Amendment to All India Services (Death-cum-Retirement Benefit) Rules, 1958

A

The Ministry of Personnel, Public Grievances and Pensions has issued a notification amending the All India Services (Death-cum-Retirement Benefit) Rules, 1958. These amendments, effective from their publication in the Official Gazette, redefine ‘Account Officer’ to include anyone responsible for accounting for a Central Government or State Government or Union Territory ministry, department, or office, including the Accountant General. Key changes include provisions for calculating ’emoluments’ for retirement or death benefits, incorporating leave encashment and average Dearness Allowance. The rules also specify how pension and family pension are to be calculated, including provisions for additional pension for elderly pensioners and detailed guidelines for family pension eligibility and disbursement, particularly for dependents of deceased members. Special conditions are outlined for family pensions in cases of disability, incapacitation, and for surviving children and parents, with an emphasis on ensuring that family pensions are disbursed appropriately and do not exceed specified limits. The notification also mandates the submission of family details by service members and updates procedures for claiming family pension.

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The Gazette of India

असाधारण

EXTRAORDINARY

भाग II—खण्ड 3—उप-खण्ड (i)

PART II—Section 3—Sub-section (i)

प्राधिकार से प्रकाशित

PUBLISHED BY AUTHORITY

सं. 3591 नई दिल्ली, मुहम्मदाबाद, जुलाई 18, 2013/आयात 27, 1935
No. 3591 NEW DELHI, THURSDAY, JULY 18, 2013/ASHADHA 27, 1935

कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय

(कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग)

अधिसूचना

नई दिल्ली, 12 जुलाई, 2013

साः का.नि 492(ब) —अखिल भारतीय सेवाएं अधिनियम, 1951 (1951 का 61) की धारा 3 की उप-धारा (1) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए केन्द्र सरकार संबंधित राज्य सरकारों के परामर्श से अखिल भारतीय सेवाएँ (मृत्यु सह सेवानिवृत्ति लाभ) नियम, 1958 में पुनः संशोधन करने के लिए निम्नलिखित नियम बनाती है, नामतः : —

  1. (1) इन नियमों को अखिल भारतीय सेवाएँ (मृत्यु सह सेवानिवृत्ति लाभ) संशोधन नियम, 2013 कहा जा सकेगा।
  2. (2) सरकारी राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से ये नियम प्रवृत्त होंगे।
  3. अखिल भारतीय सेवाएँ (मृत्यु सह सेवानिवृत्ति लाभ) नियम, 1958 (इसे इसके बाद उत्तर नियम कहा जाएगा) के नियम 2, उप-नियम (I)-की धारा (क) के लिए निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, नामतः : — (क) “लेखा अधिकारी” से अभिप्राय किसी भी पदनाम के उत्तर अधिकारी से है जो केन्द्र सरकार या राज्य सरकार या संघ शासित प्रदेश के किसी मंत्रालय, विभाग अथवा कार्यालय का लेखा जोखा रखता है और जिसमें वह महालेखाकार शामिल होता है, जिसे केन्द्र सरकार अथवा राज्य सरकार अथवा संघ राज्य क्षेत्र के लेखा अथवा लेखा के भाग का लेखा जोखा रखने के कार्य सौंपा जाता है।

3171 GI/2013

(I)


(ख) धारा (कक) में, टिप्पणी (VII) के पश्चात निम्नलिखित को जोड़ा जाएगा, नामत: :-
“(VIII) सेवा के ऐसे सदस्य के मामले में जो अपनी सेवा के अंतिम 10 महीनों के दौरान अर्जित अवकाश पर था और एक वेतन वृद्धि अर्जित की, जिसे रोका नहीं गया था, ऐसी वेतन वृद्धि यथापि वास्तव में जटिल नहीं की गई थी पर उसे औसत परिलब्धियों में शामिल कर लिया जाएगा :

बशर्ते कि अर्जित अवकाश 120 दिन से अधिक होने से पूर्व अथवा पहले 120 दिनों के अर्जित की गई हो जहाँ वह छुट्टी एक सौ बीस दिन से अधिक हो” ;

धारा (खख) के लिए निम्नलिखित को पुरःस्थापित किया जाएगा, नामत्:-
“(खख) “परिलब्धियां” से अभिप्राय मूल वेतन, जैसा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (वेतन) नियम 2007 के नियम 2 की धारा (कक) में परिभाषित किया गया हो तथा भारतीय पुलिस सेवा अथवा भारतीय वन सेवा हेतु बनाए गए अन्य संगत नियमों, जैसा भी मामला हो, की सेवा का सदस्य अपनी सेवानिवृत्ति अथवा मृत्यु, जो भी मामला हो, से पूर्व प्राप्त कर रहा था।
(1 जनवरी, 2006 से) सेवानिवृत्ति अथवा मृत्यु उपदान की गणना के प्रयोजनार्थ “परिलब्धियां” से तात्पर्य मूल वेतन एवं मंहगाई भत्ते से है जो सेवा का सदस्य अपनी सेवानिवृत्ति अथवा उसकी मृत्यु की तिथि, जो भी मामला हो, को प्राप्त कर रहा था :

बशर्ते कि उनकी पेंशन और मृत्यु सह सेवानिवृत्ति उपदान जिन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा (वेतन) नियम, 2007 (पूर्व-संशोधित) और भारतीय पुलिस सेवा अथवा भारतीय वन सेवा हेतु बनाए गए संगत नियमों जैसा भी मामला हो, के संदर्भ में पूर्व संशोधित वेतनमान में वेतन आहरित करना जारी रखने का विकल्प दिया हो और 1 जनवरी, 2006 अथवा उसके बाद पूर्व संशोधित वेतनमान में सेवानिवृत्त हो गए हों, को निम्नानुसार विनियमित किया जाएगा :
(i) “परिलब्धियों” में औसत एआईसीपीआई (आधार वर्ष 1982-100) तक मंहगाई वेतन और मंहगाई भत्ता भी शामिल होगा।
(ii) परिलब्धियों के $50 \%$ अथवा औसत परिलब्धियों के रूप में परिकलित पेंशन जो भी कर्मचारी के लिए अधिक लाभप्रद है।
(iii) अखिल भारतीय सेवा (मृत्यु सह सेवानिवृत्ति लाभ) संशोधन, नियम, 2013 के लागू होने से पूर्व लागू आदेश के अंतर्गत उपर्युक्त (i) और मंहगाई भत्ते की परिलब्धियों के संदर्भ में मृत्यु सह सेवानिवृत्ति उपदान देय होगा। पेंशन तथा पेंशनभोगी कल्याण विभाग के कार्यालय ज्ञापन संख्या 45/86/97-पीएंडपीडब्ल्यू(ए)(भाग-I) दिनांक 27-10-1997 के संदर्भ में उपदान की राशि $3,50,000$ रुपए से अधिक नहीं होगी।
(iv) अखिल भारतीय सेवा (मृत्यु सह सेवानिवृत्ति लाभ) संशोधन, नियम, 2013 के लागू होने के ठीक पहले लागू आदेशों के अनुसार पेंशन सारांशीकरण देय होगा।
(v) अखिल भारतीय सेवाएं (मृत्यु सह सेवानिवृत्ति लाभ) संशोधन, नियम, 2013 के पूर्व में लागू आदेशों के अनुसार पारिवारिक पेंशन की अनुमति दी जाएगी और पूर्व संशोधित वेतनमान में मूल वेतन के संदर्भ के साथ इसकी गणना की जाएगी और इस प्रकार से परिकलित परिवार पेंशन, पेंशन तथा पेंशनभोगी कल्याण विभाग के कार्यालय ज्ञापन संख्या 42/2/2006/ पीएवंपीडब्ल्यू (जी) में निहित दर पर एआईसीपीआई 536 (आधार वर्ष 1982-100) की औसत तक मंहगाई राहत की गणना की जाएगी और इस प्रकार परिकलित राशि को


एलाईसीपीआई 536 की औसत से ऊपर मंहगाई राहत का भुगतान विनियमित करने के लिए परिवार पेंशन माना जाएगा।

बशर्ते यह भी कि सेवा के ऐसे सदस्य के मामले में जिसने संशोधित वेतन बैंड में वेतन नियतन का विकल्प दिया है और संशोधित वेतन बैंड में आने की तिथि के 10 माह के भीतर सेवानिवृत्त हो जाता है, सेवानिवृत्ति से 10 माह पूर्व की अवधि के मूल वेतन की निम्नलिखित को ध्यान में रखते हुए वेतन की गणना की जाएगी :
(क) संशोधित वेतन ढांचे में आहरित वेतन की अवधि के दौरान – निर्धारित वेतन बैंड और लागू ग्रेड वेतन अथवा एचएजी+और उपर के मामले में वेतनमान में आहरित वेतन।
(ख) शेष अवधि के लिए जिसमें पूर्व-संशोधित वेतनमान में वेतन आहरित किया जाता है –
(i) संबंधित अवधि के दौरान आहरित एक जनवरी, 2006 की स्थिति के अनुसार लागू दरों पर मूल वेतन के उपयुक्त मूल वेतन+मंहगाई वेतन तथा वास्तविक मंहगाई भत्ता ;
(ii) पूर्व संशोधित वेतनमान में मूल वेतन पर $40 \%$ के फिटमेंट लाभ को लागू कर मूल वेतन की नोशनल वृद्धि :
(घ) खण्ड (ख) हेतु निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाए, नामतः :-
“(ख) “वेतन” से अभिप्राय सेवा के सदस्य द्वारा मासिक रूप से वेतन के रूप में वेतन बैंड जमा ग्रेड वेतन अथवा सेवा से सेवानिवृत्ति के समय इसके द्वारा धारित पद के लिए विशेष वेतन के अलावा वेतनमान में आहरित राशि है’;
(ड.) खण्ड (अञ) हेतु निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाए, नामतः :-
‘(अञ) “संशोधित वेतनमान” से अभिप्राय, जब तक अन्यथा विनिर्दिष्ट किया जाए 01 जनवरी, 2006 से लागू वेतन ढांचा अथवा वेतनमान है’
3. उक्त नियमों के नियम 4 के लिए निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाए, नामत: :-
(1) सेवा का कोई सदस्य एक ही पद पर एक साथ या उसी निरंतर सेवा द्वारा दो पेंशन अर्जित नहीं कर सकता।
(2) नियम 8 के उप-नियम (4) में किए गए प्रावधान को छोड़कर, अधिवर्षिता पेंशन या सेवानिवृत्ति पेंशन पर सेवानिवृत्त होने वाला और तदुपरांत पुन:नियुक्ति पाने वाला सेवा का कोई सदस्य उसकी पुन:नियुक्ति की अवधि पर किसी पृथक पेंशन या उपदान (ग्रैच्युटी) का पात्र नहीं होगा।
4. उक्त नियमों के नियम 5क में, उप-नियम (3) में शब्द, आंकड़े और “या 22ख, जैसा भी मामला हो,” शब्दों का लोप किया जाना चाहिए।
5. उक्त नियमों के नियम 6 में, उप-नियम (1) में, टिप्पण-1 के लिए, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाए, नामत: :-
“टिप्पण-1 – जब पेंशन का कोई अंश रोका जाता है या वापस लिया जाता है तो ऐसे पेंशन की राशि प्रति माह तीन हजार पांच सौ रुपए या केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियमावली, 1972 के समनुरूपी नियमों के तहत किए गए प्रावधान की गई दरों से नीचे नहीं घटानी चाहिए।
6. उक्त नियमों के नियम 7 में, उप-नियम (2) में, शब्द, अंक और अक्षर ” 22 क या 22 ख, जैसा भी मामला हो,” शब्द और अक्षर ” 22 ” शब्द का प्रतिस्थापन किया जाए।
7. उक्त नियमों के नियम 8क का लोप किया जाएगा।


  1. उक्त नियमों के नियम 13 में, उप-नियम (2) में शब्द, अंक और अक्षर “अथवा 22ख” का लोप किया जाएगा।
  2. उक्त नियमों के नियम 18 में :-
(क) उप-नियम (1), –
(क) खंड (क) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड जोड़ा जाए, नामतः :—
“(कक) सेवानिवृत्ति की तारीख पर देय मंहगाई भर्त्त को भी इस नियम के उप-नियम
(1) (क) के प्रयोजन से परिलब्धियाँ माना जाए।

(ख) खंड (ख) के लिए, निम्नलिखित खंड को प्रतिस्थापित किया जाएगा, नामतः :— ” (ख) यदि सेवा का सदस्य, दस वर्ष की अर्हता सेवा पूर्ण करने के पश्चात् इन नियमों के प्रावधानों के अनुसार सेवा से सेवानिवृत्त होता है, पेंशन की राशि का परिकलन परिलब्धियों का पचास प्रतिशत पर अथवा औसत परिलब्धियों, जो भी उसके लिए अधिक लाभकरी हो, पर किया जाएगा, जो न्यूनतम तीन हजार पांच सौ रुपए प्रति मैनसेम तथा अधिकतम पैंतालीस हजार रुपए प्रति मैनसेम के अधीन रहेगी”; (ख) उप नियम (1) के पश्चात् निम्नलिखित उप नियमों को रखा जाएगा, नामतः :— “18. (1-क) अस्सी वर्ष अथवा इससे अधिक की आयु पूरा करने के पश्चात्, उप नियम (1) के खण्ड (ख) के अनुसार मान्य पेंशन के अतिरिक्त, अतिरिक्ति पेंशन निम्नलिखित विधि में सेवा के सेवानिवृत्त सदस्य को भुगतेय होगी:-

पेंशनभोगी की आयु अतिरिक्त पेंशन
80 वर्ष से 85 वर्ष से कम की आयु तक मूल पेंशन का $20 \%$
85 वर्ष से 90 वर्ष से कम की आयु तक मूल पेंशन का $30 \%$
90 वर्ष से 95 वर्ष से कम की आयु तक मूल पेंशन का $40 \%$
95 वर्ष से 100 वर्ष से कम की आयु तक मूल पेंशन का $50 \%$
100 वर्ष और अधिक मूल पेंशन का $100 \%$

स्पष्टीकरण:- इस नियम के प्रयोजनार्थ, अर्हता सेवा की अवधि का परिकलन करने में, तीन माह या इससे अधिक की अवधि के अंश को पूर्ण अर्ध-वर्ष के रूप में माना जाएगा तथा उसे अर्हता सेवा के रूप में गिना जाएगा।”; (ग) द्वितीय परन्तुक में, उप-नियम (2) में, नियम 22 (ख) का उप-नियम (2), शब्दों, कोष्ठक, अंकों एवं अक्षरों के लिए नियम 22 के उप-नियम (2) (iii) के शब्द, कोष्ठक, अंकों को प्रतिस्थापित किया जाएगा। 10. उक्त नियमों के नियम 19 में,— (क) हाशिए के शीर्षक के लिए, निम्नलिखित हाशिए के शीर्षक को प्रतिस्थापित किया जाएगा, नामतः— “19. सेवानिवृत्त अथवा मृत्यु उपदान।” (ख) उप-नियम 3 (क) (i) के परन्तुक में, “बीच लाख एवं पचास हजार रुपए” शब्दों के लिए, “रुपए दस लाख” शब्दों को प्रतिस्थापित किया जाएगा।


(ग) उप-नियम 3 (क) (ii) के परन्तुक में, निम्नलिखित परन्तुक को प्रतिस्थापित किया जाएगा, नामतः :-
“बशर्ते कि इस खंड के अन्तर्गत देय सेवानिवृत्ति उपदान की राशि किसी भी स्थिति में रुपए इस लाख से अधिक नहीं रहेगी।”
11. उक्त नियमों में, नियम 22, 22-क, 22-ख, एवं 22-ग के लिए, निम्नलिखित को प्रतिस्थापित किया जाएगा, नामतः :-
“22. परिवार पेंशन: :-
(1) इस नियम के प्रावधान निम्नलिखित पर लागू होंगे,-
(क) 1 जनवरी, 1964 को अथवा इसके पश्चात् सेवा में नियुक्त किया गया सेवा का सदस्य; तथा
(ख) सेवा का ऐसा सदस्य जो 31 दिसम्बर, 1963 को सेवा में था तथा जिसने केन्द्र सरकार द्वारा जारी किए गए आदेशों के तहत इस नियम के लाभों का विकल्प दिया था।
टिप्पणः- इस नियम के प्रावधान, 22 सितंबर, 1977 से, उन सदस्यों के लिए भी लागू होंगे, जो 31 दिसंबर, 1963 से पूर्व सेवानिवृत्त हुए अथवा जिनकी मृत्यु हो गई, उनके लिए भी लागू होंगे जो 31 दिसंबर, 1963 को जीवित थे परन्तु जिन्होंने 1964 स्कीम से बाहर रहने का विकल्प दिया था।
(2) उप-नियम (5) में, समाविष्ट प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जहां सेवा के सदस्य की मत्यु :-
(i) सतत् सेवा का एक वर्ष पूरा करने के पश्चात; अथवा
(ii) सतत् सेवा का एक वर्ष पूरा करने के पूर्व

बशर्ते की संबंधित सेवा के दिवंगत सदस्य की सेवा अथवा पद में उसकी नियुक्ति के तत्काल पूर्व उपयुक्त चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा जांच की गई थी तथा प्राधिकारी द्वारा सरकारी सेवा के लिए योग्य घोषित किया गया था; अथवा
(iii) सेवा से सेवानिवृत्ति के पश्चात् तथा मृत्यु की तिथि को पेंशन अथवा इन नियमों में उल्लिखित प्रतिपूर्ति भत्ता प्राप्त कर रहा था,
दिवंगत का परिवार राज्य सरकार अथवा केन्द्र सरकार कर्मचारी, 1964 के लिए परिवार पेंशन स्कीम के तहत परिवार पेंशन का हकदार होगा, जिसकी राशि का निर्धारण मूल वेतन के $30 \%$ की एक समान दर पर किया जाएगा जो न्यूनतम तीन हजार पांच सौ रुपए प्रति मैनसेम तथा अधिकतम सत्ताइस हजार रुपए प्रति मैनसेम के अधीन रहेगा।
स्पष्टीकरणः-इस नियम में जहां कहीं भी ‘सतत् सेवा का एक वर्ष’ अभिव्यक्ति का उल्लेख किया गया है, वहां इसका अर्थ होगा कि खण्ड (ii) में यथाउपबंधित ‘सतत् सेवा का एक वर्ष से कम’ सम्मिलित है।
3. परिवार पेंशन की राशि मासिक दर पर नियत की जाएगी तथा पूर्ण रुपए में अभिव्यक्त की जाएगी तथा जहां परिवार पेंशन में एक रुपए का अंश समाविष्ट रहेगा, वहां इसे अगले उच्चतर रुपए में पूर्णांक कर दिया जाएगा।

बशर्ते की किसी भी स्थिति में इस नियम के तहत निर्धारित अधिकतम से अधिक परिवार पेंशन की अनुमति नहीं दी जाएगी।


  1. उप-नियम (2), (3) एवं (5) के अनुसार देय परिवार पेंशन के अतिरिक्त, अस्सी वर्ष अथवा अधिक की आयु पूरा करने के पश्चात, अतिरिक्त परिवार पेंशन निम्नानुसार रीति से देय होगी:-
कुटुम्ब पेंशनभोगी की आयु अतिरिक्त कुटुम्ब पेंशन
80 वर्ष से लेकर 85 वर्ष से कम आयु तक मूल कुटुम्ब पेंशन का $20 \%$
85 वर्ष से लेकर 90 वर्ष से कम आयु तक मूल कुटुम्ब पेंशन का $30 \%$
90 वर्ष से लेकर 95 वर्ष से कम आयु तक मूल कुटुम्ब पेंशन का $40 \%$
95 वर्ष से लेकर 100 वर्ष से कम आयु तक मूल कुटुम्ब पेंशन का $50 \%$
100 वर्ष अथवा अधिक मूल कुटुम्ब पेंशन का $100 \%$

(5) (क) (i) जहां सेवा का ऐसा सदस्य जो कामगार प्रतिपूर्ति अधिनियम, 1923 (1923 का 8) द्वारा अभिशासित नहीं होता है परन्तु 7 वर्ष से कम की सतत् सेवा के दौरान उसकी मृत्यु हो जाती है, उस स्थिति में कुटुम्ब को देय कुटुम्ब पेंशन की दर पिछले आहरित वेतन का 50 प्रतिशत के समान रहेगी तथा इस प्रकार मान्य राशि दस वर्षों की अवधि के लिए सेवा के सदस्य की मृत्यु की तिथि के पश्चात की तिथि से देय होगी। (ii) सेवानिवृत्ति के पश्चात सेवा के सदस्य की मृत्यु होने की स्थिति में, में उपनियम (क) के तहत यथानिर्धारित परिवार पेंशन सात वर्ष की अवधि अथवा उस अवधि के लिए जिस तिथि को सेवा का सेवानिवृत्त दिवंगत सदस्य 67 वर्ष की आयु प्राप्त करता यदि वह जीवित होता, जो भी कम हो, के लिए देय रहेगी: –

बशर्ते कि किसी भी स्थिति में उप खण्ड (ख) के तहत निर्धारित परिवार पेंशन की राशि सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति पर प्राधिकृत पेंशन से अधिक नहीं होगी:

बशर्ते यह भी कि जहां सेवानिवृत्ति पर प्राधिकृत पेंशन की राशि उप नियम (2) के तहत देय परिवार पेंशन की राशि से कम है, तो इस खंड के तहत निर्धारित परिवार पेंशन की राशि को उप नियम (2) के तहत देय परिवार पेंशन की राशि तक सीमित रहेगी। स्पष्टीकरणः-इस उप खण्ड के प्रयोजन से सेवानिवृत्ति पर प्राधिकृत पेंशन में पेंशन का वह भाग भी सम्मिलित होगा जिसे सेवानिवृत्त सदस्य ने अपनी मृत्यु से पूर्व परिणत किया होता। (ख) खंड (क) में उल्लिखित अवधि की समाप्ति के पश्चात उस खंड के तहत परिवार पेंशन प्राप्त करने वाला परिवार उप नियम (2) के तहत देय दर पर परिवार पेंशन का हकदार होगा। (6) जहां असाधारण पेंशन नियमावली, 1939 के तहत पुरस्कार देय है, वहां इस नियम के तहत कोई परिवार पेंशन ऐसे अवार्ड की अवधि के दौरान प्राधिकृत नहीं होगी। (7) जिस अवधि के लिए परिवार पेंशन दी जाएगी वह निम्नानुसार है:- (i) पहले परंतुक के अधीन, विधवा या विधुर के मामले में, मृत्यु या पुनर्विवाह की तिथि, जो भी पहले हो, तक; (ii) दूसरे परंतुक के अधीन, अविवाहित पुत्र के मामले में, उसके पच्चीस वर्ष की आयु का हो जाने या विवाहित होने या आजीविका कमाना शुरू करने तक, जो भी पहले हो; (iii) दूसरे एवं तीसरे परंतुक के अधीन, अविवाहित या विधवा या तलाकशुदा पुत्री के मामले में, उसके विवाहित होने या पुनर्विवाहित होने या आजीविका कमाना शुरू करने तक, जो भी पहले हो;


(iv) उप-नियम (12) के अधीन, माता-पिता के मामले में, जो मृत्यु से ठीक पहले तक या जीवनपर्यंत सेवा के सदस्य पर संपूर्ण रूप से आखित हों;
(v) उप-नियम (13) और चौथे परंतुक के अधीन, विकलांग सहोदरों (अर्थात् भाई और बहन) के मामले में, जो मृत्यु से ठीक पहले तक या जीवनपर्यंत सेवा के सदस्य पर संपूर्ण रूप से आखित हों;
बशर्ते कि नि:संतान विधवा को पुनर्विवाह होने पर, यदि सभी अन्य स्रोतों से उसकी आय इस नियम के उपनियम (2) के तहत न्‍यूनतम परिवार पेंशन और उस पर देय मंहगाई राहत से कम है तो उसे परिवार पेंशन जारी रखी जाएगी।
पुन: इस शर्त के अधीन कि सेवा के सदस्य का पुत्र या पुत्री किसी नि:शक्तता या मंद बुद्धि के साथ-साथ मानसिक विकलांगता से पीड़ित है या शारीरिक रूप से अपंग है या इस हद तक विकलांग है कि पच्चीस वर्ष का होने के बाद भी वह अपनी आजीविका नहीं कमा सकता, तो निम्नलिखित शर्तों के अधीन उस पुत्र या पुत्री को आजीवन परिवार पेंशन का भुगतान किया जाएगा नामत: : –
(i) यदि वह पुत्र या पुत्री सेवा के सदस्य के दो या अधिक बच्चों में से एक है, शुरू-शुरू में इस नियम के उप-नियम (9) के खंड (iii) में निर्धारित किए गए अनुसार अंतिम बच्चे के पच्चीस वर्ष के होने तक परिवार पेंशन अवयस्क बच्चों [इस उप-नियम के खंड (ii) या खंड (iii) में उल्लिखित किए गए अनुसार] को देय है और इसके बाद परिवार पेंशन नि:शक्त या मंद बुद्धि के साथ-साथ मानसिक विकलांगता से पीड़ित या शारीरिक रूप से अपंग या विकलांग पुत्र या पुत्री के पक्ष में जारी रखनी चाहिए और यह आजीवन देय होनी चाहिए;
(ii) यदि, एक से अधिक पुत्र या पुत्री हैं जो नि:शक्त या मंद बुद्धि के साथ-साथ मानसिक विकलांगता से पीड़ित या शारीरिक रूप से अपंग या विकलांग हैं, तो परिवार पेंशन उनके जन्म के क्रम में देय होगी और सबसे कनिष्ठ को उस समय तक परिवार पेंशन मिलेगी जब उससे आयु में ज्येष्ठ सहोदर पेंशन के लिए पात्र नहीं रह जाता/जाती है; बशर्ते कि ऐसे जुड़वा बच्चों को परिवार पेंशन का भुगतान करने के मामले में, जैसा कि इस नियम के उप-नियम (8) के खंड (घ) में निर्धारित रीति अपनाई जाएगी;
(iii) शारीरिक रूप से अपंग या विकलांग पुत्र या पुत्री जो वयस्क हो गए हैं के मामले को छोड़ कर ऐसे अवयस्क पुत्र या पुत्री को अभिभावक के माध्यम से परिवार पेंशन का भुगतान किया जाएगा जैसे वे अवश्यक हों;
(iv) ऐसे पुत्र या पुत्री को आजीवन परिवार पेंशन की स्वीकृति देने से पहले, नियोक्ता प्राधिकारी इस बात की पुष्टि करेगा कि विकलांगता की प्रकृति ऐसी है जिससे वह अपनी आजीविका कमाने में असमर्थ है और चिकित्सा अधीक्षक या संस्थान का प्राध्यापक या निदेशक या अध्यक्ष या अध्यक्ष के रूप में उसका नामिति और अन्य दो सदस्यों जिनमें से कम-से-कम एक मंद बुद्धि के साथ-साथ मानसिक या शारीरिक विकलांगता के क्षेत्र का विशेषज्ञ हो, वाले एक चिकित्सा बोर्ड से प्राप्त प्रमाण पत्र के माध्यम से इसका प्रमाणन किया जाना चाहिए जिसमें जहां तक संभव हो, बच्चे की मानसिक या शारीरिक स्थिति का सटीक निर्धारण होना चाहिए।
(v) ऐसे पुत्र या पुत्री के अभिभावक के रूप में परिवार पेंशन प्राप्त करने वाला व्यक्ति या ऐसे पुत्र या पुत्री जो परिवार पेंशन अभिभावक के माध्यम से प्राप्त नहीं करता/करती है को स्थायी विकलांगता के मामले में एक बार और अस्थायी विकलांगता के मामले में पांच वर्षों में एक बार विकलांगता चिकित्सा अधीक्षक या संस्थान को प्रधान या निदेशक या अध्यक्ष या अध्यक्ष के रूप में उसको नामिति और अन्य दो सदस्यों, जिनमें से कम से कम एक मंद बुद्धि के साथ-साथ मानसिक या शारीरिक विकलांगता के क्षेत्र का विशेषज्ञ हो, से इस आशय का एक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा कि वह मानसिक


गड़बड़ी या विकलांगता से पीड़ित है और शारीरिक रूप से अपंग या विकलांग बना हुआ है;
(vi) मंद बुद्धि, वाले पुत्र या पुत्री के मामले में, सेवा के सदस्य या पेंशनभोगी, जैसा भी मामला हो, द्वारा नामित किए गए व्यक्ति को परिवार पेंशन दी जाएगी। यदि सेवा के सदस्य या पेंशनभोगी से उसके जीवनकाल में कार्यालय अध्यक्ष को ऐसा कोई नामांकन प्राप्त नहीं होता है तो ऐसे मामले में सेवा के सदस्य या पेंशनभोगी, जैसा भी मामला हो, के पति या पत्नी द्वारा नामित व्यक्ति को, बाद में ओटिजम, सेरेब्रल पालसी, मेंटल् रिटार्डेशन और बहु विकलांगता से पीड़ित ब्यक्तियों को परिवार पेंशन प्रदान करने हेतु अभिभावक के नामांकन या नियुक्ति के लिए राष्ट्रीय न्यास अधिनियम, 1999 (1999 की सं. 44) की धारा 14 के तहत उक्त अधिनियम में उल्लिखित के अनुसार स्थानीय स्तर की समिति द्वारा जारी किया गया संरक्षकता प्रमाणपत्र स्वीकार्य है:
पुनः इस शर्त के अधीन कि यदि अविवाहित या विधवा या तलाकशुदा पुत्री को पच्चीस वर्ष की आयु के बाद या उसके विवाहित होने तक या पुनर्विवाह तक या उसके द्वारा आजीविका कमाना शुरू करने तक, जो भी पहले हो, तक परिवार पेंशन का प्रदान करना या जारी रखना निम्नलिखित शर्तों के अधीन होगा, नामत: : –
(i) इस नियम के उप-नियम (9) के खण्ड (ii) में निर्धारित किए गए क्रम के अनुसार शुरूशुरू में परिवार पेंशन का भुगतान, सबसे छोटे अवयस्क संतान के पच्चीस वर्ष के होने तक, अवयस्क संतानों [जैसा कि इस उप-नियम के खंड (ii) या खंड (iii) में उल्लेख किया गया है] को किया जाएगा; और
(ii) इस उप-नियम के दूसरे परंतुक के अनुसार कोई विकलांग संतान परिवार पेंशन प्राप्त करने का पात्र नहीं है:
पुनः इस शर्त के अधीन कि सेवा के सदस्य या पेंशनभोगी का पुत्र या पुत्री कोई निःशक्तता या (मंद बुद्धि के साथसाथ) मानसिक विकलांगता से पीड़ित है या इस हृद तक शारीरिक रूप से अपंग या विकलांग है कि पच्चीस वर्ष का/की होने के बाद भी वह अपनी आजीविका कमा नहीं सकता/सकती के मामले में इस नियम में यथानिर्धारित समान रीति एवं समान निःशक्तता मानदंड का अनुसरण करते हुए निःशक्त सहोदर पारिवारिक पेंशन के पात्र होंगे।
स्पष्टीकरण 1- इस उप-नियम के अंतर्गत, निःशक्त पुत्र या पुत्री को छोड़ कर कोई अविवाहित पुत्र या अविवाहित या विधवा या तलाकशुदा पुत्री, उसके विवाह या पुनर्विवाह की तारीख से परिवार पेंशन के लिए अपात्र हो जाएंगे।
स्पष्टीकरण 2- ऐसे पुत्र या पुत्री या अभिभावकों या सहोदरों को देय परिवार पेंशन उस समय बंद कर दी जाएगी जब वह या वे अपनी आजीविका कमाना शुरू कर देंगे।
स्पष्टीकरण 3 – पुत्र या पुत्री या सहोदरों या अभिभावक का यह दायित्व होगा कि वे प्रति वर्ष राजकोष या बैंक, जैसा भी मामला हो, को इस आशय का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करें कि (i) उसने अपनी आजीविका कमानी शुरू नहीं की है, और (ii) उसने विवाह या पुनर्विवाह नहीं किया है और संतानरहित विधवा द्वारा अपने पुनर्विवाह के बाद या निःशक्त पुत्र या पुत्री द्वारा या अभिभावक द्वारा प्रतिवर्ष राजकोष या बैंक, जैसा भी मामला हो, में इस आशय का समान प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया जाना है कि उसने/उन्होंने अपनी आजीविका कमानी शुरू नहीं की है। स्पष्टीकरण 4 – इस उप-नियम के प्रयोजनार्थ, परिवार के किसी सदस्य को उस स्थिति में अपनी आजीविका कमाने वाला/वाली माना जाएगा जब किसी अन्य स्रोतों से उसकी आय इस नियम के उप नियम (2) के तहत न्यूनतम परिवार पेंशन और उस पर देय मंहगाई राहत के समान या इससे अधिक हो। स्पष्टीकरण 5 – अभिभावकों को सेवा के सदस्य का आश्रित माना जाएगा यदि उनकी संयुक्त आय इस नियम के उप नियम (2) के तहत न्यूनतम परिवार पेंशन और उस पर देय महंगाई राहत से कम हो।


स्पष्टीकरण 6 – नि:शक्त सहोदरों को सेवा के सदस्य का आचित माना जाएगा यदि उनकी आय इस नियम के उप नियम (2) के तहत न्यूनतम परिवार पेंशन और उस पर देय मंहगाई राहत से कम हो।
स्पष्टीकरण 7 – नि:संतान विधवा को देय परिवार पेंशन, उसके पुनर्विवाह के पश्चात्, सभी अन्य स्रोतों से उसकी आय इस नियम के उप नियम (2) के तहत न्यूनतम परिवार पेंशन और उस पर देय महंगाई राहत के बराबर या इससे अधिक हो जाने की स्थिति में समाप्त की जाएगी।
(8) (क) (i) ऐसे मामले में जहां एक से अधिक विधवाओं को परिवार पेंशन देय होती है, तो विधवाओं को समान हिस्सों में परिवार पेंशन देय होगी।
(ii) किसी विधवा की मृत्यु हो जाने पर, उसके हिस्से की परिवार पेंशन उसके पात्र संतान को देय होगी।

बशर्ते कि यदि विधवा के कोई संतान नहीं हैं, तो उसके हिस्से की परिवार पेंशन समाप्त नहीं की जाएगी बल्कि उसका भुगतान अन्य विधवाओं को समान हिस्सों में किया जाएगा, या ऐसी अन्य विधवा यदि केवल एक है तो उसे पूरी पेंशन देय होगी।
(ख) जहां सेवा के पेंशनभोगी सदस्य की मृत्यु के पश्चात उसकी विधवा उत्तरजीवी हो लेकिन दूसरी पत्नी जो जीवित न हो से उत्पन्न हुआ पात्र बच्चा या बच्चे जो वह अपने पीछे छोड़ गया हो तो पात्र बडा या बच्चे परिवार पेंशन, जो उनकी मां प्राप्त करती यदि वह सेवा या पेंशनभोगी सदस्य की मृत्यु के समय जीवित होती, के हिस्से के हकदार होंगे।

बशर्ते कि परिवार के पेंशन के ऐसे भाग का भुगतान ऐसे बबच्चे या बच्चों या विधवा या विधवाओं को न किया जाना हो, तो ऐसा भाग व्यपगत नहीं होगा, अपितु यह समान भागों में अन्यथा पात्र अन्य विधवा या विधवाओं या अन्य बच्चे या बच्चों को देय होगा या अगर एक ही विधवा या बडा हो तो उसे पूर्ण रूप से देय होगा।
(ग) जहां सेवा के दिवंगत पेंशनभोगी सदस्य या पेंशनभोगी किसी विधवा द्वारा उत्तरजीवी हो लेकिन अपने पीछे तलाकशुदा या अवैध रूप से विवाहित पत्नी या पत्नियों से पात्र बच्चा या बच्चे अपने पीछे छोड़ गया हो तो पात्र बच्चा या बच्चे परिवार की पेंशन के भाग के हकदार होंगे जिसे मां जो तलाकशुदा न होती या वह वैध रूप से विवाहित होती तो दिवंगत सेवक या पेंशनभोगी की मृत्यु पर प्राप्त करती।

बशर्ते कि परिवार के पेंशन के ऐसे भाग का भुगतान ऐसे बच्चे या बच्चों या विधवा या विधवाओं को न किया जाना हो, तो ऐसा भाग व्यपगत नहीं होगा, अपितु यह समान भागों में अन्यथा पात्र अन्य विधवा या विधवाओं या अन्य बच्चे या बच्चों को देय होगा या अगर एक ही विधवा या बच्चा हो तो उसे पूर्ण रूप से देय होगा।

टिप्पणीः- पूर्व के मामलों में, पिछले हितालाभ प्राप्तकर्ता से कोई वसूली नहीं की जानी चाहिए। किसी अपात्र मां से उत्पन्न सेवा या पेंशनभोगी सदस्य के पात्र बच्चे या बच्चों से आवेदन प्राप्त होने पर परिवार के पेंशन के बंटवारे के संबंध में निर्णय सक्षम प्राधिकारी द्वारा तथ्यों के सत्यापन एवं आवेदक की हकदारी के विषय में स्वयं सन्तुष्ट होने पर लिया जाएगा।
(घ) जहां परिवार पेंशन जुड़वां बच्चों को दी जानी हो वहाँ यह ऐसे बच्चों को समान भागों में अदा की जाएगी।

बशर्ते कि जब एक ऐसा बच्चा पात्र नहीं रह जाता तो उसका हिस्सा दूसरे बच्चे को दिया जाएगा एवं जब उन दोनों में से कोई भी पात्र न हो तो परिवार पेंशन अगले पात्र इकवाँते बच्चे या जुड़वां बच्चों को अदा की जाएगी।
(9)(i) उप नियम (8) में दिए गए को छोड़कर, परिवार पेंशन एक ही समय में एक से अधिक सदस्य को नहीं प्रदान की जाएगीः-
(i) यदि सेवा या पेंशनभोगी दिवंगत सदस्य अपने पीछे विधवा या विधुर छोड़ जाता है तो परिवार पेंशन विधवा या विधुर को देय होगी, जिसके न होने पर पात्र बच्चे को देय होगी;


(ii) बच्चों को परिवार पेंशन उनके जन्म के क्रम में देय होगी और उनमें से छोटा बच्चा परिवार पेंशन का तब तक पात्र नहीं होगा जब तक उससे बड़ा परिवार पेंशन प्रदान करने के लिए अपात्र नहीं हो जाता।

बशर्ते कि जहां पारिवार पेंशन जुड़वा बच्चों को देय हो तो यह इस नियम के उप नियम (8) के खण्ड (घ) में दी गई रीति के अनुसार प्रदान की जाएगी।
(10) जहां दिवंगत सेवा या पेंशनभोगी सदस्य अपने पीछे एक से अधिक बच्चे छोड़ जाता है तो परिवार का सबसे बड़ा पात्र बच्चा उप नियम (7) के खण्ड (ii) या खण्ड (iii) जैसा भी मामला हो में उल्लिखित अवधि के लिए पारिवारिक पेंशन का हकदार होगा एवं उस अवधि के समाप्त होने पर अगला बच्चा पारिवारिक पेंशन प्रदान किए जाने का पात्र होगा।
(11) जहां इस नियम के अंतर्गत परिवार पेंशन किसी अवयस्क को प्रदान की जाती है तो यह अवयस्क की ओर से अभिभावक को देय होगी।
(12) (क) परिवार पेंशन माता-पिता को देय होगी यदि माता-पिता दिवंगत सेवा सदस्य की मृत्यु से तत्काल पूर्व पूर्ण रूप से उस पर निर्भर थे एवं दिवंगत सेवा सदस्य का कोई विधवा या पात्र बच्चों द्वारा उत्तरजीवी न हो।
(ख) परिवार पेंशन, जहां भी माता-पिता को देय हो तो यह मृतक सेवा सदस्य की मां को देय होगी जिसके न होने पर पिता को देय होगी।
(13) परिवार पेंशन आचित विकलांग सहोदरों को देय होगी यदि सहोदर, दिवंगत सेवा सदस्य के उपर उसकी मृत्यु से ठीक पहले पूर्ण रूपेण आचित थे एवं दिवंगत सेवा सदस्य की कोई विधवा या पात्र बच्चे या पात्र माता-पिता न हों।
(14) यदि पठ्ठी एवं पति दोनों सेवा सदस्य हों एवं इस नियम के प्रावधानों द्वारा अभिशासित होते हैं और उनमें से एक सेवा के दौरान या सेवानिवृत्ति के पश्चात मर जाता है तो दिवंगत की परिवार पेंशन उत्तरजीवी पति या पठ्ठी को देय होगी एवं पति या पठ्ठी की मृत्यु के मामले में उत्तरजीवी बच्चे या बच्चों को दिवंगत माता-पिता के संबंध में नीचे विनिर्दिष्ट सीमाओं के अध्यक्षीन दो परिवार पेंशन प्रदान की जाएगी; नामतः :-
(क) (i) यदि उत्तरजीवी बच्चा उप नियम (5) में उल्लिखित दर से दो परिवार पेंशन प्राप्त करने का पात्र है, तो दोनों पेंशनों की राशि पैतालीस हजार रु. प्रति में सेम तक सीमित होगी।
(ii) यदि एक परिवार पेंशन उप नियम (5) में उल्लिखित दर से देय नहीं रह जाती और उसके स्थान पर उप नियम (2) में उल्लिखित दर से पेंशन देय होती है तो दोनों पेंशनों की राशि पैतालीस हजार रु. प्रति मेंसेम तक ही सीमित होगी।
(ख) यदि दोनों परिवार पेंशने उप नियम (2) में उल्लिखित दर पर देय होती हैं तो दोनों पेंशन की राशि सताईस हजार रु. प्रति मेंसेम तक सीमित होगी।
15. जहां सेवा की महिला या पुरुष सदस्य की अपने पीछे कानूनी रूप से अलग हुए पति या विधवा को छोड़ कर मृत्यु हो जाती है और उनका कोई बच्चा या बच्चे न हों तो दिवंगत के संबंध में परिवार पेंशन उत्तरजीवी व्यक्ति को देय होगी।
बशर्ते कि जहां कानूनी रूप से अलगाव ब्याभिचार के आधार पर दिया गया हो एवं सेवा सदस्य की मृत्यु ऐसे अलगाव की अवधि के दौरान होती है और यदि उत्तरजीवी व्यक्ति ब्याभिचार को दोषी हो तो परिवार पेंशन उत्तरजीवी व्यक्ति को देय नहीं होगी।
(16) (क) जहां महिला सेवा सदस्य या पुरुष सेवा सदस्य की अपने पीछे कानूनी रूप से अलग पति या विधवा बच्चे या बच्चों के साथ को छोड़कर मृत्यु हो जाती है दिवंगत के संबंध में देय परिवार पेंशन उत्तरजीवी व्यक्ति को देय होगी बशर्ते कि वह ऐसे बच्चे या बच्चों का अभिभावक हो।


(ख) जहां उत्तरजीवी व्यक्ति ऐसे बच्चे या बच्चों का अभिभावक नहीं रह गया हो वहाँ ऐसी परिवार पेंशन ऐसे व्यक्ति को देय होगी जो ऐसे बड्डे या बड्डों का वास्तविक अभिभावक हो।
(ग) इस नियम के अधीन बच्चा या बच्चों के परिवार पेंशन के पात्र नहीं रह जाने पर, उप नियम 15 के परंतुक के अध्यक्षीन, ऐसी परिवार पेंशन दिवंगत सदस्य के कानूनी रूप से अलग उत्तरजीवी जीवनसाथी को उसकी मृत्यु या पुनर्विवाह जो भी पहले हो तक देय होगी।
(17) (क) यदि कोई व्यक्ति, इस नियम के अंतर्गत सेवा के दौरान सदस्य की मृत्यु पर परिवार पेंशन प्राप्त करने का पात्र होता है, जिस पर सेवा सदस्य की हत्या के अपराध या ऐसे अपराध को करने में सहयोग करने का आरोप लगाया जाएगा, परिवार पेंशन प्राप्त करने के लिए परिवार के सदस्यों का या उस पात्र सदस्य का दावा, उसके विरुद्ध आरम्भ की गई आपराधिक कार्यवाहियों के निर्णय तक निलम्बित रहेगा।
(ख) यदि खण्ड (क) में संदर्भित दण्डनीय कार्यवाहियों के निर्णय पर संबंधित व्यक्ति पर:-
(i) सेवा सदस्य की हत्या करने या उसमें दुष्येषण करने का दोषसिद्ध होता है तो ऐसे व्यक्ति को परिवार पेंशन प्राप्त करने से विवर्जित किया जाएगा और पेंशन सेवा सदस्य की मृत्यु तिथि से परिवार के अन्य पात्र सदस्य को देय होगी।
(ii) सेवा सदस्य की हत्या करने या दुष्येषण करने के आरोप से बरी हो जाता है तो परिवार पेंशन ऐसे व्यक्ति को सेवा सदस्य की मृत्यु की तिथि से देय होगी।
(ग) खण्ड (क) एवं खण्ड (ख) के उपबंध सेवा सदस्य की सेवानिवृत्ति के पश्चात् उसकी मृत्यु होने पर देय परिवार पेंशन पर भी लागू होंगे।
(18) (क) (i) जैसे ही सेवा सदस्य सरकारी सेवा में आता है वह अनुसूची ‘ज’ में अपनी परिवार का ब्यौरा कार्यालयाध्यक्ष को देगा।
(ii) यदि सेवा सदस्य का कोई परिवार नहीं है तो जैसे ही वह परिवार बसाता है वह अनुसूची ‘ज’ में अपने परिवार का ब्यौरा देगा।
(ख) सेवा का सदस्य अपने बच्चे की शादी के तथ्य सहित अपने परिवार के आकार में किसी भी उत्तरवर्ती परिवर्तन की सूचना कार्यालय प्रमुख को देगा।
(ग) जब कभी भी उप-नियम (7) के परंतुक में संकेतित विकलांगता किसी बच्चे में प्रकट होती है जो उसे अपनी आजीविका अर्जित करने में असमर्थ बनाती है, तो इस तथ्य को एक चिकित्सा अधिकारी जिसकी रैंक सिविल सर्जन के कम न हो, के उचित रूप से समर्थित चिकित्सा प्रमाणपत्र द्वारा कार्यालय प्रमुख के संज्ञान में लाया जाना चाहिए और इसे कार्यालय प्रमुख द्वारा अनुसूची ‘जे’ में इंगित किया जाए। (घ) जब कभी भी परिवार पेंशन का दावा उत्पन्न होता है तो बच्चे के कानूनी अभिभावक को एक चिकित्सा अधिकारी, जिसका रैंक सिविल सर्जन से कम नहीं हो, द्वारा समर्थित एक नए चिकित्सा प्रमाणपत्र के साथ एक आवेदन करना चाहिए कि बच्चा अभी भी विकलांगता से पीडित है।
(ङ) (i) कार्यालय प्रमुख, उक्त अनुसूची ‘जे’ प्राप्त होने पर इसे सेवा के संबंधित सदस्य की सेवा पुस्तिका पर चिपकाएगा तथा उक्त अनुसूची ‘जे’ तथा इस संबंध में सेवा के सदस्य से प्राप्त अन्य सभी पत्रों की पावती देगा।
(ii) परिवार के आकार में किसी भी परिवर्तन के संबंध में सेवा के सदस्य से पत्र प्राप्त होने पर कार्यालय प्रमुख इन परिवर्तनों को अनुसूची ‘जे’ में समाविष्ट करेगा।
(19) समय-समय पर यथासंशोधित वित्त मंत्रालय के दिनांक 16 अक्तूबर, 1963 के कार्यालय ज्ञापन सं. 15 (13)-ई.वी.(ए)/63, में स्वीकृत पेंशन में तदर्थ वृद्धि इस नियम के अंतर्गत परिवार पेंशन के प्राप्त होने पर परिवार को देय नहीं होगी।
(20) इस नियम के प्रयोजनार्थ
(क) “लगातार सेवा” का आशय, सेवा के सदस्य द्वारा अस्थायी अथवा स्थायी क्षमता में की गई सेवा होती है तथा इसमें निम्नलिखित शामिल नहीं होते—


(i) निलंबन की अवधि, यदि कोई हो ; और
(ii) सेवा की अवधि, यदि कोई हो, जो अठारह वर्ष की आयु प्राप्त करने से पूर्व की गई;
सेवा के सदस्यों के संबंध में ” परिवार” का आशय-
i. सेवा के पुरुष सदस्य के मामले में पत्नी अथवा सेवा की महिला सदस्य के मामले में पति;
ii. कानूनी तौर पर अलग हुए पत्नी अथवा पति, ऐसी पृथकता परगमन के आधार पर नहीं की गई हो तथा जीवित व्यक्ति परगमन करने का अपराधी नहीं हुआ हो ;
iii. अविवाहित पुत्र जिसने पच्चीस वर्ष की आयु प्राप्त नहीं की हो तथा अविवाहित अथवा विधवा अथवा तलाकशुदा पुत्री, कानूनी रूप से गोद लिए हुए ऐसे पुत्र और पुत्री सहित
iv. आचित माता-पिता;
v. सेवा के सदस्य का आचित निःशक्त सहोदर (अर्थात् भाई या बहन)
(ग) “वेतन” का आशय –
i. 2 (1) (ख ख) में यथासंदर्भित परिलिब्धियां, अथवा
ii. 2 (1) (क क) में यथासंदर्भित औसत परिलब्धियां, यदि सेवा के दिवंगत सदस्य की परिलब्धियां उसकी सेवा के अंतिम दस महीनों के दौरान शास्ति के अलावा अन्य रूप से कम की गई हों।”
13. अनुसूचियों की अनुसूची “जे” के लिए निम्नलिखित प्रतिस्थापित की जाएगी, नामित :-

अनुसूची जे

[ नियम 22 (11) (क) (i) देखें ]
परिवार का विवरण :

सेवा के सदस्य का नाम
पदनाम
जन्म की तारीख
नियुक्ति की तारीख
को मेरे परिवार का विवरण
क्रम सं. परिवार के सदस्यों के नाम जन्म की तारीख अधिकारी के साथ संबंध कार्यालय प्रमुख के आद्यक्षर | टिप्पणी
1 |

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8
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मैं उपर्युक्त विवरण में किसी भी वृद्धि अथवा परिवर्तन की सूचना कार्यालय प्रमुख को देते हुए इसे अद्यतन रखने का वचन देता हूं/देती हूं। सेवा के सदस्य के हस्ताक्षर स्थान : दिनांक : *इस प्रयोजन से परिवार का आशय, अखिल भारतीय सेवा (मृत्यु-मह-सेवानिवृत्ति लाभ) नियमावली, 1958 के नियम 22 के उप-नियम (20) के खंड (ख) में यथापरिभाषित परिवार से है। टिप्पणी – पत्नी तथा पति में क्रमशः कानूनी तौर पर अलग हुए पत्नी और पति शामिल होंगे। [फा. सं. 29018/16/2012-एआईएस (II)] मनोज कुमार द्विवेदी, निदेशक (सेवाएं)


पाद टिप्पणी. – मुख्य नियमावली, दिनांक 18 अगस्त, 1958 के जी.एम.आर. सं. 728 [असाधारण भाग II, [खंड 3, उप खंड (i)] के तहत भारत के राजपत्र में प्रकाशित की गई थी तथा तत्पश्चात् निम्नलिखित अधिसूचनाओं के तहत संशोधित की गई :-

क्रम सं. सा.का.नि. सं. तारीख
1. 526 4.9 .64
2. 527 3.4 .65
3. 528 3.4 .65
4. 529 3.4 .65
5. 572 17.4 .65
6. 215 12.2 .65
7. 1915 17.2 .66
8. 590 3.3 .68
9. 687 6.7 .74
10. 755 2.7 .74
11. 946 7.9 .74
12. $27(\mathrm{~m})$ 24.1 .75
13. 724 14.6 .75
14. 2264 23.8 .75
15. 2635 8.11 .75
16. 2030 20.12 .75
17. 128 31.1 .76
18. 196 14.2 .76
19 316 6.3 .76
20. 504 10.4 .76
21. 758 5.6 .76
22. 757 5.6 .76
23. 1182 14.8 .76
24. 1765 25.12 .76
25. 579 7.5 .77
26. 830 2.7 .77
27. 831 2.7 .77
28. 1598 26.11 .77
29. 1700 24.12 .77
30. 252 18.2 .78
31. 253 18.2 .78
32. 460 8.4 .78
33. 924 22.7 .78
34. 922 22.7 .78
35. 214 2.1 .79
36. 161 3.2 .79
37. 373 3.2 .79

38. 1151 15.9 .79
39. 1291 22.10 .79
40. 512 10.5 .80
41. 545 17.5 .80
42. 546 17.5 .80
43. 978 27.9.80
44. 248 7.3.81
45. 276 14.3.81
46. 705 1.8.81
47. 293 9.1.83
48. 557 3.7.83
49. 712 1.10.83
50. 33 21.1.84
51. 559 15.6.85
52. 813 31.8.85
53. 275 22.5.87
54. 343 3.4.88
55. 567 16.7.88
56. 91 25.2.89
57. 420 21.2.90
58. 101 16.2.91
59. 2890 23.11.91
60. 308 19.6.93
61. 271 6.07 .96
62. 717(अ) 19.12.97
63. 718(अ) 19.12.97
64. 249(अ) 13.5.98
65. 252(अ) 18.5.98
66. 259(अ) 22.5.98
67. 548(अ) 31.8.98
68. 719(अ) 7.12.98
69. 35(अ) 14.1.99
70. 702(अ) 1.9.2000
71. 355-(अ) 14.5.01
72. 524(अ) 11.7.01
73. 49(अ) 18.1.02
74. 779(अ) 12.11.02
75. 385(अ) 7.5.03
76. 105(अ) 6.2.04
77. 820(अ) 20.12.04
78. 617(अ) 30.9.05
79. 699(अ) 30.11.05
80. 727(अ) 20.12.05
81. 360(अ) 12.6.06

82. $20(\pi)$ 12.1 .07
83. $58(\pi)$ 31.1 .07
84. $184(\pi)$ 9.3 .07
85. $585(\pi)$ 28.7 .2011
86. $612(\pi)$ 9.8 .2011