Important revisions to the pay structure for members of the Indian Administrative Service have been officially notified, reflecting the recommendations of the Sixth Central Pay Commission. These changes, primarily effective from January 1, 2006, introduce a revised definition of ‘basic pay’ within the new pay bands and clearly outline ‘grade pay’ and ‘revised emoluments’. The notification details specific pay bands and associated grade pays for various career stages, including Junior Scale, Senior Time Scale, Junior Administrative Grade, Selection Grade, Super Time Scale, and the Cabinet Secretary Grade. It also establishes clear guidelines for promotion, specifying service-based eligibility criteria for advancement to higher grades. A key aspect of these revisions is the detailed mechanism for pay fixation in the new structure, involving a multiplication factor of 1.86 and rounding to the nearest multiple of ten. Provisions are included to address instances of ‘bunching’ of pay to ensure equitable treatment. Furthermore, special considerations for officers on deputation abroad or on leave, and those drawing specific allowances, have been outlined. The document also clarifies the rate of annual increment, set at 3% of the pay in the pay band and grade pay, and revises rules concerning advance increments for officers who pass departmental examinations. These comprehensive amendments ensure a streamlined and updated pay framework for the Indian Administrative Service.
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EXTRAORDINARY
भाग II—खण्ड 3—उप-खण्ड (i)
PART II-Section 3-Sub-section (i)
प्राधिकार से प्रकाशित
PUBLISHED BY AUTHORITY
सं. 510]
No. 510]
नई दिल्ली, शुक्रवार, सितम्बर 19, 2008/भाद्र 28, 1930
NEW DELHI, FRIDAY, SEPTEMBER 19, 2008/BHADRA 28, 1930
कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय
(कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग)
अधिसूचना
नई दिल्ली, 19 सितम्बर, 2008
सा.का.नि. 665(अ).—कुंन्द्र सरकार, अखिल भारतीय सेवाएं अधिनियम, 1951 (1951 का 61) की धारा 3 की उप-धारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए सम्बन्धित राज्य सरकारों से परामर्श करने के पश्चात् भारतीय प्रशासनिक सेवा (वेतन) नियमावली, 2007 में संशोधन करने के लिए एतद्द्वारा निम्नलिखित आगे और नियम बनाती है, अर्थात् :-
- (1) इन नियमों का नाम भारतीय प्रशासनिक सेवा (वेतन) द्वितीय संशोधन नियमावली, 2008 है ।
(2) ये 1 जनवरी, 2006 को लागू हुए समझे जाएंगे सिवाय ‘सेवा के सदस्य द्वारा धारित केन्द्र सरकार के अन्तर्गत आने वाले ऐसे पदों’ से सम्बद्ध अनुसूची-II के भाग-ग में विहित केन्द्रीय (कार्यावधि पर प्रतिनियुक्ति) भत्ते के प्रावधानों के, जो 1 सितम्बर, 2008 से लागू होंगे । - भारतीय प्रशासनिक सेवा (वेतन) नियमावली, 2007 के नियम-2 में
(जिसे यहां उपर्युक्त नियमावली के रूप में संदर्भित किया गया है)
(i) खण्ड (क) के पश्चात् निम्नलिखित खण्ड अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
‘ (क क) संशोधित वेतन ढांचे में “मूल वेतन” से अभिप्राय है निर्धारित पेय बैंड में आहरित वेतन और लागू ग्रेड पे लेकिन इसमें विशेष वेतन इत्यादि जैसा कोई और वेतन शामिल नहीं है ।
शीर्षस्थ वेतनमान और मंत्रिमण्डल सचिव के वेतनमान में सेवा के सदस्य के मामलों में मूल वेतन से अभिप्राय है, संशोधित वेतनमान का वेतन;
(ii) खण्ड (ड.) के स्थान पर निम्नलिखित खण्ड अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
‘(ड.) “येड-पे” पूर्व-संशोधित वेतनमान/पदों के तदनुरूपी नियत राशि है;
(iii) खण्ड (ज ) के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
‘(ज क) “पे-बैंड में वेतन” से अभिप्राय है नियम 3 के उप-नियम-1 में विनिर्दिष्ट रनिंग पे-बैंडों में आहरित वेतन;
(iv) खण्ड (ड) के पश्चात् निम्नलिखित खण्ड अंतःस्थापित किए जाएंगे, अर्थात्:-
‘(ड क) “संशोधित परिलब्धियों” से अभिप्राय है पे-बैंड में वेतन और संशोधित वेतन ढांचे में सेवा के सदस्य की येड-पे अथवा शीर्षस्थ वेतनमान और मंत्रिमण्डल सचिव के वेतनमान में मूल वेतन;
‘(ड ख) अनुसूची-।। में विनिर्दिष्ट किसी पद के सम्बन्ध में “संशोधित वेतन ढांचे” से अभिप्राय कॉलम-5 और 6 में विनिर्दिष्ट उस पद अथवा वेतनमान पर विनिर्दिष्ट पे-बैंड अथवा येड-पे से है जब तक कि उस पद के लिए एक अलग संशोधित पे-बैंड और येड-पे अथवा वेतनमान अलग से अधिसूचित नहीं कर दिया जाता;
3. उपर्युक्त नियमावली के नियम-3 में उप-नियम (1) के स्थान पर निम्नलिखित उपनियम प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
“(1) पे-बैंड और येड-पे – सेवा के सदस्य को अनुजेय पे-बैंड और येड-पे और वे तारीख जिनसे पे-बैंड और येड-पे लागू हुए समझे जाएंगे, निम्नानुसार होंगे:-
(क) कनिष्ठ वेतनमान –
पे-बैंड – 3: 15600-39100 रुपये और येड-पे 5400 रुपये ।
(1 जनवरी, 2006 से लागू)
(ख) वरिष्ठ वेतनमान –
(i) वरिष्ठ समय वेतनमान – पे-बैंड – 3: 15600-39100 रुपये और येड-पे 6600 रुपये (पदोन्नति पर वेतन निर्धारित करते समय दो अतिरिक्त वेतनवृद्धियां दी जाएंगी) ।
(ii) कलिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड – पे-बैंड – 3: 15600-39100 रुपये और ग्रेड-पे 7600 रुपये (पदोन्नति पर वेतन निर्धारित करते समय दो अतिरिक्त वेतनवृद्धियां दी जाएंगी)।
(iii) चयन ग्रेड:- पे-बैंड – 4: 37400-67000 रुपये और ग्रेड-पे 8700 रुपये (पदोन्नति के समय पे-बैंड के न्यूनतम और ग्रेड-पे पर दो अतिरिक्त वेतनवृद्धियां दी जाएंगी)।
(1 जनवरी, 2006 से लागू)
(ग) अधिसमय वेतनमान :-
पे-बैंड – 4: 37400-67000 रुपये और ग्रेड-पे 10000 रुपये ।
(1 जनवरी, 2006 से लागू)
(घ) अधिसमय वेतनमान से ऊपर के वेतनमान :-
(i) पे-बैंड – 4: 37400-67000 रुपये और ग्रेड-पे 12000 रुपये ।
(ii) शीर्षस्थ वेतनमान: 80000 रुपये (नियत) और ग्रेड-पे: शून्य
(iii) मंत्रिमण्डल सचिव ग्रेड: 90000 रुपये (नियत) ; ग्रेड-पे: शून्य;
(भारत सरकार के मंत्रिमण्डल सचिव के पद के लिए)
(1 जनवरी, 2006 से लागू)
टिप्पणी 1. – समय वेतनमान और इससे ऊपर के पदों पर सेवा के सदस्य की नियुक्ति, भारतीय प्रशासनिक सेवा में विभिन्न ग्रेडों में पदोन्नति के बारे में मार्गदर्शी सिद्धांतों में दिए गए प्रावधानों के अनुसार विनियमित की जाएगी :
बशर्ते कि सेवा का कोई सदस्य भारतीय प्रशासनिक सेवा (भर्ती) नियमावली, 1954 के नियम-6क के उप-नियम (2) के प्रावधानों के अध्यधीन अपनी सेवा के 4 वर्ष पूरी करने के पश्चात् वरिष्ठ समय वेतनमान में, 9 वर्ष की सेवा पूरी करने के पश्चात् कलिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड में, 13 वर्ष की सेवा पूरी करने के पश्चात् चयन ग्रेड में और 16 वर्ष की सेवा पूरी करने के पश्चात् अधिसमय वेतनमान में नियुक्त किए जाने का पात्र हो जाएगा:
बशर्ते आगे यह भी कि सेवा का कोई सदस्य यथानिर्धारित अनिवार्य मध्य केरिअर प्रशिक्षण चरण-III पूरा करने के पश्चात् ही कलिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड में नियुक्त किया जाएगा ।
टिप्पणी 2. इस नियम में सेवा के 4 वर्ष, 9 वर्ष, 13 वर्ष, 16 वर्षो की गणना, भारतीय प्रशासनिक सेवा (वरिष्ठता का विनियमन) नियमावली, 1987 के नियम-3 के अंतर्गत इसे आबंटित, आबंटन वर्ष से की जाएगी ।
टिप्पणी 3. चिकित्सा प्रमाण-पत्र के आधार के अलावा ली गई किसी असाधारण छुट्टी अथवा सम्बन्धित राज्य सरकार द्वारा सुविचारित, सेवा के सदस्य के नियंत्रण से परे किसी कारण के लिए ली गई छुट्टी अथवा अध्ययन के लिए ली गई छुट्टी जो कि लोकहित में हो और जिसके लिए अखिल भारतीय सेवा (अध्ययन छुट्टी) विनियमावली, 1960 के अंतर्गत अध्ययन छुट्टी अन्यथा अनुज्ञेय हो, की अवधि को इन येडों में नियुक्ति के लिए अपेक्षित सेवा की पात्रता अवधि की गणना करने के आशय से शामिल नही किया जाएगा ।
बशर्ते यह कि सेवा का कोई सदस्य उस तारीख तक मौजूदा वेतनमान में वेतन आहरित करते रहने का विकल्प दे सकता है जिस तारीख को वह मौजूदा वेतनमान में अपनी अगली या कोई तदनुरूपी वेतनवृद्धि पाता है अथवा जब तक वह अपना पद छोड़ देता है अथवा जब तक वह उस वेतनमान में वेतन आहरित करना बंद कर देता है ।
बशर्ते यह कि ऐसे मामलों में जहां सेवा के सदस्य को 1.01.2006 और इन नियमों की अधिसूचना की तारीख के बीच में पदोन्नति अथवा वेतनमान के अपयेडेशन के कारण . उच्चतर वेतनमान में रखा गया है, सेवा के सदस्य ऐसी पदोन्नति अथवा अपयेडेशन, जैसा भी मामला हो, की तारीख से संशोधित वेतन ढांचे का विकल्प दे सकते हैं ।
स्पष्टीकरण 1- इन नियम के परन्तुक के अन्तर्गत मौजूदा वेतनमान बहाल रखने का विकल्प केवल एक मौजूदा वेतनमान के मामले में देय होगा ।
स्पष्टीकरण 2- उपर्युक्त विकल्प 1 जनवरी, 2006 को अथवा उसके बाद किसी पद पर नियुक्त किसी भी व्यक्ति के लिए लागू नहीं होगा और उसे केवल संशोधित वेतन ढांचे में ही वेतन प्राप्त करने की अनुमति होगी ।
स्पष्टीकरण 3- जहां सेवा का कोई सदस्य उस वेतनमान में वेतन नियमन के प्रयोजन के लिए नियमित आधार पर स्थानापन्न क्षमता पर धारित अपने किसी पद के संबंध में इस नियम के अन्तर्गत मौजूदा वेतनमान को बहाल रखने का विकल्प चुनता है तो इस स्थिति में उसका वास्तविक वेतन वह मूलभूत वेतन होगा जो मौजूदा वेतनमान के संबंध में धारित पद, जिस पर उसका पुनर्यहणाधिकार रहता या निलंबन न किए जाने तक उसका पुनर्यहणाधिकार बना रहता या स्थानापन्न पद का वह वेतन, इनमें से जो भी अधिक हो, होगा जो कि लागू होने के समय किसी भी आदेश के अनुरूप वास्तविक वेतन की खासियत लिए हुए वह अर्जित करता ।
- उपर्युक्त नियमावली के नियम 3 क के लिए निम्नलिखित नियम प्रतिस्थापित किए जाएंगे अर्थात् :-
‘3क. संशोधित वेतन ढांचे में वेतन का नियतन- सेवा का कोई सदस्य जो इन नियमों के अनुसार, 1 जनवरी, 2006 को अथवा बाद की किसी तारीख को संशोधित वेतन ढांचे के अनुसार विकल्प देता है अथवा विकल्प दिया हुआ समझा जाता है तो उसके आरंभिक वेतन का, उसके उस स्थायी पद, जिस पर उसका पुनर्यहणाधिकार रहता है और वह पद जिस पर उसका पुनर्यहणाधिकार रहता यदि वह निलंबित न हो गया होता, के वास्तविक वेतन के अनुसार उस तारीख से अलग से पुनः निर्धारित किया जाएगा और उसके द्वारा धारित पद स्थानापन्न वेतन के संबंध में निम्नलिखित तरीके से निर्धारित किया जाएगा अर्थात् :-
(क) सेवा के सभी सदस्यों के मामलों में:-
(i) वेतन बैंड/वेतनमान में वेतन का निर्धारण 1 जनवरी, 2006 को यथाविघमान मौजूदा मूल वेतन को 1.86 के गुणक से गुणा करके तथा इस प्रकार प्राप्त संख्या को 10 के अगले गुणज में पूर्णांकित करके किया जाएगा ।
(ii) यदि संशोधित वेतन बैंड/वेतनमान का न्यूनतम उपर्युक्त (i) के अनुसार प्राप्त राशि से ज्यादा है तो वेतन संशोधित वेतन बैंड/वेतनमान के न्यूनतम पर निर्धारित किया जाएगा ।
बशर्ते कि
(क) वेतन निर्धारण में जहां कहीं सेवा के किसी सदस्य का वेतन जो मौजूदा वेतनमान में दो या अधिक संयोजी अवस्थाओं पर आहरित वेतन समूहबद् हो जाता है अर्थात् अन्यथा कहीं तो इसी अवस्था पर संशोधित वेतन ढांचे में वेतन बैंड में निर्धारित हो जाता है तो इस प्रकार से समूहबद् ऐसी प्रत्येक दो अवस्थाओं के लिए उन्हें एक वेतन वृद्धि का लाभ दिया जाएगा जिससे कि संशोधित रनिंग वेतन बैंडों में दो अवस्थाओं से अधिक बंचिंग से बचा जा सके । इस प्रयोजन के लिए वेतन वृद्धि वेतन बैंड में वेतन पर परिकलित की
जाएगी बंचिंग को कम करने के लिए वेतनवृद्धियां देते समय ब्रैड वेतन को ध्यान में नहीं रखा जाएगा ।
(ख) उपर्युक्त ढंग से वेतन वर्धन से किसी सरकारी कर्मचारी का वेतन संशोधित वेतन बैंड/वेतनमान (जहां लागू हो) की उस अवस्था पर निर्धारित हो जाता है जो कि अगली उच्च अवस्था अथवा अवस्थाओं वाले संशोधित वेतन बैंड वाले कर्मचारियों को प्राप्त हो रहा है, तब ऐसी स्थिति में बाद वाले कर्मचारी का वेतन उस सीमा तक बढ़ाया जाएगा जब तक कि वह पिछले कर्मचारी के वेतन की तुलना में कम हो ।
(iii) वेतन बैंड में वेतन उपर्युक्त तरीके से निर्धारित होगा। वेतन बैंड में वेतन के अलावा मौजूदा वेतनमान के अनुरूप येड वेतन भी देय होगा ।
(ख) सेवा के उस सदस्य, जो भारत के बाहर 1 जनवरी, 2006 को प्रतिनियुक्ति अथवा छुट्टी अथवा विदेश सेवा पर था अथवा जो उच्चतर पद पर कार्य करने के अलावा एक या अधिक निम्नतर पदों पर उस तारीख को कार्य किया होता, के मामले में “विचमान वेतनमान” में, उस पद जिस पर वह उच्चतर पद पर कार्य करने के अलावा भारत के बाहर प्रतिनियुक्ति अथवा छुट्टी अथवा विदेश सेवा अथवा, जैसा भी मामला हो, के लिए लागू वेतनमान शामिल है ।
(ग) सेवा के उन सदस्यों के मामले में जो कि मौजूदा वेतनमान में वेतन के अलावा विशेष वेतन अथवा भत्ता कर रहे हैं तथा जिनके लिए स्थानापन्न तौर पर किसी विशेष वेतन अथवा भत्तों के बिना ही कोई वेतन बैंड येड वेतन दिया गया है, ऐसे सदस्यों का वेतन संशोधित वेतन ढांचे में ऊपर (क) के उप खण्ड में निहित प्रावधानों के अनुसार ही किया जाएगा ।
(घ) सेवा के उन सदस्यों के मामले में जो कि वर्तमान वेतनमानों में मिल रहे वेतन के अतिरिक्त किसी अन्य नाम से विशेष वेतन घटक प्राप्त कर रहे हैं, जैसे कि छोटे परिवार के मानकों को प्रोत्साहन देने के लिए व्यक्तिगत वेतन, केन्द्रीय ( कार्यकाल पर प्रतिनियुक्ति ) भत्ता, आदि तथा जिनके मामले में इनके स्थान पर साइश्य भत्ता अथवा वेतन के साथ संशोधित
वेतन ढांचा लागू कर लिया गया है, के मामले में संशोधित वेतन ढांचा उपर्युक्त धारा (क) के प्रावधानों के अनुरूप निर्धारित होंगे ऐसे मामलों में संस्तुत नई दरों पर भत्ते, इन भत्तों से संबंधित वैयक्तिक अधिसूचनाओं में विनिर्दिष्ट तारीख से संशोधित वेतन ढांचे में मिलने वाले वेतन के अतिरिक्त मिलेंगे ।
टिप्पणी 1- निलंबनाधीन सेवा का सदस्य वेतन के विधमान वेतनमान पर आधारित निर्वाह भत्ता लेता रहेगा और संशोधित वेतन ढांचे में उसका वेतन लंबित अनुशासनिक कार्यवाहियों पर अन्तिम आदेश के अध्यधीन होगा ।
टिप्पणी 2- सेवा के किसी सदस्य की “मौजूदा परिलब्धियां” संशोधित परिलब्धियों से अधिक हो जाती है तो उस अन्तर को वेतन में होने वाली भावी वृद्धियों में व्यकिगत वेतन के रूप में समाहित करने की अनुमति होगी ।
स्पष्टीकरण- इस टिप्पणी के उद्देश्य के लिए, “मौजूदा परिलब्धियों” से अभिप्राय
(i) मौजूदा मूल वेतन (ii) मूल वेतन पर मंहगाई वेतन और (iii) मौजूदा मूल वेतन पर मंहगाई भत्ता + औसत सूचकांक 536(1982=100) पर मंहगाई वेतन
टिप्पणी 3- जहां उप नियम (1) के अधीन वेतन निर्धारण में सेवा का कोई सदस्य जो मौजूदा वेतनमान में 1 जनवरी, 2006 के तुरंत पहले समान कैडर के किसी कनिष्ठ कर्मचारी की तुलना में अधिक वेतन प्राप्त कर रहा था और संशोधित वेतन बैंड में उसका वेतन एक ऐसी अवस्था पर निर्धारित हो जाता है जो कि उसके कनिष्ठ से कम हो तब ऐसी स्थिति में उसका वेतन संशोधित वेतन बैंड में उसी अवस्था में बढा दिया जाएगा जिस अवस्था पर वह कनिष्ठ कर्मचारी हो ।
टिप्पणी 4- जहां सेवा को कोई सदस्य 1 जनवरी, 2006 को व्यकिगत वेतन प्राप्त कर रहा हो और जो उसकी मौजूदा परिलब्धियों से जुडने पर संशोधित परिलिब्धियों से अधिक हो जाती है, तो उस अंतर को वेतन में होने वाली वृद्धियों में उस सेवा के किसी सदस्य के व्यकिगत वेतन के रूप में समाहित करने की अनुमति होगी ।
टिप्पणी 5- उस सेवा के सदस्य के मामले में जो 1 जनवरी, 2006 के पूर्व “हिन्दी शिक्षण योजना” के अन्तर्गत हिन्दी प्राज और ऐसी अन्य परीक्षाएं उत्तीण करने के लिए व्यकिगत वेतन प्राप्त कर रहा है, उनका यह अव्यकिगत
वेतन संशोधित वेतन संरचना में मूल वेतन के निर्धारण के लिए शामिल नहीं किया जाएगा, वे 1 जनवरी, 2006 से या उससे आगे की अवधि के लिए संशोधित वेतन ढांचे में उस व्यक्तिगत वेतन को प्राप्त करते रहेंगे जो कि वे संशोधित वेतन ढांचे का निर्धारण न होने की दशा में प्राप्त करते । ऐसा व्यक्तिगत वेतन, निर्धारण की तिथि से संशोधित वेतन ढांचे में वेतन वृद्धि की उचित दर से उस अवधि तक के लिए दिया जाएगा जिस अवधि तक अधिकारी उसे प्राप्त करना जारी रखता ।
स्पष्टीकरण : इस टिप्पणी के प्रयोजन के लिए “संशोधित वेतन ढांचे में वेतनवृद्धि की उपयुक्त दर” का तात्पर्य वेतन बैंड में वेतन के कुल के 3 प्रतिशत के बराबर धनराशि तथा उस स्तर पर येड वेतन है जिस पर कर्मचारी का वेतन, संशोधित वेतन ढांचे में नियत किया गया है ।
टिप्पणी 6 – जहां दिनांक 01 जनवरी, 2006 से पूर्व किसी उच्च्तर पद पर पदोन्नत किया गया सेवा का कोई ज्येष्ठ सदस्य अपने कनिष्ठ सदस्य से पुनरीक्षित वेतनमान में कम वेतन प्राप्त करता है, जो 01 जनवरी, 2006 को या उसके पश्चात उच्चतर पद पर पदोन्नत किया गया है वहां सेवा के ज्येष्ठ सदस्य के वेतन बैंड में वेतन को उस उच्चतर पद में उसके कनिष्ठ सदस्य के वेतन बैंड में नियत किए गए वेतन के बराबर राशि तक बढ़ाया जाएगा और वेतन के बढ़ाए (स्टेप-अप) जाने को निम्नलिखित शर्तों को पूरा करने के अध्यधीन सेवा के कनिष्ठ सदस्य की पदोन्नति की तारीख से प्रभावी किया जाएगा अर्थात् :-
(क) सेवा के कनिष्ठ और वरिष्ठ दोनों सदस्य उसी काइर के होंगे और वह पद जिन पर उन्हें पदोन्नत किया गया है उसी काइर में सइश होंगे;
(ख) निम्नतर और उच्चतर पदों के पूर्व संशोधित वेतनमान और संशोधित येड वेतन जिसमें वे वेतन पाने के हकदार हैं, एक-समान होंगे;
(ग) पदोन्नति के समय सेवा का ज्येष्ठ सदस्य कनिष्ठ के बराबर या अधिक वेतन पा रहा हो और;
(घ) विषमता, इस उप नियम के उपबंधों के लागू करने के परिणामस्वरूप प्रत्यक्षत: होगी;
(ड.) यहां तक कि यदि निम्नतर पद में कनिष्ठ अधिकारी उसको अनुदत् किन्हीं अग्रिम वेतनवृद्धियों के कारण ज्येष्ठ व्यक्ति से पूर्व संशोधित वेतनमान में अधिक वेतन प्राप्त कर रहा था, तो इस टिप्पणी के प्रावधानों को सेवा के ज्येष्ठ सदस्य के वेतन को बढ़ाने के लिए विखंडित किए जाने की आवश्यकता है ।
टिप्पणी 7:- उपरोक्त उपबंधों के अनुसरण में सेवा के ज्येष्ठ सदस्य के वेतन में पुनः नियतन से संबंधित आदेश सुसंगत नियमों के अधीन जारी किया जाएगा और सेवा का ज्येष्ठ सदस्य वेतन के पुन: नियतन की तारीख से उसके द्वारा अपेक्षित सेवा पूरी करने पर अगली वेतनवृद्धि का हकदार होगा ।
(ड.) दिनांक 01 जनवरी, 2006 के बाद संशोधित वेतनमान में वेतन का निर्धारण- जहां सेवा का कोई सदस्य मौजूदा वेतनमान में वेतन आहरित करना जारी रखता है और 01 जनवरी, 2006 के बाद किसी तारीख से संशोधित वेतन ढांचे का विकल्प देता है तो संशोधित वेतन ढांचे में उसका वेतन, बाद वाली तारीख से इन्हीं नियमों के तहत निर्धारित किया जाएगा और इस प्रयोजन के लिए मौजूदा वेतनमान में उसका वेतन खंड (क), (ग) अथवा (घ) जैसी भी स्थिति हो, के अनुसार यथा परिकलित मौजूदा परिलब्धियों के मामले के बराबर होगा, परन्तु इस शर्त के अध्यधीन कि बाद वाली तारीख में मूल वेतन और जहां सेवा का सदस्य सेवा विशेष भत्ता प्राप्त कर रहा है, उसका वेतन इस प्रकार परिकलित परिलब्धियों के उपयुक्त संशोधित दरों पर विशेष भत्ते के समान धनराशि की उन परिलब्धियों में से घटाकर नियत किया जाएगा ।
5. उपर्युक्त नियमावली के नियम 4 में :-
(क) उप नियम (1) के स्थान पर निम्नलिखित उप नियम प्रतिस्थापित किया जाएगा ।
” (1) सीधी भर्ती के अधिकारी का प्रारंभिक वेतन, 5400 रूपए के ग्रेड वेतन सहित वेतन बैंड-3 के न्यूनतम पर निर्धारित किया जाएगा;
परन्तु यह कि यदि सीधी भर्ती का कोई अधिकारी भारतीय प्रशासनिक सेवा में उसकी नियुक्ति से पूर्व उस पर लागू नियमों के तहत लियत रखता है, अथवा लियत रखता
यदि उसका लियन स्थायी आधार पर निलंबित न कर दिया गया होता, उसका आरंभिमक वेतन निम्नलिखित तरीके से विनियमित किया जाएगा अर्थात:-
(क) वह, परिवीक्षा की अवधि के दौरान स्थायी पद का वेतन आहरित करेगा, यदि यह कलिष्ठ वेतनमान और भारतीय प्रशासनिक सेवा में स्थायीकरण होने पर उसके वेतनमान के न्यूनतम से अधिक है;
(ख) यदि वह भारतीय प्रशासनिक सेवा में नियुक्ति से पूर्व किसी समूह ‘क’ के पद को धारण किए हुए था, उसका वेतन, उस स्तर पर निर्धारित किया जाएगा जैसा कि वेतन बैंड-3 जमा योड वेतन 5400 में समूह ‘क’ के लिए किया जाएगा; और
(ग) यदि वह समूह ‘क’ से किसी निम्नतर पद को धारण किए हुए था तो उसका वेतन, वेतन बैंड-3 में वेतन बैंड और योड वेतन के 3 प्रतिशत के बराबर एक वेतनवृद्धि देकर नियत किया जाएगा जिसे 10 के अगले गुणज तक संगणित और पूरा किया जाएगा तथा इस प्रकार जो वेतन बनता है और यदि यह वेतन, वेतन बैंड-3 के न्यूनतम वेतन से कम है तो उसका वेतन, वेतन बैंड-3 के न्यूनतम पर निर्धारित किया जाएगा;
(घ) तथापि, कलिष्ठ वेतनमान में वह कोई वेतनवृद्धि प्राप्त नहीं करेगा, जब तक कि अपनी सेवा अवधि के हिसाब से वह किसी उच्चतर वेतन के लिए पात्र नहीं बन जाता !
परन्तु यह और कि वह नियम 7 के तहत अनुजेय वेतन आहरित करेगा, यदि वह पूर्ववर्ती परन्तुक में उल्लिखित वेतन से अधिक है;
(ख) उप नियम (2) के स्थान पर निम्नलिखित उप-नियम प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
“(2) वरिष्ठ समय वेतनमान के पद पर पदोन्नत होने पर कलिष्ठ वेतनमान के सेवा के सदस्य का वेतन संशोधित वेतन ढ़ाचे में निम्नानुसार निर्धारित किया जाएगा :
भारतीय प्रशासनिक सेवा के कलिष्ठ वेतनमान के लिए पे बैंड के कुल वेतन और मौजूदा योड-पे के $3 \%$ के बराबर सैद्धान्तिक आधार पर एक वेतनवृद्धि दी जाएगी और इसे अगले 10 के गुणज तक पूरा किया
जाएगा तथा इसे उनके मौजूदा वेतन में जोड़ दिया जाएगा । इसके पश्चात् सैद्धान्तिक आधार पर एक वेतनवृद्धि और वरिष्ठ समय वेतनमान की 6600 रूपए की तदनुरूपी येड-पे को जोड़कर $3 \%$ की दर से दो अतिरिक्त वेतनवृद्धियों की गणना की जाएगी और उसे अगले 10 के गुणज के बराबर कर दिया जाएगा और इसे पे-बैंड -3 के मौजूदा वेतन में जोड़ दिया जाएगा ताकि भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ समय वेतनमान का वेतन आकलित किया जा सके और दूसरी वेतनवृद्धि की गणना पे-बैंड तथा मौजूदा येड-पे में पहली वेतनवृद्धि और वरिष्ठ समय वेतनमान की 6600 रूपए की येड-पे जोड़कर पे-बैंड में इस वेतन के अतिरिक्त स्वीकृत किया जाएगा ।
(ग) उप नियम(5) के स्थान पर निम्नलिखित उप-नियम प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात :-
“(5) कलिष्ठ प्रशासनिक येड में पदोन्नति होने पर वरहि समय वेतनमान में सेवा के सदस्य का वेतन, पे-बैंड-3 में उसी प्रकार निर्धारित किया जाएगा जैसे कलिष्ठ समय समय वेतनमान से वरिष्ठ समय वेतनमान में पदोन्नति होने पर पे-बैंड-3 के वेतन तथा 7600 रूपए की येड-पे में $3 \%$ की दर से 2 अतिरिक्त वेतनवृद्धियों को जोड़कर किया जाता है जिसकी गणना अगले 10 के गुणज द्वारा पूरा करके की जाती है और इसे पे-बैंड 3 के मौजूदा वेतन में 7600 रूपए की येड पे जोड़कर किया जाता है ।
(घ) उप नियम-(6) के लिए निम्नलिखित उप-नियम को पदस्थापित किया जाएगा, अर्थात :-
” (6) कलिष्ठ प्रशासनिक येड में सेवा के सदस्य की चयन येड में पदोन्नति होने पर उसका वेतन पे-बैंड-4 में न्यूनतम पे-बैंड तथा येड-पे की गणना के दो अतिरिक्त वेतनवृद्धियों को स्वीकृत करके निर्धारित किया जाएगा तथा 8700 रूपए का गेड-पे चयन गेड के लिए स्वीकृत किया जाएगा “;
(ड.) उप नियम (7) के लिए निम्नलिखित उप नियम पदस्थापित किया जाएगा, अर्थात:-
(7) चयन येड में सेवा के किसी सदस्य का, सुपर समय वेतनमान में पदोन्नति होने पर तथा सुपर समय वेतनमान से ऊपर के वेतनमान में
पदोन्नति होने पर सुपर समय वेतनमान में वेतन का निर्धारण वेतन-बैंड-4 में उसके वेतन और मौजूदा येड के $3 \%$ के बराबर एक वेतनवृद्धि को उनके सुपर समय वेतनमान से और सुपर समय वेतनमान से ऊपर के वेतनमान, जैसी भी स्थिति हो, की मौजूदा वेतन और वेतन बैंड-4 का तदुरूपी येड वेतन में जोडकर आकलित किया जाएगा । और इसे अगले 10 के गुणज के बराबर किया जाएगा और उसे वेतन बैंड में उस वेतन के अतिरिक्त दिया जाएगा ।
(च) उप नियम (8) के स्थान पर निम्नलिखित उप नियम प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात :-
“(8) सेवा में एक येड से दूसरे येड में पदोन्नत होने पर सेवा के सदस्य के पास विकल्प होगा कि वह अपना वेतन, उच्चतर पद के पे-बैंड में या तो अपनी पदोन्नति की तारीख से या उस वर्ष की पहली जुलाई से निर्धारित करा सके, जब वह उपर्युक्त संगत उप-नियम में किए गए प्रावधान के अनुसार निचले वेतनमान में तदनुरूप बाद की वेतनवृद्धि अर्जित करता है । बाद वाले मामले में, पदोन्नति की तिथि को पे-बैंड में वेतन, निचले पद के समान ही निर्धारित किया जाएगा परन्तु येड-पे उच्चतर पद की ही होगी तथा इसका पुनर्निर्धारण संबंधित उप-नियमावली में किए गए प्रावधान के अनुसार एक जुलाई, जो निचले वेतनमान में वास्तविक वेतनवृद्धि की तिथि है, से किया जाएगा ।”
6. उक्त नियमावली के नियम-5 में –
(i) उप नियम(1) के स्थान पर निम्नलिखित उप नियम प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात :-
“(1)(क) इन नियमों के नियम 6 या नियम 7 के अन्तर्गत संबंधित राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए किसी आदेश के अध्यधीन भारतीय प्रशासनिक सेवा (भर्ती) नियमावली 1954 के नियम 7 या नियम 7क के अंतर्गत नियुक्त सेवा के सदस्य को अनुजेय वेतनवृद्धि प्रत्येक वर्ष की पहली जुलाई को एकसमान रूप से दी जाएगी;
(ख) संशोधित वेतन ढांचे में एक जुलाई को 6 माह या इससे अधिक पूरा करने वाले अधिकारी, वेतनवृद्धि पाने के पात्र होंगे ।
(ग) संशोधित वेतन ढांचे में 1 जनवरी, 2006 को वेतन निर्धारण के पश्चात् पहली वेतनवृद्धि दिनांक 1 जुलाई, 2006 को, सेवा के उन सदस्यों को दी जाएगी जिनकी वेतनवृद्धि की अगली तिथि 1 जुलाई, 2006 से 1 जनवरी, 2007 के बीच थी ।
(घ) सेवा के सभी सदस्य जिन्होंने अपनी अन्तिम वेतनवृद्धि 01-01-2005 तथा 01-01-2006 के बीच अर्जित की थी, वे अपनी वेतनवृद्धि 01-07-2006 को अर्जित करेंगे ।
बशर्ते कि उन व्यक्तियों के मामलो में, जो 01 जनवरी, 2006 की स्थिति के अनुसार एक वर्ष से अधिक की अवधि के लिए मौजूदा वेतनमान के अधिकतम पर थे, उन्हें संशोधित वेतन ढांचा में अगली वेतनवृद्धि 01 जनवरी, 2006 से दी जाएगी, उसके बाद इस नियम के प्रावधान लागू होंगे :
बशर्ते यह भी कि यदि सेवा का सदस्य जहाँ अपने वेतन बैंड के अधिकतम पर पहुँच जाता है, वह उस अधिकतम पर पहुँचने के एक वर्ष बाद अगले उच्चतर वेतन बैंड में आ जाएगा तथा उसे उच्चतर वेतन बैंड में रखे जाने के समय, उसे एक वेतनवृद्धि का लाभ दिया जाएगा, उसके बाद उसके उस वेतन बैंड के अधिकतम पर पहुँचने तक वह उच्चतर वेतनबैंड में चलता रहेगा, जिसके बाद उसे कोई अगली वेतनवृद्धि नहीं दी जाएगी” ;
(ii) उप-नियम (2) और (3) का लोप कर दिया जाएगा ;
(iii) “वेतनमान” और “वेतन का मान” शब्दों के लिए उप-नियम (6) में “वेतन बैंड और येड वेतन” शब्द प्रतिस्थापित होंगे ;
7. उपर्युक्त नियमों के नियम 5-क के लिए निम्नलिखित नियम प्रतिस्थापित होंगे, अर्थात् :-
“5क संशोधित वेतन ढांचा में वेतनवृद्धि की दर”:-
(1) संशोधित वेतन ढांचा में वेतनवृद्धि की दर, लागू वेतन बैंड और येड वेतन में वेतन की राशि के $3 \%$ के बराबर होगी, जो 10 की गुणा पर पूर्ण होगी तथा उस राशि को वेतन बैंड में मौजूदा वेतन में जोड़ा जाएगा ।
(2) वेतन बैंड-3 के मामले में, $3 \%$ और $4 \%$ पर वेतनवृद्धि की अलग-अलग दरें दी जाएं ।
(3) वेतनवृद्धि की उच्चतर दर, वेतन बैंड-3 में अधिकारियों की पद संख्या के $20 \%$ से अधिक को नहीं दी जाएगी ।”
8. उपर्युक्त नियमों के नियम 7 के लिए, निम्नलिखित नियम प्रतिस्थापित होंगे :-
“(7) – अग्रिम वेतनवृद्धि प्रदान करना – भारतीय प्रशासनिक सेवा (परिवीक्षा) सेवा की अवधि पर ध्यान दिए बिना उसके निर्धारित विभागीय परीक्षा या परीक्षाओं को उत्तीर्ण कर लेने के बाद वेतनवृद्धि की निर्धारित तारीख से सीधे भर्ती किए गए व्यक्ति को देय दूसरी और तीसरी वेतनवृद्धियाँ स्वीकृत करेंगी ।
बशर्ते कि इस नियम के अंतर्गत तीसरी वेतनवृद्धि, निर्धारित विभागीय परीक्षा, या अंतिम निर्धारित विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण करन के बाद परिवीक्षा को सफलतापूर्वक पूरा करने और स्थायीकरण पर जैसी भी स्थिति हो, वेतनवृद्धि की निर्धारित तारीख से पूर्व-प्रभावी दी जाएगी :
बशर्ते कि यह भी कि सीधे भर्ती किए गए कोई व्यक्ति, जिसे पूरी विभागीय परीक्षा या परीक्षाओं या विभागीय परीक्षा या परीक्षाओं का किसी भाग में, जैसी भी स्थिति हो, इस कारण से उपस्थित होने से छूट दी गई है, कि उसने, सेवा का सदस्य होने से पूर्व, ऐसी परीक्षा या परीक्षाओं या उनके किसी भाग को पहले ही उत्तीर्ण कर लिया है, को, इस नियम के प्रयोजनार्थ, उस पूर्व परीक्षा या परीक्षाओं या उनके भाग, जिनमें वह उपस्थित होता, की तारीख के बाद विभागीय परीक्षा या परीक्षाओं या उनके भाग, जैसी भी स्थिति हो, को उत्तीर्ण किया गया माना जाएगा, लेकिन छूट के लिए, सेवा का सदस्य होने के बाद” ।
9. उपर्युक्त नियमों के नियम 9 में, उप-नियम (7) में, “26000 रुपए” शब्द और अंकों के लिए “80000 रुपए” शब्द और अंक प्रतिस्थापित होंगे ।
10. उपर्युक्त नियमों की अनुसूची में,
(क) “01 जनवरी, 1996” शब्द और अंकों के लिए, जहाँ कहीं ये आते हैं, क्रमश: “01 जनवरी, 2006” शब्द और अंक प्रतिस्थापित होंगे ;
(ख) पैरा (1) के लिए, निम्नलिखित पैरा प्रतिस्थापित होंगे :-
“(1) के नियम 3 के उप-नियम (1) में प्रथम उपबंध तथा उसके अंतर्गत टिप्पणियों में किसी बात के होते हुए, पदोन्नत अधिकारी या चयन द्वारा नियुक्त किसी अधिकारी, जैसी भी स्थिति हो, का आरंभिक वेतन, निम्नलिखित तरीके से अधिकारी की पात्रता के अनुसार तीन घटक वरिष्ठ वेतनमानों के लिए अनुज्ञेय एक ग्रेड वेतन के अतिरिक्त राज्य सेवा में वेतन बैंड-3 या वेतन बैंड-4 में अधिकारी द्वारा आहरित वेतन पर नियत किया जाएगा ।
| वेतन बैंड में वेतन | ग्रेड- पे |
|---|---|
| वेतन बैंड-3 में 29490 रूपए तक के वेतन में अधिकारी | $6600 /-$ |
| वेतन बैंड-3 में 29491 रूपए से 30690 रूपए के | $7600 /-$ |
| मध्य वेतन में अधिकारी | |
| वेतन बैंड-3/वेतन बैंड-4 में 30691 रूपए अथवा उससे | $8700 /-$ |
| ऊपर के वेतन में अधिकारी |
यदि राज्य सेवा में अधिकारी का वेतन 1 जनवरी, 2006 से नए वेतन ढांचे के अनुसार संशोधित नही किया गया है, इसे नियम 3क में समाविष्ट प्रावधानों के आधार पर संशोधित किया जाएगा । 11. उक्त नियमों की अनुसूची II में,- (क) “क-राज्य सरकार के अधीन भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ वेतनमान से ऊपर के वेतन में पद । अनुसूची II” शब्दों और अंकों के लिए निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाएगा :-
“अनुसूची II
भाग-क
राज्य सरकारों के अधीन भारतीय प्रशासनिक सेवा में वरिष्ठ वेतनमान से ऊपर के वेतन में पद “; (ख) अनुसूची II, भाग-क में सभी स्थानों पर “26000 रूपए”, “22400-52524500” और “18400-500-22400” शब्दों और अंकों के लिए, वेतन ढांचा “80000”, “वेतन बैंड-4:37400-67000रूपए जमा ग्रेड
वेतन 12000 रूपए” और “वेतन बैंड-4: 37400-67000रूपए जमा योड वेतन 10000 रूपए”, क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाएगा। (ग) भाग-क के अंत में, अंक “ख” के लिए, शब्द और अंक “भाग-ख” प्रतिस्थापित किया जाएगा ; (घ) “ग -सेवा के सदस्यों द्वारा धारित केन्द्रीय सरकार के अधीन पदों और तालिका के स्थान पर” निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
“भाग-ग सेवा के सदस्य द्वारा धारित केन्द्रीय सरकार पद
तालिका
| पद का नाम | वेतनमान | केन्द्रीय (पदावधि पर प्रतिनियुक्ति) भत्ना |
| — | — | — |
| (1) | (2) | (3) |
| (1) मंत्रिमण्डल सचिव | 90000/- रूपए (नियत) | — |
| (2) भारत सरकार के सचिव/भारत सरकार के विशेष सचिव | 80000/- रूपए (नियत) | — |
| (3) भारत सरकार के अपर सचिव | वेतन बैंड-4: 37400-67000 रूपए; और योड वेतन 12000 रूपए | — |
| (4) भारत सरकार के संयुक्त सचिव | वेतन बैंड-4: 37400-67000 रूपए; और योड वेतन 10000 रूपए | — |
| (5) भारत सरकार के निदेशक | चयन योड (वेतन बैंड-4: 3740067000 रूपए; और योड वेतन 8,700/- रूपए) | अधिकतम चार हजार रूपए प्रति मास के अध्यधीन मूल वेतन का दस प्रतिशत |
| (6) भारत सरकार के उप सचिव | चयन योड: (वेतन बैंड-4: 3740067000 रूपए; और योड वेतन 8,700/- रूपए)
या
कनिष्ठ प्रशासनिक योड: वेतन बैंड-
3: 15600-39100 रूपए; और योड वेतन 7600 रूपए | अधिकतम चार हजार रूपए प्रति मास के अध्यधीन मूल वेतन का दस प्रतिशत |
| (7) भारत सरकार के अवर सचिव | कनिष्ठ प्रशासनिक योड: वेतन बैंड- 3: 15600-39100 रूपए; और योड वेतन 7600 रूपए या वरिष्ठ समय वेतनमान (योड: वेतन बैंड-3: 15600-39100 रूपए; और योड वेतन 6600 रूपए |
अधिकतम चार हजार रूपए प्रति मास के अध्यधीन मूल वेतन का दस प्रतिशत |
|---|---|---|
टिप्पणी – इस नियम में विनिर्दिष्ट केन्द्रीय (कार्यावधि पर प्रतिनियुक्ति) भत्ना, सेवा के किसी सदस्य को सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित प्रतिनियुति की अवधि के लिए दिया जाएगा” ।
[फा. सं. 14021/1/2008-अ.भा.से. (II)-क]
हरजोत कौर, निदेशक
टिप्पणी : मूल नियम भारत के असाधारण राजपत्र में सा.का.नि.सं. 213(अ), तारीख 20 मार्च, 2007 द्वारा प्रकाशित किए गए थे और तत्पश्चात् सा.का.नि.सं.23(अ)दिनांक 10 जनवरी, 2008 द्वारा संशोधन किए गए ।
व्याख्यात्मक ज्ञापन
केन्द्रीय सरकार ने यथा अनुमोदित संशोधन के अनुसार भारत सरकार के दिनांक 29 अगस्त, 2008 के संकल्प सं. 1/1/2008-आईसी में यथा विहित अखिल भारतीय सेवाओं के वेतनमानों में संशोधन के संबंध में छठे केन्द्रीय वेतन आयोग द्वारा की गई सिफारिशों को दिनांक 1 जनवरी, 2006 से कार्यान्वित करने का निर्णय किया है । इन सिफारिशों को कार्यान्वित करने के मद्देनजर, भारतीय प्रशासनिक सेवा (वेतन) नियमावली, 2007 को । जनवरी, 2006 से तदुसार संशोधित किया जा रहा है ।
यह प्रमाणित किया जाता है कि इन नियमों को भूतलक्षी प्रभाव से लागू किए जाने से भारद्वीय प्रशासनिक सेवा के किसी भी सदस्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।