A recent administrative directive has brought clarity to a complex issue involving the allocation of government personnel following state reorganizations, specifically addressing long-standing concerns that emerged after the creation of Uttarakhand. This significant decision, prompted by a High Court order, involved a thorough review of individual representations regarding their final postings. The resolution confirms that certain personnel, despite their origins in the newly formed state, will maintain their allocation to the parent state, Uttar Pradesh. This outcome underscores a commitment to the rigorous application of established guidelines for personnel transfers during state bifurcations, ensuring that all final allocations align with the principles governing such administrative restructurings.
SOURCE PDF LINK :
Click to view full document content
संख्या 27/17/2011-SRS
भारत सरकार
कार्मिक, लोक शिकायत तथा पैशन मंत्रालय
(कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग)
तृतिय तल, लोक नायक भवन,
खान मार्केट, नई दिल्ली
दिनांक : जनवरी, 2012
सेवा में,
23 JAN 2017
- मुख्य सचिव
उत्तर प्रदेश सरकार
लखनऊ -
मुख्य सचिव
उत्तराखंड सरकार,
देहारादून
विषय: माननीय उत्तराखंड उच्च न्यायालय दवारा रिट याचिका संख्या 423/06 एवं 424/2006 में पारित
दिनांक 18-12-2009 के आदेश के अनुपालन में श्री के0 एस0 विष्ट तथा श्री जगमोहन सिंह विष्ट का
प्रत्यावेदनों पर विचार ।
महोदय,
मुझे उपर्युक्त विषय के सन्दर्भ में यह कहने का निदेश हुआ है कि माननीय उत्तराखंड उच्च न्यायालय
द्वारा रिट याचिका संख्या 423/06 एवं 424/2006 में पारित दिनांक 18-12-2009 के आदेश के तहत श्री के0
एस0 विष्ट तथा श्री जगमोहन सिंह विष्ट का अंतिम आवंटन तब तक स्थगित रखा गया जब तक भारत
सरकार दवारा उनके दिनांक 16-07-2007 का प्रत्यावेदन निपटाया ना जाए ।
- न्यायालय के आदेश के अनुपालन में परामर्शी समिति द्वारा दिनांक 17-10-2011 को आयोजित बैठक
में याचीओं के प्रत्यावेदन पर विचार किया गया । समिति को बताया गया कि श्री के0 एस0 विष्ट तथा श्री
जगमोहन सिंह विष्ट के प्रत्यावेदन के अनुसार उनके नाम उत्तराखंड आबंटन हेतु जारी अनंतिम अंतिम आवंटन
सूची में सम्मिलित थे क्योंकि वे उत्तराखंड राज्य के मूल निवासी तथा उसी राज्य के विकल्पी हैं । परंतु
अंतिम आवंटन सूची से इनके नाम हटा दिये गए । समिति ने पाया कि दोनों कार्मिकों का कथन सत्य है, परंतु
ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में अवर अभियंता के उत्तराखंड राज्य आवंटित पद के सापेक्ष अवर अभियंता संवर्ग
के विकल्पधारी कार्मिकों कि संख्या अधिक थी तथा प्रश्नगत कार्मिक अन्य विकल्पधारियों से कनिष्ठ थे ।
शासनादेश में उल्लिखित व्यवस्था के अनुसार यदि पद से अधिक विकल्पधारी कार्मिकों की संख्या है तो
वरिष्ठता के आधार पर कार्मिकों के नाम ही सूची में सम्मिलित किए जाएंगे । याचौगण के कनिष्ठ होने के
कारण अंतिम आवंटन सूची में उनके नाम सम्मिलित नहीं किए गए । समिति द्वारा विकल्पधारियों में उक्त
दोनों कार्मिकों के कनिष्ठ होने के कारण प्रत्यावेदन अस्वीकार किए जाने कि संस्तुति की गयी । -
भारत सरकार समिति की संस्तुति से सहमत है तथा तदनुसार श्री के0 एस0 विष्ट तथा श्री जगमोहन
-24-
सिंह विष्ट का अंतिम आवंटन उत्तर प्रदेश राज्य के लिए बना रहेगा । संबन्धित कार्मिकों से स्थिति के बारे में अवगत करवा दिया जाए ।
भवदीय, (सारंगधर नायक) अवर सचिव, भारत सरकार
प्रतिलिपि:-
- श्री राजेन्द्र मोहन श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश राज्य पुनर्गठन समन्वय विभाग, 8-ए, नवीन भवन, सचिवालय, लखनऊ -226001 ।
- अवर सचिव, पुनर्गठन विभाग, उत्तराखंड सरकार, देहारादून ।
