Today, we delve into an important administrative update concerning the remuneration structure for police personnel transitioning into higher roles. The Central Government has recently introduced significant amendments to the pay regulations governing the Indian Police Service. These revisions specifically address the principles for determining the salaries of state police service members who are either promoted to the Indian Police Service or assigned to cadre posts.
The core of these amendments lies in providing clear definitions for various pay components. New guidelines define ‘Actual Pay’ as the salary a state police officer is entitled to based on their substantive position, including relevant allowances like dearness allowance and interim relief, especially if state government pay scales haven’t been revised since early 1973. Similarly, ‘Fictitious Pay’ is now clearly delineated for officers serving in higher pay scales, whether on promotion or confirmed, again considering allowances and past pay revisions.
Furthermore, the revised rules differentiate between ‘Higher Pay Scale’ and ‘Lower Pay Scale,’ detailing how these are to be interpreted in the context of state-level pay revisions after January 1, 1973. Crucially, these definitions clarify how dearness allowances and other reliefs are to be treated when they have been merged into revised pay scales. This move aims to bring greater clarity and standardization to the pay fixation process for police officers, ensuring fairness and consistency across different levels of service. These new rules will become effective upon their official publication.
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भारत के साधारण राजपत्र, भाग 2, चाण्ड्य 18 से पूरकताराम, संख्या 11030/3/80-ए0आई0एस08118
भारत सरकार
गृह मंत्रालय
कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग
नई दिल्ली-110001, दिनांक 7-1980
अनुसूचना
सालकालीन तौल केन्द्रीय सरकार, अतिसूक्ष्म भारतीय सेवा अधिनियम, 1951 1951 का 618 की धारा 3 की उपधारा 18 द्वारा पुष्टता शक्तियों का प्रयोग करते हुए, तौल राज्य सरकारों से परामर्श करने के पश्चात्, भारतीय पुलिस सेवा हवेतन 1 निष्पक्ष, 1954 में और संशोधन करने के लिए निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात्:-
- इन नियमों का नाम भारतीय प्रशासनिक सेवा हवेतन 1 पांचवा संशोधन नियम, 1980 है ।
- ये राजपत्र में प्रकाशन की तारीख को पुष्ट होनी चाहिए ।
भारतीय पुलिस सेवा हवेतन 1 नियम, 1954 की अनुसूची 2 में
“भारतीय पुलिस सेवा में नियुक्त होने पर प्रोत्साहित अधिकारी को और काउंट पदों पर स्थानापन्न रूप में नियुक्त होने पर राज्य पुलिस सेवा के सदस्यों को वेतन नियुक्त करने के लिए नियुक्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, अर्थात्:-
- वास्तविक वेतन” से वह वेतन, चाहे वह निम्नलिखित वेतन-मान में हो या उच्चतम वेतन-मान में, अभिप्रेत हो, जिसके लिए राज्य पुलिस सेवा का कोई सदस्य, उस सेवा के काउंट में अपनी अधिकृत स्थिति के आधार पर हकदार है; और यदि राज्य सरकार ने 1 जनवरी, 1973 को या उसके पश्चात् राज्य पुलिस सेवा को यथा गणू वेतन-मानों को पुनर्गठित नहीं किया है, तो वास्तविक वेतन के अन्तर्गत, 1 जनवरी, 1973 को यथा पुष्टता दरों पर ऐसे वेतन पर अनुरूप गहराई भत्ता, गहराई वेतन, अन्तरिम या अतिरिक्त सहायता भी है ।
-
“कौन-से-वेतन” से वह वेतन अभिप्रेत है, जो उच्चतम वेतनमान में स्थानापन्न रूप में कार्य करने वाला या पुष्ट हो गया राज्य पुलिस सेवा का सदस्य, अपनी सेवा के निम्नलिखित वेतन-मान में है, उस दर्जा में वेतन होगा, जब तक उच्चतम वेतन-मान में स्थानापन्न रूप में कार्य न करता होगा या पुष्ट न किया गया होगा, और यदि राज्य सरकार ने 1 जनवरी, 1973 को या उसके पश्चात् राज्य पुलिस सेवा को यथा गणू वेतन-मान पुनर्गठित नहीं किया है, तो कौन-से वेतन के अन्तर्गत, 1 जनवरी, 1973 को यथा पुष्टता दरों पर ऐसे वेतन पर अनुरूप गहराई भत्ता, गहराई वेतन, अन्तरिम या अतिरिक्त सहायता भी है ।
है । ।। है “उच्चतर वेतन-मान” से वह वेतन-मान अभिप्रेत है, जो राज्य पुलिस सेवा के लिए विहित और । जनवरी, 1973 को या उसके पश्चात्कर्ती किसी तारीख को प्रचलित नियन्तर वेतन-मान से उच्चतर है । पश्चात्कर्ती तारीख वह तारीख है, जिसको राज्य पुलिस सेवा को लागू वेतन-मान । जनवरी, 1973 के पश्चात् प्रथम बार पुनर्योजित किए गए हैं । परन्तु पश्चात्कर्ती दवा में, । जनवरी, 1973 के पश्चात् राज्य सरकार द्वारा मंजूर किए गए और पुनर्योजित वेतन-मान में विलीन, महंगाई भत्ता, महंगाई वेतन, अन्तरिम या अतिरिक्त सहायता को अपवर्जित कर दिया जाएगा ।
है। है “नियन्तर वेतन-मान” से, राज्य पुलिस सेवा के लिए विहित और । जनवरी, 1973 को या उसके पश्चात्कर्ती किसी तारीख को प्रचलित, मामूली या नियन्तर वेतन-मान अभिप्रेत है । पश्चात्कर्ती तारीख वह तारीख है, जिसको राज्य पुलिस सेवा को लागू वेतन-मान । जनवरी, 1973 के पश्चात् प्रथम बार पुनर्योजित किए गए हैं । परन्तु पश्चात्कर्ती दवा में, । जनवरी, 1973 के पश्चात् राज्य सरकार द्वारा मंजूर किए गए और पुनर्योजित वेतन-मान में विलीन, महंगाई भत्ता, महंगाई वेतन, अन्तरिम या अतिरिक्त सहायता को अपवर्जित कर दिया जाएगा ।
है वी० आर० श्रीनिवासम्
अवर सचिव, भारत सरकार
सेवा में,
प्रलन्थन,
भारत सरकार मुद्रणालय,
मागमुरी है रिंग रोड है
नई दिल्ली ।