Government Order on Mutual Transfer and Spouse Policy for State-Level Officers

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This document outlines the procedures and conditions for mutual transfer and spouse policy for state-level officers who have been finally allocated to Uttar Pradesh and Uttarakhand. It details the criteria for “Genuine Hardship” (such as severe medical conditions) and “Spouse Policy” (considering the employment of the spouse in government service). The order specifies how applications will be processed, the eligibility of employees, and the timelines for submission. It also mentions that mutual transfers based on mutual agreement will be terminated, and individual cases will be considered based on specific rules and prior agreements. The document aims to facilitate the transfer of employees between the two states under defined circumstances, ensuring fairness and adherence to established policies.

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रजिस्ट्रेशन नम्बर-एस०एस०पी०/एल० डब्लू/एन०पी०-91/2008-10 लाइसेंन्स टू पोस्ट ऐट कन्सेशनल रेट

सरकारी गजट; उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रकाशित

असाधारण

लखनऊ, मुख्यमंत्री, 4 फरवरी, 2009
भाद्रपद 15, 1930 शक सम्पत्

सत्तर प्रदेश शासन

उद्यम पुनर्गठन समन्वय विभाग

संख्या 194/25-1-2009
लखनऊ, 04 फरवरी, 2009

अधिसूचना/संशोधन

उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम-2000 को धारा 73 (2) के अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखण्ड के राज्य स्तरीय अधिकारियों/कर्मचारियों के अनाम आवंटन आदेश जारी किये गये हैं। भारत सरकार, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पैनान मंत्रालय, नई दिल्ली के पत्र संख्या-14/279/2002-एसआर(एस) दिनांक 08 जून, 2008 के प्रकाश में दोनों राज्यों में पदस्थ अधिकारियों/कर्मचारियों की पारिवारिक कठिनाईयों को दृष्टिगत रखते हुए राज्य परामर्शीय समिति द्वारा दिनांक 17 सितम्बर, 2008 को सम्पन्न बैठक में विचार-विमर्श के उपरान्त Gremise Hardship (वास्तविक व्यथा) एवं Spouse Policy (सामान्य नीति) के अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा अनाम रूप से आवंटित राज्य स्तरीय अधिकारियों/कर्मचारियों को उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखण्ड से एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानान्तरण के संबंध में प्रक्रिया निर्धारित की गयी है।

भारत सरकार कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पैनान मंत्रालय, नई दिल्ली के पत्र संख्या-14/279/2002-एसआर(एस) दिनांक 08 जून, 2008 तथा पत्र संख्या-27/18/2009-एसआर(एस) दिनांक 23 दिसम्बर, 2008 के अनुपालन में तथा राज्य परामर्शीय समिति द्वारा अनाम किए गए सिद्धान्त के अनुरूप तात्कालिक प्रभाग से दोनों राज्यों के मध्य कार्मिकों के अनाम आवंटन हेतु निम्नलिखित व्यवस्था एवं प्रक्रिया निर्धारित की जाती है –

1-Genuine Hardship (वास्तविक व्यथा) के अंतर्गत राज्य परिवर्तन की सुविधा :-

अ-इस श्रेणी के अर्न्तगत केवल उन्हीं प्रकरणों पर विचार किया जायेगा जिनकी अनन्तिम अनाम आवंटन सूची (T.F.A.L) जारी हो चुकी हो परन्तु अनाम आवंटन सूची (F.A.L) जारी नहीं हुई हो।

पात्रता-

1-यदि शासकीय कार्मिक स्वयं अन्यता, हृदय बाईंहास, गुर्दा रोग, कैंसर या मानसिक रोग से ग्रसित हो।


2- यदि शासकीय सेवक के पति या पत्नी, आश्रित माता-पिता एवं आश्रित बच्चे गुर्दा रोग, कैंसर, या मानसिक रोग से ग्रसित हों।

ब-Spouse Policy (दाम्पस्य नीति) के अंतर्गत राज्य परिवर्तन को सुविधा :-
(क) ऐसे शासकीय विभागों के सेवक जिन्हें उत्तरवर्ती उत्तर प्रदेश/उत्तराखण्ड राज्य अन्तिम रूप से आवंटित हुआ हो, दाम्पत्य नीति के अनुसार स्थानान्तरणोपरान्त उत्तर प्रदेश/उत्तराखण्ड में निवत. तिथि 09 नवम्बर, 2000 को धारित पद के सुर पर ही समायोजन के पात्र होंगे।
(ख) नीति के अन्तर्गत ऐसे शासकीय सेवकों को सुविधा अनुभव्य होगी जिनके दम्पत्ति शासकीय विभागों में अथवा निम्न संस्थाओं में कार्यरत हों :-
(i) राजकीय शिक्षण संस्थाएं, राजकीय विश्वविद्यालय, राजकीय डिग्री कॉलेज आदि के कार्मिक।
(ii) शासकीय प्राविधिक शिक्षण संस्थाएं, प्रथा-आईएटीएआईए आदि के कार्मिक।
(iii) शासकीय चिकित्सकीय शिक्षण संस्थाएं तथा-संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के कार्मिक।
(iv) राजकीय तथा केन्द्रीयत निगम जिनका कार्य क्षेत्र केवल उत्तर प्रदेश अथवा उत्तराखण्ड के अन्तर्गत हो तथा भारत सरकार की संस्थायें तथा-C.D.R.I. लखनऊ, I.T.R.C. लखनऊ, वनस्पति अनुसंधान केन्द्र, लखनऊ, I.V.R.I. बरेली आदि।
(v) राज्य नियंत्रणाधीन एवं राज्य वित्ता पोषित स्वायत्तशासी, संस्थाओं, बेसिक शिक्षा परिषद् तथा ऐसी संस्थायें जिनके वेतनमान राज्य वेतन समिति द्वारा निर्धारित किये जाते हैं।
(ग) दम्पत्ति के राजकीय सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं में कार्यरत होने की दसा में उपरोक्त (क) एवं (ख) की सुविधा अनुभव्य नहीं होगी।
(घ) नीति के अंतर्गत विवाह की तिथि के अनुसार आरोही क्रम में वरीयता दी जायेगी।
(क) नीति के अंतर्गत उन कार्मिकों को भी वह सुविधा अनुभव्य होगी, जिनका विवाह नियत तिथि 09-11-2000 के पश्चात हुआ हो।
(घ) इस नीति के अन्तर्गत, विस्तृत प्रहार एवं प्रसार के उपरान्त विकल्प देने के लिये केवल 30-09-2009 तक का समय दिया जायेगा। उपलक्ष्य रिक्तियों की संगणना वर्ष 2008-09 तक के चयन वर्ष की रिक्तियों के आधार पर की जायेगी।
(घ) सम्बन्धित राज्यों में उपलक्ष्य सम्बन्ध विभाग में रिक्तियों, भर्ती के स्त्रोत (यथा सीधी भर्ती अथवा प्रोन्नति) तथा आरक्षण नीति के अनुसार ही स्थानान्तरण/समायोजन पर विचार किया जा सकता है।
(ज) यदि पति-पत्नी दोनों ही शासकीय सेवा में हैं, तो पत्नी के विकल्प के आधार पर ही समायोजन किया जायेगा।
(झ) ऐसे शासकीय सेवक (दाम्पत्य नीति से आच्छादित प्रकरण) जिन्हें उत्तरवर्ती उत्तर प्रदेश/उत्तराखण्ड राज्य अन्तिम रूप से आवंटित हुआ हो, वे उत्तर प्रदेश/उत्तराखण्ड में नियत तिथि 09 नवम्बर, 2000 को जिस पद पर थे, उसी पद पर तथा उसी विभाग/विभागाध्यक्ष के अधीन सेवा के पद/संवर्ग में उसी वेतनमान एवं समकक्ष कार्य-प्रकृति के पद पर समायोजित होंगे।
(अ) ऐसे शासकीय सेवक (दाम्पत्य नीति से आच्छादित प्रकरण) जिनकी सेवानिवृत्ति में, इस नीति के प्रसारित होने की तिथि से एअ वर्ष से कम समय शेष रह गया हो, वे समायोजन के पात्र नहीं होंगे।


(ए) ऐसे शासकीय सेवक (दाम्पत्य नीति से आचापरित प्रकरण) जिनके विरूद्ध विभागीय जांच/सतर्कता जांच/अभियोजन की कार्यवाही प्रचलित है, वे समायोजन के पात्र नहीं होंगे।
(ग) ऐसे शासकीय सेवक, जिन्होंने पारस्परिक स्थानान्तरण की सुविधा प्राप्त कर ली है, वे दाम्पत्य नीति के अन्तर्गत लाभ प्राप्त करने हेतु पात्र नहीं होंगे।
(ड) समायोजन के फलस्वरूप शासकीय सेवक को स्थानान्तरण भरता की पात्रता नहीं होगी।
(ब) यदि नीति के अनुसार स्थानान्तरित द्वापर्यत को अन्तिम रूप से आवंटित किया जा चुका हो, तो समायोजन के फलस्वरूप उत्तरवर्ती राज्य में कार्यभार ग्रहण करने वाले शासकीय सेवकों को संविलियन करते हुये उनकी ज्येष्ठता तिथि 09 नवम्बर, 2000 से निर्धारित की जायेगी।

  • (ग) भारत सरकार द्वारा अन्तिम राज्य के दिनांक 09 नवम्बर, 2000 के बाद किसी शासकीय सेवक को उत्तरवर्ती राज्य में यदि पदोन्नति दी गयी है और वह उत्तरवर्ती उत्तर प्रदेश/उत्तराखण्ड (जैसी भी स्थिति हो) राज्य में समायोजन चाहता है, तो उन्हें समायोजन पर आये उत्तरवर्ती राज्य में अन्तिम आवंटन के समय दिनांक 09 नवम्बर, 2000 को बारित पद पर पदावनत कर, उस राज्य में संविलियन किया जायेगा। समायोजन के पश्चात् उत्तरवर्ती राज्य में कार्यभार ग्रहण करने के बाद सम्बन्धित अधिकारी/कर्मचारी यदि संवर्ग में पदोन्नति हेतुं पात्रता रखते है, तो इस पर संबंधित राज्य द्वारा विचार किया जायेगा।
    (ग) दाम्पत्य नीति के अन्तर्गत उसी स्थिति में विचार किया जायेगा जबकि पति एवं पत्नी दोनों दिनांक 09 नवम्बर, 2000 के पूर्व सरकारी नौकरी में कार्यरत रहे हों अथवा दोनों में कोई एक सरकारी नौकरी में तथा दूसरा उपरोक्त (ख) में इंगित विभिन्न सरकारी संस्थाओं में से किसी एक में कार्यरत रहा हो।
    (घ) उपरोक्त में वर्णित दाम्पत्य नीति के सुविधा उस हालत में भी प्रदान की जायेगी जबकि पति एवं पत्नी दोनों स्टेट कँडर से इत्तर जिला अथवा मण्डल कँडर के कर्मी हों।

2-राज्य परिवर्तन की प्रक्रिया-परिवर्तन के इच्छुक एवं पात्र कार्मिक अपना आवेदन-पत्र जिस उत्तरवर्ती राज्य में वे कार्यरत हैं, उस राज्य के अपने विभागाध्यक्ष को प्रस्तुत करेंगे।

उत्तरवर्ती राज्य के संबंधित विभाग के विभागाध्यक्ष ऐसे प्राप्त आवेदन पत्रों का परीक्षण कर-अपने अभियत के साथ आवेदन-पत्र संबंधित प्रशासकीय विभाग को प्रेषित करेंगे। संबंधित प्रशासकीय विभाग अपने अभियत के साथ उत्तरवर्ती उत्तर प्रदेश/उत्तराखण्ड राज्य, जैसी भी स्थिति हो, के संबंधित प्रशासकीय विभाग की टिप्पणी प्राप्त कर राज्य परामर्शीय समिति के विचारार्थ प्रस्तुत करने हेतु समिति के सचिवालय तथा-उत्तर प्रदेश शासन के उपप्रत पुनर्गठन समन्वय विभाग को प्रेषित करेंगे।

3-उपरोक्त के अतिरिक्त अंतिम आवंटन के प्रकरण राज्य परामर्शीय समिति द्वारा विचार हेतु पुनः गही व्यवहृत किये जायेंगे।

4-राज्य परामर्शीय समिति के निर्णयानुसार केवल लम्बित मामलों को छोड़ते हुए उत्तरवर्ती राज्यों के कार्मिकों के बीच हुए आपसी समझौते पर आधारित पारस्परिक स्थानान्तरण की सुविधा तात्कालिक प्रभाव से समाप्त की जाती है।

आज्ञा से,
आर0 एम0 श्रीवास्तव,
प्रमुख सचित्र।


उत्तर प्रदेश शासन उत्तर प्रदेश पुनर्गठन समन्वय विभाग संख्या : 338/28-1-2009 लखनऊ :: दिनांक : 06 मार्च, 2009

अधिसूचना/संशोधन

Mutual Transfer (पारस्परिक स्थानान्तरण) एवं Spouse Policy (दाम्पत्य नीति) अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा अन्तिम रूप से आवंटित राज्य स्तरीय अधिकारियों/कर्मचारियों उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखण्ड से एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानान्तरण के सम्बन्ध में ७ अधिसूचना संख्या 194/28-1-2009, दिनांक 04 फरवरी, 2009 में निम्नवत् संशोधन वि जाता है –

विद्यमान प्राविधान एतदुद्धारा प्रतिस्थापित प्राविधान
प्रस्तर-1: Genuine Hardship (वास्तविक व्यथा) के अन्तर्गत राज्य परिवर्तन की सुविधा:- प्रस्तर-1: Medical Hardship (चिकित्सकीय व्यथा) के अन्तर्गत राज्य परिवर्त की सुविधा:-
प्रस्तर-1 (ज) : यदि पति-पत्नी दोनों ही शासकीय सेवा में हैं तो पत्नी के विकल्प के आधार पर ही समायोजन किया जायेगा। प्रस्तर-1 (ज) : केवल पत्नी को ही यह विकल्प प्राप्त होगा कि वह अपने प्रदेश में कार्यरत रहन चाहती है या अपने पति के तैनाती के प्रदेश सेेे सेवा करने हेतु स्थानान्तरण चाहती है।
प्रस्तर-1 (थ) : उपरोक्त में वर्णित दाम्पत्य नीति की सुविधा उस हालत में भी प्रदान की जायेगी जबकि पति एवं पत्नी दोनों स्टेट कैडर से इतर जिला एवं मण्डल काडर के कर्मी हों। प्रस्तर-1-(थ) : उपरोक्त वर्णित दाम्पत्य नीति की सुविधा उस हालत में भी प्रदान की जायेगी जबकि पति एवं पत्नी दोनों स्टेट कैडर या तत्कालीन पर्वतीय उप संवर्ग के कर्मी हों।
प्रस्तर-4 : राज्य परामर्शीय समिति के निर्णयानुसार केवल लम्बित मामलों को छोड़ते हुये उत्तरवर्ती राज्यों के कार्मिकों के बीच हुये आपसी समझौते पर आधारित पारस्परिक स्थानान्तरण की सुविधा तात्कालिक प्रभाव से समाप्त की जाती है। प्रस्तर-4 : पारस्परिक स्थानान्तरण की अवधि दिनांक 31 मार्च, 2009 तक बढ़ा दी जाये तथा इस अवधि में प्राप्त नये प्रकरण और वे पुराने प्रकरण जिन्हें कालबाधित होने के कारण निरस्त कर दिया गया था, को भी सम्मिलित करते हुये गुण-दोष के आधार पर निर्णय लिया जाये।

338 (1)/28-1-2009, तद दिनांक –

प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित –
प्रमुख सचिव, महामहिम श्री राज्यपाल, उत्तर प्रदेश।
मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन।
(3) मुख्य सचिव, उत्तराखण्ड शासन, देहरादून।
(4) अपर सचिव, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, भारत सरकार, कक्ष संख्या 109, नार्थ ब्ले नई दिल्ली।
(5) उप सचिव, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, भारत सरकार, तृतीय तल, कार्मिक, ह शिकायत एवं पेन्शन मंत्रालय, तृतीय तल, लोक नायक भवन, ख़ान मार्केट, नई दिल्ली।
(6) पुनर्गठन आयुक्त, उत्तराखण्ड शासन, लखनऊ।
(7) निजी सचिव, अध्यक्ष, राज्य परामर्शीय समिति, 3/7, एफ ब्लॉक, सप्तम् तल, बापू भः उत्तर प्रदेश सचिवालय, लखनऊ।
(8) समस्त प्रमुख सचिव/सचिव, उत्तर प्रदेश शासन।
(9) सचिव, राज्य पुनर्गठन विभाग, उत्तराखण्ड शासन, देहरादून।
(10) निदेशक, राजकीय मुद्रणालय, उत्तर प्रदेश, कैम्प कार्यालय, ऐशबाग, लखनऊ को अनुरोध के साथ प्रेषित कि आगामी गजट में इसको प्रकाशित करने तथा उसकी 10 प्रतियाँ उत्तर प्रदेश पुनर्गठन समन्वय विभाग को भी उपलब्ध कराने का कष्ट करें।

$$
\begin{aligned}
& \text { आज्ञा से, } \
& \text { (आरएम० श्रीवास्तव ) } \
& \text { प्रमुख सचिव। }
\end{aligned}
$$


15-01-1995 08:40 FROM:

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रजिस्ट्रेशन माध – 1000/1000-1000
वायु/एनएमए 91-200-16
लाइसेंस दू 101-1100-1000

सरकारी गजट, उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेशीय सरकार द्वारा प्रकाशित

असाधारण

लखनऊ, बुधवार, 03 फरवरी, 2010
मध्य 14, 1931 शक समिति

उत्तर प्रदेश शासन

1000 पुनर्गठन समन्वय अनुमान-1

संख्या 174/28-1-2010
लखनऊ, 03 फरवरी, 2010

अधिसूचना / संशोधन

Medical Hardship (चिकित्सकीय व्यय) के अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा अग्रिम रूप से आयोजित राज्य स्तरीय अधिकारियों/कर्मचारियों को उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखण्ड के मध्य एक-दूसरे राज्य में स्थानान्तरण के संबंध में अधिसूचना संख्या-194/26 1 2009, दिनांक 04 फरवरी, 2009, संबंधित संशोधित अधिसूचना संख्या 338/38-1-2009, दिनांक 06 जुलाई 2009 में प्रक्रिया निर्धारित की गई है।

राज्य गणस्तरीय समिति की बैठक दिनांक 22 जनवरी, 2010 के निर्णयानुसार चिकित्सकीय व्यय के अंतर्गत दिनांक 14 फरवरी, 2010 तक उत्तर प्रदेश पुनर्गठन समन्वय निर्धारित में प्राप्त प्रारूपिक पर ही विचार किया जायेगा। इसके उपरांत प्राप्त होने वाले प्रत्यायनों पर कोई कार्यवाही नहीं की जायेगी।

आशा से
आर0 एग0 श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव।

पीएएमएयूएवीए ए० पी० 1160 राजपत्र-(टिप्पी)-2010-(2373)-585 प्रतियां-(कम्प्यूटर/आफसेट)। पीएएमएयूएवीए-ए० पी० 1 1160 राजपत्र पुनर्गठन 2010-(2380)-500 प्रतियां-(कम्प्यूटर/आफसेट)।