यागपत्र आदि, इनमें से जो भी पहले हो।6.3.1 प्रत्येक कर्मचारी, जिसे जैसे ही अधिशेष घोषित किया जाएगा उसे केन्द्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियमावली, 1972 के नियम $29,48$ और 48 – क के तहत स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने की सुविधा तथा मूल नियम 56 के विविध खंडों के संबंध में सूचित किया जाएगा। यदि इनमें से किसी भी नियम के तहत सेवानिवृत्ति का अनुरोध प्राप्त होता है तो संगत नियम (नियमों) के तहत उस पर शीघ्रता से कार्यवाही की जाएगी और सेवानिवृत्ति के आदेश यथासंभव शीघ्र जारी किए जाएंगे ।
6.3.2 सेवानिवृत्ति का अनुरोध स्वीकार होने की स्थिति में केन्द्रीय प्रकोष्ठ को इस संबंध में तत्काल सूचित किया जाएगा ताकि उसके संबंध में चल रही पुनर्नियोजन की प्रक्रिया समाप्त कर दी जाए ।
6.4.1 अधिशेष कर्मचारी स्थापना का सदस्य होने के नाते प्रत्येक अधिशेष कर्मचारी उसे मंजूर की गई देय तथा अनुमत्य छुट्टी को छोड़कर नियमित रूप से कार्यालय में उपस्थित होता रहेगा और मंत्रालय/विभागाध्यक्ष द्वारा इस प्रयोजन के लिए पदनामित अधिकारी (अधिकारियों) को रिपोर्ट करेगा ।
6.4.2 अधिशेष कर्मचारी को अपने.पुनर्नियोजन की प्रतीक्षा तक उसके विभाग/संगठन के अध्यक्ष अथवा अन्य वरिष्ठ प्राधिकारी द्वारा वैकल्पिक ड्यूटियाँ अथवा कार्यभार दिया जा सकता है जो, यद्यपि यह आवश्यक नहीं कि वह उसके पूर्व के कार्य क्षेत्र से संबंधित हो, लेकिन उसकी स्थिति, योग्यता और अनुभव के मद्देनज़र उससे कार्य को सुगमतापूर्वक निष्पादित करने की अपेक्षा की जाती है । ऐसी ड्यूटियां नैमित्तिक अथवा सहायक स्वरूप की होनी चाहिए ताकि अधिशेष कर्मचारी केन्द्रीय प्रकोष्ठ द्वारा जुटाई गई वैकल्पिक तैनाती पर बिना किसी कठिनाई अथवा समय के नुकसान के कार्यभार ग्रहण करने पर राहत महसूस करें ।
6.5.1 जैसी ही संबंधित केन्द्रीय प्रकोष्ठ द्वारा वैकल्पिक तैनाती हेतु किसी नियुक्ति प्रस्ताव, की व्यवस्था की जाती है भले ही वह चाहे समान वेतनमान वाले पद अथवा कर्मचारी की पसंद के राज्य में हो, अथवा अन्यथा, अथवा किसी अन्य संगठन के तहत किसी पद पर कार्यभार ग्रहण करने हेतु ऐसे प्रकोष्ठ से अधिशेष कर्मचारी को कार्यमुक्त किए जाने का निर्देश प्राप्त होता है तो संबंधित विभागाध्यक्ष, अधिशेष कर्मचारी को तत्काल कार्यमुक्त किए जाने की कार्रवाई करे जिसके उपरांत अधिशेष कर्मचारी स्थापना में उसके द्वारा धारित पद समाप्त हो जाएगा । उपर्युक्त स्थापना से एक बार कार्यमुक्त होजाने वाला कोई भी व्यक्ति, संबंधित प्रकोष्ठ की पूर्व सहमति के बिना अधिशेष कर्मचारी स्थापना में वापिस नहीं लिया जाएगा । लंबी छुट्टी पर रह रहे और अप्राधिकृत रूप से अनुपस्थित रह रहे कर्मचारियों को अनुपस्थिति की अवधि में मंजूर की गई छुट्टी (जो उपयुक्त मामलों में कम की जा सकती है) समाप्त होने पर अथवा प्रापक संगठन अथवा प्रकोष्ठ द्वारा निर्दिष्ट अवधि के भीतर, जैसी भी स्थिति हो प्रापक (रिसीपियन्ट) पद पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश सहित कार्यमुक्त कर दिया जाए । किसी अधिशेष कर्मचारी को कार्यमुक्त किए जाने की कार्रवाई, किसी कर्मचारी द्वारा दिए गए अभ्यावेदन मात्र के आधार पर प्रोकी न जाएं।
6.5.2 यह मंत्रालय/संगठन का दायित्व होगा कि वे किसी ऐसे अधिशेष कर्मचारी, जिसके संबंध में उपर्युक्त पैरा 6.5 .1 के अनुसार संबंधित प्रकोष्ठ का नियुक्ति प्रस्ताव अथवा निर्देश प्राप्त हुआ है, ऐसे प्रस्ताव या निर्देश जैसी भी स्थिति हो, की तारीख के बाद उसका वेतन जारी नहीं करेगा, सिवाए ऐसी अवधि के लिए जो संबंधित – कर्मचारी को कार्यमुक्त करने के लिए पूरी तरह आवश्यक है ।
7. केन्द्रीय प्रकोष्ठों को रिक्तियों की सूचना देना
7.1 यह आवश्यक है कि अधिशेष कर्मचारियों का पुनर्निवोजन का संचालन करने वाले केन्द्रीय प्रकोष्ठों के पास अधिशेष कर्मचारियों की तैनाती हेतु रिक्तियां तत्काल उपलब्ध होनी चाहिए । इस प्रयोजन के लिए सरकारी संगठनों में पदों पर सीधी भर्ती में वर्तमान प्रतिबंध तक तक लागू रहेगा जब तक कि प्रत्येक अवसर पर पदों की प्रत्येक श्रेणी के लिए संबंधित केन्द्रीय प्रकोष्ठ से इस आशय का एक प्रमाण पत्र प्राप्त हो जाए कि केन्द्रीय प्रकोष्ठ के पास प्रायोजित करने के लिए कोई उपयुक्त उम्मीदवार नहीं है ।
तथापि, यह प्रतिबंध, संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित वार्षिक प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से की जाने वाली भर्ती पर लागू नहीं होगा।
7.2 इसी प्रकार, लघुकालीन नियुक्ति व्यवस्था को छोड़कर किसी .पद को स्थानांतरण द्वारा (अन्यथा प्रतिनियुक्ति द्वारा) भरे जाने के संबंध में प्रथमतः संबंधित प्रकोष्ठ से ऐसी रिक्तियों पर पुनर्निवोजन हेतु अधिशेष कर्मचारियों की अनुपलब्धता का कोई प्रमाण पत्र प्राप्त किए बिना, प्रतिबंध होगा ।7.3 विभिन्न श्रेणियों की रिक्तियों की रिपोर्ट, उस विभाग में स्थित केन्द्रीय प्रकोष्ठ को तथा रोजगार तथा प्रशिक्षण महानिदेशालय में स्थित विशेष प्रकोष्ठ को दिए जाने की प्रक्रिया का पालन करने के संबंध में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग द्वारा जारी किए गए विस्तृत अनुदेशों का किसी सेवा/पद की भर्ती से संबंधित नियंत्रक प्राधिकारी द्वारा कठोरता से पालन किया जाना चाहिए और इन अनुदेशों के किसी प्रकार के उल्लंघन को सरकार द्वारा गंभीरता से लिया जाएगा।
7.4 संबंधित केन्द्रीय प्रकोष्ठ को सूचित की गई कोई भी रिक्ति वापिस नहीं ली जाएगी, जब एक बार इस रिक्ति पर कोई अधिशेष कर्मचारी नामित कर दिया जाता है, सिवाए इस स्थिति के कि प्रशासनिक मंत्रालय के सचिव द्वारा या उनके स्पष्ट अनुमोदन द्वारा रिक्ति के वापिस लिए जाने के कारण स्पष्ट करते हुए अनुरोध किया जाए। यह नियम समूह ‘क’ और ‘ख’ सेवाओं/पदों की रिक्तियों पर भी लागू होगा जिनके संबंध में संघ लोक सेवा आयोग ने कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के प्रकोष्ठ द्वारा प्रायोजित अधिशेष कर्मचारी की नियुक्ति के लिए सिफारिश की है। संबंद्ध मंत्रालय/विभागाध्यक्ष सामान्यतया ऐसे अनुरोधों के संबंध में केन्द्रीय प्रकोष्ठ के प्राधिकारियों द्वारा दिए गए निर्णय का पालन करने के लिए बाध्य होते हैं। लगातार मत वैमिन्नय की स्थिति में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग का निर्णय अंतिम होगा।
8.0 सापेक्ष महत्व योजना तथा प्रशिक्षण
8.1 प्रत्येक मंत्रालय/विभाग अनुक्रमिक वर्ष के दौरान कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए अपनी आवश्यकताओं का मूल्यांकन करेगा और निर्धारित प्रपत्र में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग को प्रशिक्षण की आवश्यकता; ऐसे ब्यक्तियों की संख्या जिनके लिए प्रशिक्षण अपेक्षित है; विशिष्ट दक्षताएं जिनमें प्रशिक्षण आघ्रश्यक है; ऐसे कर्मचारियों की क्षेत्रीय तैनाती; वह स्तर जिस तक विभिन्न समूह के कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए; और प्रशिक्षण पाठ्यक्रम की इष्टतम अवधि, स्थान और उसके शुरू होने की उपयुक्त तारीख दर्शाते हुए विहित प्रपत्र में अपनी अपेक्षाएं दर्शाएगा।
8.2 प्रत्येक मंत्रालय/विभाग विशेष रूप से श्रेणी वार ऐसे कर्मचारियों की संख्या का मूल्यांकन करेगा जो उत्तरोत्तर वर्ष में अधिशेष घोषित किए जाने हैं और किन ब्यक्तियों को उसी विभाग में, अथवा उसी मंत्रालय के अधीन किसी अन्य विभाग में, अथवा अन्य मंत्रालयों के किसी संगठन में वैकल्पिक पदों पर शीघ्रता से समायोजित हो सकने की क्षमता बढ़ाने के लिए नई दक्षताओं (स्किल्स) में प्रशिक्षण की आवश्यकता है।8.3 प्रशिक्षण आवृत्त्यकताओं के संबंध में उपर्युक्त मूल्यांकन, ऐसा प्रशिक्षण वास्तव में जिस समय दिया जाग्रा है उससे कम से कम 6 से 8 माह पूर्व कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग को भेजा जाना चाहिए।
8.4 उसके पश्चात कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग विभिन्न संबंधित मंत्रालयों/संगठनों के परामर्श से संबंधित कर्मचारियों के लिए अपेक्षित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की व्यवस्था हेतु कदम उठाएगा ।
8.5 कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग यह निर्णय भी करेगा कि क्या किसी अधिशेष कर्मचारी को किसी नए संगठन में पुनर्नियोजन से पूर्व किसी दक्षता में प्रशिक्षण दिया जाना है अथवा किसी नए संगठन में पुनर्नियोजन के बाद वहां पर उसे सेवाकालीन प्रशिक्षण दिया जाना है । उदाहरणार्थ, किसी ऐसे व्यक्ति को पुनर्नियोजन से पूर्व टंकण में प्रशिक्षण दिया जाना आवश्यक नहीं है जो किसी नए घंंगठन में लिपिक के पद पर पुनर्नियोजन के लिए शैक्षिक रूप से अर्ह है क्योंकि कर्मचारी अपने पुनर्नियोजन के बाद ऐसे संगठन में लिपिक के पद पर उपयोगी रूप से कार्य करते समय टंकण में अनिवार्य प्रशिक्षण प्राप्त कर सकता है ।
8.6 प्रशिक्षण में जाने वाले अधिशेष कर्मचारी को, चाहे वह पुनर्नियोजन से पूर्व, उसके लिए व्यवस्थित किया गया अथवा पुनर्नियोजन के बाद, उसे ऐसी प्रशिक्षण की अवधि के दौरान पूरा वेतन और भत्ते प्राप्त होते रहेंगे ।
8.7 एक अधिशेष कर्मचारी जिसे प्रशिक्षण के लिए प्रायोजित किया गया है उससे यह अपेक्षित होता है कि वह अपनी पूरी गंभीरता और परिश्रम से नई दक्षता को ग्रहण करे जिसमें उसे प्रशिक्षण दिए जाने का प्रस्ताव है । ऐसे प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पर जाने के लिए इंकार करने अथवा बिना किसी पर्याप्त कारण के कोई प्रगति नहीं दर्शाने पर तो वह पुनर्नियोजन के लिए अयोग्य ठहराया जा सकता है और जो पहले ही पुनर्नियोजित नहीं है, उन्हें सेवा से हटाए जाने की कार्रवाई की जा सकती है ।9.0 अधिशेष कर्मचारियों की तैनाती
किसी रिक्ति पर नियुक्ति हेतु अशक्त रक्षा कार्मिकों से शिल्कुल अगले स्तर पर अधिशेष कर्मचारियों को प्रथम व रीयता दी जाएगी ।
9.2.1 जहां तक संभव हो, एक अधिशेष कर्मचारी को उसकी उपयुक्तता की शर्त पर, उसके वर्तमान वेतनमान के सदृश वेतनमान वाले पद पर पुनर्नियोजित किया जाए ।
9.2.2 इस प्रयोजन के लिए, एक सदृश वेतनमान का तात्पर्य एक ऐसा वेतनमान जिसका अधिकतम वेतन, अधिशेष कर्मचारी के वेतनमान के बराबर हो, और जिसका न्यूनतम वेतन अधिशेष कर्मचारी के उस मूल वेतन (पदोन्नति अवरोध (स्टेगनेशन) वेतन सहित) से अधिक न हो, जितना वह अपने नामांकन के समय प्राप्त कर रहा था ।
9.2.3 जहां, सदृश वेतनमान वाले पद पर कोई उपयुक्त रिक्ति उपलब्ध नहीं है तो वहां अधिशेष कर्मचारी को असदृश वेतनमान वाले पद पर पुनर्नियोजित किया जा सकता है ।
परन्तु यह कि :-
(i) ऐसे पद के वेतनमान का अधिकतम, अधिशेष कर्मचारी के वेतनमान के अधिकतम से 10 प्रतिशत से अधिक न हो; और
(ii) ऐसा पद, किसी ऐसे पद से निम्नतर नहीं हो जो अधिशेष कर्मचारी द्वारा वर्तमान रूप से धारित पद के पदधारियों हेतु पदोन्नति क्रम में अगला निम्नतर पद हो ।
परन्तु यह और कि, अपने अनुरोध को छोड़कर अन्यथा, निम्नतर वेतनमान वाले पद पर पुनर्नियोजित होने पर, अधिशेष कर्मचारी को अपने अगले पद पर अपने पूर्व वेतनमान लेने की अनुमति होगी, भले ही वह केवल उस पद पर स्थापन्न रूप से कार्य कर रहा था ।
9.3 सामान्यतया, अधिशेष कर्मचारी को पहले तीन माह के भीतर किसी निम्नतर पद पर नियुक्ति के लिए प्रायोजित नहीं किया जाएगा ।9.4 यद्यपि प्रापक संगठन के दृष्टिकोण को ध्यान में रखे जाने के प्रयास किए जाएंगे किन्तु अन्ततः केन्द्रीय प्रकोष्ठ ही यह निर्णय करने का प्राधिकारी होगा कि किस विशिष्ट व्यक्ति को किस विशिष्ठ संगठन द्वारा स्वीकार किया जाएगा । प्रापक मंत्रालय/विभाग नामांकन के सामान्यतया 15 दिनों के भीतर नियुक्ति प्रस्ताव जारी कर देगा। यदि प्रापक संगठन को इस प्रयोजन के लिए प्रायोजित अधिशेष कर्मचारी के विलयन के विरूद्ध कोई कठोर आपत्ति है (सिवाए इसके कि कर्मचारी लोक सेवा आयोग द्वारा संस्तुत किया गया हो, जिसके मामले में आयोग की सिफारिश स्वीकार न किए जाने की प्रक्रिया का अनुपालन करना होगा), तो प्रापक संगठन को इसे भी उपर्युक्त 15 दिनों की अवधि के भीतर केन्द्रीय प्रकोष्ठ को सूचित करना होगा। यदि अधिशेष कर्मचारी के नामांकन के पत्र जारी होने की तारीख के एक माह के भीतर संबंधित प्रकोष्ठ को न तो कोई ‘आपत्ति और नहीं कोई नियुक्ति प्रस्ताव प्राप्त होता है तो यह मान लिया जाएगा कि प्रापक संगठन को अधिशेष कर्मचारी को स्वीकार करने में कोई आपत्ति नहीं है और संबंधित केन्द्रीय प्रकोष्ठ, अधिशेष कर्मचारी के मूल संवर्ग को उन्हें सूचना देते हुए उसे प्रापक संगठन में ड्यूटी के लिए रिपोर्ट करने हेतु कार्यमुक्त करने संबंधी निर्देश देने के लिए सक्षम होगा और इस त्ररंह कार्यमुक्त होने पर कर्मचारी प्रापक संगठन की सेवा में गिना जाने लगेगा । कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग नियमों में इस आशय के आवश्यक प्रावधान करेगा।
9.5 जहां सीधी भर्ती या स्थानांतरण द्वारा भरे जाने वाले पदों पर अधिशेष कर्मचारियों की नियुक्ति हेतु शैक्षणिक अर्हताओं, अनुभव आदि के मामलों में नियमों में छूट दिए जाने संबंधी मौजूदा प्रावधान जारी रहेंगे, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि जहां एक अधिशेष कर्मचारी को उसके वर्तमान वेतनमान में एक उच्चतर अधिकतम वेतन वाले पद पर नियुक्ति हेतु प्रायोजित किया जाता है तो उसके पास या तो वे योग्यताएं होनी चाहिए जो कि उस पद पर सीधी भर्ती या स्थानांतरण द्वारा नियुक्ति हेतु विहित की गई है अथवा उसने मूल संवर्ग में उस प्रापक पद से संबंध ड्यूटियों को सफलतापूर्वक निष्पादित किया हो।
9.6 (क) एक कर्मचारी जो किसी अधिशेष घोषित पद पर स्थानापन्न रूप से कार्य कर रहा है वह निम्नलिखित शर्तों के अध्यधीन उपरोक्त पैरा 9.2.1 और 9.2.2 के अनुसार किसी सदृश वेतनमान वाले पद पर पुनर्नियोजन के लिए पात्र होगा: –
(i) कि वह किसी ऐसे पद पर पदोन्नति अथवा स्थानांतरण की नियमित प्रक्रिया द्वारा नियुक्त हुआ हो और वहां साधारण क्रम में, उसके अधिशेष घोषित होने की तारीख से छह माह की अवधि के भीतर उसकी पदावनति की कोई संभावना न हो;
(ii) यदि वह उस पद, जिसमें उसका लियन है, पर प्रत्यावर्तित होने का स्वप्रेरणा से विकल्प नहीं देता है, और(iii) उसकी अधिवर्षिता का समय नहीं आया है या उसने उस पर लागू नियमों के अंतर्ग 6 महीने की उक्त अवधि के भीतर किसी तिथि, से सेवा-निवृत्ति हेतु अनुरोध नहीं किया है ।
(ख) फालतू स्थानापन्न कर्मचारी को उस तिथि, जिससे उसे फालतू घोषित किया गया हो, से छ: माह की अवधि समाप्त होने पर उसी पद, प्रशासनिक या मूल ( जब तक कि ऐसा पद पहले ही समाप्त न कर दिया गया हो या फालतू न किया जा चुका हो) पर प्रत्यावर्तित कर दिया जाएगा जिस पर उसका लियन बना हुआ है, यदि इस अवधि में किसी उपयुक्त पद पर उसका नियोजन न किया जा सका हो, या उसने उसके लिए व्यवस्थित पद पर नियोजन से इंकार कर दिया हो, या उस अधिकारी, जिसके अधीन नियोजन का पद आता है, द्वारा ज्वाइन करने के लिए दी गई अवधि में ऐसे पद पर पदभार ग्रहण नहीं किया हो ।
(ग) खण्ड (क) में व्यवस्थित किसी सदृश वेतनमान वाले पद पर ही पुनः तैनाती तथा यदि उपर्युक्त खण्ड (ख) में अंतर्विष्ठ उक्त अवधि के अंतर्गत किसी समुचित पद पर कोई नियुक्ति नहीं की जाती है, तो छः माह की अवधि समाप्त होने पर प्रत्यावर्तन का प्रावधान ऐसे कर्मचारी पर लागू नहीं होगा जिसने अपने धारित पद पर अपनी परिवीक्षा अवधि संतोषजनक रूप से पूरी की हो अथवा जिसे सक्षम प्राधिकारी के सामान्य अथवा विशेष आदेशों के अधीन, ऐसी स्थानापन्न नियुक्ति पर परिवीक्षा पर रखे जाने से मुक्त कर दिया गया था ।
10.0 कुछ मामलों में पुनर्नियोजित स्टाफ का पुनः समायोजन
10.1 चूँकि इस योजना का एक उद्देश्य फालतू के रूप में अभिनिर्धारित स्टाफ का अतिशीघ्रता के आधार पर वैकल्पिक नियोजन की व्यवस्था करना है, ताकि उनके कारण राजस्व पर अनावश्यक बोझ न पडे, कई मामलों में, यह आवश्यक होगा कि उन्हें निचले वेतनमान वाले पदों अथवा निचली श्रेणी में पुनःनियोजित कर दिया जाए । यद्यपि, सामान्य रूप से समूह ‘ग’ एवं ‘घ’ से संबंधित अल्प वेतन भोगी कर्मचारियों को उसी राज्य में पुनर्नियोजित करने का प्रयास किया जाएगा जिसमें वे फालतू घोषित किए जाने के समय कार्यरत हों, या उस राज्य में जिसमें वे बसना चाहते हों, तथापि, उन्हें अन्य राज्यों में पुनर्नियोजित करना जरूरी होगा यदि संगत समय में फालतू कर्मचारी सेल मे उपयुक्त रिक्त पद सूचित नहीं किये जाते हैं । ऐसे मामलों में, फालतू कर्मचारियों को होने वाली कठिनाईयों को कम करने के लिए, उन्हें, उनके विकल्प के अनुसार बाद में समान वेतन वाले पदों पर, या समान वर्ग के पदों पर, जैसा भी मामला हो पुनःसमायोजित किया जा सकता है । इसी प्रकार, पूर्व में अन्यत्र पुनर्नियोजित अल्प वेतन भोगी कर्मचारियों को, उस राज्य में, जिसमें वे पहले तैनात थे या पुनर्नियोजित होना चाहते हैं, पुनर्समायोजित करने का भी प्रयास किया जाएगा । यह सुविधा सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित, कठिनाईयों का सामना कर रही अन्य श्रेणियों के कार्मिकों के लिए भी दी जा सकती है । इस संबंध में, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग द्वारा आवश्यक नियम बनाए जा सकते हैं ।11.1 इस वर्तमान नीति में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है कि पुनर्नियोजन से पूर्व की गई पिछली सेवा की गणना, नए संगठन/नए पद जिसमें फालतू घोषित कर्मचारी पुनः तैनात किया जाता है, वरिष्ठता के लिए नहीं की जाएगी । यही नियम उनके मामलों में भी लागू होगा जो पुनर्नियोजन के बाद पुनर्समायोजित किए जाएँगे ।
11.2 वर्तमान में फालतू कर्मचारियों को, पदभार ग्रहण करने की अवधि, पदभार ग्रहण करने की अवधि के वेतन, तथा केन्द्रीय सरकार के विभाग में नये पद पर जाने के लिए स्थानांतरण यात्रा भत्ते के स्वीकार्यता के मामले में लोकहित में स्थानांतरण द्वारा नियुक्ति मानी जाएगी ।
11.3 ऐसे फालतू कर्मचारी, जो स्थाई है, का जब नए संगठन में पुनर्नियोजित/पुनःसमायोजन होता है तो उसका लियन भी सुरक्षित रहेगा ।
11.4 सेवा के अन्य मामलों में उन्हें स्थानांतरण द्वारा नियुक्त माना जाएगा ।
11.5 फालतू कर्मचारियों को यदि वे ऐसे पदों पर पुनर्नियोजित किया जाता है जो निचले वर्गीकरण के हैं, तो उन्हें अपना वर्तमान वर्गीकरण बनाए रखने का विकल्प होगा यह सुविधा बढ़ाई रहती रहेगी ।
12.0 पुनर्नियोजन, के प्रयास बंद करना और पद समाप्त करने तथा इसके बाद सेवाएँ समाप्त करने के बारे में कार्रवाई करना।
यदि किस फालतू कर्मचारी को वैकल्पिक नियुक्ति का प्रस्ताव दिया जाता है परंतु वह नए पद का पदभार ग्रहण करने से इंकार करता है या नए पद के सक्षम नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा निर्दिष्ट अवधि में बिना कोई कारण बताए उक्त पद का पदभार ग्रहण नहीं करता या ज्वाइनिंग के लिए समय बढ़ाने को अनुरोध नहीं करता है, तो उसका फालतू पद फालतू टाफ स्थापना में समाप्त कर दिया जाना चाहिए, उसके पुनर्नियोजन हेतु अगली कार्रवाई कर दी जाए तथा उसकी सेवाएँ, स्थाई कर्मचारी के मामले में, केन्द्रीय सिविल सेवाएँ (पेंशन) नियमावली-1972 के नियम 39(1)स्थाईवत/अस्थाई कर्मचारियों के संबंध में केन्द्रीय सिविल सेवाएँ ( अस्थाई सेवाएँ) नियमावली, 1965 के के क्रमशः नियम 7 एवं 5, जो उस पर लागू हो, के अंतर्गत नोटिस देकर उसकी सेवाएँ बर्खास्त की जा सकती हैं या उसे उसके मूल पद पर भेजा जा सकता है जिसमें उसका लियन बना हुआ है यदि उक्त पद फालतू घोषित नहीं किया गया हो । इसी प्रकार की कार्रवाई उस फालतू कर्मचारी के विरुद्ध भी की जा सकती है जिसने एसे प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में जाने से मना कर दिया है जिसके लिए उसे फालतू स्टाफ सेल ने उसकी पुनःतैनाती का निर्णय हो जाने तक भेजा है या वह निर्धारित तिथि तक उस पाठ्यक्रम में जान-बूझ कर नहीं जाता है या उसमें संतोषनक प्रगति नहीं दिखाता है जैसा कि उपर्युक्त पैरा 8.7 में प्रावधान है ।फालतू स्थापना सेल में स्थानांतरण के लिए फालतू कर्मचारियों की पहचान तथा उनके आगे व्यवस्था करने के लिए कदम
1.0 कर्मचारी को फालतू घोषित करने का आधार
1.1 स्टाफ निरीक्षण यूनिट/आंतरिक कार्य अध्ययन यूनिट/प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग या कार्य आकलन करने के लिए अध्ययन हेतु सरकार द्वारा नियुक्त अन्य समिति/निकाय/संगठनात्मक ढाँचे का पुनरीक्षण, की रिपोर्ट के आधार पर सहमत सिफारिश, जीरो बेस बजटिंग आदि लागू करना जिसमें एक या अधिक पदों की स्वीकृत संख्या में कटौती शामिल है
1.2 (क) किसी संगठन को बंद करना या समाप्त करना या किसी संगठन में चल र किसी विशेष गतिविधि को बंद करना, (ख) किसी गतिविधि/संगठन को किसी ज्वायत्त संगठन/सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम/राज्य सरकार आदि की स्थानांतरित करने के लिए निर्णय/आदेश ;
2.0 कार्यान्वयन के लिए समय-सीमा
तीन माह ( जब तक कि किसी मामले में भिन्न समय-सीमा निर्धारित न की जाती हो ।)
-(1) फालतू पद तथा फालतू कर्मचारियों की पहचान करना तथा उनकी पुनर्नियोजन के लिए उनकी पात्रता जाँच हेतु उनके बायोडाटा की रिपोर्ट के लिए 2 महीने ।
-(2) उपर्युक्त (1) सहित, अतिरिक्त स्टाफ को फालतू घोषित करने तथा उन्हे फालतू स्टाफ स्थापना में स्थानांतरित करने के लिए 3 महीने ।
नोट:- पदों में कटौती के बिना तदर्थ आर्थिक कटौती तथा अन्य आर्थिक उपायों के फलस्वरूप फालतू हो गए कर्मचारी केन्द्रीय सेल (अर्थात् कार्मिक, एवं प्रशिक्षण विभाग में केन्द्रीय फालतू स्टाफ सेल और रोजगार एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय में विशेष सेल) के माध्यम से पुनर्नियोजन के पात्र नहीं है ।
3.0 फालतू स्टाफ की पहचान के लिए उपाय:
3.1 संशोधित ( अर्थात् कम की गई) स्वीकृत संख्या से अधिक रिक्त पदों को समाप्त करना ।
3.2 फालतू जोन में किसी ऐसे व्यक्ति का पता लगाना जिसका सियन किसी अन्य पद पर बना और वह उक्त पद पर जाना चाहता हो, यदि ऐसा हो, तो उस व्यक्ति को प्रत्यावर्तित करना।
3.3 उन व्यक्तियों का समायोजन/व्यवस्था करना, जो संशोधित स्वीकृत संख्या से अधिक है तथा जो कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के दिनांक 28.81978 के कार्यालय ज्ञापन सं. 28017/1/75-स्था.(घ) (समय-समय पर यथासंशोधित) में निहित अनुदेशों के अनुसार फालतू ल के माध्यम से पुनर्नियोजन के पात्र नहीं है ।
3.4.1 अभी फालतू घोषित किए जाने वाले व्यक्तियों का निर्धारण । वरिष्ठता के विपरीत क्रम का पालन करते हुए उस संख्या के बराबर कनिष्ठतम व्यक्तियों की सूची तैयार करना ।3.4.2 यदि संगठन पूरी तरह बंद किया जा रहा है, चाहे चरणों में सही, वरिष्ठता के विपरीत क्रम से स्टाफ को फालतू गेषित न किया जाए बल्कि इसे पूर्णतः नियमित वरिष्ठता के अनुसार ही किया जाए ।
3.5.1 जहाँ पर संवर्ग में वरिष्ठता के विपरीत क्रम में से कर्मचारियों को फालतू गेषित किया जाना है, वरिष्ठता क्रम में उच्चतर स्थान वाले व्यक्ति से उनकी इच्छा जान ली जाए, जो उपर्युक्त सूची ( पैरा 3.4.1 के तहत) में शामिल अपने कनिष्ठ कर्मचारियों के बदले प्रथम द्रष्ट्या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति या पुनःतैनाती का लाभ लेने के लिए फालतू घोषित किया जाना चाहते हैं । ऐसे स्टाफ से इसके साथ परिचालित प्रोफार्मा (अनुबंध-II) में विकल्प माँगे तथा उसे सुरक्षित रखें ।
3.5.2 जहाँ पर वरिष्ठता क्रम में कर्मचारियों को फालतू किया जाना है, वहाँ वरिष्ठ कर्मचारियों को बाद अभ्यर्पित में किए जाने के लिए संगठन में बने रहने के उनके विकल्प के अनुसार अनुमति दी जा सकती है तथा उनके कनिष्ठ कर्मचारियों का अभ्यर्पित किया जाए तथा उन्हें ( अर्थात् विकल्प लेने वाले वरिष्ठ कर्मचारी) यह स्पष्ट रूप से बता देना चाहिए कि कार्यालय में बने रहने का विकल्प लेने के बाद वे नए कार्यालयों में वरिष्ठता के अपने प्वाइंट से वंचित हो जाएँगे जहाँ उनसे कनिष्ठ कर्मचारियों को पहले पुर्नियोजित कर दिया गया है । $\cdot$
3.6 अब फालतू घोषित किए जाने वाले व्यक्तियों की पहचान करना इस प्रकार से तैयार की गई सूची में निम्नलिखित बातें शामिल होंगी:
(क) वरिष्ठ व्यक्ति जिन्होंने अपने आप से फालतू घोषित किए जाने का विकल्प चुना है, तथा
(ख) उपर्युक्त पैरा 3.4.1 में कुल संख्या को पूरा करने के लिए अपेक्षित कनिष्ठतम व्यक्ति ( चरणबद्ध रूप से बंद किए जाने वाले संगठन के मामले में, इसमें ऐसे वरिष्ठतम व्यक्ति शामिल होंगे जिन्होंने उक्त संगठन में बने रहने का विकल्प नहीं दिया है ।)
यदि किसी ऐसे स्थाई पद को समाप्त करना अपेक्षित है जिसका ऐसा व्यक्ति कार्यरत है जो अन्य पद पर प्रतिनियुक्ति पर है तो उसे स्थाई पद पर वापस आने का नाटिस दिया जाना चाहिए तथा उसे यह भी सूचित किया जाना चाहिए कि यदि वह वापस न आने का विकल्प चुनता है तो उसके स्थाई पद के समाप्त होने पर उसका लियन समाप्त हो जाएगा तथा इसके परिणामस्वरूप वह बाद में अपने स्थाई संगठन/संवर्ग में वापस नहीं आ सकेगा । ऐसे प्रतिनियुक्ति पद पर तैनात कर्मचारी के अपने मूल संवर्ग में प्रत्यावर्तित होने पर उसे फालतू घोषित कर दिया जाएगा तथा संवर्ग में स्थानापन्न रूप में कार्यरत कनिष्ठतम व्यक्ति को प्रत्यावर्तित/छंटनी, जैसा भी मामला हो, की जाएगी ।
3.7.1 विभाग में प्रचलित परस्पर वरिष्ठता क्रम से व्यवस्थित करके संवर्ग में इस प्रकार फालतू अभिनिर्वारित किए गए व्यक्तियों की सूची बना ले ।3.8 इस बात की जाँच कर लें कि क्या शेष संवर्ग में अनुसूचित जाति के कर्मचारियों की संकक्षिकथित संवर्ग/पद के लिए भर्ती हेतु निर्धारित प्रतिशत से कम है, यदि हाँ, तो उसमें कमी की सीमा तक, फालतू घोषित किए जाने के लिए अभिनिर्वारित किए गए लोगों में 1 . अनुसूचित जाति के कर्मचारियों को (यदि हो) बनाए रखा जाए तथा उतनी ही संख्या मे सामान्य वर्ग के कनिष्ठतम व्यक्तियों को फालतू घोषित किए जाने वाले व्यक्तियों की सूची में शामिल किया जाए ।
3.9 यह सुनिश्चित करने के लिए कि चालू संवर्ग में अनुसूचित जनजाति से संबंधित कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व बना रहे, यही प्रक्रिया दाहराएँ ।
3.10 ऐसा करते समय, अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के कर्मचारी जिन्होंने अपने आप स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति या पुनर्नियोजन का सुविधा का लाभ उठाने के लिए फालतू घोषित किए जाने ( 3.5 .1 पैरा के अनुसार) का विकल्प दिया है, उन्हें रोका नहीं रखा जाना चाहिए ।ऐसे इच्छुक व्यक्ति को छोड़कर अन्य अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति जिन्हें पहले से जारी संवर्ग में अपने प्रतिवेदन में पाई गई अपनी कमी को दूर करने के लिए रोका जाना है, अपने पारस्परिक वरिष्ठता के क्रम को बनाए रखना चाहिए।
3.11 जहां एक ही संगठन में कार्य कर रहे पति या पत्नी में से किसी एक को साधारण परिस्थिति में अधिशेष घोषित किया जाता है (या अधिशेष होने पर उन्हें पुनर्विनियोजित किया जाता है) परन्तु दूसरा इसके पात्र नहीं हैं और साधारण परिस्थिति में उसे अधिशेष घोषित नहीं किया जा सकता है तथा उसके विकल्प के आधार पर भी उनसे वरिष्ठ जिन्होंने विकल्प दिया है कि वरीयता में अधिशेष घोषित किए जा रहे, छोड़ दिए गए पति या पत्नी को अनुमति देने में कोई आपत्ति नहीं होगी बशर्ते ऐसे पति-पत्नी ने अधिशेष प्रकोष्ठ की बारी से पहले (बारी से पहले स्थानांतरण के ऐसे सभी विद्यमान परिणामों सहित) स्थानांतरण किए जाने का विकल्प चुना है और अधिशेष घोषित किए जाने से वरिष्ठ व्यक्ति के पति या पत्नी को रियायत से वंचित नहीं रखा जाता है। ऐसे मामले में अधिशेष कर्मचारी की सूची में पहले से शामिल सबसे कनिष्ठ व्यक्ति को छोड़ दिए गए पति-पत्नी के लिए स्थान बनाने हेतु रोक लिया जाएगा।
3.12.1 इस प्रकार तैयार की गई अधिशेष कर्मचारियों की अंतिम सूची में नामित किए जा रहे व्यक्तियों के नाम और विवरण केन्द्रीय प्रकोष्ठ को अनुबंध-॥। पर प्रपत्र में यह सुनिश्चित करते हुए रिपोर्ट करें कि यह उपरोक्त पैरा 2.0 के संदर्भ में संस्थीकृत संवर्ग कर्मचारी संख्या में कमी के लिए सहमत सिफारिश तिथि से दो माह के अंत तक इसे अद्यतन किया गया है। जीवन-वृत्त के साथ उपर्युक्त उप पैरा 3.5 .1 के संदर्भ में विकल्प (अनुबंध-॥) की एक प्रति भी केन्द्रीय प्रकोष्ठ को भेजें।
3.12.2 उसी विभाग में उपलब्ध किसी अन्य पद के लिए अधिशेष कर्मचारी को समायोजित करने का प्रस्ताव पद परिवर्तन के लिए केन्द्रीय प्रकोष्ठ (अधिशेष कर्मचारी) को साथ-साथ ही भेजा जाए।
3.13 प्रकोष्ठ से एक पखवाड़े के लिए उपर्युक्त सामग्री के प्राप्त होने की पावती देखें, उन्हें अनुस्मरण कराएं यदि प्रकोष्ठ से कोई सूचना प्राप्त नहीं होती है।
3.14 यदि अधिशेष घोषित किए जाने वाले प्रस्तावित कर्मचारी को फिर से काम में लगाने की स्वीकृति अथवा अन्यथा के संबंध में प्रकोष्ठ से एक महीने के अंदर कोई सूचना प्राप्त नहीं होती है तो कृपया उप सचिव, प्रभारी अधिशेष सेल को व्यक्तिगत या टेलीग्राम करके तुरत स्वीकृति के लिए सम्पर्क करें।3.15 प्रकोष्ठ से स्वीकृति प्राप्त हो जाने पर अधिशेष कर्मचारी के रूप में अंततः पहचाने गए स्टाफ के अधिशेष स्टाफ स्थापना में स्थानांतरण संबंधी आदेश जारी करें जिसे पुनर्नियोजन के लिए प्रतीक्षित अधिशेष कर्मचारी को काम पर लगाने के लिए संबंधित मंत्रालय/विभाग में नियुक्त किया जाएगा। इस आदेश में अन्य बातों के साथ-साथ अधिशेष घोषित किए गए कर्मचारी का नाम और पदनाम तथा अधिशेष घोषित की गई विशेष तिथि दर्शाए। इस आदेश की एक प्रति कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग या रोज़गार प्रशिक्षण महानिदेशालय जैसा भी मामला बनता हो, में केन्द्रीय प्रकोष्ठ को पृष्ठांकन करें।
3.16 अधिशेष कर्मचारी को साथ-साथ ही उपर्युक्त स्थापना में उनके स्थानांतरण की औपचारिक सूचना दी जाए जिससे कि समय पर लागू नियमों और आदेशों के अनुसार पुनर्नियोजन का प्रयास करने के लिए संबंधित केन्द्रीय प्रकोष्ठ को उनका नाम और जीवन-वृत्त भेजा जा सके और कि पूर्व में धारण किए गए पद तब फौरन समाप्त हो जाएंगे जब उन्हें अन्य पदों पर कार्यग्रहण करने के लिए कार्यमुक्त कर दिया जाएगा।
3.17 अस्थायी पद पर तैनात अधिशेष कर्मचारियों को भी अधिशेष कर्मचारी स्थापना में उनके साथ स्थानांतरित किया जाए।
अपने स्थायी पदों में तैनात अधिशेष कर्मचारियों के मामले में ऐसे पदों को समाप्त माना जाएगा और समान पदनामों और वेतनमान वाले अधिसंख्यक पदों को उपर्युक्त स्थापना में उनके साथ-साथ सृजित पद समझा जाएगा।
3.18.1 अधिशेष कर्मचारियों का ध्यान केन्द्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियमावली, 1972 के नियम 29 के तहत उपलब्ध स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की सुविधाओं की ओर आकर्षित किया जाए और यह कि उस तिथि जब से वे अधिशेष घोषित किए गए हैं, से दो महीने के अंदर ऐसी सेवानिवृत्ति ली जा सकती है।
3.18.2 उनका ध्यान केन्द्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियमावली, 1972 के नियम 48 और 48 -क के तहत तथा एफ आर 56 के विभिन्न खंडों के तहत उपलब्ध समय से पूर्व सेवानिवृत्ति चाहने वालों की सुविधा की ओर भी आकर्षित किया जा सकता है।
3.19 यदि अधिशेष कर्मचारी स्थापना को कोई भी सदस्य उपर्युक्त नियमों के तहत स्वैच्छिक/समय-पूर्व सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन करता है तो उनके अनुरोध पर अतिशीघ्र कार्रवाई की जाए और सेवानिवृत्ति के उक्त आदेश की एक प्रति निरपवाद रूप से संबंधित केन्द्रीय प्रकोष्ठ को पृष्ठांकित की जाए ताकि कर्मचारी के पुनर्नियोजन संबंधी आगे की कार्रवाई को रोका जा सके।3.20 वह पद जिसके लिए अधिशेष प्रकोष्ठ ने अधिशेष कर्मचारी को नामित किया है, पर नियुक्ति/तैनाती के आदेश होने पर अथवा अधिशेष प्रकोष्ठ द्वारा उसे किसी पद का कार्य-भार ग्रहण करने के क्रम मे संबंधित अधिशेष प्रकोष्ठ से कार्यमुक्त किए जाने संबंधी निदेश मूल मंत्रालय/विभाग में प्राप्त होने पर उस नियंत्रण/नियुक्ति प्राधिकरण को अनुबद्ध कार्यग्रहण समय के अंदर नए संगठन के उपयुक्त प्राधिकरण को रिपोर्ट करने के निदेश के साथ संबंधित अधिशेष कर्मचारी को तत्काल कार्यमुक्त किया जाए और कर्मचारी को कार्यमुक्त करने की तारीख से अधिशेष पद को समाप्त करने संबंधी आदेश जारी करे । संबंधित कर्मचारी इस आधार पर अपने पद पर बने नहीं रह सकता कि वह नियुक्ति उसके लिए उपयुक्त नहीं है । इसके बावजूद यदि कर्मचारी उनको दिए गए दूसरे पद की अपनी तैनाती/पुनर्नामांकन के विरूद्ध पुनर्विचार के लिए आवेदन प्रस्तुत करता है तो अधिशेष पद से उसे कार्यमुक्त करने और ऐसे पद को समाप्त करने की प्रक्रिया को आस्थगित न किया जाए, हालांकि उसके आवेदन को संबंधित केन्द्रीय प्रकोष्ठ के प्राधिकारियों को उपयुक्त विचारार्थ अग्रेषित किया जा सकता है । कार्यमुक्त आदेश/पद की समाप्ति आदेश की एक प्रति केन्द्रीय प्रकोष्ठ को पृष्ठांकित की जानी चाहिए।टिप्पणी :-
(कोई अधिशेष कर्मचारी जो एक बार अधिशेष स्टाफ स्थापना से कार्यमुक्त हो जाता है, उसे दुबारा वापस नहीं लेना चाहिए, जब तक कि संबंधित प्रकोष्ठ की पूर्व सहमति न ले ली जाए)
3.21 जहां केन्द्रीय प्रकोष्ठ एक विशेष कर्मचारी को किसी विशिष्ट कौशल में प्रशिक्षण हेतु भेजने का निदेश देता है तो उसे उस प्रयोजनार्थ विनिर्दिष्ट तारीख और समय पर प्रशिक्षण एजेंसी को समय पर रिपोर्ट करने के लिए कार्यमुक्त कर देना चाहिए ताकि वह पाठ्यक्रम की अवधि के दौरान नियमित और श्रमपूर्वक प्रशिक्षण पर जा सके ।
3.22 ऐसे मामले में, जहां एक अधिशेष कर्मचारी उसे प्रस्तावित पद को लेने से मना कर देता है जिसके लिए वह संबंधित केन्द्रीय प्रकोष्ठ अथवा संघ लोक सेवा आयोग द्वारा संस्तुत या केन्द्रीय प्रकोष्ठ के द्वारा प्रवर्तित किया गया था या वह नए कौशल में प्रशिक्षण के लिए इंकार कर देता है जैसा भी मामला हो, तो उसके पुनर्नियोजन की कार्रवाई को समाप्त समझा जाए और उस पर लागू नियमों के तहत उसकी सेवाओं की समाप्ति का नोटिस देना चाहिए। अधिशेष स्टाफ स्थापना में उसके द्वारा धारित पद को समाप्त कर देना चाहिए और कथित स्थापना में रोके रखने के स्थान पर उसे नोटिस की अवधि के (अथवा उसमें कोताही जैसा भी मामला हो) आवश्यक वेतन और भत्ते देने चाहिए।# प्रपत्र
अधिशेष घोषित होने पर विकल्प और अधिशेष स्टाफ स्थापना में स्थानान्तरण
मैं (श्री/श्रीमती/कुमारी) के रूप में कार्यरत के कार्यालय में मैं स्वयं की सेवाओं को अधिशेष स्टाफ के निपटान हेतु संशोधित योजना के प्रावधानों के अनुसार अपने कनिष्ठों से वरियता में अधिशेष कर्मचारी स्थापना में अधिशेष और स्थानान्तरण करने हेतु एतदद्वारा अर्पित करता हूँ । मैं समझता हूँ कि अधिशेष कर्मचारी स्थापना में मेरा स्थानान्तरण उपर्युक्त योजना के अन्तर्गत ऐसे स्थानान्तरण और उसके अन्तर्गत जारी नियम/आदेश के सभी अनुवर्ती निष्कर्षों के अध्यधीन है ।
शेतावनी :- एक अधिशेष कर्मचारी जो उसके लिए प्रबंधित पुनर्नियोजन में कार्यग्रहण करने के लिए मना अथवा उसके लिए असफल रहता है न्यूनतम वेतनमान के एक पद सहित अथवा एक न्यूनतम वर्गीकरण प्रतिपूरक पेंशन पर छंटनी/सेवानिवृत्ति (यदि अनुडेय हो) किया जाए। यदि वह उसके मूल संगठन में निम्न स्थायी पद पर अपना लियन/धारणाधिकार जारी रखता है तो उसे ऐसे पद से जिस तारीख से उसे अधिशेष घोषित किया है उसके छ: महीने की अवधि के समाप्त होने पर उसके लिए प्रबंधित पद/प्रशिक्षण को स्वीकार अथवा उसके लिए असफल रहने पर इनमें से जो भी पहले हो, प्रत्यावर्तित कर दिया जाएगा ।
हस्ताक्षर
नाम
पदनाम
स्थान# प्रपत्र
कार्यालय का नाम और पता जहां
से कर्मचारी अधिशेष हुआ।
अधिशेष कर्मचारी का जीवनवृत
(अधिशेष प्रकोष्ठ में स्थानांतरित होने की तारीख को)
- नाम (जैसा कि उसकी सेवा पुस्तिका में दर्ज है ) :
- जन्मतिथि
- सेवानिवृत्ति की तारीख
- क्या अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/ : भूतपूर्व सैनिक/विकलांग है
- पदनाम
- तैनाती का स्थान
- तैनाती का राज्य/संघ राज्य क्षेत्र
- वेतनमान
- वेतन
- अंतिम धारित पद की श्रेणी : राजपत्रित/अराजपत्रित/तकनीकी/गैरतकनीकी समूह’क’/ समूह’ख’/ समूह’ग’/ समूह’ध’
- नियुक्ति का धारित पद
(क) स्थायी आधार पर
(ख) नियमित स्थापना आधार पर
(ग) नियमित अस्थायी आधार पर
(घ) तदर्थ लघु अवधि आधार पर - अंतिम धारित पद का नियुक्ति प्राधिकारी
12 क . वित्तीय सलाहकार/लेखानियंत्रक का नाम और पता :13. अधिशेष घोषणा तक की गई सेवा और अनुभव का ब्यौरा :
| (i) | (ii) | (iii) | (iv) |
|---|---|---|---|
| कार्यालय / संगठन | धारित पद / वेतनमान |
की गई सेवा की अवधि |
ड्यूटी संक्षिप्त में |
| – | |||
- शैक्षणिक और अन्य योग्यताएं
(उत्तीर्ण परीक्षाएं / केन्द्रीय सरकार के द्वारा मान्य प्रमाणपत्र/डिप्लोमा के संबंध में सूचना)
| उत्तीर्ण परीक्षा | वर्ष | विद्यालय / बोर्ड / विश्वविद्यालय जहां से उत्तीर्ण |
विषय | अंको का प्रतिशत / श्रेणी / डिवीजन |
|---|---|---|---|---|
| || | | | | | ||||
| :– | :– | :– | :– | :– |
- अधिशेष घोषित/प्रस्तावित होने की तारीख
- क्या कर्मचारी वरिष्ठता के उत्क्रम में अधिशेष घोषित हुआ है अथवा अपने विकल्प पर/बाद के मामले में अनुबंध-।। पर दिए प्रपत्र में कार्यालयाध्यक्ष द्वारा विधिवत प्रमाणित उसका विकल्प
- (क) क्या स्थायी/स्थायीवत/अस्थायी
(ख) स्थायी/स्थायीवत/पद का नाम जिसमें स्थायी/स्थायीवत घोषित किया गया
(ग) प्राधिकारी का पदनाम और हैसियत (वर्तमान वेतनमान) जिसमें उसे स्थायी/ स्थायीवत हैसियत से नियुक्त किया
(घ) स्थानापन्न कर्मचारी के मामले में पद के ब्यौरे जिसमें अनुवर्ती प्रशासनिक लियन है और कार्यालय/संवर्ग/सेवा जिसमें पद स्थित है
(ड.) नियमित अस्थायी कर्मचारी के मामले में क्या परिवीक्षा की अवधि पूरी हो गई है और यदि हां तो कर्मचारी को स्थायी क्यों नहीं किया गया । - क्या उसके विरूद्ध कोई सतर्कता मामला/ अनुशासनिक कार्रवाइयां लंबित अथवा अपेक्षित हैं यदि हां तो उसका आधार
- क्या कर्मचारी के सेवा में प्रवेश करते समय उसकी चिकित्सा परीक्षा कर ली थी यदि हां तो चिकित्सा प्राधिकारी की हैसियत और पद जिसने उसे फिट पाया गया ।
- क्या कर्मचारी का चरित्र और जीवनवृत्तसत्यापित कर लिए थे । (यदि कुछ उसके प्रतिकूल पाया गया तो उसका ब्यौरा दें)
- क्या कर्मचारी ने स्वैच्छिक सेवानिवृति का केन्द्रीय सिविल सेवा (पेंशन नियम) 1972 के नियम 29 या 48 अथवा 48 क अथवा मूल नियम 56 के संगत खण्ड यथा उस पर लागू कोई अन्य नियम (यदि पात्र है) का विकल्प दिया है यदि हा तो
(i) वह नियम जिसके तहत आवेदन किया गया
(ii) आवेदन की तारीख
(iii) किस तारीख से सेवानिवृत्ति चाहिए
(iv) अनुरोध स्वीकार करने की टिप्पणियां - टिप्पणियां :-
प्रमाणपत्र
- प्रमाणित किया जाता है कि (क) उपर्युक्त कर्मचारी निर्धारित माध्यम (अर्थात् रोजगार केन्द्र, अखबारों के विज्ञापन इत्यादि द्वारा) से भर्ती किया गया था और (ख) उसके द्वारा धारित अन्तिम पद के लिए भर्ती नियमों में निर्धारित योग्यताओं को पूरा करता है
अथवा
उपर्युक्त भर्ती कर्मचारी की भर्ती सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन से अंतिम धारित पद के लिए भर्ती/योग्यताओं के निर्धारित तरीके में छूट देकर की गई थी ।
2. प्रमाणित किया जाता है कि (i) दिए गए ब्यौरे संगत रिकार्डो में से सत्यापित कर लिए गए हैं और ठोक हैं ।
(ii) मुझे विभागाध्यक्ष ने उसके कार्यालय आदेश दिनांक के द्वारा इस प्रपत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए प्राधिकृत किया है ।| स्थान : | विभागाध्यक्ष अथवा अन्य प्राधिकृत |
| :– | :– |
| दिनांक : | अधिकारी के हस्ताक्षर |
| दूरभाष सं. : | (नाम और परनाम मोहर सहित) |
| टेलीग्राफ पता (यदि कोई) | |
| टिप्पणी-1. यदि कर्मचारी ने कोई विशेष प्रशिक्षण/व्यावसायिक प्रशिक्षण या कोई | |
| लेख, किताब इत्यादि लिखी अथवा साहित्यिक/अनुसंधान कार्य किया हो | |
| तो उसका ब्यौरा एक अलग पेज पर दें। | |
- यदि अंतिम धारित पद के लिए कोई सांविधिक लापसेंस चाहिए (अर्थात् मोटर ड्राइवर, सिनेमा आपरेटर, फीमेसिस्ट इत्यादि के मामले में) तो उसकी एक प्रति दें।
- तब भरा जाए जब प्रपत्र पर अवर सचिव, भारत सरकार के पद से नीचे के अधिकारी के द्वारा हस्ताक्षरित हो।