Amendment to All India Service (Performance Appraisal Report) Rules, 2017

A

This document introduces significant amendments to the All India Service (Performance Appraisal Report) Rules, 2017. Key changes include the introduction of a new definition for ‘competent authority’ to handle appeals against performance appraisal reports, and provisions for the electronic preparation and submission of reports. The amendments also clarify procedures for reporting, reviewing, and accepting appraisal reports, including timelines and the handling of situations where a member of the service leaves their post. Furthermore, the rules address the scenario where a performance appraisal report is not duly recorded and outline the process for submitting and deciding on representations against appraisals, ensuring transparency and adherence to timelines. The amendments also stipulate that certain provisions regarding reporting, review, and acceptance authorities will not apply to retired officers and that representations can be submitted up to 90 days after the appraisal, with the possibility of condonation of delay under unavoidable circumstances. The document also lists previous amendments made to these rules since their original publication in 2007.

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The Gazette of India

असाधारण EXTRAORDINARY

भाग II—खण्ड 3—उप-खण्ड (i)

PART II—Section 3—Sub-section (i)

प्राधिकार से प्रकाशित

PUBLISHED BY AUTHORITY

सं. 494] नई दिल्ली, शुक्रवार, जून 16, 2017 / ज्येष्ठ 26, 1939
No. 494] NEW DELHI, FRIDAY, JUNE 16, 2017 / JYAISTHA 26, 1939

कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय

(कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग)

अधिसूचना

नई दिल्ली, 15 जून, 2017

सा.का.नि. 596(अ).—केन्द्रीय सरकार, अखिल भारतीय सेवा अधिनियम, 1951 (1951 का 61) की धारा 3 की उप-धारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, राज्य सरकारों से परामर्श करने के पश्चात् अखिल भारतीय सेवा (कार्य-निष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट) नियम, 2007 का और संशोधन करने के लिए निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात:-

  1. (1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम अखिल भारतीय सेवा (कार्य-निष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट) संशोधन नियम, 2017 है।
  2. (2) ये राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त होंगे।
  3. अखिल भारतीय सेवा (कार्य-निष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट) नियम, 2017 (जिसे इसमें इसके पश्चात् उत्तरदायित्व कहा गया है), के नियम 2 में, खण्ड (ख) के पश्चात, निम्नलिखित खण्ड अंतःस्थापित जाएगा, अर्थात:-
  4. “सक्षम प्राधिकारी” से सेवा के सदस्य को प्रकट की गई कार्य-निष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट के विरुद्ध रिपोर्टिंगत अधिकारी के अभ्यावेदन का विनिश्चय करने के लिए उप नियम 9 के उप नियम (7क) और उप नियम (7ख) में यथा उल्लिखित प्राधिकारी अभिप्रेत है।”
  5. उत्तरदायित्व में, नियम 4 के पश्चात निम्नलिखित नियम अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात:-
  6. “4क (1) कार्य-निष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट अनुसूची (2) यथाविनिर्दिष्ट प्रारूप में इलेक्ट्रॉनिक रूप से रिपोर्टिंगत अधिकारी द्वारा तैयार की जाएगी और लिखी जाएगी।”
  7. (2) रिपोर्ट करने वाले, पुनर्विलोकन करने वाले और स्वीकार करने वाले प्राधिकारी की टीका-टिप्पणियां, यदि वह सरकारी सेवक है, इलेक्ट्रॉनिक रूप से अभिलेखित की जाएगी।

(3) राजनीतिक कार्यपालक अपनी टीका टिप्पणियां शारीरिक रूप में अभिलिखित कर सकेंगे और इस प्रकार अभिलिखित की गई कार्य-निष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट अनुसूची (2) में विनिर्दिष्ट समय-सीमा के अनुसार इलैक्ट्रॉनिक रूप से अपलोड की जाएगी :

परंतु कतिपय मामलों में, सरकार के अनुमोदन से और उन कारणों के लिए, जो लेखबद्ध किए जाएं, कार्यनिष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट रिपोर्टगत अधिकारी और रिपोर्टकर्ता प्राधिकारियों में से किसी रिपोर्टकर्ता प्राधिकारी अर्थात् समय-समय पर केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट मार्गदर्शी सिद्धांतों के अनुसार रिपोर्ट करने वाले या पुनर्विलोकन या स्वीकार करने वाले प्राधिकारी द्वारा शारीरिक रूप से तैयार की जाएगी और लिखी जाएगी:

परंतु यह और कि कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के परामर्श से केन्द्रीय सरकार का पूर्व अनुमोदन उन मामलों में लिया जाएगा जहां कार्य-निष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट के इलैक्ट्रॉनिक रूप से फाइल किए जाने से स्थायी छूट किसी विशिष्ट वर्ग के पदों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा आदि के आधारों पर वांछित है।”
4. उस नियम के नियम 5 में, –
(i) नियम 2 के स्थान पर निम्नलिखित नियम रखा जाएगा, अर्थात् :-
“(2) उप-नियम (4) के अधीन उपबंधों के रहते हुए, कार्य-निष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट तब भी लिखी जाएगी जब या तो ऐसा रिपोर्ट करने वाला या पुनर्विलोकन करने वाला या स्वीकार करने वाला प्राधिकारी, जो सरकारी सेवक है या रिपोर्टगत सेवा का सदस्य पद के भार को (सेवानिवृत्त से भिन्न) त्याग देता है और ऐसे मामले में, कार्य-निष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट भरे जाने के लिए साधारण मार्गदर्शी सिद्धांतों के पैरा 9 में, कार्य-निष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट के पूरे किए जाने के लिए अनुसूची 2 में यथाविनिर्दिष्ट समय-सीमा के भीतर लिखी जाएगी।”;
(ii) उप-नियम (3) के पहले और दूसरे परन्तुक के स्थान पर, निम्नलिखित परन्तुक रखे जाएंगे, अर्थातः-
“परंतु वित्तीय वर्ष के दौरान किसी विशिष्ट अवधि के लिए सेवा के किसी सदस्य के संबंध केवल एक रिपोर्ट लिखी जाएगी:

परंतु यह और कि यदि सेवा का सदस्य एक पद से अधिक धारित करता है, तब सरकार रिपोर्ट करने के लिए अथवा पुनर्विलोकन करने के लिए पद (मूल अथवा अतिरिक्त प्रभार) परिलक्षित करेगी”;
(iii) उप-नियम (3) के पध्दात्, निम्नलिखित उप-नियम अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थातः-
“(3क) सामान्य तौर पर एक व्यक्ति किसी निष्पित समय अवधि के लिए रिपोर्ट करने, पुनर्विलोकन करने अथवा स्वीकार करने वाले प्राधिकारी की हैसियत में कार्यनिष्पादन मूल्यांकन रिपोर्टे लिखेगा:

परंतु यदि एक से अधिक व्यक्ति किसी निष्पित समय अवधि के लिए सेवा के सदस्य के कार्यनिष्पादन का पर्यवेक्षण करता है तब सरकार सुसंगत मूल्यांकन का पर्याप्त समय पूर्व रिपोर्ट करने अथवा पुनर्विलोकन करने के लिए व्यक्तियों को परिलक्षित करेगी”;
(iv) उप-नियम (7) का लोप किया जाएगा।
5. उस नियमों के, नियम 6 में, उप नियम (4) का लोप किया जाएगा।
6. उस नियमों के, नियम 7 में, उप नियम (2) का लोप किया जाएगा।
7. उस नियमों के, नियम 7 के पध्दात्, निम्नलिखित नियम अन्तःस्थापित किए जाएंगे, अर्थातः-
“7क. कतिपय मामलों में रिपोर्ट करने वाला प्राधिकारी, इत्यादि पर प्रतिबंध- नियम 5, 6 और 7 में किसी बात के होते हुए भी, रिपोर्ट करने वाले प्राधिकारी, पुनर्विलोकन करने वाले प्राधिकारी अथवा स्वीकार करने वाले प्राधिकारी के लिए कार्यनिष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट लिखने के लिए वहां सक्षम नहीं होगा जहां सेवा से सेवानिवृत्ति के एक मास


के पथ्यात् कार्यनिष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट का रिपोर्ट करने वाला प्राधिकारी एक सरकारी सेवक हो, और अन्य मामलों में, इस तारीख के एक मास के पथ्यात् जिस पद को वह खोज़ देता है।”

स्पष्टीकरणः- इस नियम के प्रयोजनों के लिए,-
(क) किसी मंत्री के बारे में पद को तब खोज़ दिया गया नहीं माना जाएगा यदि वह मंत्री परिषद में मंत्री के रूप में बना रहता है और उसका विभाग बदल दिया गया हो अथवा मंत्रियों की इस पूर्व परिषद जिसका वह मंत्री था, के ठीक पथ्यात् पुनर्गठित मंत्री परिषद में मंत्री बना हुआ हो जिसका वही विभाग हो अथवा विभाग बदल गया हो परंतु यथा-स्थिति प्रधानमंत्री अथवा मुख्यमंत्री पद पर बना रहता है।
(ख) किसी मंत्री के बारे में पद खोज़ दिया गया माना जाएगा, जब नए निर्वाचनों के अनुसरण में एक नई मंत्रिपरिषद का पुनर्गठन कर दिया गया है, भले ही वह मंत्री जो पूर्व मंत्रिपरिषद का सदस्य था, नई मंत्रिपरिषद में वही अथवा भिन्न विभाग प्राप्त करे।
7ख. कार्यनिष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट को मौजूद नहीं के रूप में मानना- ऐसी कार्यनिष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट जिसे इन नियमों के उपबंधों तथा उनके अधीन जारी किए गए अनुदेशों के अनुसार अभिलिखित नहीं किया गया है, को मौजूद नहीं के रूप में माना जाएगा:

परन्तु सरकार के अनुमोदन के बिना शारीरिक रूप से फाइल की गई सभी कार्यनिष्पादन मूल्यांकन रिपोर्टे मौजूद नहीं के रूप में मानी जाएंगी।”
8. उक्त नियमों के, नियम 9 में-
(i) उप-नियम (1) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-नियम रखा जाएगा, अर्थात्:
“(1) समग्र ग्रेड तथा सत्यनिष्ठा के मूल्यांकन सहित पूरी वार्षिक कार्यनिष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट को स्वीकार करने वाले प्राधिकारी द्वारा अंतिम रूप दिए जाने के पथ्यात् ऐसे मामलों को खोज़कर जहां इसे शारीरिक रूप से तैयार किया जाता है, रिपोर्टगत अधिकारी के समक्ष इलैक्ट्रानिक रूप से प्रकट किया जाएगा, ताकि रिपोर्टगत अधिकारी को अपना मामला प्रस्तुत करने में समर्थ बनाया जा सके।”
(ii) उप-नियम (4) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-नियम रखा जाएगा, अर्थात्:
“(4) स्वीकार करने वाला प्राधिकारी, रिपोर्टगत अधिकारी से टीका टिप्पणियां प्राप्त होने की तारीख से पन्द्रह दिन के भीतर इन्हें पुनर्विलोकन तथा रिपोर्ट करने वाले प्राधिकारी को अग्रेषित करेगा और टीका टिप्पणियों पर उनके अभिमत मांगेगा तथा रिपोर्ट करने वाले और पुनर्विलोकन करने वाले प्राधिकारी की टीका-टिप्पणियां मांगी जानी अपेक्षित हैं भले ही वे सेवानिवृत्त हो गए हों, पद खोज़ दिया हो या पद त्याग दिया हो, और यदि टीका-टिप्पणियां प्राप्त होने की तारीख से पन्द्रह दिन के भीतर रिपोर्ट करने वाले और पुनर्विलोकन करने वाले प्राधिकारी की टीकाटिप्पणियां प्राप्त नहीं होती हैं तो यह माना जाएगा कि रिपोर्ट करने वाले और पुनर्विलोकन करने वाले प्राधिकारी को कोई टीका-टिप्पणियां नहीं करती है।”
(iii) उप-नियम (7) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-नियम रखा जाएगा, अर्थात्:
“(7) यदि स्वीकार करने वाला प्राधिकारी राज्य सरकार या केन्द्रीय सरकार में मंत्री के स्तर से नीचे का है तो अध्यायेदन का विनिश्चय करने वाला सक्षम प्राधिकारी स्वीकार करने वाले प्राधिकारी के स्तर से एक उच् स्तर का अधिकारी होगा तथा ऐसे मामलों में स्वीकार करने वाला प्राधिकारी, पुनर्विलोकन करने वाले प्राधिकारी के मत प्राप्त होने से पन्द्रह दिनों के भीतर रिपोर्ट करने वाले प्राधिकारी, पुनर्विलोकन करने वाले प्राधिकारी तथा स्वयं अपने अभिमत सहित रिपोर्टगत अधिकारी की टीका-टिप्पणियां सक्षम प्राधिकारी को अग्रेषित करेगा तथा स्वीकार करने वाले प्राधिकारी की टीका-टिप्पणियां प्राप्त करनी अपेक्षित होगी भले वे सेवानिवृत्त हो गए हों या उन्होंने पद खोज़ दिया हो या उन्होंने पद त्याग दिया हो।
(7क) सक्षम प्राधिकारी, रिपोर्टगत अधिकारी की टीका-टिप्पणियां रिपोर्ट करने वाले प्राधिकारी, पुनर्विलोकन करने वाले प्राधिकारी तथा स्वीकार करने वाले प्राधिकारी के अभिमतों पर विचार करेगा तथा सम्यकतः विचार करने के


पश्चात्, सक्षम प्राधिकारी उन्हें स्वीकार कर सकता है और सकारण आदेश के साथ कार्यनिष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट को उपांतरित कर सकता है तथा स्वीकार करने वाले प्राधिकारी के अभिमत प्राप्त होने के पन्द्रह दिनों के भीतर रिपोर्टगत अधिकारी को अंतिम ग्रेडिंग समुचित की जाएगी।
(7ख) यदि स्वीकार करने वाला प्राधिकारी राज्य में मंत्री (मुख्यमंत्री सहित) अथवा केन्द्र में मंत्री हो, तो अभ्यावेदन पर विनिश्चय करने के लिए सक्षम प्राधिकारी स्वयं स्वीकार करने वाला प्राधिकारी होगा और ऐसे मामलों में स्वीकार करने वाला प्राधिकारी रिपोर्टगत प्राधिकारी की टीका-टिप्पणियों, रिपोर्ट करने वाले प्राधिकारी और पुनर्विलोकन प्राधिकारी के अभिमतों पर विचार करेगा और सम्यकत: विचार करने के पश्चात, वह उन्हें स्वीकार कर सकता है और तदनुसार निष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट को उपांतरित कर सकता है तथा पुनर्विलोकन प्राधिकारी के अभिमत प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर विनिश्चय और अंतिम ग्रेडिंग को रिपोर्टगत प्राधिकारी को संमुचित किया जाएगा और रिपोर्ट करने वाले तथा पुनर्विलोकन प्राधिकारी की टीका-टिप्पणियों को प्राप्त करना अपेक्षित होगा भले ही वे सेवानिवृत्त हो गए हों अथवा उन्होंने पद छोड़ दिया हो या पद त्याग दिया हो।
(7ग) “यदि रिपोर्टगत अवधि के कार्य को सक्षम प्राधिकारी द्वारा देखा नहीं गया हो, तो अभ्यावेदन को रेफरल बोर्ड के पास भेजा जाएगा।”
(iv) उप-नियम 9 के खंड (क) में “स्वीकार करने वाला प्राधिकारी” शब्दों के स्थान पर “स्वीकार करने वाला प्राधिकारी तथा सक्षम प्राधिकारी” शब्द रखे जाएंगे;
(v) उप-नियम 9 के खंड (ख) के पश्चात निम्नलिखित परन्तुक अन्त: स्थापित किया जाएगा:-
“परंतु, रिपोर्टगत अधिकारी के कार्य को सक्षम प्राधिकारी द्वारा नहीं देखे जाने की स्थिति में जब अभ्यावेदन को रेफरल बोर्ड के पास भेजा गया हो, तो रेफरल बोर्ड रिपोर्ट करने वाले अधिकारी, पुनर्विलोकन करने वाले प्राधिकारी और स्वीकार करने वाले प्राधिकारी की टीका-टिप्पणियों के आलोक में रिपोर्टगत अधिकारी के अभ्यावेदन पर विचार करेगा तथा समग्र ग्रेड सहित निष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट की पुष्टि अथवा उपांतरण करेगा और रेफरल बोर्ड का यह विनिश्चय तथ्यात्मक संप्रेक्षणों एवं तथ्यों संबंधी त्रुटियों दोनों के संबंध में होगा तथा रेफरल बोर्ड का विनिश्चय अंतिम होगा और रेफरल बोर्ड के विनिश्चय के प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर रिपोर्टगत अधिकारी को अंतिम ग्रेडिंग की संमूचना दी जाएगी।”
9. उक्त नियम के नियम 10 के स्थान पर निम्नलिखित नियम रखा जाएगा, अर्थात :-
“10. मूल्यांकन के विरुद्ध अभ्यावेदन – इन नियमों की कोई भी बात किसी अधिकारी को अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के नियम 25 के अधीन उपबंध किए गए अनुसार, कार्य-निष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट के संबंध में नब्बे दिनों की अवधि के भीतर राष्ट्रपति को अभ्यावेदन प्रस्तुत करने मे निवारित करने वाली नहीं समञ्ची जाएगी:

परन्तु, उन मामलों में जहां अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण, नब्बे दिनों की उक्त अवधि के भीतर इन नियमों के अधीन अभ्यावेदन प्रस्तुत करना संभव न हो, तो सक्षम प्राधिकारी अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की समय-सीमा में छूट प्रदान कर सकेगा।”
[फा. सं. 11059/01/2016-अ.भा.से.-III]
राजेश कुमार यादव, अवर सचिव (सेवाएं)

टिप्पण : मूल नियम भारत के राजपत्र में सा.का.नि.सं. 197(अ.) 14 मार्च, 2007 की तारीख में प्रकाशित किए गए थे और तत्पश्चात् उनमें निम्नानुसार संशोधन किए गए थे:-
(i) सा.का.नि. 296(अ.), तारीख 16 अप्रैल, 2007
(ii) सा.का.नि. 256(अ.), तारीख 31 मार्च, 2008
(iii) अधिसूचना सं. 11059/06/2010-अ.भा.से.(III), तारीख 22 दिसम्बर, 2010
(iv) अधिसूचना सं. 11059/03/2012-अ.भा.से.(III), तारीख 19 फरवरी, 2013