This notification introduces significant amendments to the Central Civil Services (Conduct) Rules, 1964. The key changes focus on reinforcing the conduct expected of civil servants. These include a commitment to uphold the Constitution, democratic values, sovereignty, integrity, public order, decency, and morality. Civil servants are now explicitly required to maintain high ethical standards, integrity, impartiality, and transparency in their duties. They must also be responsive to the public, particularly vulnerable sections, and ensure judicious use of public resources. The rules emphasize fair decision-making based on merit and prohibit any form of financial or other gratification that could influence official conduct. Furthermore, civil servants are expected to maintain political neutrality and avoid any action that could prejudice India’s integrity, security, economic interests, or international relations. Confidentiality regarding sensitive information is also underscored. The amendments aim to foster a more accountable, efficient, and ethical civil service.
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परीक्षा के दौरान The Gazette of India
असाधारण
EXTRAORDINARY
भाग II—खण्ड 3—उप-खण्ड (i)
PART II—Section 3—Sub-section (i)
प्राधिकार से प्रकाशित
PUBLISHED BY AUTHORITY
सं. 626] नई दिल्ली, बृहस्पतिवार, नवम्बर 27, 2014/अप्रहायण 6, 1936
No. 626] NEW DELHI, THURSDAY, NOVEMBER 27, 2014/AGRAHAYANA 6, 1936
कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय (कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग)
अधिसूचना
नई दिल्ली, 27 नवम्बर, 2014
सा.का.नि. 845(अ).—संविधान के अनुच्छेद 309 के परंतुक और अनुच्छेद 148 के खण्ड (5).द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए और भारतीय लेखा परीक्षा एवं लेखा विभाग में कार्यरत कार्मिकों के संबंध में भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक के परामर्श से, राष्ट्रपति केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियमावली, 1964 में आगे संशोधन करने के लिए एतद्वागत निम्नलिखित नियम बनाते हैं, अर्थात्:-
- (1) इन नियमों को केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) (तृतीय संशोधन) नियमावली, 2014 कहा जाएगा।
- (2) ये राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख को प्रवृत्त होंगे।
-
केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियमावली, 1964 के नियम 3 के उप नियम (1) में खण्ड (iii) के पश्चात् निम्नलिखित खण्ड जोड़े जाएंगे, अर्थात्:-
- (iv) संविधान की सर्वोच्चता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति वचनबद्ध रहेगा;
- (v) भारत की संप्रभुता और अखंडता, राष्ट्र, सार्वजनिक व्यवस्था, शिष्टता एवं नैतिकता की रक्षा करेगा एवं उसकी मर्यादा को बनाए रखेगा;
- (vi) उच्च नैतिक मानकों और ईमानदारी को बनाए रखेगा;
- (vii) राजनीतिक तटस्थता बनाए रखेगा;
- (viii) कर्त्तव्यों के निर्वहन में योग्यता, ईमानदारी और निष्पक्षता के सिद्धांतों को बढ़ावा देगा;
- (ix) जवाबदेही और पारदर्शिता बनाए रखेगा;
- (x) जनता, विशेषत: कमजोर वर्गों के प्रति अनुक्रियाशील बना रहेगा;
4690 GI/2014 (1)
(xi). जनता के साथ शिष्ट और सद ब्यबहार बनाए रखेगा;
(xii). केवल लोकहित में निर्णय लेगा, सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग कार्यकुशलता और प्रभावी ढंग से तथा मितव्ययिता से करेगा और करवाएगा;
(xiii). अपने सार्वजनिक कर्त्तव्यों से जुडे किसी निजी हित को प्रकट करेगा एवं किसी अंतर्विरोध का समाधान करने के लिए ऐसे कदम उठाएगा जिससे लोक हित की रक्षा होती हो;
(xiv). किसी ब्यक्ति अथवा संगठन से किसी प्रकार का विल्तीय अथवा अन्य प्रकार का आभार स्वीकार नहीं करेगा जिससे सरकारी कार्य का निष्पादन प्रभावित हो;
(xv). सिविल सेवक के रूप में अपने पद का दुरुपयोग नहीं करेगा और न ही सृवयं के लिए, अपने परिवार के लिए या मित्रों के लिए विल्तीय एवं भौतिक संसाधन के रूप में लाभ प्राप्त करने के लिए कोई निर्णय लेगा;
(xvi). केवल योग्यता के आधार पर निर्वचन करेगा, निर्णय लेगा और सिफारिश करेगा।
(xvii). ईमानदारी एवं निष्पक्षता से कार्य करेगा एवं किसी के प्रति विशेषकर समाज के गरीब एवं सुविधाओं से वंचित वर्गों के प्रति भेदभाव नहीं करेगा;
(xviii). किसी कानून, नियम, विनियम एवं स्थापित परिपाटियों के विरुद्ध कोई कार्य करने से विरत रहेगा;
(xix). अपने कर्त्तव्य पालन के प्रति अनुशासित रहेगा और स्वयं को संसूचित विधि सम्मत् आदेशों का पालन करेगा;
(xx). तत्सामयिक किसी कानून में की गई अपेक्षा के अनुसार विशेषकर ऐसी सूचना, जिसके प्रकटन से भारत की अखण्डता, राष्ट्र की सुरक्षा, राष्ट्र के रणनीतिक, वैज्ञानिक या आर्थिक हित, विदेशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हो या किसी अपराध के लिए दुष्पेरणा मिलती हो या किसी ब्यक्ति को अवैध या गैर-कानूनी लाभ प्राप्त होता हो, के संबंध में अपने शासकीय दायित्व का निर्वहन करते हुए गोपनीयता बनाए रखेगा;
(xxi). अपनी उच्चतर पेशेवर योग्यता और समर्पण के साथ कर्त्तव्य का निर्वहन करेगा।”
[फा. सं. 11013/6/2014-स्था.क]
ममता कुंद्रा, संयुक्त सचिव
टिप्पणी : मुख्य नियम, दिनांक 12 दिसम्बर, 1964 की का.आ. 4177 के तहत भाग-II, खण्ड 3, उप-खण्ड (ii) द्वारा भारत के राजपत्र में प्रकाशित किए गए थे और तत्पश्चात् निम्नलिखित संशोधन किए गए थे :-
- का.आ. 482, दिनांक 14 फरवरी, 1970;
- का.आ. 3643, दिनांक 4 नवम्बर, 1972;
- का.आ. 83, दिनांक 13 जनवरी, 1973;
- का.आ. 846, दिनांक 28 फरवरी, 1976;
- का.आ. 2563, दिनांक 17 जुलाई, 1976;
- का.आ. 2691, दिनांक 24 जुलाई, 1976;
- का.आ. 4663, दिनांक 11 दिसम्बर, 1976;
- का.आ. 2859, दिनांक 17 सितम्बर, 1977;
- का.आ. 2859, दिनांक 30 सितम्बर, 1978;
- का.आ. 3, दिनांक 6 जनवरी, 1979;
- का.आ. 1270, दिनांक 10 मई, 1980;
- का.आ. 4812, दिनांक 19 अक्तूबर, 1985;
- का.आ. 935, दिनांक 8 मार्च, 1986;
- का.आ. 1124, दिनांक 22 मार्च, 1986;
- का.आ. 3159, दिनांक 20 सितम्बर, 1986;
- का.आ. 3280, दिनांक 27 सितम्बर, 1986;
- का.आ. 1965, दिनांक 8 अगस्त, 1987;
- का.आ. 1454, दिनांक 14 मई, 1988;
- का.आ. 2582, दिनांक 6 अक्तूबर, 1990;
- का.आ. 3132, दिनांक 26 दिसम्बर, 1992;
- सा.का.नि. 355, दिनांक 29 जुलाई, 1995;
- सा.का.नि. 637, दिनांक 31 अगस्त, 1996;
- सा.का.नि. 49, दिनांक 7 मार्च, 1998;
- सा.का.नि. 342, दिनांक 23 अक्तूबर, 1999;
- सा.का.नि. 458, दिनांक 27 दिसम्बर, 2003;
- सा.का.नि. 376, दिनांक 22 अक्तूबर, 2005;
- सा.का.नि. 8, दिनांक 31 जनवरी, 2009;
- सा.का.नि. 370(अ), दिनांक 9 मई, 2011
- सा.का.नि. 149(अ), दिनांक 4 मार्च, 2014 और
- सा.का.नि. 823(अ), दिनांक 19 नवम्बर, 2014