Indian Police Service (Limited Departmental Competitive Examination for Recruitment) Regulations, 2011

I

This document outlines the regulations for the Indian Police Service (Limited Departmental Competitive Examination for Recruitment) Regulations, 2011. It details the eligibility criteria, age limits, educational qualifications, and the number of attempts allowed for candidates. The regulations also cover the process of conducting the examination by the Union Public Service Commission (UPSC), including the definition of ‘available vacancies’, ‘Commission’, ‘examination’, and ‘list’. It specifies that candidates must be Indian citizens and meet age and educational requirements. The document also addresses disqualifications for the examination, such as engaging in misconduct or providing false information, and clarifies that inclusion in the merit list does not guarantee appointment. Furthermore, it addresses the reservation of vacancies for Scheduled Castes, Scheduled Tribes, and Other Backward Classes, and sets conditions for medical and character assessments for appointment.

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MRTI की 1942 The Gazette of India

असाधारण

EXTRAORDINARY

भाग II—खण्ड 3—उप-खण्ड (I)

PART II—Section 3—Sub-section (I)

प्राधिकार से प्रकाशित

PUBLISHED BY AUTHORITY

सं. 701 नई दिल्ली, बुधवार, फरवरी 22, 2012/फाल्गुन 3, 1933
No. 701 NEW DELHI, WEDNESDAY, FEBRUARY 22, 2012/PHALGUNA 3, 1933

कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय (कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग)

अधिसूचना

नई दिल्ली, 21 फरवरी, 2012

सा.का.नि. 97(अ).—केंद्रीय सरकार, अखिल भारतीय सेवा निदेशक, 1951 (1951 का 61) की धारा 3 की उपधारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए और भारतीय पुलिस सेवा (भर्ती) निदेशक, 1954 के निदेशक 8 के उपनिदेशक (1) के अनुसरण में, संबद्ध राज्य सरकारों और संघ लोक सेवा आयोग से परामर्श करने के पश्चात् निम्नलिखित विनियम बनाती है:

  1. संक्षिप्त नाम- इन विनियमों का संक्षिप्त नाम भारतीय पुलिस सेवा (सीमित प्रतियोगिता परीक्षा द्वारा नियुक्ति) विनियम, 2011 है।
  2. परिभाषाएं- (1) इन विनियमों में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
  3. (क) “उपलब्ध रिक्तियों” से सेवा में ऐसी रिक्तियां अभिप्रेत हैं जो भर्ती निदेशकों के निदेशक 4 के उपनिदेशक (2) के अधीन केंद्रीय सरकार द्वारा किसी परीक्षा के परिणामों के आधार पर भरी जाने के लिए अवधारित की गई हैं;
  4. (ख) “आयोग” से संघ लोक सेवा आयोग अभिप्रेत है;
  5. (ग) “परीक्षा” से भर्ती निदेशकों के निदेशक 4 के उपनिदेशक (1) (क) के अधीन सेवा में भर्ती के लिए आयोजित सीमित प्रतियोगिता परीक्षा अभिप्रेत है;
  6. (घ) “सूची” से विनियम 7 के उपविनियम (1) के अधीन तैयार की गई अभ्यर्थियों की सूची अभिप्रेत है;
  7. (ड) “भर्ती निदेशकों” से भारतीय पुलिस सेवा (भर्ती) निदेशक, 1954 अभिप्रेत है;
  8. (च) “अनुसूचित जातियां”, “अनुसूचित जनजातियां”, और “अन्य पिछड़े वर्गों” का वही अर्थ होगा जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 366 के खंड (24) और खंड (26) में क्रमशः उनका है; और

(छ) “सेवा” से भारतीय पुलिस सेवा अभिप्रेत है।
(2) अन्य सभी शब्दों और पदों का, जो इन विनियमों में प्रयुक्त किए गए हैं और परिभाषित नहीं किए गए है वही अर्थ होगा जो क्रमशः भर्ती नियमों में उनका है ।
3. परीक्षा का आयोजन- (1) आयोग द्वारा परीक्षा, केंद्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित शैति में संचालित की जाएगी ।
(2) वह अनोखे जिसको और वे स्थान, जहां परीक्षा आयोजित की जाएगी, आयोग द्वारा निश्चित किए जाएंगे ।
4. पात्रता की शर्तें- परीक्षा में भाग लेने की पात्रता के उद्देश्य से अभ्यर्थी को निम्नलिखित शर्तों का समाधान करना चाहिए, अर्थात् :-
(i) राष्ट्रीयता :
(क) वह भारत का नागरिक हो ; या
(ख) उसे व्यक्तियों के ऐसे प्रवर्गो से होना चाहिए जो केंद्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर इस निमित्त अधिसूचित किए जाएं ।
(ii) आयु : उसनै, उस वर्ष की 1 अगस्त को, जिसमें परीक्षा का आयोजन किया जाता है, 35 वर्ष की आयु प्राप्त न की हो :

परंतु व्यक्तियों के ऐसे प्रवर्गो की बाबत, जो केंद्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त समय-समय पर अधिसूचित किए जाएं, प्रत्येक प्रवर्ग की बाबत अधिसूचित सीमा तक और अधिसूचित शर्तों के अधीन रहते हुए ऊपरी आयु सीमा में छूट दी जा सकेगी ।
(iii) शैक्षिक अर्हताएं : वह भारत के केंद्रीय या राज्य विधान मंडल के किसी अधिनियम द्वारा निम्नलित किसी विश्वविद्यालय या संसद् के किसी अधिनियम द्वारा स्थापित या विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, अधिनियम, 1956 की धारा 3 के अधीन विश्वविद्यालय के रूप में समझी जाने वाली अन्य शैक्षणिक संस्थाओं या केंद्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर अनुमोदित किसी विदेशी विश्वविद्यालय की कोई डिग्री धारण करता हो या ऐसी अर्हता रखता हो जिसे केंद्रीय सरकार द्वारा (परीक्षा में प्रवेश पाने के प्रयोजन के लिए) मान्यता प्रदान की गई है :

परंतु-
(क) आयोग, अपवादिक मामलों में किसी ऐसे अभ्यर्थी को अर्हित रूप में समझ सकेगा जिसके पास यद्यपि इस खंड में विहित अर्हता नहीं है किन्तु उसने उसी स्तर की, किसी अन्य संस्था द्वारा संचालित परीक्षाओं को उत्तीर्ण किया है जो आयोग की राय में परीक्षा के लिए अभ्यर्थी के प्रवेश को न्यायोचित ठहराती है ; और
(ख) ऐसे अभ्यर्थी भी, जो अन्यथा अर्हित हैं किन्तु ऐसे विदेशी विश्वविद्यालयों से डिग्री ले चुके हैं जो केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित नहीं है, आयोग के निदेश पर परीक्षा में प्रवेश पा सकेंगे ।
(iv) परीक्षा के प्रयास : परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए प्रत्येक ऐसे अभ्यर्थी को, जो अन्यथा पात्र है, परीक्षा के लिए दो प्रयास अनुज्ञात किए जाएंगे ; और परीक्षा में किसी अभ्यर्थी की हाजरी को, यथास्थिति, उसकी निरर्हता या उसकी अभ्यर्थिता के स्खरूण को विचार में लाए बिना परीक्षा का एक प्रयास समझा जाएगा :


परंतु व्यक्तियों के ऐसे प्रवर्गो की बाबत, जो केंद्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर इस निमित्त अधिसूचित किए जाएं, प्रयासों की संख्या में प्रत्येक प्रवर्ग की बाबत अधिसूचित सीमा तक और अधिसूचित शर्तों के अधीन रहते हुए छूट दी जा सकेगी ।
(v) राज्य पुलिस सेवा के अधीन राज्यों में पुलिस उपनिरीक्षक और केंद्रीय अर्द्ध सैनिक बलों (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल, भारत तिब्बत सीमा पुलिस, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल और सशस्त्र सीमा बल) में सहायक कमांडेंट और सशस्त्र सेना में कैप्टन, मेजर या समतुल्य श्रेणी के अधिकारियों के रूप में भर्ती ऐसे अधिकारी, जिनके पास निस्तर पांच वर्ष का अनुभव और वास्तविक सेवा है, परीक्षा में सम्मिलित होन के पात्र होगे ।
(vi) फीस- वह आयोग द्वारा विनिर्दिष्ट फीस का संदाय करेगा ।
(vii) सतर्कता अनापत्ति- सीमित प्रतियोगिता परीक्षा का विकल्प चुनने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी को सतर्कता के दृष्टिकोण से सही घोषित करते हुए उसके मूल काडर का एक प्रमाणपत्र संलग्न करना होगा । मूल काडर का अद्यतन सतर्कता अनापत्ति प्रमाणपत्र साक्षात्कार के समय प्रस्तुत किया जाएगा ।
5. प्रवेश के लिए निर्यता- आयोग द्वारा, किसी अभ्यर्थी की ओर से किसी साधनों द्वारा उसकी अभ्यर्थिता के लिए समर्थन प्राप्त करने हेतु किसी प्रयास के लिए परीक्षा में प्रवेश के लिए उसे निर्यात किया जा, सकेगा ।
6. आयोग के विश्निचय का अंतिम होना- परीक्षा में प्रवेश के लिए किसी अभ्यर्थी की पात्रता या उससे अभ्यथा के बारे में आयोग का विनिश्चय अंतिमा होगा और ऐसे किसी अभ्यर्थी को, जिसके लिए आयोग द्वारा प्रवेश प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया है, परीक्षा में प्रवेश नहीं दिया जाएगा ।
7. सफल अभ्यर्थियों की सूची- (1) उप विनियम (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, आयोग, केंद्रीय सरकार को ऐसे अभ्यर्थियों की योग्यता के क्रम में व्यवस्थित एक सूची अग्रेषित करेगा जो ऐसे मानकों के अनुसार अर्हित है जो आयोग द्वारा अवधारित किए जाएं ।
(2) आयोग द्वारा, किसी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गो के अभ्यर्थियों का, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या के विस्तार तक, सेवा में चयन के लिए इन अभ्यर्थियों की उपयुक्तता के अधीन रहते हुए शिथिल मानकों के अनुसार अनुमोदन किया जा सकेगा :

परंतु अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गो के ऐसे अभ्यर्थियों को, जिनका इस उप विनियम में निर्दिष्ट शिथिल करने वाले मानकों का आश्रय लिए बिना आयोग द्वारा अनुमोदन किया गया है, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गो के लिए आरक्षित स्थानों पर समायोजित नहीं किया जाएगा ।
8. सूची से नियुक्तियां- विनियम 9, विनियम 10, विनियम 12 और विनियम 13 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, अभ्यर्थियों का उपलब्ध स्थानों पर नियुक्ति के लिए, उस क्रम में विचार किया जाएगा, जिसमें उनका नाम सूची में उपदर्शित किया है ।
9. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गो के अभ्यर्थियों के लिए स्थानों का आख्यण- (1) भर्ती नियम के नियम 7 के अनुसरण में, उपलब्ध स्थानों का 15 प्रतिशत, 7.5 प्रतिशत और 27 प्रतिशत स्थान ऐसे अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित होंगे जो क्रमशः अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गो के सदस्य हैं ।


(2) इस प्रकार आरक्षित स्थानों को भरने में ऐसे अभ्यर्थियों पर, जो अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के सदस्य हैं नियुक्ति के लिए उस क्रम में विचार किया जाएगा जिसमें उनके नाम सूची में उपदर्शित हैं ।
10. एक से अधिक विवाह के आधार पर नियुक्ति के लिए निरहता : वह व्यक्ति-
(क) जिसने ऐसे व्यक्ति से जिसका पति या जिसकी पत्नी जीवित है, विवाह किया है, या विवाह की संविदा की है ; या
(ख) जिसने अपने पति या अपनी पत्नी के जीवित रहते हुए किसी व्यक्ति से विवाह किया है, सेवा में नियुक्ति का पात्र नहीं होगा :

परन्तु यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि ऐसा विवाह उस व्यक्ति और विवाह के अन्य पक्षकार को लागू स्वीय विधि के अधीन अनुज्ञेय है और ऐसा करने के लिए अन्य आधार हैं तो वह किसी व्यक्ति को इस विनियम के प्रवर्तन से छूट दे सकेंगी ।
11. अनुशासनात्मक कार्रवाई- कोई ऐसा अभ्यर्थी जो आयोग द्वारा निम्नलिखित का दोषी घोषित किया जाता है या किया गया है-
(i) निम्नलिखित साधनों द्वारा अपनी अभ्यर्थिता का समर्थन प्राप्त करना, अर्थात् :-
(क) अवैध परितोषण प्रदान करके ; या
(ख) दबाव डालकर ; या
(ग) परीक्षा के संचालन से संबंधित किसी व्यक्ति को ब्लैकमेल करना या ब्लैकमेल करने की धमकी देना ; या
(ii) प्रतिस्थण करके ; या
(iii) किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिस्थण उपाप्त करके ; या
(iv) गढे हुए दस्तावेज या ऐसे दस्तावेज, जिनके साथ छेड़छाड़ की गई है, प्रस्तुत करके ; या
(v) ऐसे कथन करके जो असत्य या मिथ्या हैं या कोई सात्वान सूचना छिपाकर ; या
(vi) परीक्षा के लिए अपनी अभ्यर्थिता के संबंध में निम्नलिखित साधनों का आश्रय लेकर, अर्थात् :-
(क) अनुचित साधनों द्वारा प्रश्नपत्र की प्रति अभिप्राप्त करना ;
(ख) परीक्षा संबंधी गोपनीय कार्य से संबंधित व्यक्तियों की विशिष्टियों का पता लगाना ;
(ग) परीक्षक पर दबाव डालना ; या
(vii) परीक्षा के दौरान अनुचित साधनों का उपयोग करके ;
(viii) उत्तर पुस्तिका में अश्लील सामग्री लिखना या अश्लील आलेख बनाना ; या
(ix) परीक्षा भवन में कदाचार करना जिसको अंतर्गत उत्तर पुस्तिकाओं को फाड़ना, परीक्षा का बहिष्कार करने के लिए अध्येता परिक्षार्थियों को उकसाना, गड़बड़ी पैदा करना और इसी प्रकार के अन्य कार्य करना भी है ; या


(x) आयोग द्वारा, उसकी परीक्षा का संचालन करने के लिए नियोजित कर्मचारिकों को तंग करना या शारीरिक क्षति पहुंचाना; या
(xi) अभ्यर्थियों को, परीक्षा के लिए प्रवेश प्रमाणपत्र के साथ अनुक्षात करने संबंधी जारी कन्व्हीं अनुदेशों का उल्लंघन करना ; या
(xii) पूर्वगामी खंडों में विनिर्दिष्ट सभी या कन्व्हीं कृत्यों को, यथास्थिति, करने का प्रवास करेगा या करने के लिए उकसाएगा, वह आपराधिक अभियोजन के अतिरिक्त-
(क) आयोग द्वारा उस परीक्षा से, जिसका वह अभ्यर्थी है, निर्दहित होने का दायी होगा ; और/या
(ख) स्थायी रूप से या किसी विनिर्दिष्ट अवधि के लिए निम्नलिखित से विवर्जित होने का दायी होगा-
(i) आयोग द्वारा उसकें द्वारा आयोजित परीक्षा से या उसकें द्वारा किए गए चयन से ;
(ii) केंद्रीय सरकार द्वारा उसकें अधीन किसी नियोजन से ; और
(ग) यदि वह पहले से सरकार के अधीन सेवा में है, तो समुचित नियमों के अधीन अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए दायी होगा :

परंतु, यथास्थिति, खंड (क) या खंड (ख) के अधीन कोई शास्ति, निम्नलिखित के सिवाय अधिरोपित नहीं की जाएगी-
(i) अभ्यर्थी को लिखित में ऐसा अभ्यावेदन करने का अवसर प्रदान करना, जो वह इस निमित्त करना चाहे ; और
(ii) यदि अभ्यर्थी द्वारा, उसे आबंटित की गई अवधि के भीतर कोई अभ्यावेदन प्रस्तुत किया जाता है तो उस पर विचार करना ।
12. चिकित्सा के आधार पर नियुक्ति के लिए निर्द्धता- किसी ऐसे अभ्यर्थी को सेवा में नियुक्त नहीं किया जाएगा जो ऐसी चिकित्सा परीक्षा के पश्चात्, जो केंद्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए, उत्तम मानसिक या शारीरिक स्वास्थ्य का, और ऐसे मानसिक या शारीरिक दोष से मुक्त, नहीं पाया जाता है जिनसे सेवा के कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा होने की संभावना है ।
13. सूची में सम्मिलित होना नियुक्ति का अधिकार प्रदत्त नहीं करता है- किसी अभ्यर्थी का सूची में सम्मिलित होना, नियुक्ति का तब तक कोई अधिकार प्रदत्त नहीं करता है जब तक केंद्रीय सरकार का ऐसी जांच करने के पश्चात्, जो वह आवश्यक समझे यह समाधान नहीं हो जाता है कि ऐसा अभ्यर्थी, उसकें चरित्र और पूर्ववृत्त को ध्यान में रखते हुऐ, सेवा में नियुक्ति के लिए सभी प्रकार से उपयुक्त है ।
14. धारणाधिकार- यदि अभ्यर्थी की वर्तमान सेवा में कोई धारणाधिकार विद्यमान है तो वह भारतीय पुलिस सेक में उसकी पुष्टि होते ही समाप्त हो जाएगा ।
[फा. सं. 13018/3/2010-ए/माईएस-(1) (डी.टी. II)]