Decision on Adjusting Urdu Translators from Uttarakhand to Uttar Pradesh

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In a significant development concerning inter-state personnel matters, the central government has issued directives regarding the redeployment of Urdu translators. A key advisory committee, after thorough discussions with representatives from both Uttar Pradesh and Uttarakhand, addressed the issue of Urdu translator positions being deemed redundant in Uttarakhand. The committee, recognizing that these specific posts fall under the district cadre rather than the state cadre, upheld a previously established central government policy. Consequently, it was determined that no further policy reconsideration was necessary for such positions. The responsibility for finalizing these adjustments, including individual cases like that of an Urdu Translator-cum-Junior Clerk, has now been placed on the mutual agreement and coordination between the Uttar Pradesh and Uttarakhand state governments. This decision streamlines the administrative process for personnel affected by state reorganization.

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संख्या- 27/07/2011-एस.आर.एस.
भारत सरकार
कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय
(कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग)

तीसरा तल, लोकनायक भवन,
खान मार्केट, नई दिल्ली ।
दिनांक 29/04/2011

सेवा में,
मुख्य सचिव,
उत्तर प्रदेश सरकार,
लखनऊ ।

मुख्य सचिव,
उत्तरांचल सरकार,
देहरादून ।

विषय:- उत्तराखण्ड में उर्दू अनुवादकों की उपयोगिता शून्य होने के कारण उत्तर प्रदेश राज्य में समायोजित किये जाने तथा श्री मो० अनीस मियां अंसारी, उर्दू अनुवादक-सह-कनिष्ठ लिपिक (गृह विभाग) के उत्तर प्रदेश राज्य में समायोजित किये जाने के प्रत्यावेदन पर विचार।

महोदय,

उपर्युक्त विषय में मुझे यह कहने का निर्देश हुआ है कि राज्य परामर्शी समिति की दिनांक 14.02.2011 को आयोजित बैठक में उत्तराखण्ड में उर्दू अनुवादकों की उपयोगिता शून्य होने के कारण उत्तर प्रदेश राज्य में समायोजित किये जाने तथा श्री मो० अनीस मियां अंसारी, उर्दू अनुवादक-सह-कनिष्ठ लिपिक (गृह विभाग) के उत्तर प्रदेश राज्य में समायोजित किये जाने के प्रत्यावेदन पर विचार किया गया। बैठक में उपस्थित उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखण्ड के प्रतिनिधि द्वारा यह बताया गया कि उर्दू अनुवादक-सह-कनिष्ठ लिपिक का पद राज्य संवर्ग का न होकर जिला संवर्ग का है। विचारोपरांत समिति ने संस्तुति की है कि जिला संवर्ग के पदों के बारे में राज्य परामर्शीय समिति की संस्तुतियों के आधार पर भारत सरकार द्वारा पूर्व में नीतिगत निर्णय लिया जा चुका है और उसमें किसी पुनर्विचार की आवश्यकता नहीं है। अतः इसमें निर्णय दोनो राज्य सरकारें आपसी सहमति से करें।

समिति द्वारा इन मामलों में जो संस्तुतियों की गई उन्हें भारत सरकार द्वारा मान लिया गया है ।

कृपया संबंधित अधिकारियों को इन निर्णयों से अवगत करा दिया जाए ।

भवदीय,

(सारंगघर नायक)
अवर सचिव, भारत सरकार

प्रतिः-

  1. श्री आर.एम. श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश पुनर्गठन समन्वय विभाग, लखनऊ
  2. प्रमुख सचिव, उत्तराखंड पुनर्गठन समन्वय विभाग देहरादून।