Amendments to Rules Governing Inquiries and Investigations

A

The latest amendments introduce significant changes to the rules governing inquiries and investigations. Key takeaways include a revised timeline for submitting written statements, now capped at forty-five days from the date of receiving charges. For the production of requested documents, a one-month deadline from the demand receipt has been set, with provisions for issuing a non-availability certificate if the documents cannot be produced due to national security or public interest concerns. Furthermore, inquiry officers are now mandated to complete investigations within six months of their appointment, with a possibility for a six-month extension under specific circumstances. These changes aim to streamline the inquiry process and ensure timely resolution.

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असाधारण EXTRAORDINARY भाग II—खण्ड 3—उप-खण्ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i)

प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY

सं. 449] नई दिल्ली, शुक्रवार, जून 2, 2017/ज्येष्ठ 12, 1939
No. 449] NEW DELHI, FRIDAY, JUNE 2, 2017/JYAISTHA 12, 1939

कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय

(कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग)

अधिसूचना

नई दिल्ली, 2 जून, 2017

साःका.नि. 548(अ).—राष्ट्रपति, संविधान के अनुच्छेद 309 के परंतुक और अनुच्छेद 148 के खण्ड (5) द्वारा प्रदत्त तक्तियों का प्रयोग करते हुए और भारतीय लेखा और लेखा परीक्षा विभाग में कार्यरत व्यक्तियों के संबंध में भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक के परामर्श से केन्द्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियमावली, 1965 में और संशोधन करने के लिए निम्नलिखित नियम बनाते हैं अर्थातः—

  1. (1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम केन्द्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) संशोधन नियम, 2017 है।
  2. (2) ये राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख को प्रचलित होंगे।
  3. केन्द्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियमावली, 1965 में—
  4. नियम 14 में,—

(i) उप-नियम (4) के स्थान पर निम्नलिखित उप-नियम रखा जाएगा, अर्थातः—

(4) (क) अनुशासनिक प्राधिकारी सरकारी सेवक को आरोप की मदों की प्रति, कदाचार या दुर्व्यवहार के अभ्यारोपों का कथन तथा उन दस्तावेजों और तबाहों की एक सूची जिसके माध्यम से प्रत्येक मद अथवा आरोपों को प्रमाणित किया जाना प्रस्तावित है, परिदृश्य करेगा अथवा परिदृश्य करवाएगा।

(ख) आरोप की मदें प्राप्त होने पर, सरकारी सेवक को अपने बचाव में यदि वह ऐसा वांछ्य करता है तो, पन्द्रह दिनों की अवधि, जिसे अनुशासनिक प्राधिकारी द्वारा अथवा अनुशासनिक प्राधिकारी द्वारा उसकी ओर से प्राधिकृत किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा लिखित रूप में अभिलिखित किए जाने वाले कारणों से एक बार में पन्द्रह दिन की अवधि से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता है, के भीतर अपना लिखित कथन प्रस्तुत करना और साथ ही यह भी बताना कि क्या वह स्वयं सुनवाई की वांछ्य रखता है, अपेक्षित होगा:


परंतु किसी भी परिस्थिति में बचाव संबंधी लिखित कथन फाइल के लिए समय आरोप की मदें प्राप्त होने की तारीख से पैंतालीस दिनों से अधिक नहीं बढ़ाया जाएगा।”
(ii) उप-नियम (13) के स्थान पर निम्नलिखित उप-नियम रखा जाएगा, अर्थात:-
“(13) उप-नियम (12) में निर्दिष्ट अध्यपेक्षा प्राप्त होने पर, प्रत्येक प्राधिकारी जिनके पास प्रार्यित दस्तावेजों की अभिरक्षा या कब्जा होता है, ऐसी मांग प्राप्त होने के एक माह के भीतर जांच प्राधिकारी के समक्ष इन्हें प्रस्तुत करेगा अथवा अनुपलब्धता प्रमाणपत्र जारी करेगा:
परंतु यदि प्रार्यित दस्तावेजों की अभिरक्षा या कब्जा रखने वाला प्राधिकारी इसके द्वारा लिखित रूप से अभिलिखित किए जाने वाले कारणों से इस बात से समाधान हो जाता है कि ऐसा कोई भी या सभी दस्तावेज प्रस्तुत करना लोकहित या राज्य की सुरक्षा के विरुद्ध होगा, तदनुसार, वह जांच प्राधिकारी को सूचित करेगा तथा जांच प्राधिकारी इस प्रकार संमूचित किए जाने पर सरकारी सेवक को अवगत कराएगा तथा ऐसे दस्तावेज प्रस्तुत करने या खोजने के लिए इसके द्वारा की गई अध्यपेक्षा को वापस लेगा।”
(iii) उप-नियम (23) के पध्दात् निम्नलिखित उप-नियम अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात:-
“(24) (क) जांच प्राधिकारी को जांच प्राधिकारी के रूप में अपनी नियुक्ति का आदेश प्राप्त होने की तारीख से छह माह की अवधि के भीतर जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर देनी चाहिए।
(ख) जहां खण्ड (क) में विनिर्दिष्ट समय-सीमा का पालन करना संभव न हो, जांच प्राधिकारी इसके कारण अभिलेख कर सकता है और अनुशासनिक प्राधिकारी से लिखित रूप में समय अवधि में विस्तार की मांग कर सकता है जो जांच पूरी करने के लिए एक बार में अधिकतम छह माह के अतिरिक्त समय की अनुज्ञा दे सकता है।
(ग) अनुशासनिक प्राधिकारी द्वारा अथवा अनुशासनिक प्राधिकारी द्वारा उसकी ओर से प्राधिकृत किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा लिखित रूप में अभिलेख किए जाने वाले किसी भी उचित या पर्याप्त कारणों से एक बार में छह माह की अवधि के विस्तार की अनुजा दी जा सकती है।”
II. नियम 16 में, 一
(i) उप नियम (1) में, खण्ड (ख) में, शब्दों, कोष्ठकों और अंकों के स्थान पर “नियम 14 के उप-नियम (3) से (23)” शब्द, कोष्ठक और अंक “नियम 14 के उप-नियम (3) से (24)” रखे जाएंगे;
(ii) उप नियम (1-क) में, शब्दों, कोष्ठकों और अंकों के स्थान पर “नियम 14 के उप-नियम (3) से (23)” शब्द, कोष्ठक और अंक “नियम 14 के उप-नियम (3) से (24)” रखे जाएंगे;
III. नियम 19 में, दूसरे परंतुक में, “आयोग की सलाह के विरुद्ध” शब्दों के पध्दात् “नियम 15 के उप-नियम (3) के खण्ड (ख) में विनिर्दिष्ट की गई समय-सीमा के भीतर” शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे;
IV. नियम 27 में, उप-नियम (2) में, परंतुक में, खण्ड (i) में “आयोग की सलाह के विरुद्ध” शब्दों के पध्दात् “नियम 15 के उपनियम (3) के खण्ड (ख) में विनिर्दिष्ट की गई समय-सीमा के भीतर” शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे;
V. नियम 29 में, उप-नियम (1) में, पहले परंतुक में, “आयोग की सलाह के विरुद्ध” शब्दों के पध्दात् “नियम 15 के उप-नियम (3) के खण्ड (ख) में विनिर्दिष्ट की गई समय-सीमा के भीतर” शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे;
VI. नियम 29-क में, परंतुक में, “आयोग की सलाह के विरुद्ध” शब्दों के पध्दात् “नियम 15 के उप-नियम (3) के खण्ड (ख) में विनिर्दिष्ट की गई समय-सीमा के भीतर” शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे |

[फा. सं. 11012/9/2016-स्थापना-क-III]
जानेन्द्र देव त्रिपाठी, संयुक्त सचिव
टिप्पणी : मूल नियम की अधिमूचना संख्या 7/2/63-स्था. (क) तारीख 20 नवम्बर, 1965 के द्वारा भारत के राजपत्र में प्रकाशित किए गए थे और तत्पध्धात् निम्नलिखित अधिमूचना संख्याओं के द्वारा संशोधित किए गए थे:-

  1. का. आ. 1149, दिनांक 13 अप्रैल, 1966;
  2. का. आ. 1596, दिनांक 4 जून, 1966;
  3. का. आ. 2007, दिनांक 9 जुलाई, 1966;
  4. का. आ. 2648, दिनांक 3 सितंबर, 1966;
  5. का. आ. 2854, दिनांक 1 अक्तूबर, 1966;
  6. का. आ. 1282, दिनांक 15 अप्रैल, 1967;
  7. का. आ. 1457, दिनांक 29 अप्रैल, 1967;
  8. का. आ. 3253, दिनांक 16 सितंबर, 1967;

  1. का. आ. 3530, दिनांक 7 अक्तूबर, 1967;
  2. का. आ. 4151, दिनांक 25 नवंबर, 1967;
  3. का. आ. 821, दिनांक 9 मार्च, 1968;
  4. का. आ. 1441, दिनांक 27 अप्रैल, 1968;
  5. का. आ. 1870, दिनांक 1 जून, 1968;
  6. का. आ. 3423, दिनांक 28 सितंबर, 1968;
  7. का. आ. 5008, दिनांक 27 दिसंबर, 1969;
  8. का. आ. 397, दिनांक 7 फरवरी, 1970;
  9. का. आ. 3521, दिनांक 25 सितंबर, 1971;
  10. का. आ. 249, दिनांक 1 जनवरी, 1972;
  11. का. आ. 990, 22 अप्रैल, 1972;
  12. का. आ. 1600, दिनांक 1 जुलाई, 1972;
  13. का. आ. 278 9, दिनांक 14 अक्तूबर, 1972;
  14. का. आ. 929, दिनांक 31 मार्च, 1973;
  15. का. आ. 1648, दिनांक 6 जुलाई, 1974;
  16. का. आ. 2742, दिनांक 31 जुलाई, 1976;
  17. का. आ. 4664, दिनांक 11 दिसंबर, 1976;
  18. का. आ. 3062, दिनांक 8 अक्तूबर, 1977;
  19. का. आ. 3573, दिनांक 26 नवंबर, 1977;
  20. का. आ. 3574, दिनांक 26 नवंबर, 1977;
  21. का. आ. 3671, दिनांक 3 दिसंबर, 1977;
  22. का. आ. 2464, दिनांक 2 सितंबर, 1978;
  23. का. आ. 2465, दिनांक 2 सितंबर, 1978;
  24. का. आ. 920, दिनांक 17 फरवरी, 1979;
  25. का. आ. 1769, दिनांक 5 जुलाई, 1980;
  26. का. आ. 264, दिनांक 24 जनवरी, 1981;
  27. का. आ. 2126, दिनांक 8 अगस्त, 1981;
  28. का. आ. 2203, दिनांक 22 अगस्त, 1981
  29. का. आ. 2512, दिनांक 3 अक्तूबर, 1981;
  30. का. आ. 168, दिनांक 23 जनवरी, 1982;
  31. का. आ. 1535, दिनांक 12 मई, 1984;

  32. अधिसूचना सं. 11012/15/84-स्था. (क), दिनांक 5 जुलाई, 1985;
    41.अधिसूचना सं. 11012/05/85-स्था. (क), दिनांक 29 जुलाई, 1985;
    42.अधिसूचना सं. 11012/06/85-स्था. (क), दिनांक 6 अगस्त, 1985;

  33. का. आ. 5637, दिनांक 21 दिसंबर, 1985;
  34. का. आ. 5743, दिनांक 28 दिसंबर, 1985;
  35. का. आ. 4089, दिनांक 13 दिसंबर, 1986;
  36. अधिसूचना सं 11012/24/85- स्था. (क), दिनांक 26 नवंबर, 1986;
  37. का. आ. 830, दिनांक 28 मार्च, 1987;
  38. का. आ. 831, दिनांक 28 मार्च, 1987;
  39. का. आ. 1591, दिनांक 27 जून, 1987;
  40. का. आ. 1825, दिनांक 18 जुलाई 1987,
  41. का. आ. 3060, दिनांक 15 अक्तूबर, 1988;
  42. का. आ. 3061, दिनांक 15 अक्तूबर, 1988;
  43. का. आ. 2207, दिनांक 16 सितंबर, 1989;
  44. का. आ. 1084, दिनांक 28 अप्रैल, 1990;
  45. का. आ. 2208, दिनांक 25 अगस्त 1990;
  46. का. आ. 1481, दिनांक 13 जून, 1992;
  47. सा. का. नि. 289, दिनांक 20 जून, 1992;
  48. सा. का. नि. 589, दिनांक 26 दिसंबर, 1992;
  49. सा. का. नि. 499, दिनांक 8 अक्तूबर, 1994;
  50. सा. का. नि. 276, दिनांक 10 जून, 1995;
  51. सा. का. नि. 17, दिनांक 20 जनवरी, 1996;
  52. सा. का. नि. 125, दिनांक 16 मार्च, 1996;
  53. सा. का. नि. 417, दिनांक 5 अक्तूबर, 1996;
  54. सा. का. नि. 337, दिनांक 2 सितंबर, 2000;
  55. सा. का. नि. 420, दिनांक 28 अक्तूबर 2000;
  56. सा. का. नि. 211, दिनांक 14 अप्रैल, 2001;
  57. सा. का. नि. 60, दिनांक 13 फरवरी, 2002;
  58. सा. का. नि. 2, दिनांक 3 जनवरी, 2004
  59. सा. का. नि. 249 (अ) दिनांक 2 अप्रैल, 2004
  60. सा. का. नि. 113, दिनांक 10 अप्रैल, 2004;
  61. सा. का. नि. 225, दिनांक 10 जुलाई, 2004;
  62. सा. का. नि. 287, दिनांक 28 अगस्त, 2004;
  63. सा. का. नि. 1, दिनांक 20 दिसंबर, 2004;
  64. सा. का. नि. 49, दिनांक 29 मार्च, 2008;
  65. सा. का. नि. 12, दिनांक 7 फरवरी, 2009;
  66. का. आ. 946, दिनांक 9 अप्रैल, 2009;
  67. का. आ. 1762(अ), दिनांक 16 जुलाई, 2009;
  68. सा. का. नि. 55(अ), दिनांक 2 फरवरी, 2010;
  69. सा. का. नि. 877(अ), दिनांक 5 दिसंबर, 2011;
  70. का. आ. 2079(अ), दिनांक 20 अगस्त, 2014;
  71. सा. का. नि. 769(अ), दिनांक 31 अक्तूबर, 2014 और
  72. सा. का. नि. 822(अ), दिनांक 19 नवंबर, 2014