A pivotal governmental directive has been released, settling the long-standing question of personnel allocation stemming from the Uttar Pradesh Reorganisation Act of 2000. This landmark decision clarifies that individuals who were part of Uttar Pradesh’s workforce prior to November 9, 2000, and subsequently held provisional posts in either Uttar Pradesh or the newly formed Uttarakhand, will now see their positions permanently assigned to Uttarakhand. The policy carefully accounts for judicial interventions, ensuring that any court-issued stay orders regarding allocations are respected and integrated into the final placement process. Furthermore, for personnel whose allocation to Uttarakhand was previously undecided under earlier directives, a clear path has been charted: they are now considered definitively allocated to Uttar Pradesh until any future determination. This comprehensive approach, informed by the detailed recommendations of an expert advisory committee, is designed to bring finality to the service assignments of many government employees, including a specific resolution for 13 police personnel whose individual appeals and concerns were meticulously addressed.
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संख्या 27/11/2011-एस0 आर0 (एस0)
भारत सरकार
कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय,
(कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग)
लोक नायक भवन, तीसरा तल,
खान मार्किट, नई दिल्ली. 110003
दिनांक 27 सितम्बर, 2011
आदेश 16(19)2011
उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 73 की उपधारा (2) अधीन, प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए,
केन्द्रीय सरकार, एतद् द्वारा यह निदेश देती है कि इस आदेश के संलग्नक में निर्दिष्ट प्रत्येक व्यक्ति, जो 09.11.2000 के ठीक
पहले विद्यमान उत्तर प्रदेश राज्य के क्रियाकलापों के सम्बन्ध में सेवा कर रहा हो, एवं उपर्युक्त अधिनियम की धारा 73 की उपधारा
(1) के अधीन, उत्तरवर्ती उत्तर प्रदेश राज्य या उत्तरांचल राज्य के क्रियाकलापों के सम्बन्ध में यथास्थिति, 09.11.2000 से ही
अनंतिम रुप से सेवा कर रहा हो, को, उत्तरवर्ती उत्तराखण्ड राज्य यथास्थिति, 09.11.2000 से सेवा के लिए अन्तिम रुप से
आबन्टित समझा जायेगा ।
परन्तु ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जिसने न्यायालय से अंतरिम स्थगन आदेश प्राप्त किया हो, उसका अंतिम आबंटन,
न्यायालय के स्थगन आदेश के रइद होने के बाद ही प्रभावी होगा अथवा जहाँ न्यायालय के द्वारा, इस सम्बन्ध में कोई निर्देश
दिया गया हो, ऐसे प्रत्येक व्यक्ति का आबंटन न्यायालय के अन्तिम आदेश के अधीन होगा ।
परन्तु ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जिसने न्यायालय से आबंटन से मुक्त रहने का स्थगन आदेश प्राप्त किया हो, को न्यायालय
के आदेश प्रभावी रहने तक आबन्टित नहीं समझा जायेगा ।
परन्तु संबंधित सेवा/पद के शेष बचे हुए कार्मिक जिनका अंतिम आबंटन उत्तरवर्ती उत्तरांचल राज्य के लिए नहीं किया
गया है तथा जो आदेश संख्या 27/9/2001-एस.आर.एस. दिनांक 11.9.2001 के द्वारा उत्तराखंड राज्य को आबंटित नहीं किए
गए हैं, उत्तरवर्ती उत्तर प्रदेश को अंतिम रुप से आबंटित समझे जायेगें जब तक कि नियमानुसार अन्यथा निर्णय नहीं लिया जाता ।
संलग्नक में निर्दिष्ट कार्मिकों का अंतिम आबंटन परामर्शी समिति की दिनांक 15.06.2011 को हुई बैठक की संस्तुतियों
पर आधारित है ।
(के. पी. के. मंगजन )
उप सचिव, भारत सरकार
संलग्नक: 1. अनुबंध ( 1 पृष्ठ में ) उत्तराखंड राज्य में अन्तिम रुप से गृह (पुलिस) विभाग के 13 कार्मिकों की सूची ।
प्रतिलिपि:
1. मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ ।
2. मुख्य सचिव, उत्तराखंड सरकार, देहरादून ।
3. श्री आर.एम. श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश पुनर्गठन समन्वय विभाग, लखनऊ ।
4. प्रमुख सचिव, उत्तराखंड पुनर्गठन समन्वय विभाग देहरादून ।विभाग | गृह विभाग
—|—
आवंटित राज्य | उत्तराखण्ड
—|—
काम(1) | कार्मिक का नाम एवं
परनाम तथा
TFAI | प्रत्यावेदन में उल्लिखित बिन्दु
1 | 2 | 3
1 | श्री अशोक कुमार,
मुख्य आतशी
288 | पानी मानसिक रोगी
1 | श्री अनिल कुमार
राय, आतशी, 801 | बैंसर रोग से पीड़ित आखित माता
2 | श्री सलाहउद्दरीन
खां, आतशी, 914 | बैंसर रोग से पीड़ित आखित माता
3 | श्री सुरजीत सिंह,
आतशी, 953 | मानसिक रोग से पीड़ित आखित पिता
4 | श्री उदय प्रताप
सिंह, आतशी
1015 | मा. न्यायालय से उत्तराखंड न जाने हेतु
स्थगमावेश प्राप्त
6 | श्री मनोज कुमार,
नातशी
2721 | गोली लगने से पैर पूर्ण रूप से कार्य नहीं करता
जिसके कारण चलने फिरने में कठिनाई
7 | श्री सर्वेश कुमार,
आतशी
2843 | दाहिने हाथ में गोली लगने के कारण हाथ पूर्ण
रूप से कार्य नहीं करता
8 | श्री तैजवीर सिंह,
आतशी
2895 | पानी क्षय एवं बैंसर रोग से पीड़ित
9 | श्री लालता सिंह,
आतशी
3144 | उत्तराखण्ड मूल निवासी, विकल्प नहीं,
कनियालय नहीं, स्वयं हृदय रोगी, इलाज
एस0जी0पी0 जी0आई0 में जारी
10 | श्री अब्दुल मन्नान
खां, आतशी
3213 | पानी शारीरिक एवं मानसिक रोग से पीड़ित
जिसका इलाज गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में जारी
सामिति की संस्तुति
4 | 5 | 6 | 7 || | | | |
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| 11 | श्री दूध नाथ सर्राज, आरक्षी 3685 | वृक्ष एवं बीमार माता.पिता, 08 पूर्वी पागलपन से ग्रसित, पत्नी स्वजनित रोग से पीड़ित एवं बीमार। | अस्थीकार करते हुए श्री अब्दुल मन्नान खां को उत्तराखण्ड राज्य आवंटित किये जाने संस्तुति की गई। बार-बार निर्देश देने के बाद भी श्री दूध नाथ सर्राज द्वारा राज्य चिकित्सा परिषद के समक्ष अपने आश्रित को उपस्थित न किये जाने के कारण समिति द्वारा श्री दूधनाथ सर्राज के प्रत्यावेदन को अस्थीकार करते हुये उत्तराखण्ड राज्य आवंटित किये जाने की संस्तुति की गई। |
| 12 | श्री अब्दुल सत्सार आरक्षी, 3742 | जनपद गाजियाबाद मूल निवासी/अविवाहित बहनों का उत्तरदायित्व/अस्वस्थ पत्नी/माता के ब्रेन हेनरेज का इलाज मेरठ में जारी। | बार-बार निर्देश देने के बाद भी श्री अब्दुल सत्सार द्वारा राज्य चिकित्सा परिषद के समक्ष अपनी माता को उपस्थित न किये जाने के कारण समिति द्वारा श्री अब्दुल मन्नान को प्रत्यावेदन को अस्थीकार करते हुये उत्तराखण्ड राज्य आवंटित किये जाने की संस्तुति की गई। |
| 13 | श्री शिवजीत बहादुर, आरक्षी 3805 | पत्नी का इलाज एसजीपीजीआई में जारी | बार-बार निर्देश देने के बाद भी श्री शिवजीत बहादुर द्वारा राज्य चिकित्सा परिषद के समक्ष पत्नी को उपस्थित न करने के कारण समिति द्वारा प्रत्यावेदन को अस्थीकार करते हुए श्री शिवजीत बहादुर को उत्तराखण्ड राज्य आवंटित किये जाने संस्तुति की गई। |