This document communicates a decision regarding the re-allocation of two junior assistants, Vinay Kumar and Rupesh Kumar, to Uttar Pradesh. A consultative committee, in its meeting on September 18, 2013, reviewed their applications. The committee noted that the grounds presented for re-allocation, such as choosing Uttar Pradesh as a state, being a native, and property ownership, were general and not covered by state reorganization guidelines. Furthermore, reasons provided by the employees for not being the junior-most were dismissed by the state government. Since the state government has the service records of the employees, their decision regarding seniority is accepted. Consequently, the committee recommended rejecting the applications of these employees for re-allocation. The Government of India’s consultative committee has agreed with this recommendation, and the final allocation for Vinay Kumar and Rupesh Kumar will remain with the state of Uttarakhand. However, this decision will only take effect after any existing stay orders are revoked. The concerned personnel are to be informed of this decision.
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सं0 27/10/2013-एस0आर0एस0
भारत सरकार
कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय
(कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग)
तीसरा तल, लोकनायक भवन
खान मार्किट, नई दिल्ली ।
दिनांक 1/8 दिसम्बर, 2013
सेवा में,
मुख्य सचिव
उत्तर प्रदेश शासन
सचिवालय, लखनऊ
उत्तर प्रदेश ।
मुख्य सचिव
उत्तराखंड शासन
सचिवालय, देहरादून
उत्तराखंड ।
विषय:- दिनांक 18.09.2013 को आयोजित परामर्शी समिति की संस्तुति की अनुपालन में सर्वश्री विनय कुमार व रूपेश कुमार, कनिष्ठ सहायकों का उत्तर प्रदेश राज्य आवंटन पर विचार।
महोदय,
उपर्युक्त विषय के सम्बन्ध में मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि सर्वश्री विनय कुमार व रूपेश कुमार, कनिष्ठ सहायकों से उत्तर प्रदेश राज्य पुनरावंटन हेतु प्राप्त आवेदन पर परामर्शी समिति की दिनांक 18.09.2013 को आयोजित बैठक में विचार किया गया । समिति की संज्ञान में लाया गया कि यह सभी कार्मिकों के द्वारा उत्तर प्रदेश राज्य पुनरावंटन हेतु दर्शाये गये आधार जैसे उत्तर प्रदेश के विकल्प तथा मूल निवासी होना, परिवार तथा अचल सम्पत्ति का देख रेख आदि सामान्य प्रकृति के हैं तथा राज्य पुनर्गठन दिशा निदेशों से आच्छादित नहीं है । पुनः कनिष्ठतम न होने के बारे में कार्मिकों के द्वारा जो कारण प्रस्तुत किये गये थे, उसे राज्य सरकार द्वारा निरस्त किया जा चुका है । क्योंकि राज्य सरकार के पास कार्मिकों के सेवा संबंधी दस्तावेज उपलब्ध हैं, अतः कनिष्ठता के सम्बन्ध में उनके द्वारा दिये गये निर्णय स्वीकार्य है । अतः समिति द्वारा इन कार्मिकों के आवेदन निरस्त किये जाने कि संस्तुति की गई ।
- भारत सरकार परामर्शी समिति की उपर्युक्त संस्तुति से सहमत है तथा तदनुसार सर्वश्री विनय कुमार व रूपेश कुमार, कनिष्ठ सहायकों का अंतिम आवंटन उत्तराखंड राज्य के लिये बना रहेगा । परंतु यदि इनके मामले में कोई स्थगनादेश है, तो यह निर्णय स्थगनादेश रद्दद होने के उपरांत ही प्रभावी होगा ।
-
कार्मिक को इस निर्णय के बारे में सूचित किया जाए ।
अवर सचिव, भारत सरकार
प्रतिलिपि प्रेषित:-
- श्री अशोक घोष, प्रमुख सचिव, उ0प्र0 पुनर्गठन समन्वय विभाग, 46, बहुखण्डी भवन, सचिवालय, लखनऊ ।।
- श्रीमती हेमलता ढींडीयाल, सचिव, उत्तराखंड पुनर्गठन विभाग, सचिवालय, देहरादून ।