This document details the establishment of the Orissa Administrative Tribunal and outlines the rules governing the salaries, allowances, and service conditions for its Chairman and Members. It covers aspects such as pay scales, special pay, dearness allowance, leave entitlements (earned leave, half-pay leave, extraordinary leave), pension benefits, provident fund subscriptions, travelling allowances, accommodation facilities, medical treatment, and dress codes for officials and parties. The rules also specify powers and functions of the Registrar, procedure for filing applications, and details on the Tribunal’s working hours and sittings.
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असाधारशा EXTRAORDINARY
भाग II—श्रेष्ठ 3—उप-श्रेष्ठ (I) PART II—Section 3—Sub-section (i) प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY
सं० 339] No. 339] मई दिल्ली, खुजफ्फर, जुलाई 4, 1986/शाबाद 13, 1908 NEW DELHI, FRIDAY, JULY 4, 1986/ASHADHA 13, 1908
इस भाग में भिन्न पृष्ठ संख्या दी जाती है जिससे कि यह असम संकलन को कर में रखा जा सके
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कामिक, लोक जिज्ञासा तथा नेतृत्व मंत्रालय (कामिक और प्रशिक्षण विभाग) मई दिल्ली, 4 जुलाई, 1986
श्रधिसूचनाएं
शा. का. नि. 934(थ) — केन्द्रीय सरकार, प्रशासनिक शोधनियम, 1985 (1985 का 13) की धारा 4 की उप-धारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए इस सम्बन्ध में उड़ीसा सरकार ने प्राप्त अनुरोध के आधार पर 14 जुलाई, 1986 ने उड़ीसा प्रशासनिक शोधनियम की पृष्ठभूमि स्थापना करती है जो कि इस शोधनियम के शाखा के प्रावधान से “निवर्त दिन” होगा।
[सं. ए.-11019/5/86-ए.टी.]
MINISTRY OF PERSONNEL, PUBLIC GRIEVANCES & PENSIONS (Department of Personnel & Trading) New Delhi, the 4th July, 1986
NOTIFICATIONS
G.S.R. 934(E)—In exercise of the powers conferred by sub-section (2) of section 4 of the Administrative Tribunals Act, 1985 (13 of 1985), the Central Government on receipt of a request in this behalf from the Government of Orissa, hereby establishes the Orissa Administrative Tribunal with effect from the 14th July, 1986, which shall be the ‘appointed day’ within the meaning of clause (c) of section 3 of the Act.
[No. A. 11019/5/86-AT.]
शा. का. नि. 934(थ) — केन्द्रीय सरकार प्रशासनिक शोधनियम, 1985 (1985 का 13) की धारा 35 की उपधारा (2) के शाखा (ए) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, निम्नलिखित नियम बनाती है, शोधनियम:
- संक्षिप्त नाम और प्रारंभ: (1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम उड़ीसा प्रशासनिक शोधनियम (श्रेष्ठ और सदस्यों के नेतृत्व और शर्तें) नियम, 1986, है।
(2) यह राजस्व में प्रकाशन की तारीख को प्रदत्त होंगे।
- परिभाषाएं: — इन नियमों में शुद्ध तक कि संदर्भ से श्रम्यथा शर्तें न हो।
(क) “शोधनियम” से प्रशासनिक शोधनियम, 1985 (1985 का 13) शोधित है।
(ख) “सरकार” से उड़ीसा सरकार शोधित है।
(ग) “शोधनियम” ने उड़ीसा प्रशासनिक शोधनियम शोधनियम के शाखा को प्रदत्त किया है।
504 GI/86-1
(ब) इन नियमों में जो शब्द तथा धर्मन्यक्तियां प्रयुक्त की गईं हैं परन्तु जिन्हें चूहों परिभाषित नहीं किया गया है और धर्मनियम में परिमेक्षित किया गया है उनका अर्थ क्रमश: वही होगा जो धर्मनियम में दिया गया है।
- वेतन :- (1) श्वथ्यज्ञ तौल हुआ पांच सौ रुपए का वेतन और ढाई सौ रुपए का विशेष वेतन प्रति माह प्राप्त करेगा। सदस्य तीन हजार रुपए प्रतिमाह का वेतन प्राप्त करेगा। परन्तु किसी ऐसे व्यक्ति के श्वथ्यज्ञ या सदस्य के रूप में नियुक्त की दिशा में जो किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में सेवानिवृत्त हुआ है या जो केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन सेवा से निवृत्त हुआ है या जो पेंशन और/या उपादान, श्वथिवादी भविष्य निधि से नियोजक के श्वथिवादी के रूप में कोई सेवा नियुक्ति फायदे या अन्य प्रकार के सेवानिवृत्ति फायदे प्राप्त कर रहा है या कर चुका है या प्राप्त करने की इकदार हो गया है तो पूर्वोक्त वेतन में से उसके द्वारा प्राप्त या प्राप्त की जाने वाली पेंशन और उपादान के समतुल्य पेंशन या श्वथिवादी भविष्य निधि में नियोजक के श्वथिवादी या किसी अन्य प्रकार के सेवानिवृत्ति फायदों, पेंशू कोई हो, की कुल रकम कम कर दी जाएगी।
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मंडपाई भत्ता और नगर प्रतिकरणमक भत्ता :- श्वथ्यज्ञ और कोई सदस्य अपने वेतन के धनुकर ऐसी दरों पर मंडपाई भत्ता और नगर प्रतिकरणमक भत्ता प्राप्त करने का इकदार होगा जो तीन हजार रुपए के ऊपर का वेतन पाने वाले केन्द्रीय सरकार के श्वथिवादी को धनुक्षेप है।
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सदस्य के रूप में नियुक्ति पर मूल सेवा से सेवा नियुक्ति :- (1) श्वथ्यज्ञ या कोई सदस्य जो श्वथिवादी भविष्य निधि की तारीख को, केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन सेवा में था, श्वथिवादी भविष्य निधि के पूर्व ऐसी सेवा से नियुक्ति से लैगा। किसी उच्च न्यायालय के किसी ऐसे श्वाधीन न्यायाधीश की दशा में जिसे श्वथ्यज्ञ के रूप में नियुक्त किया गया है, श्वथिवादी भविष्य निधि में दूसरी धनुक्षेप के भाग (ब) के पैरा 11(ख) (i) के अन्तर्गत वास्तविक सेवा मानी जाएगी।
(2) उपनियम (1) में क्या उपवृत्तित सेवानिवृत्ति पर श्वथ्यज्ञ श्वथवा कोई सदस्य—
(i) उसकी लागू सेवा नियुक्ति प्रभुत्विकर्मा से संबंधित नियमों के अनुसार पेंशन और उपादान प्राप्त करने का इकदार होगा,
(ii) श्वधनी उपाधित छुट्टी श्वधनीत करने के लिए धनुक्षात नहीं होगा किन्तु श्वधनी सेवानिवृत्ति के पूर्व उसकी लागू नियमों के छुट्टी सम्बन्ध में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में 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श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में 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श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में श्वधनी की तुलना में
समान कीवों के परिबहन के लिए उसी मापमान और दरों पर जो उच्च न्यायात्य न्यायाधीश (वाक़ा भत्ते), नियम, 1956 में बिहित है, हकदार होगा।
- छुट्टी वीक्षा रियायत: — भ्रध्यक्ष या कोई सदस्य उल्ही दरों और उल्ही मापमानों और उल्ही शर्तों पर जो 3,000 रु. या उससे ऊपर का वेतन पाने वाले भ्रष्ठिय शास्त्रीय सेवा के सदस्यों पर लागू है, छुट्टी वाक़ा रियायत का हकदार होगा।
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बास सुविधा: — (1) भ्रध्यक्ष या किसी सदस्य के रूप में अधिकरण में नियुक्ति प्रत्येक व्यक्ति, सरकार द्वारा समय-समय पर बिहित दरों पर अनुप्राप्त फीस के संयंत्र किए जाने पर उपयुक्त दाइप में शासकीय निवास का उपयोग करने का हकदार होगा बशर्ते कि ऐसा निवास स्थान उपलब्ध हो।
(2) जब भ्रध्यक्ष या किसी सदस्य को उपनियम (1) में निविदा शासकीय निवास उपलब्ध नहीं कराया जाता है या वह उसका उपयोग नहीं करता है तो उसे उसके वेतन के गवाह परीक्षित के बराबर रकम का ऋण प्रतिमान संवत् किया जा सकेगा।
(3) जहां भ्रध्यक्ष या कोई सदस्य अनुबंध धार्मिक के परे शासकीय निवास का उपयोग करता है तो वह बधार्मिक, शताब्दिक शासकीय और शासकीय निवास का संयंत्र करने का दायाँ होगा और उसे सरकार के नियमों के अनुसार बेदखल कराया जा सकेगा।
- समारी सुविधा: — भ्रध्यक्ष या कोई सदस्य सरकार के तहत कार्ड के रूप में भ्रष्ठी के अनुसार स्टाफ कार सुविधा का हकदार होगा।
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चिकित्सा उपचार की सुविधाएँ: — भ्रध्यक्ष या कोई सदस्य चिकित्सा उपचार और परमाणु सुविधाओं का उसी प्रकार हकदार होगा जिस प्रकार सरकार के प्रगति उनके बराबर वेतन पाने वाले किसी अधिकारी की अनुबंध है।
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भ्रध्यक्ष के रूप में नियुक्त उच्च न्यायालय के शासकीय न्यायाधीशों की सेवा की शर्तें: — इन नियमों में किसी बात के होते हुए भी जहाँ किसी उच्च न्यायालय का कोई शासकीय न्यायाधीश अधिकरण के भ्रध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया जाता है तो उस पर, उच्च न्यायालय के शासकीय न्यायाधीश के रूप में उसकी अधिनियम की तारीख तक उच्च न्यायालय न्यायाधीश (सेवा की शर्तें) अधिनियम 1954 और उसके प्रगति बनाए गए नियमों में यथा घनत्विक सेवा शर्तें लागू होंगी। उसके बाद वह भ्रध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल की शेष धार्मिक के लिए इन नियमों द्वारा साबित होगा।
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भ्रवैज्ञानिक उपचार: — भ्रध्यक्ष या किसी सदस्य की सेवा की शर्तें जिनके लिए इन नियमों में कोई प्राधिकरण उपबंध उपलब्ध नहीं है, भारतीय प्रशासनिक सेवा के ऐसे अधिकारी जिनका वेतन उनके बराबर है, पर उस समय लागू नियमों और शादेसी द्वारा भ्रवैज्ञानिक की जाएंगी।
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नियमों की शिथिल करने की शक्ति: — केन्द्रीय सरकार को इन नियमों के किसी उपबंधों को किसी वर्ग या प्रेयो के व्यक्तियों की बाबत शिथिल करने की शक्ति होगी।
[का.सं.ए-11019/42(1)/95-ए.डी.]
G.S.R. 935(E).—In exercise of the powers conferred by clause (c) of sub-section (2) of section 35 of the Administrative Tribunals Act, 1985 (13 of 1985), the Central Government hereby makes the following rules, namely:
- Short title and commencement.—(1) These rules may be called the Orissa Administrative Tribunal (Salaries and Allowances and Conditions of Service of Chairman and Memers) Rules, 1986.
(2) They shall come into force on the date of their publication in the official Gazette.
- Definitions.—In these rules, unless the context otherwise requires:
(a) “Act” means the Administrative Tribunals Act, 1985 (13 of 1985);
(b) “Government” means the Government of Orissa;
(c) “Tribunal” means the Orissa Administrative Tribunal;
(d) The words and expressions used in these rules and not defined, but defined in the Act shall have the meanings respectively assigned to them in the Act.
- Pay.—(1) The Chairman shall receive a pay of rupees three thousand five hundred plus a special pay of rupees two hundred fifty per mensem. A Member shall receive a pay of rupees three thousand per mensem:
Provided that in the case of an appointment as Chairman, or a Member of a person who has retired as a judge of a High Court or who has retired from service under the Central Government or a State Government and who is in receipt of or has received or has become entitled to receive any retirement benefits by way of pension and/or gratuity, employer’s contribution to the Contributory Provident Fund or other forms of retirement benefits, the aforementioned pay shall be reduced by the gross amount of pension and pension equivalent of gratuity or employer’s contribution to the Contributory Provident Fund or any other form of retirement benefits, if any, drawn or to be drawn by him.
- Dearness, allowance and city compensatory allowance.—The Chairman and Member shall receive dearness allowance and city compensatory allowance appropriate to their pay at the rates admissible to the Officers of the Central Government drawing a pay of rupees three thousand or above.
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Retirement from parent service on appointment as Members: — (1) The Chairman or a Member who, on the date of his appointment to the Tribunal, was in service under the Central Government or a State Government, shall seek retirement from such service before his appointment to the Tribunal. In the case of a sitting Judge of a High Court who is appointed as Chairman his service in the Tribunal shall be treated as actual service within the meaning of para 11(b)(i) of Part ‘D’ of the Second Schedule to the Constitution.
(2) On such retirement as is provided for in sub-rule (1), the Chairman, or a Member:
(i) shall be entitled to receive pension and gratuity in accordance with the rules relating to the retirement benefits applicable to him.
(ii) shall not be alowed to carry forward his earned leave but shall be entitled to receive cash equivalent to leave salary, if any, in accordance with the rules applicable to him prior to retirement.
- Leave.—(1) A person, on appointment to the Tribunal as Chairman or a Member shall be entitled to leave as follows:
(i) earned leave at the rate of fifteen days for every completed year of service or a part thereof;
(ii) half pay leave on medical certificate or on private affairs at the rate of twenty days in respect of each completed year of service. The leave salary for half pay leave shall be equivalent to half of the leave salary admissible during the earned leave;
(iii) leave on half pay can be commuted to full pay leave at the discretion of the individual provided it is taken on medical grounds and is supported by a medical certificate from the competent medical authority;
(iv) extraordinary leave without pay and allowances upto a maximum period of one hundred eighty days in one term of office.
(2) If the Chairman or a Member is unable to enjoy full vacation on account of his occupation with the Tribunal he shall be entitled to add the unenjoyed period of vacation to the leave account.
Explanation.—For the purpose of this sub-rule, “vacation” means vacation of thirty days in each calendar year observed by the Tribunal.
(13) On the expiry of his term of office in the Tribunal, the Chairman or a Member shall be entitled to receive cash equivalent of leave salary in respective of the earned leave standing to his credit provided that the quantum of leave encashed under this sub-rule and sub-rule (2) (ii) of rule 5 shall not exceed 180 days.
(4) The Chairman and Members shall be entitled to receive the dearness allowance on the leave salary under sub-rule (3) as admissible at the rates in force on the date of the relinquishment of the office in the Tribunal;
Provided that he shall not be entitled for the city compensatory allowance or any other allowance on such leave salary.
- Leave sanctioning authority.—The Chairman shall be the authority competent to sanction leave to the Member. The President shall be the authority competent to sanction leave to the Chairman.
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Pension.—(1) Every person appointed to the Tribunal as the Chairman or a Member shall be entitled to pension provided that no such pension shall be payable:
(i) if he has put in less than two years of service with the Tribunal or
(ii) if he has been removed from an office in the Tribunal under sub-section (2) of Section 9 of the Act.
(2) Pension under sub-rule (1) shall be calculated at the rate of rupees seven hundred per annum for each completed year of service or a part thereof and irrespective of the number of years of service in the Tribunal, the maximum amount of pension shall not exceed rupees three thousand five hundred per annum.
Provided that the aggregate amount of pension payable under this rule together with the amount of any pension including commuted portion of pension (if any), drawn or entitled to be drawn while holding office in the Tribunal shall not exceed the maximum amount of pension prescribed for a judge of the High Court.
- Provident Fund.—The Chairman or a Member shall be entitled to subscribe to the Provident Fund at this option and in case of his so opting shall be governed by the provisions of the All India Services (Provident Fund) Rules.
Provided that if the Chairman or a Member was a Judge of a High Court or was a Member of an All India Service or was holding a post under the Central or a State Government immediately before his joining the Tribunal, he shall be governed by the rules which were applicable to him immediately before joining the Tribunal.
- Travelling Allowances: The Chairman or other Member while on tour or on transfer (including the journey undertaken to join the Tribunal or on the expiry of his term with the Tribunal to proceed to his home town) shall be entitled to the travelling allowance, daily allowance, transportation of personal effects and other similar matters at the same scales and at the same rates as are prescribed in the High Court Judges (Travelling Allowances) Rules, 1956.
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Leave Travel Concession: The Chairman or a Member shall be entitled to the leave travel concession at the same rates and the same scales and on the same conditions as are applicable to the Members of the All India Services drawing pay of Rupees three thousand or above.
-
Accommodation: (1) Every person appointed to the Tribunal as Chairman or a Member shall be entitled to the use of official residence from the appropriate type, subject to availability, on the payment of licence fee at the rates prescribed by Government from time to time.
(2) When the Chairman or a Member is not provided with or does not avail himself of the official residence referred to in sub-rule (1), he may be paid every month an allowance of an amount equal to fifteen percent of his pay.
(3) Where the Chairman or a Member occupies an official residence beyond the permisible period he shall be liable to pay additional licence fee or penal rent, as the case may be, and liable to eviction in accordance with the rules of the Government.
13. Facility of conveyance : The Chairman and a Member shall be entitled to the facility of staff car in accordance with the Staff car Rules of the Government.
14. Facilities for Medical Treatment: The Chairman or a Member shall be entitled to medical treatment and hospital facilities as are admissible to an officer of the corresponding status in salary in the Government.
15. Conditions of service of sitting judges of the High Court appointed as Chairman notwithstanding anything contained in these rules, where a sitting judge of a High Court is appointed as the Chairman of the Tribunal, the service conditions as contained in the High Court Judges (Conditions of Service) Act, 1954 and the rules made thereunder shall apply to him, upto the date of his superannuation as a sitting judge of the High Court. Thereafter he shall be governed by these rules for the remaining period of his tenture as Chairman.
16. Residuary provision: The conditions of service of the Chairman or a Member for which no express provision is available in these rules shall be determined by the rules and orders for the time being applicable to Officers of corresponding pay levels belonging to the Indian Administrative Service.
17. Powers to relax rules: The Central Government shall have power to relax the provisions of any of these rules in respect of any class or categories of persons.
[NO. A. 11019|42 (1)|85-AT]
सा. का. नि. 936(ख) :-केन्द्रीय सरकार, प्रशासनिक प्राधिकरण अधिनियम 1985 (1985 का 13) की प्रारां 35 की उपप्रारां (2) के खण्ड (घ), (इ) और (ब) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने हुए निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात्:-
- संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ:-(1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम उड़ीसा प्रशासनिक प्राधिकरण, (प्रक्रिया) नियम, 1986 है।
(2) ये सरकारी राजपत्र में इनके प्रकाशन की तिथि को प्रवृत्त होंगे । - परिभाषाएं :-इन नियमों में, जब तक कि संदर्भ मे क्षम्यथा अपेक्षित न हो :-
(क) “अधिनियम” मे प्रशासनिक प्राधिकरण अधिनियम, 1985 (1985 का 13) अभिप्रेत है ;
(ख) “एडबोकेट” मे प्राधिकक्ता अधिनियम, 1961 (1961 का 25) के उपक्रमों के अधीन किसी सूची में दर्ज प्राधिकक्ता अभिप्रेत है।
(ग) “अभिकर्ता” मे किसी पक्षकार द्वारा अपनी ओर से प्राधिकरण के समक्ष प्रावेदन या उत्तर प्रस्तुत करने के लिये सम्पक् रूप मे प्राधिकृत किया गया कोई व्यक्ति अभिप्रेत है।
(ब) “प्रावेदक” मे प्रारां 19 के प्रग्रीन प्राधिकरण को प्रावेदन करने वाला कोई व्यक्ति अभिप्रेत है ;
(इ.) “प्रावेदन” मे प्रारां 19 के प्रग्रीन प्राधिकरण को किया गया प्रावेदन अभिप्रेत है ;
(ब) “पपत्र” मे इन नियमों के साथ संलग्न प्रपत्र अभिप्रेत है।
(छ) “राज्य सरकार” मे उड़ीसा सरकार अभिप्रेत है।
(ज) “विधि व्यवसायी” का वही अर्थ होगा, जो उसका प्राधिकक्ता अधिनियम, 1961 (1961 का 25) में है ;
(स) “रजिस्ट्रार” मे प्राधिकरण का रजिस्ट्रार अभिप्रेत है और इसके धम्तर्गत ऐसा कोई प्राधिकारी भी है जिसको नियम 26 के खण्ड (2) के प्रग्रीन रजिस्ट्रार की शक्तियां और कृत्य प्रस्तापोजित किए जाएं ;
(ब) “प्रारां” मे अधिनियम की प्रारां अभिप्रेत है ;
(ट) “अन्तरित प्रावेदन” मे ऐसा वाद या अन्य कार्यवाही जो प्रारां 29 की उपप्रारां (1) के प्रग्रीन प्राधिकरण को अन्तरित की गई है, अभिप्रेत है ;
(ठ) “प्राधिकरण” मे प्रारां 4 की उपप्रारां (2) के प्रग्रीन स्थापित उड़ीसा प्रशासनिक प्राधिकरण अभिप्रेत है । - प्राधिकरण की भाषा :
(1) प्राधिकरण की भाषा अंग्रेजी होनी परन्तु प्राधिकरण के समक्ष किसी कार्यवाही के पक्षकार यदि ऐसा चाहे तो उड़ीसा में तैयार की गई दस्तावेज़ें फो फाइल कर सकेंगे ।
परन्तु यह और कि न्यायपीठ अपने विवेकानुसार कार्यवाहियों में उड़ीसा का प्रयोग अनुव्रात कर सकेगी ; किन्तु अन्तिम प्रादेश अंग्रेजों में होगा । - प्रावेदन फाइल करने की प्रक्रिया :
(1) प्राधिकरण को प्रावेदन प्रावेदक द्वारा व्यक्तिगत रूप मे या किसी अभिकर्ता द्वारा या सम्प्रकृत प्राधिकृत प्राधिकक्ता द्वारा रजिस्ट्रार की क्षमथा प्रावेदन पत्र प्राप्त करने के लिए रजिस्ट्रार द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य प्राधिकारी की इन नियमों के साथ संलग्न प्रपत्र 1 में प्रस्तुत किया जाएगा या रजिस्ट्री वाक द्वारा रजिस्ट्रार को सम्बोधित करके भेजा जाएगा।
(2) उपनियम (1) के प्रग्रीन प्रावेदन फाइल के आकार के एक खाली निफाफे के साथ जिस पर प्रत्यर्थी का पूरा पता हो, एक अभिलेख पुस्तिका प्ररूप में तीन पर्ण छेदों में प्रस्तुत किया जाएगा और जहां प्रत्यभियों की संख्या एक से अधिक है, वहां प्रावेदक द्वारा फाइल के आकार के अपेक्षित संख्या में खाली निफाफे के साथ जिन पर प्रत्येक प्रत्यर्थी का पूर्ण पता होगा, प्रत्यभियों की संख्या के बराबर अभिलेख पुस्तिका प्ररूप में प्रावेदन पत्र की प्रातिरिक्त प्रतियां प्रस्तुत की जाएंगी।
(3) प्रावेदक अपने प्रावेदन पत्र के साथ प्ररूप सं. 1 में एक रसीबी पर्ची संलग्न करेगा तथा प्रस्तुत करेगा जिस पर प्रावेदन पत्र की प्राप्ति की पावती के रूप में रजिस्ट्रार द्वारा क्षमथा रजिस्ट्रार की ओर से प्रावेदन पत्र प्राप्त करने वाले प्राधिकारी द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे।
(4) उपनियम (1), (2) तथा (3) में दी गई किसी बात के बावजूद भी प्राधिकरण निम्नलिखित अनुमति दे सकता है :-
(क) एक से अधिक व्यक्ति निष्पकर एक संयुक्त प्रावेदन पत्र दायर कर सकते है जबकि बाय के उद्देश्य तथा वांछित राहत के स्वरूप की ध्यान में रखकर प्राधिकरण इस बात के नेतृत्व है कि तेषा मामले में उनका समाप्त हित है ; क्षमथा
(ख) संयुक्त ध्रावेदन पक्ष में खामिया हूति के इच्छुक व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व करने वाली एसोसिएशन को किन्तु शर्त बहु है कि ध्रावेदन पक्ष में ऐसे सभी व्यक्तियों के नाम दिए जाएंगे जिनकी और वे बहु बाबर किया गया है।
5. ध्रावेदनों का प्रस्तुत किया जागा और उनकी संबोधा :
(1) रजिस्ट्रार, या रजिस्ट्रार द्वारा प्राधिकृत ध्रधिकारी, प्रत्येक ध्रावेदन पर बहु तारीख पृथ्वांकित करेवा जिसको बहु छत नियम के अधीन प्रस्तुत की गई है या प्रस्तुत की गई समझे गई है और उस पृथ्वांकन पर हस्ताक्षर करेगा।
(2) यदि संबोधा पर, ध्रावेदन कमाणुसार पाया जाता है, तो बहु सम्भकता रजिस्ट्रीकृत किया जाएगा और उसे जन संस्थांक दिया जाएगा।
(3) यदि संबोधा पर ध्रावेदन छुटिपूर्ण पाया जाता है और बुनियक्त छुटि प्रकोपित प्रकृति की है, तो रजिस्ट्रार अपनी उपस्थिति में उस छुटि का परिशोधन करने के लिए पक्षकार को अनुव्रात कर सकेगा और यदि उक्त छुटि प्रकोपित प्रकृति की नहीं है तो रजिस्ट्रार छुटि का परिशोधन करने के लिए ध्रावेदक की ऐया समय अनुव्रात कर सकेगा जो बहु ठीक समझे।
(4) यदि सम्बद्ध ध्रावेदक उपनियम (3) में अनुव्रात समय के भीतर छुटि का परिशोधन करने में असफल रहता है तो रजिस्ट्रार ऐसे कारणों से किन्तुं लेखबद्ध किया जाएगा, ध्रावेद द्वारा ध्रावेदन को रजिस्टर करने से इंकार कर सकेगा।
(5) उपनियम (4) के अधीन रजिस्ट्रार के ध्रावेद के बिच्छ ध्रावेदन ऐया ध्रावेद करने के 15 दिव के भीतर प्राधिकरण को की जाएगी जिस पर उसका निर्वय ध्रनिव्य होया ।
6. ध्रावेदन फाइल करने का स्थान:—ध्रावेदन ध्रावेदक द्वारा याभाभ्यक रजिस्ट्रार के पास फाइल किया जाएगा।
7. ध्रावेदन फीस:—रजिस्ट्रार के पास फाइल किए गए प्रत्येक ध्रावेदन के साथ केवल पचास रुपये की फीस दी जाएगी जो कि ध्रावदन पक्ष पर लगाई गई कोर्ट की स्टैम्पस के रूप में ली जाएगी ।
8. ध्रावेदन की ध्रम्तर्वस्तु :
(1) नियम 4 के अधीन फाइल किए गए प्रत्येक ध्रावेदन में बुनियन भर्यो के अधीन संशिप्तता ऐसे ध्रावेदन के स्यापारों की धपबकित किया जाएगा और ऐसे स्यापार कवज्ञ: संस्थांकित किए जाएंगे और दोहरी लाइनों में दकित किए जाएंगे।
(2) अन्तरिम ध्रावेद या निदेश मांगने के लिए पृथक ध्रावेदन प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं होगा यदि ध्रावेदन का अंतिम निपटान अस्पनित रखकर ध्रावेदन में अंतरिम ध्रावेद या निदेश मांग का निदेशन किया गया है।
(3) कोई ध्रावेदक अधिनियम की धारा 19 के अधीन ध्रावेदन पक्ष बाबर करने के बाद अन्तरिम ध्रावेद्य ध्रवया निदेश के लिए ध्रावेदन कर सकता है। ऐया ध्रावेदन पक्ष यथासंभव उसी प्रबन्ध में होगा जो धारा 19 के अधीन किसी ध्रावेदन पक्ष के लिए निर्धारित है और इसके साथ केवल द. 2/- (दो रुपये) फीस होगो जो कि ऐसे किसी ध्रावेदन पक्ष पर लगाई गई कोर्ट की स्टैम्पस के रूप में देव होगो।
9. ध्रावेदन के साथ भेजी जाने वाली धरिनिध्त पुस्तिका खादि :
(1) प्रत्येक ध्रावेदन के साथ एक प्रभिनिध्त पुस्तिका संबन्ध होठी जिसमें निम्नलिखित हूति :-
(i) उस ध्रावेद की प्रभामित प्रति जितके बिच्छ ध्रावेदन फाइल किया गया है ;
(ii) वे सभी दस्तावेजों जिनका ध्रावेदक द्वारा प्रबन्धंव लिया गया है और जिनका ध्रावेदन में उल्लेख किया गया है, तथा
(iii) दस्तावेजों की अनुपमभिका।
(2) उपनियम (1) में निर्दिष्ट दस्तावेजों की किसी ध्रधिवक्ता द्वारा ध्रवया राजपत्रित ध्रविःंं द्वारा अनुपमाभित किया जाएगा।
(3) जहां ध्रावेदन पक्ष किसी ध्रधिकर्ता द्वारा बाबर किया जा रहा हो, वहां ऐसे ध्रधिकर्ता को प्राधिकृत करने बाने दस्तावेजों को भी ध्रावेदन के साथ संबन्ध किया जाएगा। परन्तु जहां ध्रावेदन पक्ष किसी ध्रधिवक्ता द्वारा बाबर किया गया है तो इसके साथ सम्बकता निम्नावित “वकासतनाभा” होया।
10. ध्रवेक उपचार:—ध्रावेदन कार्यवाही के एकल उद्देश्य पर स्यापारित होया और इसमें एक बा एक से ध्रधिक अनुयोशों की लांग की जा सकेगी बशर्ते कि बावित अनुयोश एक दूसरे के परिमारिक हो।
11. प्रावर्षी पर ध्रावेदन का नोटिस तामील करना :-
(1) धरिनिध्त पुस्तिका में ध्रावेदन की एक प्रति सामान्यतः प्रत्येक प्रावर्षी पर रजिस्ट्रार द्वारा निम्नलिखित में वे एक किस्म से तामील की जाएगी :-
(i) ध्रावेदक के माध्यम से ध्रवया बाद तामील करने वाले के माध्यम से दस्ती।
(ii) पावतो सहित रजिस्ट्री बाक द्वारा।
(2) उपनियम (i) में दी गई किसी बात के बावजूद भी रजिस्ट्रार प्रावधियों की संख्या तथा उनके निवास स्थानों तथा ध्रव्य परिस्थितियों की ध्यान में रखकर वह निदेश दे सकता है कि प्रावधियों पर ध्रावेदन पक्ष का नोटिस प्रतिस्थापित तामील की रीति सहित किसी ध्रव्य रीति से तामील किया जाएगा जो रजिस्ट्रार की उचित तथा सुविधाजनक प्रतीत होगी।
(3) प्रत्येक ध्रावेदक ऐसे किसी ध्रावेदन पक्ष के बारे में जहां प्रावधियों की संख्या पांच से ध्रधिक हो प्रक्रियाएं तामील तथा निम्नावित किए जाने के लिए, निम्नलिखित फीस देगा :-
(i) पांच से ध्रधिक प्रावर्षी होने पर प्रत्येक प्रावर्षी के लिए द. 2/- (पांच रुपये), ध्रवया
(ii) जबकि तामील ऐसी रीति से किया गया है जैसा कि उपनियम (2) में अधीन रजिस्ट्रार ने निदेश दिया था तो ऐसी राशि जो तामील करने में वास्तव में व्यय हुई हो और रजिस्ट्रार द्वारा निर्धारित की गई हो।
(4) उपनियम (3) के अधीन प्रक्रियाएं तामील करने ध्रवया निम्नावित करने के लिए फीस ध्रावेदक द्वारा कोर्ट फी स्टैम्पस के रूप में जमा कराई जाएगी।
(5) उपनियम (1), (2), (3) तथा (4) में दी गई किसी बात के होते हुए भी यदि न्यादाधिकरण इस बात से संतुष्ट हो जाता है कि ध्रावेदन का नोटिस तभी प्रावधियों पर तामील करना व्यावहारिक रूप में उचित नहीं है तो वह लिखित किए जाने बाने कारणों से वह निदेश दे सकता है कि ध्रावेदन पक्ष पर कूनवाई इस बात पर ध्यान दिए बिना की जाएगी कि कुछ प्रावधियों को ध्रावेदन पक्ष का नोटिस तामील
नहीं किया गया या बघवें कि किसी भी धार्मिक्य पक्ष पर कुनवाईं तय राय नहीं होंगी जब तक कि-
(i) धार्मिक्य पक्ष का मोडिस सरदार पर तामील नहीं किया गया हो जबकि सरकार एक प्रावधी है ;
(ii) धार्मिक्य पक्ष का मोडिस उस प्रातिकारों पर तामील कर दिया गया है जिसमे बहु धार्मिक्य चात् किया था जिसमे विरुद्ध धार्मिक्य पक्ष यावर किया गया है, तथा
(iii) न्यायाधिकरण उस बात से संतुष्ट है कि जिन प्रावधियों पर धार्मिक्य पक्ष का मोडिस तामील नहीं किया गया है उसके हितों का जन प्रावधियों द्वारा जिन पर धार्मिक्य पक्ष का मोडिस तामील किया गया है, पर्याप्त रूप से प्रतिनिधित्व होता है।
12. प्रावधी द्वारा उत्तर और अन्य दस्तावेजों का फाइव किया जाना :
(1) प्रावधी पर धार्मिक्य की सूचना तामील किए जाने की तारीख के एक बात के भीतर बहु रजिस्ट्रार की धार्मिक्य पक्ष का उत्तर देते हुए धार्मिक्य पुस्तिका के प्रथम में तीन पूर्ण तेढ फाइल करेगा जिसके साथ में ऐसे दस्तावेज भी होंगे जिन पर उसमे भरोसा किया है।
(2) प्रावधी उपनियम (1) में क्या बधित दस्तावेजों के साथ उत्तर की एक प्रति धार्मिक्य पर ध्र्यया सक्रियता पर, यदि कोई हो, तामील करेगा और ऐसी तामील का प्रमाण रजिस्ट्रार की दाबर करेगा। ध्रधिकरण प्रावधी द्वारा धार्मिक्य किए जाने पर एक बात की कायाप्राधि की समाप्ति के पश्चात् उत्तर फाइल करने की अनुमा दे सकेगा।
13. कुनवाई की तारीख और समय का ध्रधिकुचित किया जाना:रजिस्ट्रार पक्षकारों की धार्मिक्य की कुनवाई की तारीख और समय ध्रधिमुचित करेगा।
14. न्यायाधिकरण की बैठकें:-न्यायाधिकरण की बैठकें सामान्यतः भुवनेश्वर में होनी। किन्तु शर्त बहु है कि यदि किसी समय ध्रधिकरण का ध्र्य्यया इस बात से संतुष्ट है कि ऐसी परिस्थितियां विज्ञान है जिसके कारण न्यायाधिकरण की बैठक भुवनेश्वर से भिन्न किमी अन्य स्थान पर करना आवश्यक है तो ध्र्य्यया ऐसे किसी उचित स्थान पर बैठक करने का निदेश दे सकेगा।
15. धार्मिक्य पक्षों पर निर्णय:-
(1) ध्रधिकरण स्थानान्तरित किए गए मामलों की कुनवाई के लिए एक कतेच्वर तैयार करेगा और यथासंभव मामलों की कुनवाई तथा निर्णय कर्तेग्वर के अनुसार करेगा।
(2) प्रत्येक धार्मिक्य पक्ष की कुनवाई तथा निर्णय यथासंभव इसके प्रस्तुत किए जाने के छ: मात के भीतर कर लिया जाएगा।
(3) उपनियम (1) और (2) के प्रयोजनों के लिए ध्रधिकरण की बहु ध्रधिकार है कि बहु किसी त्वयन से मना कर दे और जबानी दलीलों के लिए समय सीमित कर सकेगा।
16. धार्मिक्य के व्यतिरूप के कारण धार्मिक्य पर कार्रवाई :-
(1) जहां धार्मिक्य की कुनवाई के लिए नियत तारीख की या किसी अन्य तारीख की चितकी ऐसी कुनवाईं स्थगित कर दी जाए, धार्मिक्य उस समय हाजिर नहीं होता है जब धार्मिक्य की कुनवाई के लिए पुकार हो, वहां ध्रधिकरण ध्वये विवेकानुसार, या तो व्यतिरूप के कारण धार्मिक्य की खारिज कर सकेगा या उसकी कुनवाई करके युवाभगुण के आधार पर इसका विनिम्न्यय कर सकेगा।
(2) जहां धार्मिक्य व्यतिरूप के कारण खारिज कर दिया जाता है और धार्मिक्य स्तरज्याह् हाजिर हो जाता है और ध्रधिकरण का बहु यथासंभ कर देता है कि उसकी छह समय पैरहाजिरी का पर्याप्त कारण या जब धार्मिक्य की कुनवाई के लिए पुकार हुई थी, वहां ध्रधिकरण धार्मिक्य की खारिज करने वाले धार्मिक्य की क्रमस्त करने वाला एक धार्मिक्य करेगा और उसे बहुध्य करेगा।
17. धार्मिक्य पर एकपर्याय कुनवाई :-
(1) जहां धार्मिक्य की कुनवाई के लिए नियत तारीख की या किसी अन्य तारीख की चितकी कुनवाईं स्थगित कर दी गई है, धार्मिक्य हाजिर होता है और प्रावधी उस समय हाजिर नहीं होता है जब धार्मिक्य की कुनवाई के लिए पुकार हुई हो वहां ध्रधिकरण, ध्वये विवेकानुसार, धार्मिक्य की स्थगित या उसकी कुनवाई कर सकेगा और धार्मिक्य का एकपर्यीय रूप से विनिम्न्यय कर सकेगा।
(2) जहां किसी प्रावधी ध्र्यया प्रावधियों के विरुद्ध धार्मिक्य पक्ष की कुनवाई एकदरया हुई हो तो ऐतार्दिये प्रावधी धार्मिक्य की निरस्त करने के लिए ध्रधिकरण से निर्वयन कर सकते हैं और यदि ऐतार्दिये प्रावधी ध्रधिकरण की बहु संतुष्टि कर दें कि मोडिस विविधत तामील नहीं किया गया था ध्र्यया बहु में धार्मिक्य की कुनवाई के समय पर्याप्त कारण से हाजिर नहीं हो सके वे तो ध्रधिकरण उनके विरुद्ध एकपर्यीय कुनवाई की निरस्त करते हुए एक धार्मिक्य ऐसी शर्त पर कर सकेगा जो बहु उचित समझे और धार्मिक्य पर ध्वये कार्रवाई के लिए कोई अन्य दिन नियत कर देगा।
किन्तु शर्त बहु है कि जहां एकपर्यीय कुनवाई का स्वरूप ऐसा है कि इसे एक प्रावधी के विरुद्ध निरस्त नहीं किया जा सकता तो इसे दर्जो के विरुद्ध ध्र्यया अन्य किसी भी प्रावधी के विरुद्ध निरस्त किया जा सकेगा।
और बहु कि कोई भी ध्रधिकरण धार्मिक्य की एकपर्यीय कुनवाई बाढ़ इस कारण से निरस्त नहीं करेगा कि मोडिस तामील किए जाने में अनिवर्यितता हुई थी जबकि बहु इस बात से संतुष्ट हो जाए कि प्रावधी की कुनवाई की तारीख के बारे में जानकारी थी और हाजिर होने तथा धार्मिक्य के दावे का उत्तर देने के लिए पर्याप्त समय था।
18. धार्मिक्य का त्वयन:—ध्रधिकरण ऐसे निबंधनों पर जो बहु ठीक समझे, और कार्यवाहियों के किसी प्रथम पर धार्मिक्य की कुनवाई स्थगित कर सकेगा।
19. धार्मिक्य पर हस्ताक्षर किया जाना और उस पर तारीख प्रखला:ध्रधिकरण का प्रत्येक धार्मिक्य लिखित रूप से होगा और उस पर सम्बद्ध न्यायपीठ का गठन करने वाले सदस्यों द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे और तारीख बाली जाएगी।
20. ध्रावेसीं का प्रकाशन:—ध्रधिकरण के ऐसे ध्रावेसीं की किसी प्राधिकृत रिपोर्ट या प्रेस में प्रकाशन के लिए ठीक समझे जाएं, ऐसे निबंधनों और सत्रों पर जिन्हें ध्रधिकरण ध्रधिकचित करे, ऐसे प्रकाशन के लिए निर्भुक्त किया जा सकेगा।
21. ध्रावेसीं का पक्षकारों की संतुषित किया जाना:—धार्मिक्य पर बारित धार्मिक्य धार्मिक्य धार्मिक्य की और प्रावधी की या तो व्यस्तिगत रूप से या रजिस्ट्री बाक द्वारा नि:शुल्क संतुषित किया जाएगा।
22. प्राधिकेशों के विरोधिम के लिए कोई फीस नहीं:—किसी पंक्ति धार्मिक्य के किसी पक्षकार द्वारा उसके प्राधिकेशों के विरोधिम के लिए कोई फीस प्रचारित नहीं की जाएगी।
- कुछ मामलों में आदेश और निर्देश —अधिकरण ऐसे आदेश कर सकेगा या ऐसे निर्देश दे सकेगा जो उसके आदेशों की प्रभावी करने के लिए या उनके संबंध में या उसकी प्रादेशिका के दुरुपयोग के निवारण के लिए या न्याय के उद्देश्यों को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक या सर्वोपरि ही।
-
विधि व्यवसायी के निपिक का रजिस्ट्रीकरण :
(1) किसी विधि-व्यवसायी द्वारा नियोजित और उस अधिकरण के जिसमें विधि व्यवसायी विधि व्यवसाय करता है, आदेशों के प्रचलित की पहुंच रखने और उनकी प्रतियां प्रचलित करने के लिए अनुक्रात निपिक को “रजिस्ट्रिकृत निपिक” के रूप में जाना जाएगा।
(2) वह विधि व्यवसायी जो अपने निपिक का रजिस्ट्रीकरण कराने का इच्छुक है, प्रबन्ध 2 में रजिस्ट्रार को एक आवेदन करेगा।
(3) एक विधि-व्यवसायी एक समय पर दो से अधिक रजिस्ट्रिकृत निपिक नहीं रखेगा जब तक कि रजिस्ट्रार साधारण या विशेष आदेश द्वारा सम्प्रभु अनुक्रात न करे।
(4) सभी रजिस्ट्रिकृत निपिकों का एक रजिस्ट्रार रजिस्ट्रार के कार्यालय में बनाए रखा जाएगा और निपिक के रजिस्ट्रीकरण के पश्चात् रजिस्ट्रार ऐसे रजिस्ट्रिकृत निपिक को एक पहचान पत्र जारी किए जाने का निर्देश देगा जो समस्तरपीय होगा और अधिकरण के इस निमित्त प्राधिकृत किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी द्वारा अनुरोध पर धारक द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा।
(5) उपनियम (4) में वचित पहचान पत्र अधिकरण के उप-रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर से जारी किया जाएगा।
(6) जब कभी कोई विधि व्यवसायी किसी रजिस्ट्रिकृत निपिक को नियोजित करना बंद कर देता है तो वह तुरन्त उस तथ्य की सूचना उसके निपिक को जारी किए गए पहचान पत्र के साथ एक पत्र के माध्यम से रजिस्ट्रार को देगा और ऐसे पत्र की प्राप्ति पर रजिस्ट्रिकृत निपिक का नाम रजिस्ट्रार से काट दिया जाएगा।
- अधिकरण के काम के घंटे—रविवारों और अन्य सार्वजनिक प्रावधान दिनों को छोड़कर अधिकरण, के कार्यालय, प्रावधान द्वारा किए गए किसी आदेश के अधीन रहते हुए, प्रतिदिन 10.00 बजे पूर्वाह्न के 5.00 बजे घनराह्न तक खुले रहेंगे किन्तु कोई भी काम जब तक कि वह प्रावधानिक प्रहति का न हो, किसी भी कार्य दिन को 3.30 घनराहन के बाद ग्रहण नहीं किया जाएगा।
-
अधिकरण की बैठक के घंटे —अधिकरण (जिसके अन्तर्गत प्रावधान न्यायपीठ भी है) की बैठक के घंटे प्रावधान द्वारा किए गए किसी आदेश के अधीन रहते हुए सामान्यतया 10.30 पूर्वाह्न से 1.00 घनराहन तक और 2.00 घनराहन से 4.00 बजे घनराह्न तक होंगे।
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रजिस्ट्रार की प्रतियां और कृत्य :
(1) रजिस्ट्रार अधिकरण के अभिलेखों को अधिकरण रखेगा और ऐसे अन्य कृत्यों का जो उसे इन नियमों के अधीन अथवा प्रावधान द्वारा सौंपे जाए, प्रयोग करेगा।
(2) रजिस्ट्रार प्रावधान के अनुरोध से उप-रजिस्ट्रार को इन नियमों द्वारा रजिस्ट्रार द्वारा प्रयोग किए जाने के लिए प्रगतित कृत्यों को प्रत्यारोपित कर सकेगा।
(3) रजिस्ट्रार की अनुपस्थिति में उप-रजिस्ट्रार प्रावधान इस संबंध में प्रावधान द्वारा लिखित रूप में प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी रजिस्ट्रार के सभी प्रावधान किसी भी प्रतियां का प्रयोग कर सकेगा।
(4) अधिकरण की सामग्री मुद्रा रजिस्ट्रार प्रावधान में रखी जाएगी।
(5) रजिस्ट्रार प्रावधान द्वारा किसी साधारण या विशेष निर्देश के अधीन रहते हुए, अधिकरण की मुद्रा किसी आदेश, समय या अन्य कार्यवाही पर लगा सकेगा।
(6) अधिकरण की मुद्रा रजिस्ट्रार के लिखित प्राधिकार के बिना अधिकरण के किसी आदेश का प्रमाणित प्रति पर नहीं लगाई जाएगी।
- रजिस्ट्रार की प्रतिरिक्त प्रतियां और कर्तव्य :
इन नियमों में प्रावधान प्रदत्त प्रतियां के प्रतिरिक्त रजिस्ट्रार की प्रावधान के साधारण या विशेष आदेश के अधीन रहते हुए निम्नलिखित प्रतियां और कर्तव्य प्राप्त होंगे, प्रकोप—
(i) सभी आवेदन और अन्य दस्तावेज जिसमें अन्तर्गत संततित आवेदन भी है, प्राप्त करना;
(ii) आवेदन रजिस्ट्रिकृत किए जाने से पूर्व उनकी संबंधित से उप-चूत होने वाले सभी प्रप्तों का निम्नवचन करना;
(iii) अधिकरण को प्रस्तुत किए गए किसी आवेदन में प्राधिनियम तथा नियमानुसार संशोधन कराए जाने की प्रगतता करना;
(iv) अधिकरण के निर्देशों के अधीन रहते हुए आवेदनों या समय कार्यवाहियों की सुनवाई की तारीख नियत करना और उनकी सूचनाएं जारी करना;
(v) अभिलेखों के किसी प्रबन्धक संशोधन का निर्देश देना;
(vi) कार्यवाहियों के पत्रकारों की दस्तावेजों की प्रतियां दिलाए जाने का प्रगत करना;
(vii) अधिकरण के अभिलेखों का निरीक्षण करने के लिए स्वीकृति देना;
(viii) सूचनाओं और अन्य प्रगतिशीलताओं की तामील से संबंधित सभी मामलों का निपटारा, नई सूचनाओं के जारी किए जाने के लिए या समय बढ़ाए जाने के लिए आवेदन;
(ix) किसी न्यायालय या अन्य प्राधिकरण की अधिकता से अभिलेखों की प्रगतता करना;
(x) आवेदन के ताब्बत रहने के दौरान मृत पत्रकारों के कानूनी प्रतिनिधियों के प्रतिस्थापन के लिए आवेदन प्राप्त करना;
(xi) वहां के निवास जहां प्रतिस्थापन से भयावह करना या भयावह करना प्रगतिशील है, प्रतिस्थापन के लिए आवेदन प्राप्त करना तथा उनका निपटारा करना;
(xii) दस्तावेजों की वापसी के लिए पत्रकारों द्वारा आवेदन प्राप्त करना तथा उनका निपटारा करना।
- मुद्रा और संग्रहीक :
अधिकरण की सामग्री मुद्रा और संग्रहीक ऐसा होगा जो सरकार विनिर्दिष्ट करे।
- अधिकरण के सदस्यों और कर्मचारिदृष्टि के लिए पोशाक :
अधिकरण के सदस्यों (जिसके अन्तर्गत प्रावधान और उपाध्यक्ष भी हैं) और अधिकरण के कर्मचारिदृष्टि के सदस्यों के लिए पोशाक ऐसी होगी जो प्रावधान विनिर्दिष्ट करे।
- पत्रकारों के लिए पोशाक :
प्राचीन विधि व्यवसायी या प्रबन्धकीय मुद्रासीन अधिकारी अधिकरण के समक्ष अपनी व्यावसायिक पोशाक में, यदि कोई हो, टॉपिक होगा और यदि ऐसा कोई पोशाक नहीं है वह—
(i) यदि वह दुकान है तो बंद करें के कोट या खर्च करें के कोट में सफेद कंरीज और पेंट और टाई के साथ टॉपिक होगा;
(1i) यदि बहु महिला है तो सफेद माही या किसी अन्य शर्बत पोशाक में ध्रुवा अन्य हल्के रंग की पोशाक में हाजिर होती।
[सं.ए-11010/42(2)/85-ए.टी.] पी.जी.सैन्य निदेशक, सी.टी.सं.
प्रकाश
(नियम 4 देखिए)
प्रशासनिक अधिकरण अधिनियम, 1955 को धारा 19 के अधीन ध्रुवेदन
अधिकरण के कार्यालय में प्रयोग के लिए
फाइन करने की तारीख
या
बाक द्वारा प्राप्ति की तारीख
रजिस्ट्रीकरण संख्या
रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर
उड़ीसा प्रशासनिक अधिकरण, भुवनेश्वर में
के मध्य
क
ख
ध्रुवेदन
और
म
घ
प्रत्यक्ष
“ओ वानु न होता ही, उसे काट दें।
ध्रुवेदन के ब्योरे
- ध्रावेदन की विनिर्दियां
(i) ध्रावेदन का नाम
(ii) पिता/पति का नाम
(iii) पदार्थीयक और कार्यालय जिनमे निर्वाजित है।
(iv) कार्यालय का पता
(v) सभी सूचनाओं की तामिल का पता - प्रत्यक्ष की विनिर्दियां
(i) प्रत्यक्ष का नाम और/या पदार्थीयक
(ii) प्रत्यक्ष के कार्यालय का पता
(iii) सभी सूचनाओं की तामिल का पता - उस ध्रवेश की जिनके विरुद्ध ध्रावेदन किया गया है, विनिर्दियां ध्रावेदन निम्नलिखित ध्रवेश के विरुद्ध है :
(i) ध्रवेश संख्या
(ii) तारीख
(iii) …… द्वारा पारित किया गया
(iv) संक्षिप्ततः विषय - अधिकरण की अधिकारीता
ध्रावेदन यह घोषणा करता है कि उस ध्रवेश की जिनके विरुद्ध वह प्रतिलीप चालता है, विपापकतु अधिकरण की अधिकारीता के अंतर्गत है।
504 G1/86-2.
- परिक्षोभाएं
ध्रावेदन वह और घोषणा करता है कि आवेदन प्रशासनिक अधिकरण अधिनियम, 1955 को धारा 21 में विद्यहित परिक्षोभा के भीतर है।
6. मामले के तथ्य :
मामले के तथ्य नीचे दिए गए है :
(यहां कमानुसार तथ्यों का एक संक्षिप्त कथन में, प्रत्येक पैरा में यथासंभव निकटतम एक एक्क विवाहक, तथ्य या सम्यथा चलचिघ्द हो।
7. मांगे गए अनुक्षेष
ऊपर पैरा 6 में वलित को ध्यान में रखकर ध्रावेदन निम्नलिखित अनुक्षेष(यों) के लिए प्रार्थना करता है :
(नीचे मांगे गए अनुक्षेष(यों) को विनिर्दिष्ट करें और अनुक्षेष (यों) के आधार और वरोसा किए गये विधिक उपबंधों (यदि कोई हो) को स्पष्ट करें।
8-प्रस्तरिम ध्रावेश, यदि उनके लिए प्रार्थना की गई है।
ध्रावेदन पर अन्तिम विनिमय लक्षित रहने तक ध्रावेदन निम्नलिखित अन्तरिम ध्रावेश जारी किये जाने की मांग करता है :-
(यहां कारण देकर उस अन्तरिम ध्रावेश को प्रकृति का उल्लेख करें जिसकी प्रार्थना की गई है।
9- निर्जन किए गए उपचारों के ब्योरे :
ध्रावेदन यह घोषणा करता है कि उसने सुसंगत सेवा नियमों आदि के अधीन उनकी उपलब्ध सभी उपचारों का उपयोग कर लिया है। (यहां किए गए अध्यावेदनों के ब्योरे और ऐसे अध्यावेदनों का परिणाम कमानुसार दें)।
10-में विवय जो किसी अन्य न्यायालय आदि के पास लक्षित नहीं है ध्रावेदन वह और घोषणा करता है कि वह विषय जिसकी वाचत वह ध्रावेदन किया गया है, किसी विधि न्यायालय या किसी अन्य प्राधिकरण या अधिकरण को किसी अन्य न्यायपीठ के समग्र लक्षित नहीं है।
11- अनुक्रमाणिका के ब्योरे :
दो प्रतियों में अनुक्रमाणिका जिसमें चकचंव लिए जाने वाले दक्षावेजों के ब्योरे चलचिघ्द है, संलग्न है।
12- अनुपम्तकों की सूची
सत्यापन :
में, (ध्रावेदन का नाम)पुत्र, पुत्री, पत्नी
धातु
के रूप
में कार्य कर रहा हूं/रही हूं और जो
का निवासी
हूं/की निवासी हूं, वह सत्यापित करता, हूं, करती हूं कि 1 मे 12 की चलचचच्रू मेरे व्यक्तिगत ज्ञान और विलास के अनुसार महां है और यह कि मैंने किसी की तात्विक तथ्य की नहीं खिताबा है।
ध्रावेदन के हस्ताक्षर :
स्थान :
तारीख
गया में,
रजिस्ट्रार :
उड़ीसा प्रशासनिक अधिकरण,
भुवनेश्वर।
पावती रसीद
की/कीयति-पदनाम
विज्ञान
अहीसा प्रशासनिक घधिकरण भुवनेश्वर को भेजे गए घावेदन की गुनर्हारा पावती रसीद भेजी जाती है।
इते रजिस्ट्टर
उड़ीसा प्रशासनिक घधिकरण् भुवनेश्वर
गुहू
प्ररूप 2
(नियम 24 देखिए)
निपिक के रजिस्ट्रीकरण के लिए घावेदन
- विधि व्यवसायी का नाम जिसकी छोर से निपिक का रजिस्ट्रीकरण किया जाना है।
- रजिस्ट्रीहृत किए जाने वाले निपिक की बिसिप्पियां
(i) दुरा नाम(बड़े घसरों में)
(ii) पिता का नाम
(iii) चामू छोर जन्म तिथि
(iv) जन्म स्थान
(v) राश्ट्रिकता
(vi) शैक्षिक घर्बूताएं
(vii) पूर्व नियोजन, यदि कोई है, की बिसिप्पियां।
$$
\begin{aligned}
& \text { (ऊपर नाभित निपिक)यह प्रतिहा करता } \
& \text { हुं कि मुम्न से संबंधित ऊपर दी गई बिसिप्पियां सही हैं। } \
& \text { निपिक के हस्ताक्षर }
\end{aligned}
$$
- क्या विधिक व्यवसायी के पास उसके नियोजन में पहने से ही कोई रजिस्ट्रीहृत निपिक है और क्या रजिस्ट्रीहृत किए जाने वाला निपिक पहने से ही रजिस्ट्रीहृत-निपिक के स्थान पर है या उसके प्रतिनिधि है।
- क्या रजिस्ट्रीहृत किए जाने वाला निपिक किसी धम्य विधि व्यवसायी के निपिक के रूप में पहने से ही रजिस्ट्रीहृत है और यदि हा तो ऐसे विधि व्यवसायी का नाम
(विधि व्यवसायी) प्रमाणित करता हुं कि ऊपर दी गई बिसिप्पियां मेरी सर्वोत्तम जानकारी और विश्वास के अनुसार सही है और वह कि मुमे ऐसे किन्ही तथ्यों की जानकारी नहीं है जिनके निपिक के रूप में उत्तर … (नाम)का रजिस्ट्रीकरण प्रबन्धनीय हो जाएगा।
तारीख :
विधि व्यवसायी के हस्ताक्षर
सेवा में,
रजिस्ट्रार,
उड़ीसा प्रशासनिक घधिकरण, भुवनेश्वर।
G.S.R. 936(E).-In exercise of the powers conferred by clauses (d), (e) and (f) of sub-section (2) of section 35 and clause (c) of Section 36 of the Administrative Tribunals Act, 1985 (13 of 1985), the Central Government hereby makes the following rules, namely:-
- Short title and commencement.-(1) These rules may be called the Orissa Administrative Tribunal (Procedure) Rules, 1986.
(2) They shall come into force on the date of their publication in the official Gazette. - Definitions.-In these rules, unless the context otherwise requires :-
(a) “Act” means the Administrative Tribunals Act, 1985 (13 of 1985);
(b) “Advocate” means an advocate entered in any roll under the provisions of the Advocates Act, 1961 ( 25 of 1961) ;
(c) “Agent” means a person duly authorised by a party to present an application or reply on its behalf before the Tribunal ;
(d) “Applicant” means a person making an application to the Tribunal under section 19;
(e) “Application” means an application made to the Tribunal under section 19 ;
(f) “Form” means the Form annexed to these rules ;
(g) “State Government” means the Government of Orissa;
(h) “Legal practitioner” shall have the same meaning as is assigned to it in the Advocates Act, 1961 ( 25 of 1961) ;
(i) “Registrar” means the Registrar of the Tribunal and includes any officer to whom the powers and functions of the Registrar may be delegated under clause (2) of rule 27;
(j) “Section” means a section of the Act ;
(k) “Transferred application” means the suit of other proceeding which has been transferred to the Tribunal under sub-section (1) of section 29 ;
(l) “Tribunal” means the Orissa Administrative Tribunal established under sub-section (2) of section 4. - Language of the Tribunal : (1) The language of the Tribunal shall be English ;
Provided that the parties to a proceeding before ${ }^{7}$ the Tribunal may file documents drawn up in Oriya, if they so desire ;
Provided further that a Bench may in its discretion, permit the use of Oriya in the proceedings. However, the final order shall be in English.
4. Procedure for filing applications : (1) An application to the Tribunal shall be presented in Form 1 annexed to these rules by the applicant in person or by an agent or by a duly authorised advocate, to the Registrar or any other officer authorised by the Registrar to receive applications or sent by registered post with acknowledgement due addressed to the Registrar.
(2) The application under sub-rule (1) shall presented in three complete sets in a paper-book form along with one empty file size envelope bearing full address of the respondent. Where the number of respondents is more than one, as many extra copies of the application in paper book form as the number of respondent together with required number of empty
lile size-envelopes bearing the full address of each respondent shall be furnished by the applicant.
(3) The applicant may attach to and present with his application a receipt slips as in Form No. 1 which shall be signed by the Registrar or the officer receiving the applications on behalf of the Registrar in acknowledgement of the receipt of the application.
(4) Notwithstanding anything contained in sub rules (1), (2) and (3), the Tribunal may permit:-
(a) more than one person to join together and file a single application if it is satisfied, having regard to the cause of action and the nature of irelef prayed for, that they have the same interest in the service matter; or
(b) an Association representing the persons desirous of joining in a single application provided, however, that the application shall disclose the names of all the persons on whose behalf it has been filed.
5. Presentation and scrutiny of applications.(1) The Registrar, or the officer authorised by the Registrar shall endorse on every application the date on which it is presented or deemed to have been presented under that rule and shall sign the endorsement.
(2) If, on scrutiny, the application is found to be in order, it shall be duly registered and given a serial number.
(3) If the application, on scrutiny, is found to be defective and the defect noticed is formal in nature, the Registrar may allow the party to rectify the same in his presence, and if the said defect is not formal in nature, the Registrar may allow the applicant such time to rectify the defect as he may deem fit.
(4) If the applicant fails to rectify the defect within the time allowed under sub-rule (3), the Registrar may, by order and for reasons to be recorded in writing, decline to register the application.
(5) An appeal against the order of the Registrar under sub-rule (4) shall be made within 15 days of the making of such order to the Tribunal whose decision thereon shall be final.
6. Place of filing application.-The application shall be filed by the applicant with the Registrar.
7. Application fee.-Every application filed with the Registrar shall be accompanied by a fee of Rs. 501- (Rupees fifty) only which shall be paid in court fee stamps affixed on the application.
Provided that where the Tribunal permits a single application to be filed, either by more than one person or by an Association, the fee payable shall be Rs. 501- (Rupees fifty) only.
8. Contents of application.-(1) Every application filed under rule 4 shall set forth concisely under distinct heads, the grounds for such application. Such grounds shall be numbered consecutively and typed in double space.
(2) It shall not be necessary to present a separate application to seek an interim order or direction if the application contains a prayer seeking an interim order or direction pending final disposal of the application.
(3) An application may, subsequent to the filing of application under recmon 19 of the Act, apply to: an interim order or dircction. Such an application shall, as far as possible, be in the same form as is prescribed for an application under section 19 and shall be accompanied by a fee of Rs. 21- (Rupees two only) which shall be payable in court fee stamps affixed on such application.
9. Paper book, etc. to accompany the application.-
(1) Every application shall be accompanied by a paper book containing :-
(i) an attested true copy of the order against which the application has been filed;
(ii) copies of the documents relied upon by the applicant and referred to in the application; and
(iii) an index of documents.
(2) The documents referred to in sub-rule (1) may be attested by an advocate or by a Gazetted Officer.
(3) Where an Application is filed by an agent, documents authorising him to act as such agent shall also be appended to the application:
Provided that where an application is filed by an advocate, it shall be accompanied by a duly executed ‘vakalatnama’.
10. Plural remedies.-An application shall be based upon a single cause of action and may seek one or more reliefs provided they are consequential to one another.
11. Service of notice of application on the respondents.-(1) A copy of the application in the paper book shall ordinatily be served on each of the respondents by the Registrar in one of the following modes:-
(i) hand delivery (dasti) through the applicant or through a process server; or
(ii) through registered post with acknowledgement due.
(2) Notwithstanding anything contained in subrule (1), the Registrar may, taking into account the number of respondents and their places of residence or work and other circumstances, direct that notice of the application shall be served upon the respondents in any other manner including any manner of substituted service, as it appear to the Registrar just and convenient.
(3) Every applicant shall pay a fee for the service or execution of processes, in respect of an applica-
tion where the aumber of respondents exceeds five, as under:—
(i) a sum of Rs. 5 (Rupees five) for each respondent in excess of five respondents; or
(ii) where the service is in such manner as the Registrar may direct under sub rule (2), a sum not exceeding the actual charges incurred in effecting the service as may be determined by the Registrar.
(4) The fee for the service or execution of processes under sub-rule (3) shall be remitted by the applicant in the form of court fee stamps.
(5) Notwithstanding anything contained in sub-rules (1), (2), (3) and (4), if the Tribunal is satisfied that it is not reasonably practicable to serve notice of application upon all the respondents, it may for reasons to be recorded in writing, direct that the application shall be heard notwithstanding that some of the respondents have not been served with notice of the application, provided that no application shall be heard unless:—
(i) notice of the application has been served on the Government, if Government is respondent;
(ii) notice of the application has been served on the authority which passed the order against which the application has been filed; and
(iii) the Tribunal is satisfied that the interests of the respondents on whom notice of the application has not been served are adequately and sufficiently represented by the respondents on whom notice of the application has been served.
- Filing of reply and other documents by the respondent.—(1) The respondent shall file three complete sets containing the reply to the application alongwith the documents relied upon by him, in a paper book form, with the Registrar within one month of the date of service of the notice of the application on him.
(2) The respondent shall also serve a copy of the reply along with copies of documents as mentioned in sub-rule (1) on the applicant or his advocate, if any, and file proof of such service with the Registrar. The Tribunal may, on application by the respondent, allow filing of the reply after the expiry of the period of one month.
- Date and place of hearing to be notified.—The Registrar shall notify to the parties the date and the place of hearing of the application.
-
Sittings of the Tribunal.—The Tribunal shall ordinarily hold its sittings at Bhubaneswar.
Provided that, if at any time, the Chairman of the Tribunal is satisfied that circumstances exist which render it necessary to have sittings of the Tribunal at any place other than Bhubaneswar, the Chairman may direct to hold the sittings at any such appropriate place.
- Decision on applications.—(1) Tribunal shall draw up a calendar for the hearing of transferred cases and as far as possible hear and decide the cases according to the calendar.
(2) Every application shall be heard and decided, as far as possible, within six months of the date of its presentation.
(3) For purposes of sub-rules (1) and (2), the Tribunal shall have the power to decline an adjournment and to limit the time for oral arguments.
- Action on application for applicant’s default.—(1) Where on the date fixed for hearing of the application or on any other date to which such hearing may be adjourned, the applicant does not appear when the application is called on for hearing, the Tribunal may, in its discretion, either dismiss the application for default or hear and decide it on merit.
(2) Where an application has been dismissed for default and the applicant appears afterwards and satisfied the Tribunal that there was sufficient cause for his non-appearance when the application was called on for hearing, the Tribunal shall make an order setting aside the order dismissing the application and restore the same.
- Hearing on application ex-parte.—(1) Where on the date fixed for hearing the application or on any other date to which such hearing may be adjourned, the applicant appears and the respondent does not appear when the application is called on for hearing, the Tribunal may, in its discretion, adjourn or hear and decide the application ex-parte.
(2) Where an application has been heard ex-parte against a respondent or respondents, such respondent or respondents may apply to the Tribunal for an order to set it aside and if such respondent or respondents satisfy the Tribunal that the notice was not duly served, or that he or they were prevented by any sufficient cause from appearing when the application was called on for hearing, the Tribunal may make an order setting aside the ex-parte hearing as against him or them upon such terms as it thinks fit, and shall appoint a day for proceeding with the application:
Provided that where the ex-parte hearing of the application is of such nature that it cannot be set aside as against one respondent only, it may be set aside as against all or any of the other respondents also:
Provided further that Tribunal shall not set aside ex-parte hearing of an application merely on the ground that there has been an irregularity in the service of notice, if it is satisfied that the respondent had notice of the date of hearing and had sufficient time to appear and answer the applicant’s claim.
- Adjournment of application.—The Tribunal may on such terms as it deems fit and at any stage
of the proceedings adjourn the hearing of the application.
19. Order to be signed and dated.-Every order of the Tribunal shall be in writing and shall be signed and dated by the Members constituting the Bench concerned.
20. Publication of orders.-Such of the orders of the Tribunal as are deemed fit for publication in any authoritative report or the press may be released for such publication on such terms and conditions as the Tribunal may lay down.
21. Communication of orders to parties.-Every order passed on an application shall be communicated to the applicant and to the respondent either in person or by registered post free of cost.
22. No fee for inspection of records.-No fee shall be charged for inspecting the records of a pending application by a party thereto.
23. Orders and directions in certain cases.-The Tribunal may make such orders or give such directions as may be necessary or expedient to give effect or in relation to its orders or to prevent abuse of its process or to secure the ends of justice.
24. Registration of legal practitioner’s clerks:-
(1) A clerk employed by a legal practitioner and permitted as such to have access to the records and to obtain copies of the orders of the Tribunal in which the legal practitioner ordinarily practices shall be known as a “registered clerk”.
(2) A legal practitioner destrous of registering his clerk shall make an application to the Registrar in Form 2.
(3) A legal practitioner shall have at a time not more than two registered clerks unless the Registrar by general or special order otherwise permits.
(4) A register of all the registered clerks shall, be maintained in the office of the Registrar and after registration of the clerk, the Registrar shall direct the issue of an identity card to him which shall be non transferable and shall be produced by the holder upon request by an officer or any other employee of the Tribunal.
(5) The identity card mentioned in sub-rule (4) shall be issued under the signatures of the Deputy Registrar of the Tribunal.
(6) Whenever a legal practitioner ceases to employ a registered clerk, he shall notify the fact at once to the Registrar by means of a letter enclosing therewith the identity card issued to his clerk and on receipt of such letter the name of the said registered clerk shall be struck off from the register.
25. Working hours of the Tribunal.-Except on sundays and other public holidays, the offices of the
Tribunal shall, subject to any order made by the Chairman, remain open daily from 10.00 a.m. to 5.00 p.m. but no work, unless it is of an urgent nature, shall be admitted after 3.30 p.m. on any working day.
26. Sitting hours of the Tribunal.-The sitting hours of the Tribunal (including a vacation Bench) shall ordinarily be from 10.30 a.m. to 1.00 p.m. and 2.00 p.m. to 4.00 p.m. subject to any order made by the Chairman.
27. Powers and functions of the Registrar :-
(1) The Registrar shall have the custody of the records of the Tribunal and shall exercise such other functions as may be assigned to him under these rules or by the Chairman.
(2) The Registrar may, with the approval of the Chairman, delegate to the Deputy Registrar any functions required by these rules to be exercised by the Registrar.
(3) In the absence of the Registrar, the Deputy Registrar or any other officer of the Tribunal authorised in writing by the Chairman in this behalf may perform or exercise all or any of the functions and powers of the Registrar.
(4) The Registrar shall keep in his custody the official seal of the Tribunal.
(5) The Registrar shall, subject to any general or special direction by the Chairman, affix the official seal of the Tribunal on any order, notice or other process.
(6) The Registrar shall have the power to authorise in writing the affixing of the seal of the Tribunal on a certified copy of any order of the Tribunal.
28. Additional powers and duties of Registrar.In addition to the powers conferred elsewhere in these rules, the Registrar shall have the following powers and duties subject to any general or special order of the Chairman namely :-
(i) to receive all application and other documents including transferred applications;
(ii) to decide all questions arising out of the scrutiny of the applications before they are registered;
(iii) to require any application presented to the Tribunal to be amended in accordance with the Act and the rules;
(iv) subject to the directions of the Tribunal to fix dates of hearing of the applications or other proceedings and issue notices thereof;
(v) to direct any formal amendment of records;
(vi) to order grant of copies of documents to parties to the proceedings;
(vii) to dispose of all matters relating to the service of notices or other processes, appli-
cations for the issue of fresh notices or for extending the time therefor.
(ix) to requisition records from the custody of any court or other authority;
(x) to receive applications for the substitution of legal representatives of the deceased parties, during the pendency of the application;
(xi) to receive and dispose of applications for substitution, except where the substitution would involve setting aside an order or abatement; and
(xii) to receive and dispose of application by parties for return of documents.
29. Seal and emblem.-The official seal and emblem of the Tribunal shall be such as the Government may specify.
30. Dress for the Members and Staff of the Tribunal. The dress for the Members of the Tribunal (including Chairman) and menubers of the staff of the Tribunal shall be such as the Chairman may specify.
31. Dress for the parties.-A legal practitioner or, as the case may be, a presenting officer shall appear before the Tribunal in his professional dress if any, and if there is no such dress :-
(i) if a male, in a closed collared coat or in an open collared coat with white shirt, trousers and a tie;
(ii) if a female, in a saree or in any other dress in where or any other light colour.
[No. A-11019|42(2)|85-AT]
P. G. LELE, Director.
FORM I
(See rule 4)
APPLICATION UNDER SECTION 19 OF THE
ADMINISTRATIVE TRIBUNALS ACT, 1960
For use in Tribunals’s Office
DATE OF FILING
OR
DATE OF RECEIPT
BY POST
REGISTRATION NO.
SIGNATURE
REGISTRAR
IN THE ORISSA ADMINISTRATIVE TRIBUNAL
BETWEEN
A
B APPLICANT
AND
C
D RESPONDENT
DETAILS OF APPLICATION :
- Particulars of the applicant:-
(i) Name of the applicant
(ii) Name of Father|Husband
(iii) Designation and office in which employed
(iv) Office Address
(v) Address for service of all notice - Particulars of the respondent :
(i) Name and/or designation of the respondent
(ii) Office address of the respondent
(iii) Address for service of all notices - Particulars of the Order against which application is made :
The application is against the following order :
(i) Order No.
(ii) Dáte
(iii) Passed by
(iv) Subject in brief
4. Jurisdiction of the Tribunal :
The applicant declares that the subject matter of the order against which he wants redressal is within the jurisdiction of the Tribunal.
5. Limitation :-
The applicant further declares that the application is within the limitation prescribed in section 21 of the Administrative Tribunals Act, 1985.
6. Facts of the case :-
The facts of the case are given below :-
(Give here a concise statement of facts in a choronological order, each paragraph containing as nearly as possible a separate issue, fact or otherwise).
- Relief(s) sought :-
In view of the facts mentioned in para 6 above, the applicant prays for the following relief(s) :-
[Specify below the relief(s) sought explaining the ground for the relief(s) and the legal provisions (if any) erlied upon].
8. Interim order, if prayed for :
Pending final decision on the application, the applicant seeks issue of the following interim order :-
(Givt here the nature of the interim order prayed for with reasons).
9. Details of the remedies exhausted :-
The applicant declares that he has availed of all the remedies available to him under the relevant service rules, etc.
(Give here choronologically the details of representations made and the outcome of such representations).
10. Matter not pending with any other court, etc.-
The applicant further declares that the matter regarding which this application has been made is not pending before any court of law or any other authority or has not been rejected by any court of law or other authority.
11. Details of Index :-
An index in duplicate containing the details of the documents to be relied upon is enclosed.
12. List of enclosures :-
Verification :
I, (name of the applicant’s $\mathrm{S} \mid 0, \mathrm{D} \mid 0$, W|o- age working as -resident of do hereby verify that the contents from 1 to 13 are true to my personal knowledge and belief and that I have not suppressed any material facts.
Place :
Date :
Signature of applicant
To
The Registrar,
Orissa Administrative Tribunal
Bhubaneswar.
RECEIPT SLIP
Receipt of the application filed in the Orissa Administrative Tribunal, Bhubaneswar by Shri|Smt. -working as in the Department of residing at is hereby acknowledged.
SEAL
for Registrar
Orissa Administrative Tribunal
Shimla