Central Administrative Tribunal (Procedure) Rules, 1987

C

The Central Administrative Tribunal (Procedure) Rules, 1987, detail the procedures for filing applications, definitions of key terms, language of the Tribunal, and various other procedural aspects. The rules cover aspects like the process of filing applications, including the required forms and fees, the roles and responsibilities of the Registrar, the timeline for submitting responses, and the procedures for hearings and decisions. It also outlines guidelines for the conduct of legal practitioners and the general functioning of the Tribunal. The document specifies the fee structure for applications, the process for serving notices, and the conditions under which applications can be heard ex-parte. It also addresses the substitution of legal representatives in case of a party’s death and the procedure for review of orders. The rules also define the working hours of the Tribunal and the dress code for members and staff. Furthermore, it details the process for registration of clerks employed by legal practitioners and the procedure for obtaining copies of documents.

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असा धारया EXTRAORDINARY

भाग II—खण्ड ३—उप-खण्ड (i)
PART II-Section 3-Sub-section (i)
प्राधिकरण से प्रकाशित
PUBLISHED BY AUTHORITY

सं० 14]
No. 14]
नई दिल्ली, मंगलवार, जनवरी 6, 1987/पोच 16, 1908
NEW DFLHI, TUESDAY, JANUARY 6, 1987/PAUSA 16, 1908

इस भाग में भिन्न पृष्ठ संहया दी जाती है जिससे कि यह अलग संकलन के रूप में रखा जा सके

Separate Paging is given to this Part in order that it may be filed as a separate compilation

कामिक, लोक निज्ञायत तथा पेंशन मंत्रालय
(कामिक और प्रजिज्ञाण विभाग)
नई दिल्ली, 6 जनवरी, 1987
श्रधिधूषना
सा. का. नि. 17 (अ) :- केन्द्रीय सरकार, प्रशासनिक

  • श्रधिकरण श्रधिनियम, 1985 (1985 का 13) की धारा 35 की उपधारा (2) के खंड (घ), (ड) और (च) तथा धारा 36 के खंड (ग) द्वारा प्रदत्त मक्तियों का प्रयोग करते हुए और प्रशासनिक श्रधिकरण (कार्यविधि) नियमावली, 1985 को उन बातों के सिद्दीय श्रधिकान्त करते हुए, जिन्हें ऐसे श्रधिक्रमण से पहले किया गया है या करने का लोप किया गया है, निम्नलिखित नियम बनाती है श्रवति :-
    (1) संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ :- (1) इन नियमों का नाम केन्द्रीय प्रशासनिक श्रधिकरण (कार्यविधि) नियमावली, 1987 है ;
    $1419 \mathrm{GI} / 86-1$
    (2) में नियम 15 जनवरी, 1987 से प्रबृत्त होंगे ।
  1. परिभाषाएं :- इन नियमों में जब तक कि संदर्भ में श्रवषा श्रपेक्षित न हो :
    (क) “श्रधिनियम” से प्रशासनिक श्रधिकरण श्रधिनियम 1985 (1985 का 13) श्रभित्रेत है ;
    (ख) “श्रभिकर्ता” से किसी पक्षकार द्वारा श्रपनी और से श्रधिकरण के समक्ष श्रावेदन या लिखित उत्तर प्रस्तुत करने के लिए सम्यक रूप से प्राधिकृत किया गया कोई व्यक्ति श्रभित्रेत है :
    (ग) “श्रावेदक” से धारा 19 के श्रर्षान श्रधिकरण की श्रावेदन करने वाला कोई व्यक्ति श्रभित्रेत है ;
    (घ) “प्रपत्र से परिशिष्ट “क” में निर्दिष्ट प्रपत्र श्रभित्रेत है ;
    (ङ) ‘विधि ब्यवतावी’ का वहाँ श्रर्य होगा जो उसका श्रधिवक्ता श्रधिनियम, 1961 (1961 का 25) में है।

(ब) “विविध ततितीय” से सृपक के तपश का कानून। तोर पर प्रतिनिधित्व करने वाला व्यक्ति अभिप्रेत है :
(छ) बधिकरण के संदर्भ में “रजिस्ट्रार” उस रजिस्ट्रार मे अभिप्रेत है जिसे प्रधान न्यायपंठ में नियुक्त किया गया हू। और बधिकरण का धन्य न्यायपंठों के संदर्भ में प्रत्येक न्यायपंठ से सम्बद्ध ऐसा रजिस्ट्रार अभिप्रेत है जिसे न्यायपंठ विशेष में नियुक्त किया गया हू। और इसके अंतर्गत ऐसा कोई बधिकारा भी है जिसकी नियम 28 की धारा (2) और (3) के सक्षम रजिस्ट्रार का अक्तियों और कृत्य प्रत्यायोजित किए जाए :
(अ) “रजिस्ट्री” मे स्थिति अनुसार बधिकरण को सबवा बधिकरण को न्यायपंठ की रजिस्ट्री अभिप्रेत है :
(स) “धारा” मे सधिनियम की धारा अभिप्रेत है :
(ब) “सन्तरित सावेदन” मे ऐसा बाद प्रा धन्य कार्यवाही अभिप्रेत है जो धारा 29 की उपधारा (1) सबवा उपधारा (2) के सक्षम बधिकरण की सन्तरित की गई है :
(ट) “बधिकरण” मे सधिनियम की धारा 4 की उपधारा (1) के अंतर्गत स्थापित केन्द्रीय प्रभामनिक बधिकरण अभिप्रेत है :
(ट) इसमें जिन शब्दों एवं अभिव्यक्तियों का इस्तेमाल तो किया गया है किन्तु जिन्हें उन नियमों में परिभाषित नहीं किया गया किन्तु जिन की परिभाषाएं सधिनियम में दी गई है उनका कमज: बह। अर्थ होगा जो कि सधिनियम में उन्हें दिया गया है।
3. बधिकरण को भाषा : बधिकरण की भाषा अंग्रेजी होगी;

परन्तु बधिकरण के समक्ष किसी कार्यवाही के पक्षकार यदि ऐसा चाहें तो हिन्दी में तैयार का गई दस्तावेज़ भी फाइल कर सकेगें:

परन्तु यह और कि न्यायपंठ अपने विवेकानुसार कार्यवाहियों में हिन्दी का प्रयोग सनुहात कर सकेगें किन्तु अंतिम आदेश अंग्रेजों में हत्या:
(ख) मामले की सुनवाई करने वाली न्यायपंठ अपने विवेकानुसार, पेश का जाने वाली दलीलों और दायर किए जाने वाले दस्तावेजों का सीधे हू! अंग्रेजों सनुवाद करने का आदेश दे सकता है।
4. सावेदन फाइल करने की प्रकिया :- (1) बधिकरण की सावेदन सावेदक द्वारा व्यक्तिगत रूप मे या किसी अभिकर्ता द्वारा या मच्यकत: प्राधिकृत सधिवक्ता द्वारा रजिस्ट्रार की सबवा सावेदन पत्र प्राप्त करने के लिए रजिस्ट्रार द्वारा लिखित रूप में प्राधिकृत किसी अन्य बधिकारों की प्रबन्ध-1 में प्रस्तुत किया जाएगा या रसोठी रजिस्ट्री डाक

द्वारा सम्बन्धित न्यायपंठ के रजिस्ट्रार की संबन्धित करने भेजा जाएगा:
(2) उप-नियम (1) के सक्षम सावेदन फाइल के साकार के एक कोरे निफाफे के साथ जिन पर प्रत्यर्थी का पूरा पता हू! एक सभिलेख पुस्तिका प्रबन्ध में तीन पूर्ण मेढों में प्रस्तुत किया जाएगा।
(3) जहाँ प्रत्यार्थियों की संख्या एक से अधिक है, वहाँ सावेदक द्वारा फाइल के साकार में सांध्यत संख्या में कोरे निफाफों के साथ जिन पर प्रत्येक प्रत्यर्थी का पूर्ण पता हत्या, प्रत्यार्थियों की संख्या के बराबर सभिलेख पुस्तिका प्रबन्ध में सावेदन पत्र की अतिरिक्त प्रतियां प्रस्तुत की जाएंगी।

परन्तु जहाँ प्रत्यार्थियों की संख्या पांच से अधिक हो वहाँ रजिस्ट्रार प्रत्यार्थियों की नोटिस जारी करते समय सावेदक की सावेदन की अतिरिक्त प्रतियां दायर करने की अनुमति दे सकता है।
(4) सावेदक अपने सावेदन े साथ प्रबन्ध II में एक रसोढी पर्ची संलग्न करेगा तथा प्रस्तुत करेगा जिस पर सावेदन पत्र की प्राप्ति की पावतों के रूप में रजिस्ट्रार द्वारा सबवा रजिस्ट्रार की ओर से सावेदन पत्र प्राप्त करने वाले बधिकारों द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे।
(5) (क) उपनियम (1) में (3) में दी गई किसी बात के बावजूद बधिकरण एक से अधिक व्यक्तित्त्रों की निःश्कर एक संयुक्त सावेदन पत्र दायर करने की अनुमति दे सकता है बशर्ते कि बाद के हेतुक तथा प्राधित राहत के स्वरूप की ध्यान में रखते हुए बधिकरण इस बात से संतुष्ट हो कि मामले में उनका समान हित है।
(ख) ऐसी अनुमति एक ही सावेदन पत्र में शामिल होने के इच्छुक व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व करने वाली एसोसिएशन की भी दी जा सकती है किन्तु शर्त यह है कि सावेदन पत्र में ऐसे सभी व्यक्तियों के बधेपेशे मेढ दिए जाएंगे, जिससे ओर से यह दायर किया गया है।
5. सावेदनों का प्रस्तुत किया ज्ञाना और उनको संबंध्ता:-
(1) रजिस्ट्रार या उसके द्वारा नियम 4 के सक्षम प्राधिकृत बधिकारा, प्रत्येक सावेदन पर वह तार,ख पृथ्टाकित करेगा जिसकी वह उस नियम के सक्षम प्रस्तुत का गई है या प्रस्तुत क. गई समक्ष। गई है और उस पृथ्टाकन पर हस्ताक्षर करेगा।
(2) यदि संबंध्ता पर सावेदन कयानुसार पाया जाता है तो वह सम्भवतः रजिस्ट्रीकृत किया जाएगा और उसे कम संक्यांक दिया जाएगा ।
(3) यदि संबंध्ता पर आवेदन जुटिपूर्ण पाया जाता है और दृष्टिगत जुटि प्ररपित प्रकृति की है, तो रजिस्टर सपनो


वर्षस्थिति में उस सूटि का परिशोधन करने के लिए पक्षकार की अनुज्ञात कर सकेगा और यदि उक्त सूटि प्रक्षेपित प्रकृति को नहीं है तो रजिस्ट्रार सूटि का परिशोधन करने के लिए ध्रावेदन को ऐसा समय अनुज्ञाय कर सकेगा जो यह ठोक समझे।
(4) यदि सम्बद्ध ध्रावेदक उपनियम (3) के अधीन अनुज्ञात समय के भीतर सूटि का परिशोधन करने में असफल रहता है तो रजिस्ट्रार ऐसे कारणों मे जिन्हें लेखबद्ध किया जाएगा, ध्रादेश द्वारा ध्रावेदन को रजिस्टर करने मे इंकार कर सकेगा और ध्रावेदक को तदनुसार सूचित कर देगा।
(5) उपनियम (4) के अधीन पारित किसी ध्रादेश के विरुद्ध सर्पील व्यथित व्यक्ति द्वारा, ऐसे ध्रादेश की तारीख से 15 दिन के भीतर प्रधान न्यायपीठ के मामले में अध्यक्ष को, और किसी अन्य न्यायपीठ के मामले में संबंधित उपाध्यक्ष को की जाएगी ; तथा

ऐसी सर्पील पर संबंधित अध्यक्ष सभवा उपाध्यक्ष द्वारा सभवा उसकी अनुपस्थिति में अध्यक्ष द्वारा किसी विशेष सभवा सामान्य ध्रादेश के माध्यम से प्राधिकृत किसी सदस्य द्वारा, चैम्बर में ही कार्रवाई की जा सकती है तथा उसका निवडान किया जा सकता है, और उस सर्पील पर उसका निर्णय सन्तिम होगा ।
6. ध्रावेदन फाइल करने का स्थान :–ध्रावेदक द्वारा सामान्यतः स्रावेदन उस न्यायपीठ के रजिस्ट्रार के पास दायर की जाएगी जिसके क्षेत्राधिकार में (i) स्रावेदक फिलहाल तैनात है: सभवा (ii) कार्रवाई का हेतुक पैदा हुआ है: सभवा (iii) सामान्यतः प्रत्यर्थी सभवा प्रत्यथियों में से कोई, जिनमे राहत मांगें। गई है, रहता है।

परन्तु मर्त यह है कि ऐसा स्रावेदन स्रधिनियम की धारा 25 के स्रथाधीन प्रधान न्यायपीठ के रजिस्ट्रार के यहां दायर किया जा सकता है ऐसे स्रावेदन पर सुनवाई तथा उसका निवडान उस न्यायपीठ द्वारा की जाएगी/किया जाएगा जिसके क्षेत्राधिकार में यह मामला आता है ।
7. स्रावेदन फीस : रजिस्ट्रार के पास फाइल किए गए प्रत्येक स्रावेदन के साथ 50 रुपये की फीस संलग्न की जाएगी और फीस संबंधित न्यायपीठ के रजिस्ट्रार के पक्ष में किसी राष्ट्रीयकृत बैंक पर लिखे और उस स्टेशन पर बैंक की प्रमुख शाखा में देय, जहां न्यायपीठ स्थित है, काम मांगदेव ड्राफ्ट मे प्ररूप में प्रेषित की जाएगी या संबंधित न्यायपीठ के रजिस्ट्रार के पक्ष में लिखे और उस स्टेशन के डाकघर में, जहां कि उक्त न्यायपीठ सवस्थित है, देय काम भारतीय पोस्टल सादर के द्वारा प्रेषित की जाएगी ।

परन्तु जहां स्रधिकरण या तो एक से स्रधिक व्यक्तियों द्वारा सभवा किसी गत्तनिग्रहणन द्वारा एक ही स्रावेदन पक्ष दायर करने की अनुमति देता है तो देय फीस पचास रुपये होगी ।

परन्तु सारी जहां स्रधिकरण इस बात से सम्पुष्ट हो जारा है कि आवेदक निर्धनता के आधार पर निर्धारित शुल्क का भुगतान करने में सममर्थ है तो अधिकरण ऐसे स्रावेदक की शुल्क के भुगतान की छूट दे सकता है ।
8. स्रावेदन पक्ष की विषय-वस्तु :
(1) नियम 4 के स्रधीन फाइल किए गए प्रत्येक स्रावेदन में सृभिस मर्दों के स्रधीन संक्षिप्ततः ऐसे स्रावेदन के स्राधारों को उपवणित किया जाएगा। ऐसे स्राधार कमरा: संख्यांकित किए जाएंगे । किसी भी प्रकीर्ण स्रावेदन सहित, प्रत्येक आवेदन, सच्चे किस्म के मोटे कागज के एक तरफ दोहरी लाइनों में इंकित किए जाएंगे ।
(2) सन्तरिम स्रादेश या निर्देश मांगने के लिए पृथक स्रावेदन प्रस्तुत करना स्रावल्यक नहीं होगा यदि मूल स्रावेदन में अंतरिम स्रादेश या निर्देश मांगने का निवेदन किया गया है ।
(3) कोई स्रावेदक स्रधिनियम की धारा 19 के स्रधीन स्रावेदन पक्ष दायर करने के बाद सन्तरिम स्रादेश सभवा निर्देश के लिए स्रावेदन कर सकता है । ऐसा स्रावेदन पक्ष यथासंभव प्ररूप-III में होगा ।
9. स्रावेदन के साथ भेजे जाने वाले दस्तावेज :-(1) प्रत्येक स्रावेदन के मात्र एक सभित्तेख पुस्तिका संलग्न होगी जिसमें निम्नलिखित होंगे :-
(i) उस स्रादेश की प्रमाणित प्रति जिसके विरुद्ध स्रावेदन फाइल किया गया है;
(ii) ऐसे सभी दस्तावेजों की प्रतियां जिनका स्रावेदक द्वारा सवर्त्तव लिया गया है और जिनका स्रावेदन में उल्लेख किया गया है; और
(iii) दस्तावेजों की सनुक्रमाणिका ।
(2) उपनियम (1) में निर्दिष्ट दस्तावेजों को किसी विधि व्यवसायी द्वारा सभवा राजपत्रित स्रधिकारी द्वारा सनुक्रमाणित किया जाएगा तथा प्रत्येक दस्तावेज को सनुबन्ध क-1, क-2, क-3, तथा सारी भी इसी ढंग से कमबद्ध रूप में अंकित किया जाएगा ।
(3) जहां आवेदन पक्ष किसी स्रभिकर्ता द्वारा दायर किया जा रहा हो, वहां ऐसे स्रभिकर्ता को प्राधिकृत करने वाले दस्तावेज की भी स्रावेदन के साथ संलग्न किया जाएगा :

परन्तु जहां स्रावेदन किसी विधि व्यवसायी द्वारा दायर किया गया है तो इसके साथ मख्वद्ध रूप से निष्पादित “वकालतनामा” होगा ।
10. अनेक उपचार :–स्रावेदन कार्यवाही के उद्देश्य पर स्राधारित होगा और उसमें एक या एक से स्रधिक सनुतीकों की मांग की जा सकेगी वसर्ते कि स्राधित सनुतीय एक दूसरे के परिशाभिक हो :


  1. स्रधिकरण द्वारा जारी किए गए नोटिस तथा स्रदेशिकाओं का तामिल करना :-
    (1) स्रधिकरण द्वारा जारी किए जाने वाला कोई भी नोटिस स्रधवा स्रादेशिक निम्नलिखित विधियों में किसी एक द्वारा तामील की जाए :-
    (i) पार्टी द्वारा स्वयं तामील ;
    (ii) बाद तामील करने वाले के माध्यम से दस्ती ;
    (iii) रसीदो रजिस्ट्री ढाक द्वारा; स्रधवा
    (iv) ऊपर उल्लिखित किसी भी विधि से संबंधित विभागाध्यक्ष के माध्यम से ।
    (2) जहां स्रधिकरण द्वारा जारी किया गया नोटिस पार्टी द्वारा स्वयं दस्ती रूप से तामील किया जाता है, वहां वह (स्रावेदक) तामील किए जाने से संबंधित हलफगामे के साथ धावती स्रधिकरण की रजिस्ट्री में दायर करेगा ।
    (3) उप नियम (1) में दी गई किसी बात के बावजूद भी स्रधिकरण प्रत्यथियों की संख्या तथा उनके निवास स्थानों स्रधवा कार्यालय स्थलों तथा सत्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निदेश दे सकता है कि प्रत्यथियों पर स्रावेदन पत्र का नोटिस प्रतिस्थापित तामील की रीति सहित किसी सत्य रीति से तामील किया जाएगा जो स्रधिकरण को उचित तथा सुविधाजनक प्रतीत होगा ।
    (4) उप-नियम (1) में दी गई किसी बात के बावजूद भी स्रधिकरण मामले के स्वरूप तथा सत्यावश्यकता को ध्यान में रखते हुए अपने विवेक पर केन्द्रीय सरकार स्रधवा केन्द्रीय सरकार के किसी विभाग द्वारा नियुक्त स्थायी वकीलों की नोटिस की तामील का निदेश ।
    (5) स्रधिकरण द्वारा जारी किए गए प्रत्येक नोटिस के साथ जब तक स्रय्यथा स्रादेश न हो स्रभिलेख पुस्तिका के साथ स्रावेदन पत्र की एक प्रति होगी ।
    (6) प्रत्येक स्रावेदक ऐसे किसी स्रावेदन पत्र के बारे में जहां प्रत्याथियों की संख्या पांच से स्रधिक हो स्रादेशिकाएं तामील तथा निष्पादित किए जाने के लिए निम्नलिखित फीस देगा :-
    (i) पांच से स्रधिक प्रत्यर्थी होने पर प्रत्येक प्रत्यर्थी के लिए पांच रुपए; स्रधवा
    (ii) जबकि तामील ऐसी रीति से किया गया है जैसा कि उप-नियम (3) के स्रघ्रोन स्रधिकरण ने निदेश किया था तो ऐसी राशि जो तामील करने में वास्तव में व्यय हुई हो और स्रधिकरण द्वारा निर्धारित की गई हो ।
    (7) उप-नियम (3) के स्रघ्रोन स्रादेशिकाएं तामील करने स्रधवा निष्पादित करने के लिए फीस, फीस निर्धारित करने के स्रादेश की तारीख से एक सप्ताह के भीतर स्रधवा रजिस्ट्रार द्वारा सनुमत बढ़ाए गए समय के भीतर नियम 7 में निर्धारित किए गए तरीके से जमा कराई जाएगी ।
    (8) उप नियम (1) से (4) में दी गई किसी बात के होते हुए भी यदि स्रधिकरण इस बात से संतुष्ट हो जाता है कि स्रावेदन का नोटिस सभी प्रत्याथियों पर तामील करना समुचित रूप से व्यवहार्य नहीं है तो वह लिखित किए जाने वाले कारणों से यह निदेश दे सकता है कि स्रावेदन पत्र पर सुनवाई इस बात पर ध्यान दिए बिना की जाएगी कि कुछ प्रत्यथियों को स्रावेदन पत्र का नोटिस तामील नहीं किया गया है-
    बशर्ते कि किसी भी स्रावेदन पत्र पर सुनवाई तब तक नहीं होगी जब तक कि-
    (i) स्रावेदन पत्र का नोटिस केन्द्रीय सरकार स्रधवा राज्य सरकार पर तामील किया गया हो यदि उक्त सरकार एक प्रत्यर्थी हो;
    (ii) स्रावेदन पत्र का नोटिस उस प्राधिकारी पर तामील कर दिया गया है जिसने यह स्रादेश पास किया था जिसके विरुद्ध स्रावेदन पत्र दायर किया गया है; स्रयवा
    (iii) स्रधिकरण इस बात से संतुष्ट है कि जिन प्रत्यथियों पर स्रावेदन पत्र का नोटिस तामील नहीं किया गया है उनके हितों का उन प्रत्यथियों द्वारा जिन पर स्रावेदन पत्र का नोटिस तामील किया गया है, पर्याप्त रूप से प्रतिनिधित्व होता है ।
  2. प्रत्यर्थी द्वारा उत्तर और अन्य दस्तावेजों का फाइल किया जाना:-
    (1) प्रत्येक प्रत्यर्थी जो स्रावेदन का प्रतिबाद करना चाहता है उस पर स्रावेदन का नोटिस तामील किए जाने की तारीख के एक मास के भीतर वह रजिस्ट्रार को स्रावेदन पत्र का उत्तर देते हुए स्रभिलेख पुस्तिका के प्रश्न में स्रावेदन के उत्तर की तीन प्रतियां तथा ऐसे दस्तावेज भी दायर करेगा जिनका उसने स्रबलंब लिया है ।
    (2) उप-नियम (1) के स्रघ्रोन दायर स्रावेदन के उत्तर में प्रत्यर्थी स्रावेदक द्वारा अपने स्रावेदन पत्र में दिए गए तथ्यों को विशिष्ट रूप से स्वीकार करेगा, इंकार करेगा स्रधवा स्पष्टीकरण देगा तथा मामले पर यथेचित निर्णय लिए जाने के लिए सावश्यक समझे जाने वाले सतिरिक्त तथ्यों का उल्लेख भी करेगा। इस पर प्रत्यर्थी द्वारा या मिथित प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के नियम 15 के स्रादेश VI में वर्णित इन ने उनके द्वारा लिखित रूप में बकायदा प्राधिकृत किए गए सभी किसी सत्य व्यक्ति

[बाल II—श्रव्व 3 (i)]

भारत का राजपत्र : तथा प्रारूप

‘द्वारा हस्ताक्षरित और लिखित बयान के रूप में धनुप्रमाणित किया जाएगा ।

(3) उप-नियम (2) में उल्लिखित दस्तावेज भी उत्तर के साथ दायर किए जाएंगे तथा इन्हें चार 1, चार 2, चार 3 (और धागे इसी प्रकार) अंकित किया जाएगा ।

(4) प्रत्यर्थी उप-नियम (1) में यथा वणित दस्तावेजों के साथ उत्तर की एक प्रति आवेदक पर अथवा उसके विधि व्यवसायी पर, यदि कोई हो, तामील करेगा और ऐसी तामील का प्रमाण रजिस्ट्री में दायर करेगा ।

(5) अधिकरण निर्धारित ध्रवध्रि की समाप्ति के पश्चात् उत्तर दायर करने की अनुमति दे सकता है ।

  1. सुनवाई की तारीख और समय का अधिसूचित किया जाना :—अधिकरण पक्षकारों को अध्यक्ष द्वारा सामान्य श्रव्वा विशेष आदेश द्वारा यथानिदिष्ट तरीके से आवेदन की सुनवाई की तारीख तथा स्थान की सूचना देगा ।

  2. मामलों का कर्लेस्टर :—

(1) प्रत्येक न्यायपोठ स्थानान्तरित आवेदन पत्रों की सुनवाई के लिए एक कर्लेस्टर तैयार करेगा और यथासंभव मामलों की सुनवाई तथा निर्णय कर्लेस्टर के अनुसार करेगा ।

(2) प्रत्येक आवेदन पत्र को सुनवाई तथा निर्णय यथासम्भव इसके प्रस्तुत किए जाने के छ. पास के भीतर कर लिया जाएगा ।

(3) अधिकरण को यह अधिकार है कि वह किसी स्थगन के लिए मना कर दे और जबानी दलीलों के लिए समय सीमित कर दे ।

  1. आवेदक के व्यतिक्रम के कारण आवेदन पर कार्रवाई :—(1) जहां आवेदन की सुनवाई के लिए नियत तारीख को या किसी अन्य तारीख को जिसके लिए ऐसी सुनवाई स्थगित की गई हो आवेदन पर सुनवाई के लिए पुकार होने पर आवेदक हाजिर नहीं होता है वहां अधिकरण अपने विवेकानुसार या तो व्यतिक्रम के कारण आवेदन को खारिज कर सकेगा या उसकी सुनवाई करके गुणावरण के आधार पर इसका विनिरीक्षक कर सकेगा ।

(2) जहां आवेदन व्यतिक्रम के कारण खारिज कर दिया जाता है तथा आवेदक खारिज होने की तारीख के तीस दिन के भीतर एक आवेदन पत्र दायर करता है तथा अधिकरण का यह समाधान कर देता है कि उसकी उस समय गैर-हाजिरी का पर्याप्त कारण या जब आवेदन की सुनवाई के लिए पुकार हुई थी, वहां अधिकरण आवेदन को खारिज करने वाले आदेश को अपार्टमेंट करने वाला एक आदेश करेगा और उसे बहाल करेगा :

किन्तु, शर्त यह है कि जहां मामले का उसके गुणावरण के आधार पर निर्णय कर दिया गया था वहां पुनरीक्षा को छोड़कर निर्णय पर पुनः विचार नहीं होगा ।

  1. आवेदन की एकपक्षीय सुनवाई तथा निर्णय :—

(1) जहां आवेदन की सुनवाई के लिए नियत तारीख को या किसी अन्य तारीख को जिसको सुनवाई स्थगित कर दी गई है, आवेदन की सुनवाई के लिए पुकार होने पर यदि आवेदक हाजिर होता है और प्रत्यर्थी हाजिर नहीं होता है तो ऐसी स्थिति में अधिकरण अपने विवेकानुसार आवेदन को स्थगित कर सकेगा या उसकी एकतरफा सुनवाई कर सकेगा और आवेदन का विनिरीक्षक कर सकेगा ।

(2) जहां किसी प्रत्यर्थी श्रव्वा प्रत्यथियों के विरुद्ध आवेदन पत्र की सुनवाई एकतरफा हुई हो तो ऐसा/ऐसे प्रत्यर्थी आदेश को निरस्त करने के लिए अधिकरण से निवेदन कर सकते हैं और यदि ऐसा/ऐसे प्रत्यर्थी अधिकरण की यह संतुष्टि कर देता है/देते हैं कि नोटिस विधिवत् तामील नहीं किया गया था श्रव्वा वह/वे आवेदन की सुनवाई के समय पुकार होने पर पर्याप्त कारणों से हाजिर नहीं हो सके थे तो अधिकरण उसके/उनके विरुद्ध एकपक्षीय सुनवाई को निरस्त करने से संबंधित एक आदेश ऐसी शर्तों पर कर सकेगा जो वह उचित समझे और आवेदन पर धागे कार्रवाई के लिए कोई अन्य दिन नियत कर सकेगा :

किन्तु शर्त यह है कि जहां आवेदन पर एक तरफा सुनवाई की प्रकृति ऐसी है कि उसे केवल एक प्रत्यर्थी के सन्दर्भ में निरस्त नहीं किया जा सकता, वहां उसे सभी या अन्य प्रत्यथियों में से किसी एक के सन्दर्भ में भी निरस्त किया जा सकता है ।

धागे यह भी शर्त है कि नियम 11 के उपनियम (5) के अधीन धागे वाले मामलों में अधिकरण किसी आवेदन की एक पक्षीय सुनवाई केवल इसी आधार पर निरस्त नहीं करेगा कि इसे प्रत्यर्थी श्रव्वा प्रत्यथियों पर तामील नहीं किया गया था ।

  1. पुनरावलोकन के लिए आवेदन का 30 दिन के भीतर फाइल किया जाना :—पुनरावलोकन के लिए किसी भी आवेदन पर तब तक विचार नहीं किया जायेगा जब तक कि वह जिस आदेश के विरुद्ध पुनरावलोकन की मांग की गई है उस आदेश की तारीख के 30 दिन के भीतर दायर नहीं किया गया हो ।

  2. विधिक प्रतिनिधियों का बदला जाना :—(1) अधिकरण में कार्यवाहियों के लम्बित रहने के दौरान किसी पक्षकार की मृत्यु हो जाने की स्थिति में मृत पक्षकार के विधिक प्रतिनिधि ऐसी मृत्यु के 30 दिन के भीतर अनिवार्य पक्षकारों के रूप में रिकार्ड किये जाने के लिए आवेदन कर सकते हैं ।

(2) जहां विधिक प्रतिनिधियों से उप नियम (1) में निर्धारित ध्रवध्रि के भीतर कोई आवेदन प्राप्त नहीं होता है वहां मृत पक्षकार के विरुद्ध कार्यवाहियों उपशर्मा हो जाएंगी :

किन्तु पर्याप्त और सक्षम कारणों से रहते हुए अधिकरण, आवेदन फाइल किये जाने की स्थिति में उपशर्मन का आदेश


विरस्त कर सकेगा और विधिक प्रतिनिधियों को प्रतिस्थापित कर सकेगा।
19. सुनवाई स्वगित किया जाना :-यदि सुनवाई के दौरान पर्याप्त कारण बताये जाएं तो अधिकरण आवेदन के आधार पर पक्षकारों को या उनमें से किसी एक को समय दे सकता है। अधिकरण ऐसा आदेश दे सकता है जो कि वह स्वगन के कारण होने वाले खर्च के सन्दर्भ में उचित समस्रता हो ।
20. आदेश पर हस्ताक्षर किया जाना और उस पर तारीख डालना :-प्रत्येक आदेश लिखित रूप से होगा और उस पर आदेश सुनाने वाली न्यायपीठ का गठन करने वाले मदस्य ध्रववा सदस्यों द्वारा हस्ताक्षर किये जाएंगे।
21. आदेशों का प्रकाशन :-यदि अधिकरण के किसी आदेश को किसी प्राधिकृत रिपोर्ट या प्रेस में प्रकाशन लिए ठीक समक्षा जाए तो ऐसे निवन्धनों और शर्तों पर जहां अधिकरण किसी सामान्य या विशेष आदेश द्वारा निर्दिष्ट करे, ऐसे प्रकाशन के लिए निर्भुक्त किया जा सकेगा।
22. आदेशों का पक्षकारों को संयुक्ति किया जाना :(1) घन्तरिम राहत स्वीकार करने वाले यो ध्रस्वीकार करने वाले या संशोधित करने वाले प्रत्येक धनंतिम आदेश तथा किसी आवेदन पर पारित धन्तिम आदेश आवेदक को और संबंधित प्रत्यर्थी को या तो दस्ती या रजिस्ट्री डाक द्वारा नि:शुल्क संयुक्ति किया जाएगा।
(2) यदि कोई आवेदक या किसी कार्यवाही के प्रत्यर्थी को किसी दस्तावेज या किसी कार्यवाही की उपलब्धि की आवश्यकता हो तो उसे उक्त परिलक्षि ध्रध्यक्ष द्वारा किसी सामान्य ध्रववा विशेष आदेश द्वारा निर्धारित फीस को की ध्रवावरी करने पर तथा ध्रध्यक्ष द्वारा उल्लिखित निर्बंधनों और शर्तों पर दे दी जाएगी।
23. ध्रधिलेखों का निरीक्षण :- (1) रजिस्ट्रार को लिखित रूप में आवेदन किए जाने पर किसी मामले के पक्षकारों ध्रववा उनके वकील को मामले के ध्रधिलेखों को निरीक्षण करने की अनुमति दी जाए।
(2) ऐसी शर्तों के ध्रध्यक्षेन जो कि ध्रध्यक्ष द्वारा किसी सामान्य ध्रववा विशेष आदेश द्वारा निर्धारित की जा सकती है, किसी ऐसे ब्वक्ति की भी, जो कार्यवाही का पक्षकार न हो, रजिस्ट्रार से लिखित रूप में अनुमति प्राप्त करने के पश्चात् कार्यवाहियों का निरीक्षण करने के लिये अनुमति दी जाये ।
24. कुछ मामलों में आदेश और निर्देश :-अधिकरण ऐसे आदेश कर सकेगा या ऐसे निर्देश दे सकेगा जो उसके आदेशों को प्रभावी बनाने के लिये या उनके संबंध में या उसकी प्रादेशिका के वृत्तपयोग के निवारण के लिये या न्याय के उद्देश्यों को सुदिक्तित करने के लिये ध्रात्स्यक या समोभोग हो।
25. विधि व्यवसायी के लिपिक का रजिस्ट्रीकरण :-
(1) किसी विधि व्यवसायी द्वारा नियोजित कोई ऐसा लिपिक तब तक उस अधिकरण के, जिसमें विधि व्यवसायी सामान्यतः विधि-व्यवसाय करता है, आदेशों के ध्रधिलेख की पहुंच रखने और अधिकरण की न्यायपीठ के आदेशों की प्रतियां ध्रधिप्राप्त करने के लिये अनुज्ञात नहीं होगा जब तक कि उनका नाम उक्त न्यायपीठ द्वारा रखे गये लिपिकों के रजिस्टर में प्रविष्ट न हो । ऐसा लिपिक “रजिस्ट्रीकृत लिपिक” के रूप में जाना जायेगा।
(2) वह विधि-व्यवसायी जो अपने लिपिक का रजिस्ट्रीकरण कराने का इच्छुक है, फार्म-IV में रजिस्ट्रार को आवेदन करेगा । रजिस्ट्रार द्वारा ऐसे आवेदन पत्र पर स्वीकृति दिये जाने पर उसका नाम लिपिकों के रजिस्टर में दर्ज कर लिया जायेगा।
(3) लिपिक के रजिस्ट्रीकरण के पश्चात् रजिस्ट्रार उसे एक पहचान-पत्र जारी किये जाने का निर्देश, देगा जो सहस्तान्तरणीय होगा और अधिकरण के इस निमित्ति प्राधिकृत किसी ध्रधिकारी या अन्य कर्मचारी द्वारा अनुरोध पर धारक द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा । उक्त पहचान पत्र संबंधित न्यायपीठ के उप-रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर से जारी किया जायेगा।
(4) उप-नियम (2) के अधीन रजिस्टर किये गये सभी लिपिकों का एन रजिस्टर प्रत्येक न्यायपीठ के रजिस्ट्रार के कार्यालय में रखे जायेगा ।
(5) एक विधि-व्यवसायी एक समय पर दो से अधिक रजिस्ट्रीकृत लिपिक नहीं रखेगा जब तक कि रजिस्ट्रार साधारण या विशेष आदेश द्वारा धन्यथा अनुज्ञात न करे।
(6) जब कभी कोई विधि-व्यवसायी किसी रजिस्ट्रीकृत लिपिक का नियोजन समाप्त कर देता है तो वह तुरन्त उस तथ्य की सूचना, उसके लिपिक को जारी किये गये पहचान पत्र के साथ, रजिस्ट्री द्वारा एक पत्र के माध्यम से रजिस्ट्रार को देगा और ऐसे पत्र को प्राप्ति पर रजिस्ट्रीकृत लिपिक का नाम रजिस्टर में काट दिया जायेगा।
26. अधिकरण के काम के घंटे :-शनिवारों, रविवारों तथा अन्य सरकारी छुट्टियों को छोड़कर अधिकरण का कार्यालय 9.30 बजे पूर्वाह्न से 6.00 बजे ध्रपराह्न तक खुला रटेगा बशर्ते कि ध्रध्यक्ष द्वारा कोई धन्यथा आदेश न निकाला गया हो।
27. अधिकरण की बैठक के घंटे :-अधिकरण (जिसके अन्तर्गत प्रावकाश न्यायापीठ भी है) की बैठक के घंटे ध्रध्यक्ष द्वारा ध्रववा ध्रध्यक्ष के पूर्वानुमोदन से संबंधित उपाध्यक्ष द्वारा किये गये किसी सामान्य ध्रववा विशेष आदेश के अधीन रहते हुए सामान्यनया 10.30 बजे पूर्वाह्न से 1.30 बजे ध्रपराह्न तक और 2.30 बजे ध्रपराह्न से 5.00 बजे ध्रपराह्न तक होगें।


1.28 रजिस्ट्रार को जाक्तियों और कृत – (1) रजिस्ट्रार बधिकरण के बभिलेखों को बभिरक्षा रखेगा और ऐसे धन्य कृत्यों का जो उसे इन नियमों के अधीन या धध्यक्ष द्वारा या संबंधित न्यायपीठ के उपाध्यक्ष द्वारा ध्रलग ध्रादेश से सोने जायें, प्रयोग करेगा।
(2) रजिस्ट्रार ध्रध्यक्ष ध्रधवा संबंधित न्यायपीठ के उपाध्यक्ष के ध्रनुमोदन से उप रजिस्ट्रार को रजिस्ट्रार द्वारा इन नियमों के अधीन किये जाने ध्रधवा प्रयोग में लाये जाने के लिये ध्रपेक्षित कन्ही कृत्यों ध्रधवा शक्तियों को प्रत्यायोजित कर सकेगा।
(3) रजिस्ट्रार की ध्रनुपस्थिति में उप-रजिस्ट्रार रजिस्ट्रार की सभी शक्तियों का प्रयोग तथा उसके कृत्यों को कर सकेगा।
(4) शासकीय मुद्रा (सील) रजिस्ट्रार की बधिरक्षा में रखी जायेगी।
(5) अध्यक्ष द्वारा किसी साधारण या विशेष निदेश के अधीन रहते हुए अधिकरण की मुद्रा (सील), सिवाय रजिस्ट्रार या उप-रजिस्ट्रार के लिखित रूप में बाधिकार के अधीन, किसी भी आदेश, ममन या अन्य कार्यवाही पर नहीं लगायी जाएगी।
(6) अधिकरण की मुद्रा (सील), सिवाय रजिस्ट्रार या उप रजिस्ट्रार के लिखित बाधिकार के अधीन, अधिरकण द्वारा जारी की गई किसी भी प्रमाणित प्रति पर नहीं लगाई जाएगी ।
29. रजिस्ट्रार की अतिरिक्त शक्तियों और कर्तव्य:इन नियमों में अन्याय प्रदत्त शक्तियों के अतिरिक्त रजिस्ट्रार की संबंधित न्यायपीठ के अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष के साधारण या विशेष आदेश के अधीन रहते हुए निम्नलिखित शक्तियों और कर्तव्य प्रब्ध होगें, अर्थात:-
(i) सभी आवेदन और अन्य दस्तावेज़ जिसके अंतर्गत अंतरेल आवेदन भी है, प्राप्त करना ;
(ii) आवेदन रजिस्ट्रीकृत किए जाने से पूर्व उनकी संबंध्ता से उद्भूत होने वाले सभी प्रभ्मों का विनिम्बय करना ;
(iii) अधिकरण को प्रस्तुत किए गए किसी आवेदन में अधिनियम तथा नियमानुसार संशोधन कराए जाने की अपेक्षा करना ;
(iv) संबधित न्यायपीठों के निदेशों के अधीन रहते हुए आवेदनों या अन्य कार्यवाहियों की प्रथम नूनवाई की तारीख नियत करना और उनकी सूचनाएं जारी करना ;
(v) अभिलेखों के किसी प्रगणित संशोधन का निदेश देना ;
(vi) कार्यवाहियों के पक्षकारों को दस्तावेजों की प्रतियां दिलाए जाने का आदेश करना ;
(vii) अधिकरण के अभिलेखों का निरीक्षण करने के लिए स्वीकृति देना ;
(viii) सूचनाओं और अन्य जायेशिकाओं की तामीन से संबंधित सभी मामलों का निपटारा, नई सूचनाओं के जारी किए जाने के लिए और ऐसे आवेदनों को दायर करने के समय को बढ़ाने के लिए तथा उत्तर अथवा प्रत्युत्तर, यदि कोई हो, को दायर करने के लिए 15 दिन से अधिक समय न देना और उपर्युक्त अवधि की समाप्ति पर मामलों को समुचित आदेशों के लिए न्यायपीठ के समक्ष प्रस्तुत करना ;
(ix) किसी न्यायालय या धन्य बाधिकरण की बभिरक्षा से अभिलेखों की ध्रध्यपेक्षा करना ;
(x) आवेदन के लम्बित रहते के दौरान मृत पक्षकारों के कानूनी प्रतिनिधियों के प्रतिस्थापन के लिए मृत्यु की तारीख से 30 दिन के भीतर आवेदन प्राप्त करना;
(xi) वहां के सिवाय जहां प्रतिस्थापन के कारण उपशमन संबंधी किसी ध्रादेश की निरस्त किये जाना हो, प्रतिस्थापन के लिए आवेदन प्राप्त करना तथा उनका निपटारा करना ;
(xii) दस्तावेजों की वापसी के लिए पक्षकारों द्वारा आवेदन प्राप्त करना तथा उनका निपटारा करना।
30. प्रधान न्यायपीठ के रजिस्ट्रार की अतिरिक्त शक्तियों :-प्रधान न्यायपीठ के रजिस्ट्रार को, ध्रध्यक्ष द्वारा समय समय पर जारी किए गए सामान्य ध्रधवा विशेष ध्रादेशों के अधीन सूचना और अभिलेख संरवाने तथा अन्य न्यायपीठों की रजिस्ट्री की जांच करने ध्रधवा करवाने का बधिकार होगा ।
31. मुद्रा और संप्रतीक :-बधिकरण की शासकीय मुद्रा और संप्रतीक ऐंगा होगा जो केन्द्रीय सरकार विनिदिष्ट करे ।
32. बधिकरण के सदस्यों और कर्मचारीवृन्द के लिए पोशाक :-बधिकरण के सदस्यों (जिसके अन्तर्गत ध्रध्यक्ष और उपाध्यक्ष भी है) और बधिकरण के कर्मचारीवृन्द के सदस्यों के लिए पोशाक ऐंगी होगी जो ध्रध्यक्ष विनिर्दिष्ट करे ।
33. पक्षकारों के लिए पोशाक :-प्रत्येक विधि व्यवसायी या यथास्थिति प्रस्तुतकर्ता बधिकारी बधिकरण के समक्ष ध्रवनी व्यावसायिक पोशाक में, यदि कोई हो, हाजिर होगा और यदि ऐंगी कोई पोशाक नहीं है तो वहा :-
(i) यदि वह पुरुष है तो बंद गले के कोट और पैंट या लाउन्ज मूर में हाजिर होगा ;
(ii) यदि वह महिला है तो सादे रंग की नाड़ी या किसी धन्य प्रचलित पोशाक में हाजिर होगी।
[संख्या ए-12018/4/86-ए.टी.] एम.के. पार्वसारभि, संयुक्त सचिव


परिशिष्ट क-फार्म

फार्म-1
(देखिए नियम 4)
प्रशासनिक सधिकरण सविनियम 1985 की धारा 19 के सर्पान सावेदन
मामले का शीर्षक :
समुक्त/दिक्त

क्रम संख्या

उन दस्तावेजों का ब्यौरा जिनका कुछ संख्या टाइमम्च दिया गया है
सावेदन पत्र
2.
3.
4.
5.
6.

सावेदक के हस्ताक्षर
सधिकरण के कार्यालय में प्रयोग के लिए :
फाइल करने की तारांख
या
डाक द्वारा प्राप्ति की तारीख
रजिस्ट्रीकरण संख्या
हस्ताक्षर
कुले रजिस्ट्रार
केन्द्रीय प्रशासनिक सधिकरण—व्यायपीठ
के मध्य
क.
ख.
सावेदक
और
ग.
च.

प्रत्यक्षीं
सावेदन के ब्यौरे

  1. सावेदक की विलिख्टियां :
    (i) सावेदक का नाम
    (ii) पिता/पति का नाम
    (iii) सावेदक की आयु
    (iv) पद नाम तथा उस कार्यालय के ब्यौरे (नाम तथा स्थान) जिसमें नियुक्त है, अथवा सेवा समाप्त होने से पहले नियुक्त था।
    (v) कार्यालय का पता
    (vi) नोरियों की तामील का पता

  1. पत्तियों की विशिष्टियां :
    (i) पत्तियों का नाम
    (ii) पिता/पति का नाम
    (iii) पत्तियों की चामु
    (iv) पदनाम तथा उस कार्यालय के ब्योरे
    (नाम तथा स्थान) जिसमें नियुक्त है
    (v) कार्यालय का पता
    (vi) नोटियों की तामील का पता
  2. उस आदेश की जिसके विरुद्ध आवेदन किया गया है, विशिष्टियां :

आवेदन निम्नलिखित आदेश के विरुद्ध है :
(i) आदेश संख्या

अनुबंध के संदर्भ में
(ii) तारीख
(iii) . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . .


  1. माने गए धनुतोष :

ऊपर पैरा 8 में वर्णित को ध्यान में रखकर धावेदक निम्नलिखित धनुतोष (शो) के लिए प्रार्थना करता है –
[नीचे माने गए धनुतोष (पो) को विनिर्दिष्ट करें और धनुतोष (शो) के आधार और ऐसे बिधिक उपबंधों (यदि कोई हो) को स्पष्ट करें जिनका यक्लम्ब लिया गया है।]
10. धन्तरिम धादेश, यदि उसके लिए प्रार्थना की गई है :

आवेदन पर अन्तिक विनिम्नवट संचित रहने तक आवेदक निम्नलिखित धन्तरिम आदेश जारी किये जाने की मांग करता है। (यहां कारण देकर उस धन्तरिम आदेश की प्रकृति का उल्लेख करें जिसकी प्रार्थना की गई है)
11. धावेदन पत्र पंजीकृत डाक द्वारा भेजे जाने की दशा में यह स्पष्ट किया जाए कि क्या धावेदक प्रवेश स्तर पर मौखिक सुनवाई की धाकांक्षा करता है यदि ऐसा है तो वह अपना पता लिखा हुए एक पोस्टकार्ड/अन्तर्देशीय पत्र संलग्न करें जिस पर सुनवाई की तारीख के बारे में उसे सूचना भेजी जा सके।
12. धावेदन फीस के सम्बन्ध में वैक ड्राफ्ट/पोस्टल धार्डर की विशिष्टियां :

  1. वैक का नाम जिसका नाम दिया गया है –
  2. मागदेव ड्राफ्ट संख्या –

या

  1. भारतीय पोस्टल धार्डरों (रों) की संख्या –
  2. जारी करने वाले डाकघर का नाम –
  3. पोस्टल धार्डर (धार्वरी) के जारी किए जाने की तारीख –
  4. डाकघर जियं पर देय है –
  5. धनुसन्तकों की सूची :

गत्यापन :
मैं
(धावेदक का नाम) पुत्र, पुत्री, पत्नी
धानु
जो
कार्यालय में
के रूप में कार्य
कर रहा है/रही हूं और जो
का निवासी हूं/की निवासी हूं। यह सत्यापित करता
हूं/करती हूं कि
के
तक के पैराग्राफी की अन्तर्देग्ध के व्यक्तिगत ज्ञान के अनुसार सही है
और पैरा
के
तक की अन्तर्वस्तु को कानूनी सलाह के आधार पर सत्य समक्षा जाता है यह
कि मैंने किसी भी तात्विक तथ्य की नहीं छिपाया है।
तारीख :
धावेदक के हस्ताक्षर
स्थान :
सेवा में,
रजिस्ट्रार


[लाग II—चरण 3(1)]

चारत का राजपत्र : भागधारक

फार्म-II

[नियम 4(4) देखें]

पावती रसीद

श्री/कुमारी/खंमती

के पद पर कार्य कर रहा है/कर रही है तथा जिन का निवास स्थान है द्वारा केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण में दायर किए गए आवेदन की एतदृढ़ता पावती स्वीकार की जाती है।

कृते रजिस्टार

केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण

न्यायपीठ

तारीख :

मोहर :

केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण में

पीठ

फार्म-III

[नियमावली 8(3) देखें]

विविध आवेदन पत्र संख्या

पत्र संख्या

19

स्थानान्तरित

एक्स

आवेदक

(आवेदक/प्रतिवादी)

बनाम

प्रतिवादी

बार

(प्रतिवादी/आवेदक)

आवेदन पत्र का सार-तथ्य

राहत धार्मा प्रार्थना :-

सत्यापन

मै (आवेदक का नाम) सुपुत्र/सुपूत्रो/पत्नी

फार्म-IV

[नियम 25(2) देखिए]

लिपिक के रजिस्ट्रीकरण के लिए धावेदन

पासपोर्ट ध्राकार की सत्यापित फोटो चिपकाई जाए ।

  1. विधि व्यवसायी का नाम जिसकी ओर से लिपिक का रजिस्ट्रीकरण किया जाना है।
  2. रजिस्ट्रीकृत किए जाने वाले लिपिक की विशिष्टियां
    (i) पूरा नाम (बड़े भ्रक्षरों में)
    (ii) पिता का नाम
    (iii) आयु और जन्म तिथि
    (iv) जन्म स्थान
    (v) राष्ट्रीयता
    (vi) सैक्षिक भ्रद्धताएं
    (vii) पूर्व नियोजन, यदि कोई है, की विशिष्टियां।

में, $\qquad$ (ऊपर नामित लिपिक) यह प्रतिज्ञा करता हूं कि मुमसे संबंधित ऊपर दी गई विशिष्टियां सही है।

लिपिक के हस्ताक्षर

  1. क्या विधिक व्यवसायी के पास उसके नियोजन में पहले से ही कोई रजिस्ट्रीकृत लिपिक है और क्या रजिस्ट्रीकृत किए जाने वाला लिपिक पहले से ही रजिस्ट्रीकृत लिपिक के स्थान पर है या उसके प्रतिरिक्त है।
  2. क्या रजिस्ट्रीकृत किए जाने वाला लिपिक किसी अन्य विधि व्यवसायी के लिपिक के रूप में पहले से ही रजिस्ट्रीकृत है और यदि हो तो ऐसे विधि व्यवसायी का नाम ।

में, $\qquad$ (विविध व्यवसायी) प्रमाणित करता हूं कि ऊपर दी गई विशिष्टियां मेरी सर्वोत्तम जानकारी और विश्वास के अनुसार सही है और यह कि मुझे ऐसे किन्हीं तथ्यों की जानकारी नहीं है जिनसे लिपिक के रूप में उक्त (नाम) का रजिस्ट्रीकरण ध्रुवांछनीय हो जाएगा। में, मेरे द्वारा समुचित रूप से सत्यापित धावेदक की पासपोर्ट ध्राकार की दो फोटो प्रतियों सहित पहचान पत्र की कीमत के रूप में 2.50 रुपए के पोस्टल चार्टर संलग्न करता हूं।

विविध व्यवसायी के हस्ताक्षर

तारीख :

सेवा में,
धधिकरण का रजिस्टार,
केन्द्रीय प्रशासनिक धधिकरण,
न्यायपीठ