This notification introduces amendments to the All India Services (Conduct) Rules, 1968, through the All India Services (Conduct) Amendment Rules, 2014. The amendments, effective from their publication in the Official Gazette, outline specific standards of conduct for members of the All India Services. These include maintaining high ethical standards, integrity, and impartiality; upholding political neutrality; promoting efficiency and fairness in the discharge of duties; fostering accountability and transparency; being responsive to the public, particularly vulnerable sections; and behaving courteously. Furthermore, the rules emphasize commitment to the Constitution and democratic values, protection of national sovereignty and integrity, and upholding probity in public service. Members are expected to make decisions in the public interest, use public resources efficiently, and declare any potential conflicts of interest. They are prohibited from accepting financial or other favors that could influence their official conduct and from misusing their position for personal or familial gain. Selections and decisions must be based on merit, and discrimination against any section of society, especially the poor and underprivileged, is forbidden. Members must adhere to laws and regulations and maintain the confidentiality of information that could harm national security, economic interests, or international relations, while performing their duties with the highest professional competence and dedication.
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असाधारण EXTRAORDINARY भाग II—खण्ड 3—उप-खण्ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i) प्राधिकार से प्रकाशित
PUBLISHED BY AUTHORITY
| सं. 413] | नई दिल्ली, शुक्रवार, अगस्त 8, 2014/स्रावण 17, 1936 |
|---|---|
| No. 413] | NEW DELHI, FRIDAY, AUGUST 8, 2014/SHRAVANA 17, 1936 |
कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय
(कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग)
अधिसूचना
नई दिल्ली, 6 अगस्त, 2014
सा.का.नि. 573(अ).—अखिल भारतीय सेवाएं अधिनियम, 1951 (1951 का 61) की धारा 3 की उप-धारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केन्द्रीय सरकार राज्य सरकारों से परामर्श करके अखिल भारतीय सेवाएं (आचरण) नियमावली, 1968 में आगे और संशोधन करने के लिए एतद्वारा निम्नलिखित विनियम बनाती है, अर्थात् :—
- (1) इन विनियमों को अखिल भारतीय सेवाएं (आचरण) संशोधन नियमावली, 2014 कहा जाएगा ।
- ये नियम सरकारी राजपत्र में उनके प्रकाशन की तारीख से प्रचुर होंगे।
- अखिल भारतीय सेवाएं (आचरण) नियमावली, 1968 में नियम 3(1) में उप-नियम (1) के बाद निम्नलिखित उप- नियम अंत:स्थापित किए जाएंगे, अर्थात् :—
(1क) सेवा के सभी सदस्य निम्नलिखित को व्यवहार में लाएंगे—
(i) उच्च नैतिक मानदंड, सत्यनिष्ठा और ईमानदारी;
(ii) राजनीतिक तटस्थता
(iii) कर्तव्य के निर्वहन में योग्यता, ईमानदारी और निष्पक्षता के सिद्धांतों को बढ़ावा देना
(iv) जवाबदेही और पारदर्शिता
(v) जनता, विशेषत: कमजोर वर्ग के प्रति अनुक्रियाशीलता
(vi) जनता के साथ शिष्टाचार और अच्छा व्यवहार
3143 GI/2014 (I)
नियम 3(2) में उप-नियम (2क), के बाद निम्नलिखित उप-नियम अंत:स्थापित किए जाएंगे :-
(2ख) सेवा के सभी सदस्य निम्नलिखित को व्यवहार में लाएंगे –
(i) संविधान की सर्वोच्चता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति वचनबद्ध रहेंगे और उसकी मर्यादा को बनाए रखेंगे।
(ii) भारत की संप्रभुता और अखंडता, राज्य, जन, आदेश, शिष्टता एवं नैतिकता की रक्षा करेंगे एवं उसकी मर्यादा को बनाए रखेंगे।
(iii) लोक सेवाओं में सत्यनिष्ठा को बनाए रखेंगे।
(iv) केवल लोकहित में निर्णय लेंगे, लोक संसाधनों का प्रयोग कार्यकुशल ढंग से, प्रभावी ढंग से और किफायत से करेंगे और करवाएंगे।
(v) अपने सार्वजनिक कर्तव्य से संबंधित किसी निजी हित को घोषित करेंगे एवं लोक हित की रक्षा करने वाले किसी अन्तर्विरोध का समाधान करने के लिए कदम उठाएंगे।
(vi) किसी व्यक्ति अथवा संगठन से किसी प्रकार का वित्तीय अथवा अन्य प्रकार का आभार स्वीकार नहीं करेंगे जो उनके सरकारी कार्य के निष्पादन को प्रभावित करे।
(vii) सिविल सेवक के रूप में अपने पद का दुरुपयोग नहीं करेंगे और न ही स्वयं के लिए, अपने परिवार के लिए या मित्रों के लिए वित्तीय एवं वस्तु रूप में लाभ प्राप्त करने के लिए कोई निर्णय लेंगे।
(viii) केवल योग्यता के आधार पर चयन करेंगे, निर्णय लेंगे और सिफारिश करेंगे।।
(ix) ईमानदारी एवं निष्पक्षता से कार्य करेंगे एवं किसी के प्रति विशेषकर समाज के गरीब एवं अल्पसुविधा प्राप्त वर्यों के प्रति भेदभाव नहीं करेंगे।
(x) किसी कानून, नियम, विनियम एवं स्थापित परिपाटियों के विरुद्ध कोई कार्य करने से विरत रहेंगे।
(xi) अपने कर्तव्यपालन के प्रति अनुशासित रहेंगे और स्वयं को संसूचित विधि सम्मत आदेशों का पालन करेंगे।
(xii) कुछ समय के लिए लागू किसी कानून में की गई अपेक्षा के अनुसार विशेषकर ऐसी सूचना, जिसके प्रकटन से भारत की अखंडता, राज्य की सुरक्षा, राज्य की रणनीति, वैज्ञानिक या आर्थिक हित, विदेशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हो या किसी अपराध के लिए दुष्प्रेरणा मिलती हो या किसी व्यक्ति को अवैध या गैर-कानूनी लाभ प्राप्त होता हो, के संबंध में अपने शासकीय दायित्व का निर्वहन करते हुए गोपनीय बनाए रखेंगे ।
(xiii) अपने कर्तव्य का निर्वहन अपनी उच्चतम व्यावसायिक योग्यता और समर्पण के साथ करेंगे।
[फा. सं. 11017/1/2014-ए.आई.एस.-III]
दिवाकर नाथ मिश्रा, निदेशक (सेवाएं)
टिप्पणी : मुख्य नियम दिनांक 4 जनवरी, 1969 के सा.का.नि. 3 संख्या के तहत भाग II, खण्ड 3, उप-खण्ड (i) द्वारा भारत के राजपत्र में प्रकाशित किए गए थे और तदुपरांत निम्नलिखित संशोधन किए गए थे :-
- सा.का.नि. 878 , दिनांक 6 जून, 1970;
- सा.का.नि. 417 , दिनांक 23 जुलाई, 1971;
- सा.का.नि. 405 , दिनांक 7 अप्रैल, 1973;
- सा.का.नि. 834 , दिनांक 10 अगस्त, 1974;
- सा.का.नि. 1017 , दिनांक 17 जुलाई, 1976;
- सा.का.नि. 1766 , दिनांक 25 दिसम्बर, 1976;
- सा.का.नि. 678 , दिनांक 4 जून, 1977;
- सा.का.नि. 1717 , दिनांक 31 दिसम्बर, 1977;
- सा.का.नि. 151 , दिनांक 28 जनवरी, 1978;
10 सा.का.नि. 583 , दिनांक 06 मई, 1978;
11. सा.का.नि. 1122 , दिनांक 08 सितम्बर, 1979;
- सा.का.नि. 1103, दिनांक 25 अक्तूबर, 1980;
- सा.का.नि. 1134, दिनांक 01 नवम्बर, 1980;
- सा.का.नि. 1009, दिनांक 02 नवम्बर, 1985;
- सा.का.नि. 34, दिनांक 17जनवरी, 1987;
- सा.का.नि. 189,
- सा.का.नि. 657, दिनांक 2 अगस्त, 1988;
- सा.का.नि. 52, दिनांक 4 फरवरी, 1995;
- सा.का.नि. 228, दिनांक 28 नवम्बर, 1998;
- सा.का.नि. 363, दिनांक 05 मई, 2011.