Government employees often face personal challenges that lead them to seek transfers, sometimes across state lines, to be closer to family or to manage serious health conditions affecting themselves or their loved ones. Recently, a State Consultative Committee convened to meticulously review 21 such applications from personnel within the Secondary Education Department. These individuals had requested a transfer from Uttarakhand to Uttar Pradesh, citing various medical exigencies, including thyroid disorders, mental health issues, and severe kidney or heart diseases impacting their spouses, parents, or children. Each case was carefully examined, involving detailed medical assessments by the State Medical Council to ascertain the validity and severity of the reported conditions. However, after thorough deliberation, the committee concluded that the medical grounds presented did not align with the specific criteria set forth in the February 4, 2009, notification issued by the Uttar Pradesh Reorganization Coordination Department. As a result, all 21 applications for inter-state adjustment were regrettably denied, and the concerned personnel are to remain allocated to Uttarakhand. This decision underscores the stringent regulatory framework governing such transfers and highlights the necessity for applicants to meet precise administrative and medical criteria for relocation requests to be approved.
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फा.सं. 27/15/2010-एस. आर. (एस.)
भारत सरकार
कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय
(कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग)
लोक नायक भवन, खान मार्किट,
नई दिल्ली – 110003
दिनांक 29 दिसम्बर, 2010
सेवा में,
मुख्य सचिव,
उत्तर प्रदेश सरकार,
लखनऊ ।
मुख्य सचिव,
उत्तरांचल सरकार,
देहरादून ।
विषयः-
चिकित्सकीय/वास्तविक व्यथा से संबंधित प्रकरणों पर राज्य परामर्शीय समिति की दिनांक 24 मई, 2010 को आयोजित 79वीं बैठक में विचार के उपरान्त अस्वीकार ।
महोदय,
उपर्युक्त विषय में मुझे यह कहने का आदेश हुआ है कि राज्य परामर्शीय समिति की दिनांक 24 मई, 2010 को आयोजित 79वीं बैठक में विचारोपरांत समिति ने संलग्नक में उल्लिखित कार्मिकी के अभ्यावेदनों की अस्वीकृत करने की सिफारिश की है । विस्तृत ब्यौरा संलग्नक पर है ।
- समिति द्वारा इन मामलों में जो सिफारिशें की गई उन्हें भारत सरकार द्वारा वास्तविक/चिकित्सकीय व्यथा के अन्तर्गत के मान लिया गया है । संलग्नक में उल्लिखित कार्मिकी के उत्तराखण्ड राज्य आवंटन का परिशोधन नहीं करने का निर्णय लिया गया है ।
कृपया संबंधित अधिकारियों को इन निर्णयों से अवगत करा दिया जाए ।
भवदीय
(सारंगधर नायक)
अवर सचिव, भारत सरकार
प्रतिः-
- श्री आर.एम. श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश पुनर्गठन समन्वय विभाग, लखनऊ ।
- श्री डी.कौ. कोटिया, प्रमुख सचिव, उत्तराखण्ड पुनर्गठन समन्वय विभाग देहरादून ।
संलग्नक 21 कर्मिकों की सूची
कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग
Dept. of Personnel
प्राप्ति और निर्गम
Receipt & Issuer
23 DEC 2010
आर्य किक/ISSEED
90चिकित्सकीय व्यथा के आधार पर राज्य परामर्शीय समिति की 79वीं बैठक दिनांक 24 मई, 2010 की बैठक में अस्वीकृत प्रत्यावेदन
माध्यमिक शिक्षा विभाग
| क्रमांक | कार्यिक का नाम/पदनाम | प्रत्यावेदन में अंकित | नियुक्ति तिथि | राज्य चिकित्सा परिषद की संस्तुति |
|---|---|---|---|---|
| क | /तैनाती | बीमारी | ||
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 |
| 1. | श्री मनमूल सिंह, प्रवक्ता, गणित, राजकीय इन्टर कालेज, धामदेयल, अल्मोड़ा। | पत्नी अन्तर रोग से ग्रस्त होने के आधार पर उत्तराखण्ड से उत्तर प्रदेश राज्य में समायोजन हेतु। | 14.12.1999 | राज्य चिकित्सा परिषद की आख्यानुसार श्रीमती शील्ला देवी पत्नी श्री मनमूल सिंह को केस आफ थायरॉगशसल साइनस विद डिस्चार्जिंग यस, आपरेशन इक्सजीन आफ थायरॉगशसल साइबरटेक्ट अण्डर जनरल सनीश्चसिया रोग से पीड़ित बताया गया है। उ.प्र. पुनर्गठन समन्वय विभाग द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 04 फरवरी, 2009 से उक्त बीमारी आच्छादित न होने के कारण समिति द्वारा इनके प्रत्यावेदन को अस्वीकार करते हुये इन्हें उत्तराखण्ड राज्य में ही बनाये रखे जाने की संस्तुति की गई। |
| 2. | श्री वीर पाल सिंह, सहायक अध्यापक, राज. इन्टर कालेज, शहरफाटक, अल्मोड़ा | पत्नी मानसिक रोग से ग्रस्त होने के आधार पर उत्तराखण्ड से उत्तर प्रदेश राज्य में समायोजन हेतु। | 01.11.1999 | राज्य चिकित्सा परिषद की आख्यानुसार श्रीमती सुषमलता पत्नी श्री वीर पाल को मिक्स्ड एन्कजायेटी विद डॉरिसिव डिस्क्रॉर्डर विद सर्वाईकल स्पान्डलीसिस का रोगी बताया गया है। है। उ.प्र. पुनर्गठन समन्वय विभाग द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 04 फरवरी, 2009 से उक्त बीमारी आच्छादित न होने के कारण समिति द्वारा इनके प्रत्यावेदन को अस्वीकार करते हुये इन्हें उत्तराखण्ड राज्य में ही बनाये रखे जाने की संस्तुति की गई। |
| 3. | श्री राकेश कुमार, सहायक अध्यापक, राज. इन्टर कालेज, रतगांव, घमोली | पिताजी गुर्दा रोग से ग्रस्त होने के आधार पर उत्तराखण्ड से उत्तर प्रदेश राज्य में समायोजन हेतु। | 11.07.1999 | राज्य चिकित्सा परिषद की आख्यानुसार श्री टेक चन्द्र पिता श्री राकेश कुमार को आन द बेसिस आफ रिकार्ड अवलेबिल विद दा पेशेन्ट ही हैजबीन अन्डर रेग्युलर ट्रीटमेंट एन्ड फालो फार एच.टी.एन. विद सी.आर. एफ. विद बी.पी. सीना वन इयर एन्ड पर हिज प्रेजेन्ट रिपोर्टस दा सी.आर.एफ इज प्रोग्रेसिंग का केस बताया गया है। अतः इनको निरन्तर एक नेफ्रोलोजिस्ट द्वारा फालोअप और किसी अच्छे नेफ्रालाजिकल सेंटर से उपचार एवं इन्हें निरन्तर एक सहायक की आवश्यकता है। उ.प्र. पुनर्गठन समन्वय विभाग द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 04 फरवरी, 2009 से उक्त बीमारी आच्छादित न होने के कारण समिति द्वारा इनके प्रत्यावेदन को अस्वीकार करते हुये इन्हें उत्तराखण्ड राज्य में ही बनाये रखे जाने की संस्तुति की गई। |
| 4. | श्री मनवीर सिंह, सहायक अध्यापक, राजकीय इन्टर कालेज, जीनापानी, अल्मोड़ा। | पत्नी गुर्दा रोग से ग्रस्त होने के आधार पर उत्तराखण्ड से उत्तर प्रदेश राज्य में समायोजन हेतु। | 29.10.1999 | राज्य चिकित्सा परिषद की आख्यानुसार श्रीमती विद्यारानी पत्नी श्री मनवीर सिंह को क्रमिक किडनी डिसीज विद ग्रेड-III केस आफ सी.आई.एन. विद यु.टी.आई. का रोगी बताया गया है। इन्हें नियमित उपचार की आवश्यकता बतायी गई है। उ. प्र. पुनर्गठन समन्वय विभाग द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 04 फरवरी, 2009 से उक्त बीमारी आच्छादित न होने के कारण समिति द्वारा इनके प्रत्यावेदन को अस्वीकार करते हुये इन्हें उत्तराखण्ड राज्य में ही बनाये रखे जाने की संस्तुति की गई। |
| 5. | श्री राकेश कुमार, प्रवक्ता, राजकीय इन्टर कालेज, पदभपुरी, नैनीताल | माता हृदय रोग से ग्रस्त एवं पत्नी गम्भीर रोग से ग्रस्त होने के आधार पर उत्तराखण्ड से उत्तर प्रदेश राज्य में समायोजन हेतु। | 21.10.1991 | 1. राज्य चिकित्सा परिषद की आख्यानुसार श्रीमती समरवधी देवी माता श्री राकेश कुमार को आई.एच.डी. विद हाइपरटेंशन विद एन्जाइना विद एल.वी.एफ. का रोगी बताया गया है। इन्हें नियमित विशेष जाँच एवं उपचार की आवश्यकता बतायी गई है। 2. राज्य चिकित्सा परिषद की आख्यानुसार श्रीमती कुसुम देवी पत्नी श्री राकेश कुमार को रिकरेन्ट ब्रान्काईटिस कास ए ई सी बी की केस बताया गया है। इन्हें नियमित उपचार की आवश्यकता बतायी गई है। उ.प्र. पुनर्गठन समन्वय विभाग द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 04 फरवरी, 2009 से उक्त बीमारी आच्छादित न होने के कारण समिति द्वारा इनके प्रत्यावेदन को अस्वीकार करते हुये इन्हें उत्तराखण्ड राज्य में ही बनाये रखे जाने की संस्तुति की गई। |
5/1/10/10| 6. | श्री लाल जी सिंह यादव, सहायक अध्यापक, राजकीय इन्टर कालेज, देवरी, खटीना, ऊपम सिंह नगर। | पत्नी हृदय रोग से ग्रस्त होने के आधार पर उत्तराखण्ड से उत्तर प्रदेश राज्य में समायोजन हेतु। | 26.08.1995 | राज्य चिकित्सा परिषद की आख्यानुसार श्रीमती कृष्णा देवी पत्नी श्री लाल जी सिंह यादव को कंस आफ आर.एच.डी. विद एम.एस. विद ट्राईवियत एम.आर.1 का रोगी बताया गया है। इसके अतिरिक्त इलाज के साथ-साथ एक अटैचेन्ट की साथ रहने की सलाह दी है। है। उ.प्र. पुनर्गठन समन्वय विभाग द्वारा जारी अधिसूचना दिनोंक 04 फरवरी, 2009 से उक्त बीमारी आच्छादित न होने के कारण समिति द्वारा इनके प्रत्यावेदन को अस्वीकार करते हुये इन्हें उत्तराखण्ड राज्य में ही बनाये रखे जाने की संस्तुति की गई। |
| — | — | — | — | — |
| 7. | श्री दशवन्त कुमार, सहायक अध्यापक, राज, इन्टर कालेज, जौरासी अल्मोड़ा। | पत्नी मानसिक रोग से ग्रस्त होने के आधार पर उत्तराखण्ड से उत्तर प्रदेश राज्य में समायोजन हेतु। | 22.09.1990 | राज्य चिकित्सा परिषद की आख्यानुसार श्रीमती पुष्पा पत्नी श्री दशवन्त कुमार को टेन्तन हेडएकस ( मानसिक रोग ) का रोगी बताया गया है। है। उ.प्र. पुनर्गठन समन्वय विभाग द्वारा जारी अधिसूचना दिनोंक 04 फरवरी, 2009 से उक्त बीमारी आच्छादित न होने के कारण समिति द्वारा इनके प्रत्यावेदन को अस्वीकार करते हुये इन्हें उत्तराखण्ड राज्य में ही बनाये रखे जाने की संस्तुति की गई। |
| 8. | श्री राम तीर्थ सरोज, सहायक अध्यापक, राजकीय इन्टर कालेज, पानाचूली, नैनीताल। | पत्नी हृदय रोग/मानसिक रोग से ग्रस्त होने के आधार पर उत्तराखण्ड से उत्तर प्रदेश राज्य में समायोजन हेतु। | 13.09.1991 | राज्य चिकित्सा परिषद की आख्यानुसार श्रीमती कैलाशकी पाली श्री राम तीर्थ सरोज को फालोथू कंस आफ डिप्रेशन विद मिटराल स्टेनोसिस विद आर.एच.डी. का रोगी बताया गया है। इन्हें लगातार हृदय रोग एवं मानसिक रोग विशेषज्ञ से उपचार लेते रहने की आवश्यकता है। है। उ.प्र. पुनर्गठन समन्वय विभाग द्वारा जारी अधिसूचना दिनोंक 04 फरवरी, 2009 से उक्त बीमारी आच्छादित न होने के कारण समिति द्वारा इनके प्रत्यावेदन को अस्वीकार करते हुये इन्हें उत्तराखण्ड राज्य में ही बनाये रखे जाने की संस्तुति की गई। |
| 9. | श्री महेन्द्र पाल गंगवार, सहायक अध्यापक, राजकीय इन्टर कालेज, सूयी, नैनेताल। | पत्नी गुर्दा रोग से ग्रस्त। होने के आधार पर उत्तराखण्ड से उत्तर प्रदेश राज्य में समायोजन हेतु। | 31.08.1996 | राज्य चिकित्सा परिषद की आख्यानुसार श्रीमती सुशीला गंगवार पत्नी श्री महेन्द्र पाल गंगवार को लेफ्ट. किडनी में स्माल कैलकुलस होना बताया गया है। जिसका मेडिकली/ सर्जकली उपचार सम्भव है। है। उ.प्र. पुनर्गठन समन्वय विभाग द्वारा जारी अधिसूचना दिनोंक 04 फरवरी, 2009 से उक्त बीमारी आच्छादित न होने के कारण समिति द्वारा इनके प्रत्यावेदन को अस्वीकार करते हुये इन्हें उत्तराखण्ड राज्य में ही बनाये रखे जाने की संस्तुति की गई। |
| 10. | श्री जगदीश सिंह पाल , प्रवक्ता-पणित , राजकीय इन्टर कालेज, बडेघ, उत्तरकाशी | पत्नी गुर्दा रोग से ग्रस्त होने के आधार पर उत्तराखण्ड से उत्तर प्रदेश राज्य में समायोजन हेतु। | 04.03.1995 | राज्य चिकित्सा परिषद की आख्यानुसार श्रीमती अनीता पत्नी श्री जगदीश सिंह पाल को कंस आफ सी.आर.एफ. ग्रेड-3 का रोगी बताया गया है। इन्हें निरन्तर चिकित्सकीय परामर्श की सलाह दी गई है। है। उ.प्र. पुनर्गठन समन्वय विभाग द्वारा जारी अधिसूचना दिनोंक 04 फरवरी, 2009 से उक्त बीमारी आच्छादित न होने के कारण समिति द्वारा इनके प्रत्यावेदन को अस्वीकार करते हुये इन्हें उत्तराखण्ड राज्य में ही बनाये रखे जाने की संस्तुति की गई। |
| 11. | श्री रजनीश कुमार, सहायक अध्यापक, राजकीय उच्चतर मकअमिक विद्यालय, रौणद रमोली, टिहरी गढ़वाल | पिता हृदय रोग से ग्रस्त होने के आधार पर उत्तराखण्ड से उत्तर प्रदेश राज्य में समायोजन हेतु। | 16.03.1996 | राज्य चिकित्सा परिषद की आख्यानुसार श्री भ्रग्बू सिंह पिता श्री रजनीश कुमार को सी.ए.वी.जी. (हृदय रोग) के फालोथू उपचाराधीन रोगी बताया गया है। इन्हें नियमित विशेषज्ञ जॉय एवं उपचार की आवश्यकता बतायी गई है। है। उ.प्र. पुनर्गठन समन्वय विभाग द्वारा जारी अधिसूचना दिनोंक 04 फरवरी, 2009 से उक्त बीमारी आच्छादित न होने के कारण समिति द्वारा इनके प्रत्यावेदन को अस्वीकार करते हुये इन्हें उत्तराखण्ड राज्य में ही बनाये रखे जाने की संस्तुति की गई। |
| 12. | श्री सतीश चन्द्र, प्रवक्ता-रघा विज्ञान, राजकीय इन्टर कालेज, गुनियालेख, नैनीताल। | पिता गुर्दा रोग से ग्रस्त होने के आधार पर उत्तराखण्ड से उत्तर प्रदेश राज्य में समायोजन हेतु। | 28.12.1993 | राज्य चिकित्सा परिषद की आख्यानुसार श्री रामेश्वर दयाल पिता श्री सतीश चन्द्र को सी.के.डी. ग्रेड-3 का रोगी बताया गया है। है। उ.प्र. पुनर्गठन समन्वय विभाग द्वारा जारी अधिसूचना दिनोंक 04 फरवरी, 2009 से उक्त बीमारी आच्छादित न होने के कारण समिति द्वारा इनके प्रत्यावेदन को अस्वीकार करते हुये इन्हें उत्तराखण्ड राज्य में ही बनाये रखे जाने की संस्तुति की गई। |
| 13. | श्री रमेश चन्द्र यादव, सहायक अध्यापक, राजकीय इन्टर कालेज पमतौला, अल्मोड़ा। | पुत्र मानसिक रोग से ग्रस्त होने के आधार पर उत्तराखण्ड से उत्तर प्रदेश राज्य में समायोजन हेतु। | 15.03.1997 | राज्य चिकित्सा परिषद की आख्यानुसार श्री सौम्य पुत्र श्री रमेश चन्द्र यादव को सीजर्स डिस्क्राउंट फालोथू कंस तथा एन्टी कन्वलसेन्ट ड्रग्स पर वेल सेटेल्ड का रोगी बताया गया है। इन्हें अगले 05 वर्ष तक नियमित फालोअप उपचार की आवश्यकता बतायी गई है। उ.प्र. पुनर्गठन समन्वय विभाग द्वारा जारी अधिसूचना दिनोंक 04 फरवरी, 2009 से उक्त बीमारी आच्छादित न होने के कारण समिति द्वारा इनके प्रत्यावेदन को अस्वीकार करते हुये इन्हें उत्तराखण्ड राज्य में ही बनाये रखे जाने की संस्तुति की गई। || 14. | श्री सन्तोष कुमार
सारस्वत,प्रवक्ता- रसायन,
राजकीय इण्टरकालेज,
रोताखाल, पौड़ी गढ़वाल। | पत्नी गुर्दा रोग से
ग्रस्त होने के आधार
पर उत्तराखण्ड से
उत्तर प्रदेश राज्य में
समायोजन हेतु। | 29.01.1991 | राज्य चिकित्सा परिषद की आख्यानुसार श्रीमती सरिता सारस्वत पत्नी श्री सन्तोष
कुमार सारस्वत को केस आफ एम्खआखडीठ ग्रेट ।। का केस बताया है। इन्हें
प्रोटीन रहित डाइट की सलाह दी गयी है। उ.प्र. पुनर्गठन समन्यय विभाग द्वारा
जारी अधिसूचना दिनोंक 04 फरवरी, 2009 से उक्त बीमारी आच्छादित न होने के
कारण समिति द्वारा इनकं प्रत्यावेदन को अस्वीकार करते हुये इन्हें उत्तराखण्ड
राज्य में ही बनाये रखे जाने की संस्तुति की गई। |
| — | — | — | — | — |
| 15. | श्री ऐश्वर्य प्रकाश,
प्रवक्ता-हिन्दी, राजकीय
इण्टर कालेज, विनोली
स्टेट, अल्मोड़ा। | माता गुर्दा रोग से
ग्रस्त होने के आधार
पर उत्तराखण्ड से
उत्तर प्रदेश राज्य में
समायोजन हेतु। | 26.07.1997 | राज्य चिकित्सा परिषद की आख्यानुसार श्रीमती राजेश्वरी देवी माता श्री ऐश्वर्य
प्रकाश को केस आफ सीडबेडडीठ-II विद हाइपर टेंशन रोग से ग्रसित बताया
है। इन्हें रैगुलर ओहमीडडीठ चेकअप की सलाह दी गयी है। उ.प्र. पुनर्गठन
समन्यय विभाग द्वारा जारी अधिसूचना दिनोंक 04 फरवरी, 2009 से उक्त बीमारी
आच्छादित न होने के कारण समिति द्वारा इनकं प्रत्यावेदन को अस्वीकार करते
हुये इन्हें उत्तराखण्ड राज्य में ही बनाये रखे जाने की संस्तुति की गई। |
| 16. | श्री राजेन्द्र यादव, प्रवक्ता
राजकीय इण्टर कालेज
बरा (किच्छा) ऊधमसिंह
नगर। | माता गुर्दा रोग से
ग्रस्त होने के आधार
पर उत्तराखण्ड से
उत्तर प्रदेश राज्य में
समायोजन हेतु। | 23.12.1996 | राज्य चिकित्सा परिषद की आख्यानुसार श्रीमती सुधा देवी पत्नी श्री राजेन्द्र यादव
को केस आफ परकिशन्या डिजीज विद डिप्रेशिव फीचर्स रोग से ग्रसित बताया
है। इन्हें लम्बे उपचार एवं पारिवाकि सहयोग की आवश्यकता बताई गयी है। उ.प्र.
पुनर्गठन समन्यय विभाग द्वारा जारी अधिसूचना दिनोंक 04 फरवरी, 2009 से उक्त
बीमारी आच्छादित न होने के कारण समिति द्वारा इनकं प्रत्यावेदन को अस्वीकार
करते हुये इन्हें उत्तराखण्ड राज्य में ही बनाये रखे जाने की संस्तुति की गई। |
| 17. | श्री रामचेर रावत,
प्रवक्ता-हिन्दी,
राजकीय इण्टर कालेज,
चौकी, नैनीताल। | माता गुर्दा रोग से
ग्रस्त होने के आधार
पर उत्तराखण्ड से
उत्तर प्रदेश राज्य में
समायोजन हेतु। | 04.08.1994 | राज्य चिकित्सा परिषद की आख्यानुसार श्रीमती अम्बर रानी माता श्री रामचेर
रावत की डायबेटीज मेलाईटिस विद हाईपरटेंशन विद नेफ्रोपैथी की उपचाराधीन
केस बताया गया है तथा इन्हें नियमित विशेषज्ञ जांच एवं उपचार की आवश्यकता
बताई गई है। उ.प्र. पुनर्गठन समन्यय विभाग द्वारा जारी अधिसूचना दिनोंक 04
फरवरी, 2009 से उक्त बीमारी आच्छादित न होने के कारण समिति द्वारा इनकं
प्रत्यावेदन को अस्वीकार करते हुये इन्हें उत्तराखण्ड राज्य में ही बनाये रखे जाने
की संस्तुति की गई। |
| 18. | श्री सत्येन्द्र कुमार सिंह,
सहायक अध्यापक,
राजकीय इण्टर कालेज,
गंगानगर, मोतियापाथर,
अल्मोड़ा। | पत्नी मानसिक रोग से
ग्रस्त होने के आधार
पर उत्तराखण्ड से
उत्तर प्रदेश राज्य में
समायोजन हेतु। | 14.09.1991 | राज्य चिकित्सा परिषद की आख्यानुसार श्रीमती मात्तवी सिंह पत्नी श्री सत्येन्द्र
कुमार सिंह को डिप्रेशन रोग से ग्रसित बताया है। इन्हें नियमित देखभाल एवं
उपचार की आवश्यकता है । उ.प्र. पुनर्गठन समन्यय विभाग द्वारा जारी अधिसूचना
दिनोंक 04 फरवरी, 2009 से उक्त बीमारी आच्छादित न होने के कारण समिति
द्वारा इनकं प्रत्यावेदन को अस्वीकार करते हुये इन्हें उत्तराखण्ड राज्य में ही
बनाये रखे जाने की संस्तुति की गई। |
| 19. | श्री राजबहादुर, प्रवक्ता,
गणित, राजकीय इण्टर
कालेज पुर्वाला दोगी,
टिहरी गढ़वाल | स्वयं विकलांगता के
आधार पर उत्तराखण्ड
से उत्तर प्रदेश राज्य
में समायोजन हेतु। | 16.07.1999 | राज्य चिकित्सा परिषद की आख्यानुसार श्री राज बहादुर को पार्शिवल
एकीलासिस आफ राइट एल्बो विद पैरासिस आफ आखडीठ/एल. विकलांगता 40
प्रतिशत बताया है। उक्त के अनुसार पेर्सेट में कम इन सेट डिवएबिलिट बताया
गया है। उ.प्र. पुनर्गठन समन्यय विभाग द्वारा जारी अधिसूचना दिनोंक 04 फरवरी,
2009 से उक्त बीमारी आच्छादित न होने के कारण समिति द्वारा इनकं प्रत्यावेदन
को अस्वीकार करते हुये इन्हें उत्तराखण्ड राज्य में ही बनाये रखे जाने की
संस्तुति की गई। |
| 20. | श्री विक्रम राम, प्रवक्ता,
अर्थशास्त्र राजकीय इण्टर
कालेज रातीघाट,
नैनीताल। | पुत्री गम्भीर हृदय रोग
से ग्रस्त होने के आधार
पर उत्तराखण्ड से
उत्तर प्रदेश राज्य में
समायोजन हेतु। | 02.04.1992 | राज्य चिकित्सा परिषद की आख्यानुसार कुुु रीतु पुत्री श्री विक्रम राम को
गम्भीर हृदय रोग से ग्रसित बताया है। इन्हें अपने भाईओ काढ़ियाईटिस के
निमित विशेषज्ञ जाँच एवं उपचार की आवश्यकता बतायी है। है। उ.प्र. पुनर्गठन
समन्यय विभाग द्वारा जारी अधिसूचना दिनोंक 04 फरवरी, 2009 से उक्त बीमारी
आच्छादित न होने के कारण समिति द्वारा इनकं प्रत्यावेदन को अस्वीकार करते
हुये इन्हें उत्तराखण्ड राज्य में ही बनाये रखे जाने की संस्तुति की गई। |
| 21. | श्री अशफी लाल, सहायक
अध्यापक, राजकीय इण्टर
कालेज छिद्रदरवाला,
देहरादून। | पिता गम्भीर हृदय रोग
से ग्रस्त होने के आधार
पर उत्तराखण्ड से
उत्तर प्रदेश राज्य में
समायोजन हेतु। | 20.03.1996 | राज्य चिकित्सा परिषद की आख्यानुसार श्री मान सिंह पिता श्री अशफी लाल
को केस आफ हिमगटेसिस हिस्ट्री आफ ए.टी.टी-2 इयर बैक रोग से ग्रसित
बताया है। है। उ.प्र. पुनर्गठन समन्यय विभाग द्वारा जारी अधिसूचना दिनोंक 04
फरवरी, 2009 से उक्त बीमारी आच्छादित न होने के कारण समिति द्वारा इनकं
प्रत्यावेदन को अस्वीकार करते हुये इन्हें उत्तराखण्ड राज्य में ही बनाये रखे जाने
की संस्तुति की गई। |