Central Civil Services (Leave) (Third Amendment) Rules, 2012

C

This document details amendments to the Central Civil Services (Leave) Rules, 1972, specifically concerning the definition of ‘child’ for leave purposes. It clarifies that a ‘child’ includes a minor adopted or legally considered a minor by a government servant, provided the child resides with the servant and is treated as a family member, and the servant has provided documentation granting the child the same status as a natural-born child. The amendments aim to provide clarity and inclusivity in leave applications related to childcare.

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REGD. NO. D.L.-33004/99

प्रारंभ की २००४ The Gazette of India

असाधारण

EXTRAORDINARY

भाग II—खण्ड 3—उप-खण्ड (i)

PART II—Section 3—Sub-section (i)

प्राधिकार से प्रकाशित

PUBLISHED BY AUTHORITY

सं. 161] नई दिल्ली, बुधवार, अप्रैल 4, 2012/देश 15, 1934

No. 161] NEW DELHI, WEDNESDAY, APRIL 4, 2012/CHAITRA 15, 1934

कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय

(कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग)

अधिसूचना

नई दिल्ली, 4 अप्रैल, 2012

सा.का.नि. 283(अ).—संविधान के अनुच्छेद 148 के खण्ड (5) के साथ पटित अनुच्छेद 309 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए और भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग में सेवारत व्यक्तियों के संबंध में भारत के नियंत्रक तथा महालेखा परीक्षक से परामर्श करने के बाद, राष्ट्रपति केन्द्रीय सिविल सेवा (छुट्टी) नियमावली, 1972 में और संशोधन करने के लिए एतद्वारा निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात् :—

  1. (1) इन नियमों को केन्द्रीय सिविल सेवा (छुट्टी) (तृतीय संशोधन) नियमावली, 2012 के नाम से जाना जाएगा । (2) ये सरकारी राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त होंगे ।
  2. केन्द्रीय सिविल सेवा (छुट्टी) नियमावली, 1972 (इसके बाद उपर्युक्त नियमावली के रूप में संदर्भित) में नियम 43-केक में, वर्तमान “नोट” की “नोट-1” के रूप में-संख्यांकित किया जाएगा और इस तरह पुनः संख्यांकित नोट-1 के बाद, निम्नलिखित नोट शामिल किया जाएगा; अर्थात् :—

‘नोट 2 :- इस नियम के प्रयोजन के लिए “बच्चा” में किसी सरकारी सेवक द्वारा अभिभावक और अवयस्क अधिनियम, 1890 अथवा उस सरकारी सेवक पर लागू स्वीय विधि के अंतर्गत अवयस्क के रूप में लिया गया बच्चा शामिल होगा, बशर्ते ऐसा अवयस्क सरकारी सेवक के साथ निवास करता हो और परिवार के सदस्य के रूप में गिना जाता हो और बशर्ते ऐसे सरकारी सेवक ने, दिव्यापत्र के माध्यम से, उस अवयस्क को वही दर्जा प्रदान किया है जैसा कि प्राकृतिक रूप से जन्मे बच्चे का होता है’।

  1. उपर्युक्त नियमावली में, नियम 43-ख में, निम्नलिखित नोट शामिल किया जाएगा, अर्थात् :—

‘नोट :- इस नियम के प्रयोजन के लिए “बच्चा” में किसी सरकारी सेवक द्वारा अभिभावक और अवयस्क अधिनियम, 1890 अथवा उस सरकारी सेवक पर लागू स्वीय विधि के अंतर्गत अवयस्क के रूप में लिया गया बच्चा


शामिल होगा, बशर्ते ऐसा अवयस्क सरकारी सेवक के साथ निवास करता हो और परिवार के सदस्य के रूप में गिना जाता हो और बशर्ते ऐसे सरकारी सेवक ने, दित्सापत्र के माध्यम से, उस अवयस्क को वही दर्जा प्रदान किया है जैसा कि प्राकृतिक रूप से जन्मे बच्चे का होता है’।
[फा. सं. 13026/5/2011-स्था.(छुट्टी)]
ममता कुन्द्रा, संयुक्त सचिव
नोट : मूल नियम दिनांक 8 अप्रैल, 1972 की अधिसूचना सं. का.आ. 940 के तहत प्रकाशित कर दिए गए थे और उनमें अंतिम संशोधन अधिसूचना सं. सा.का.नि. 261 (अ) दिनांक 29 मार्च, 2012 के तहत किया गया था।