Administrative Tribunals (Procedure for Investigation of Misconduct or Incapacity of Chairman and Other Members) Amendment Rules, 2013

A

This notification introduces amendments to the Administrative Tribunals (Procedure for Investigation of Misconduct or Incapacity of Chairman and Other Members) Rules, 2000. The amendments primarily focus on removing the term “Vice-Chairman” and replacing it with “Member” in certain sections, and also exclude sitting High Court Judges appointed as Chairman or Member from the purview of these rules, as they will continue to be governed by Article 217 of the Constitution. The changes aim to streamline the procedural rules for investigating misconduct or incapacity within the administrative tribunal.

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असाधारण EXTRAORDINARY भाग II—खण्ड 3—उप-खण्ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i) प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY

सं. 21 नई दिल्ली, बुधवार, जनवरी 2, 2013/पौध 12, 1934
No. 21 NEW DELHI, WEDNESDAY, JANUARY 2, 2013/PAUSA 12, 1934

कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय

(कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग)

अधिसूचना

नई दिल्ली, 1 जनवरी, 2013

स.कार्म.नि. 2(अ).—कोटीय सरकार, प्रशासनिक अधिकरण, 1985 (1985 का 13) की धारा 35 की उप-धारा (1) और उप-धारा (2) के खंड 9 (ख) के साथ पटित धारा 9 की उप-धारा (3) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, प्रशासनिक अधिकरण (अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों के कदाचार या असमर्थता के अन्वेषण के लिए प्रक्रिया) नियम, 2000 का और संशोधन करने के लिए निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात :-

  1. संक्षिप्त नाम—इन नियमों का नाम प्रशासनिक अधिकरण (अध्यक्ष और अन्य सदस्यों के कदाचार या असमर्थता के अन्वेषण के लिए प्रक्रिया) संशोधन नियम, 2013 है।
  2. प्रशासनिक अधिकरण (अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों के कदाचार या असमर्थता के अन्वेषण के लिए प्रक्रिया) नियम, 2000 (जिसे इसमें इसके पश्चात् मूल नियम कहा गया है) के नियम 1 के उपनियम (1) में “उपाध्यक्ष” शब्द का लोप किया जाएगा।
  3. मूल नियम के नियम 2 में,-
  4. (क) “उपाध्यक्ष” शब्द का लोप किया जाएगा; और
  5. (ख) निम्नलिखित परंतुक अंत:स्थापित किया जाएगा, अर्थात्:—

“परंतु ये नियम अधिकरण के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में नियुक्त उच्च न्यायालय के आसीन न्यायाधीश पर लागू नहीं होंगे और ऐसा अध्यक्ष या सदस्य संविधान के अनुच्छेद 217 के उपबंधों द्वारा तब तक शासित होता रहेगा जब तक वह उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का पद धारण करता रहेगा।”

  1. मूल नियम के नियम 3 के उप-नियम (1) में,—
  2. (क) खंड (ग) में, “उपाध्यक्ष” शब्द के स्थान पर, “सदस्य” शब्द रखा जाएगा;
  3. (ख) खंड (च) में, “या उपाध्यक्ष” शब्दों का लोप किया जाएगा;
  4. (ग) खंड (छ) में, “और उपाध्यक्ष” शब्दों का लोप किया जाएगा;
  5. (घ) खंड (ज) का लोप किया जाएगा।

[फा. सं. ए-11013/8/2012-ए.टी.]

मनोज जोशी, संयुक्त सचिव

टिप्पणी : – मूल नियम भारत के राजपत्र असाधारण, भाग II, खंड 3(i), संख्यांक सा.कार्म. नि. 91(अ), तारीख 7 फरवरी, 2000 में प्रकाशित किए गए थे।