Central Civil Services (Leave) Fourth Amendment Rules, 2013

C

This document details amendments to the Central Civil Services (Leave) Rules, 1972, specifically concerning the extension of leave periods for government employees who have availed study leave. It outlines conditions related to bond periods and the equivalence of study leave with other types of leave. The notification clarifies that the bond period of an employee will be extended by an equivalent duration to any other leave taken during the study leave period. It also specifies the process for executing bonds and the responsibilities of both the employee and the government. The document includes distribution lists and explanatory notes regarding the original rules.

SOURCE PDF LINK :

Click to access 13026_4_2012-Estt.L-18022014A-Hindi.pdf

Click to view full document content



[भारत के राजपत्र, असाधारण, भाग-II, खण्ड 3, उपखंड (I) में प्रकाशनार्थ]
भारत सरकार
कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय
(कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग)
अधिसूचना

नई दिल्ली, | 8 फरवरी, 2014

सा.का.नि. 923)संविधान के अनुच्छेद 309 के परंतुक और अनुच्छेद 148 के खण्ड (5) दवारा प्रदत्त शक्तियों
का प्रयोग करते हुए भारतीय लेखा परीक्षा तथा लेखा विभाग में सेवारत व्यक्तियों के संबंध में नियंत्रक और
महालेखापरीक्षक से परामर्श करके राष्ट्रपति, केन्द्रीय सिविल सेवाएं (छुट्टी) नियमावली, 1972 में और संशोधन
करके निम्नलिखित नियम बनाते हैं, अर्थातः-

  1. (1) इन नियमों का नाम केन्द्रीय सिविल सेवाएं (छुट्टी) चतुर्थ संशोधन नियमावली, 2013 है।
    (2) ये सरकारी राजपत्र में प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त होंगे।

  2. केन्द्रीय सिविल सेवाएं (छुट्टी) नियमावली, 1972 के नियम 53, उप-नियम (4) में,
    (क) पैरा 4 के पश्चात फार्म 7 और 8 में क्रमशः निम्नलिखित पैरा जोड़ा जाएगा, अर्थातः-
    “अब उपर्युक्त लिखित बाध्यता की शर्त है कि मेरे बांड की अवधि उपर्युक्त उल्लिखित अवधि के लिए
    सेवा में अधिदेश के दवारा मेरे दवारा ली गई अध्ययन छुट्टी की समाप्ति के उपरांत मुद्रा बांड की
    अवधि के दौरान मेरे दवारा ली गई किसी भी प्रकार की छुट्टी की कुल अवधि के समतुल्य, तुलनीय
    अवधि के दवारा विस्तारित की जाएगी।”
    (ख) पैरा 5 के पश्चात फार्म 9 तथा 10 में क्रमशः निम्नलिखित पैरा जोड़ा जाएगा, अर्थातः-
    “अब उपर्युक्त लिखित बाध्यता की शर्त है कि बांड की अवधि उपर्युक्त उल्लिखित अवधि के लिए, छुट्टी
    लेने वाले के दवारा ली गई अध्ययन छुट्टी की समाप्ति के उपरांत, उपकृत करने वाले के दवारा सेवा में
    अधिदेश से मुद्रा बांड की अवधि के दौरान उसके दवारा ली गई किसी भी प्रकार की छुट्टी की कुल
    अवधि के समतुल्य, तुलनीय अवधि के दवारा विस्तारित की जाएगी।”

[फा.सं. 13026/4/2012-स्था.(छू)] 56
(ममता कुंद्रा)
संयुक्त सचिव, भारत सरकार

टिप्पणीः- प्रमुख नियम, भारत के राजपत्र, असाधारण, भाग-II, खण्ड-3, उप-खण्ड (I) में दिनांक 8 अप्रैल,
1972 के का.आ. 940 दवारा प्रकाशित किए गए थे और दिनांक 4 अप्रैल, 2012 को सा.का.नि. संख्या 280(ई)
के दवारा इनमें अंतिम संशोधन किया गया था।सेवा में
भारत सरकार के सभी मंत्रालय/विभाग (मानक डाक प्रेषण सूची के अनुसार)
सं. 13026/4/2012-स्था.(छु.)
नई दिल्ली, दिनांक $18 \mid \mathrm{~m} / 2014$
प्रतिलिपि प्रेषित:

  1. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक का कार्यालय/महालेखा नियंत्रक, वित्त मंत्रालय।
  2. सचिव/संघ लोक सेवा आयोग/सर्वोच्च न्यायालय/निर्वाचन आयोग/लोक सभा सचिवालय/राज्य सभा सचिवालय/मंत्रिमंडल सचिवालय/केन्द्रीय सतर्कता आयोग/ राष्ट्रपति सचिवालय/ उपराष्ट्रपति सचिवालय/प्रधानमंत्री कार्यालय/योजना आयोग/केन्द्रीय सूचना आयोग।
  3. अपर सचिव (यू.टी.) गृह मंत्रालय।
  4. सभी राज्य सरकारें एवं संघ शासित क्षेत्र।
  5. सभी राज्यों के राज्यपाल/उप राज्यपाल/संघ शासित क्षेत्र के प्रशासक।
  6. सचिव, राष्ट्रीय परिषद (कर्मचारी पक्ष), 13-सी फिरोजशाह रोड, नई दिल्ली।
  7. विभागीय परिषद की राष्ट्रीय परिषद के कर्मचारी पक्ष के सभी सदस्य।
  8. पुनर्वास शाखा सहित गृह मंत्रालय के सभी संबद्ध/अधीनस्थ कार्यालय एवं डेस्क/अनुभाग अधिकारी।
  9. कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग/प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत/पैशन एवं पैशन भोगी कल्याण विभाग के सभी अधिकारी/अनुभाग।
  10. राजभाषा खंड (विधायी विभाग)
  11. रेलवे बोर्ड, नई दिल्ली
  12. एन.आई.सी, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, मंत्रालय की बेबसाइट पर अपलोड करने के लिए।

$$
\begin{aligned}
& 397 \
& \text { (मुकुल रात्रा) } \
& \text { निदेशक (छु. एंड भ.) }
\end{aligned}
$$फॉर्म-7
[नियम 53(4) देखें]
अध्ययन अवकाश पर जाते समय किसी सरकारी सेवक, जो स्थायी कर्मचारी है, द्वारा निष्पादित किए जाने वाला बंधपत्र

में एतद्वारा सूचित करता हुं कि
में. .निवासी जिला वर्तमान
.मंत्रालय/कार्यालय में. के रूप में कार्यरत हुं, एतद्वारा

स्वयं की एवं अपने वारिसों, निष्पादकों और प्रशासकों की ओर से यह वचन देता हूं कि भारत के राष्ट्रपति (जिन्हें इसके बाद ‘सरकार’ कहा जाएगा) को मांग पर. रु. (……………..रु. केवल) की राशि का सरकारी ऋणों पर लागू तत्कालीन सरकारी दरों पर मांग की तारीख से अब तक के ब्याज सहित या यदि भुगतान भारत से बाहर किसी अन्य देश में किया गया है तो उक्त राशि का उस देश और भारत के बीच के शासकीय विनिमय दर के अनुसार परिवर्तित मुद्रा में, सरकार द्वारा वहन किए गए अथवा किए जाने वाले वकील एवं मुवक्किल के बीच की सभी लागतों सहित एक साथ अदा करुंगा ।

चूंकि मुझे सरकार द्वारा अध्ययन अवकाश प्रदान किया गया है।

और चूंकि, सरकार की बेहतर सुरक्षा हेतु, मैंने इस शर्त पर जैसा कि नीचे लिखा गया है इस बंधपत्र को निष्पादित करने की सहमति दी है :

अब, उपर्युक्तलिखित बाध्यताओं की शर्ते यह हैं कि, मेरे द्वारा कार्यभार न संभालने अथवा सेवा से त्यागपत्र देने या सेवानिवृत्त होने अथवा अन्यथा अध्ययन अवकाश की अवधि के पूर्ण हो जाने या समाप्त किए जाने के पश्चात इयूदी पर वापस न आते हुए सेवा छोड़ने अथवा अध्ययन के पाठ्यक्रम को पूरा न करने की स्थिति में अथवा इयूदी पर मेरे वापस आने के बाद तीन वर्षोंपांच वर्षों की अवधि के दौरान किसी भी समय, मैं सरकार को अथवा सरकार द्वारा निर्देशित किए अनुसार, उक्त रु. रु. केवल) की राशि की मांग पर सरकारी ऋणों पर लागू तत्कालीन सरकारी दरों पर मांग की तारीख से ब्याज सहित का तत्काल भुगतान करुंगा ।

अब, इसकी उपर्युक्तलिखित बाध्यताओं के लिए पुन: यह शर्त है कि ऊपर निर्दिष्ट अवधि के लिए सेवा में बाध्यकारी रुप से लाने की मेरे बंधपत्र की अवधि को मेरे द्वारा लिए गए अध्ययन अवकाश की समाप्ति के बाद बंधपत्र की अवधि के दौरान मेरे द्वारा ली गई किसी भी प्रकार की छुट्टी की कुल अवधि के समान तुलनात्मक अवधि के लिए विस्तार प्रदान किया जाएगा ।

और मेरे द्वारा इस राशि का भुगतान किए जाने पर उपर्युक्तलिखित बाध्यता समाप्त और निष्प्रभावी हो जाएगी, अन्यथा यह पूरी तरह से लागू एवं प्रभावी रहेगी ।यह बंधपत्र सभी प्रकार से भारत के तत्कालीन प्रभावी नियमों द्वारा शासित होगा और इसके अधीन सभी अधिकार एवं बाध्यताएं, जहां भी अपेक्षित हो, भारत में उचित न्यायालयों द्वारा तदनुसार निर्धारित की जाएंगी।

दो हजार
के
दिन को

द्वारा हस्ताक्षरित एवं सुपुर्द
की उपस्थिति में
गवाह :
2.

स्वीकृत
भारत के राष्ट्रपति के लिए
और की तरफ से
स्पष्टीकरणः ‘करेन्सी ऑफ बांड’ शब्द का आशय है उस अवधि के दौरान जिसमें सरकारी सेवक की बाध्यताएं सक्रिय की गई थी और अपनी बाध्यता का निष्पादन करने में असफल होने वाले सरकारी सेवक से पूर्व निर्धारित राशि का दावा करने का सरकार का अधिकार प्रभावी है।# फॉर्म-8

[नियम 53(4) देखें]
अध्ययन अवकाश का विस्तार प्रदान करते समय किसी सरकारी सेवक, जो स्थायी कर्मचारी है, द्वारा निष्पादित किए जाने वाला बंधपत्र

मैं एतद्वारा सूचित करता हुं कि
मैं .निवासी जिला वर्तमान
.मंत्रालय/कार्यालय के रूप कार्यरत हुं, एतद्वारा
की एवं अपने वारिसों, के ओर से वचन देता है कि भारत
के के मा पर
(………………रु. केव की राशि का सरकारी पर लागू तत्कालीन सरकारी
की तारीख से के ब्याज सहित यदि भुगतान भारत से बाहर किसी अन्य देश
किया गया है तो की का उस देश और और भारत के बीच के शासकीय विनिमय
के के बीच के शासकीय विनिमय के अनुसार परिवर्तित मुद्रा में, सरकार द्वारा वहन किए गए अथवा किए जाने वाले वकील एवं
मुवक्किल की सभी लागतों सहित एक साथ अदा करुंगा ।

चूंकि मुझे सरकार द्वारा यह ध्यान में रखते हुए कि, मेरे द्वारा भारत के राष्ट्रपति के प्रति दिनांक. $\qquad$ का रु. $\qquad$ रु. केवल) का बंधपत्र निष्पादित किया गया है, ……………….से…………..तक अध्ययन अवकाश प्रदान किया गया था।

और चूंकि, मुझे मेरे अनुरोध पर. $\qquad$ तक के लिए अध्ययन अवकाश का विस्तार प्रदान किया गया है।

और चूंकि, सरकार की बेहतर सुरक्षा हेतु, मैंने इस शर्त पर जैसा कि नीचे लिखा गया है इस बंधपत्र को निष्पादित करने की सहमति दी है :

अब, उपर्युक्तलिखित बाध्यताओं की शर्ते यह हैं कि, मेरे द्वारा कार्यभार न संभालने अथवा सेवा से त्यागपत्र देने या सेवानिवृत्त होने अथवा अन्यथा अध्ययन अवकाश की अवधि के पूर्ण हो जाने या समाप्त किए जाने के पश्चात इयूटी पर वापस न आते हुए सेवा छोड़ने अथवा अध्ययन के पाठ्यक्रम को पूरा न करने की स्थिति में अथवा इयूटी पर मेरे वापस आने के बाद तीन वर्षापांच वर्षो की अवधि के दौरान किसी भी समय, मैं सरकार को अथवा सरकार द्वारा निर्देशित किए अनुसार, उक्त रु. $\qquad$ रु. केवल) की राशि की मांग पर सरकारी ऋणों पर लागू तत्कालीन सरकारी दरों पर मांग की तारीख से ब्याज सहित का तत्काल भुगतान करुंगा ।

अब, इसकी उपर्युक्तलिखित बाध्यताओं के लिए पुन: यह शर्त है कि ऊपर निर्दिष्ट अवधि के लिए सेवा में बाध्यकारी रूप से लाने की मेरे बंधपत्र की अवधि को मेरे द्वारा लिए गए अध्ययन अवकाश की समाप्ति के बाद बंधपत्र की अवधि के दौरान मेरे द्वारा ली गई किसी भी प्रकार की छुट्टी की कुल अवधि के समान तुलनात्मक अवधि के लिए विस्तार प्रदान किया जाएगा ।और मेरे द्वारा इस राशि का भुगतान किए जाने पर उपर्युक्त बाध्यता समाप्त और निष्प्रभावी हो जाएगी, अन्यथा यह पूरी तरह से लागू एवं प्रभावी रहेगी ।

यह बंधपत्र सभी प्रकार से भारत के तत्कालीन प्रभावी नियमों द्वारा शासित होगा और इसके अधीन सभी अधिकार एवं बाध्यताएं, जहां भी अपेक्षित हो, भारत में उचित न्यायालयों द्वारा तदनुसार निर्धारित की जाएंगी ।

दो हजार
के
दिन को

द्वारा हस्ताक्षरित एवं सुपुर्द
की उपस्थिति में
गवाह: 1
2

स्वीकृत
भारत के राष्ट्रपति के लिए
और की तरफ से
स्पष्टीकरणः ‘करेन्सी ऑफ बांड’ शब्द का आशय है उस अवधि के दौरान जिसमें सरकारी सेवक की बाध्यताएं सक्रिय की गई थी और अपनी बाध्यता का निष्पादन करने में असफल होने वाले सरकारी सेवक से पूर्व निर्धारित राशि का दावा करने का सरकार का अधिकार प्रभावी है ।फॉर्म-9
[नियम 53(4) देखें]
अध्ययन अवकाश पर जाते समय किसी सरकारी सेवक, जो स्थायी कर्मचारी नहीं है, दुवारा
निष्पादित किए जाने वाला बंधपत्र

माँ/हम एतदुवारा सूचित करते हैं कि हम…………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………..और बाध्यताधारी श्री/श्रीमती/कुमारी………………….और अथवा उपर्युक्त जमानती श्री/श्रीमती/कुमारी……………………और अथवा श्री/श्रीमती/कुमारी……………………द्वारा इस राशि का भुगतान किए जाने पर उपर्युक्त बाध्यता समाप्त और निष्प्रभावी हो जाएगी, अन्यथा यह पूरी तरह से लागू एवं प्रभावी रहेगी ।

सर्वदा बशर्ते कि इसके अधीन जमानतियों की देयताएं, समयावधि प्रदान करने या किसी अन्य सहिष्णुता द्वारा या सरकार अथवा उसके द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति (चाहे जमानतियों की सहमति या ज्ञान से हो या अन्यथा) द्वारा छोड़ देने के कारण क्षीण या निष्पादित नहीं होगी, यह भी आवश्यक नहीं होगा कि जमानतियाँ श्री/श्रीमती/कुमारी…………………….. और श्री/श्रीमती/कुमारी……………………या उनमें से किसी एक पर इसके अधीन राशि हेतु अभियोग चलाने से पहले बाध्यताधारी पर अभियोग चलाया जाए !

यह बंधपत्र सभी प्रकार से भारत के तत्कालीन प्रभावी नियमों द्वारा शासित होगा और इसके अधीन सभी अधिकार एवं बाध्यताएं, जहां भी अपेक्षित हो, भारत में उचित न्यायालयों द्वारा तंदनुसार निर्धारित की जाएंगी ।

दो हजार………………………के……………………………..के……………………..दिन को

उपर्युक्त श्री/श्रीमती/कुमारी…………………….. दिवारा हस्ताक्षरित एवं सुपुर्द

……………………………..की उपस्थिति में
गवाह: 1…………………………………………. 2…………………………………………. 2………………………………………….

उपर्युक्त श्री/श्रीमती/कुमारी…………………….. दिवारा हस्ताक्षरित एवं सुपुर्द

……………………………..की उपस्थिति में
गवाह: 1…………………………………………. 2…………………………………………. 2………………………………………….

उपर्युक्त श्री/श्रीमती/कुमारी…………………….. दिवारा हस्ताक्षरित एवं सुपुर्द

……………………………..की उपस्थिति में
गवाह: 1…………………………………………. 2………………………………………….

स्वीकृत
भारत के राष्ट्रपति के लिए
और की तरफ से
स्पष्टीकरणः ‘करेन्सी ऑफ बंधपत्र’ शब्द का आशय है उस अवधि के दौरान जिसमें सरकारी सेवक की बाध्यताएं सक्रिय की गई थी और अपनी बाध्यता का निष्पादन करने में असफल होने वाले सरकारी सेवक से पूर्व निर्धारित राशि का दावा करने का सरकार का अधिकार प्रभावी है ।फॉर्म-10
(नियम 53(4) देखें)
अध्ययन अवकाश का विस्तार प्रदान करते समय किसी सरकारी सेवक, जो स्थायी कर्मचारी नहीं है, द्वारा निष्पादित किए जाने वाला बंधपत्र

मैं/हम एतद्वारा सूचित करते हैं कि
हम. निवासी जिला वर्तमान
मैं. मंत्रालय/कार्यालय के रूप कार्यरत (जिन्हें इसके
बाद “बाध्यताधारी” कहा . जाएगा) और श्री/श्रीमती/कुमारी.
पुत्र/पुत्री. और श्री/श्रीमती/कुमार
पुत्र/पुत्री. (जिन्हें इसके बाद “जमानती” कहा जाएगा) एतद्वारा
अपनी/हमारी ओर से एवं मेरे/हमारे वारिसी, विधिक प्रतिनिधियों, निष्पादकों और प्रशासकों की
ओर से संयुक्त रूप से और पृथक रूप से यह वचन देता
(जिन्हें इसके बाद ‘सरकार’ कहा जाएगा) को मांग पर.
के की राशि का सरकारी श्रेणी पर लागू तत्कालीन सरकारी दरों पर मांग की तारीख से अब
तक के ब्याज सहित या यदि भुगतान भारत से बाहर किसी अन्य देश में किया गया है तो
उक्त राशि का उस देश और भारत के बीच के शासकीय विनिमय दर के अनुसार परिवर्तित
मुदा में, सरकार द्वारा बहन किए गए अथवा किए जाने वाले | वकील एवं मुवक्किल के बीच
की सभी लागत सहित एक साथ अदा करुंगा/करेंगे । |

सरकार द्वारा बाध्यताधारी को. $\qquad$ से. $\qquad$ तक अध्ययन अवकाश प्रदान किया गया इसको ध्यान में रखते हुए उसके द्वारा भारत के राष्ट्रपति के प्रति दिनांक. $\qquad$ का रु. $\qquad$ रु. केवल) का बंधपत्र निष्पादित किया गया ।

और जबकि बाध्यताधारी के अध्ययन अवकाश को उसके अनुरोध पर. $\qquad$ तक के लिए बढ़ाया गया ।

और जबकि सरकार की बेहतर सुरक्षा हेतु, बाध्यताधारी ने इस शर्त पर जैसा कि नीचे लिखा गया है इस बंधपत्र को निष्पादित करने की सहमति दी है :

जबकि उक्त जमानतियाँ द्वारा उपर्युक्त बाध्यताकारियों. $\qquad$ की ओर से जमानतियों के रूप में इस बंधपत्र पर हस्ताक्षर करने की सहमति दी है ।

अब, उपर्युक्त लिखित बाध्यताओं की शर्ते यह है कि, बाध्यताधारी श्री/श्रीमती/कुमारी. $\qquad$ द्वारा कार्यभार न संभालने अथवा सेवा से त्यागपत्र देने या कार्यअवधि पूल होने के पश्चात इयूटी पर वापस न आते हुए सेवा छोड़ने या अध्ययन के पाठ्यक्रम को पूरा न करने की स्थिति में या उसके इयूटी पर वापस आने के बाद तीन वर्षोंपांच वर्षों की अवधि के दौरान किसी भी समय, बाध्यताधारी और जमानती सरकार को मांग पर सरकारी श्रेणी पर लागू तत्कालीन सरकारी दरों पर मांग की तारीख से ब्याज सहित उक्त रु. $\qquad$ रु. केवल) की राशि का तत्काल भुगतान करेंगे ।

इसके अलावा ऊपर लिखित बाध्यताओं के लिए पुन: शर्त है कि बंधपत्र की अवधि का, ऊपर निर्दिष्ट अवधि के लिए बाध्यताधारी की अनिवार्य सेवा अवधि के अलावा, उसके द्वारा ली गई अध्ययन छुट्टी की समाप्ति के बाद बंधपत्र की अवधि के दौरान उसके द्वारा ली गई किसी भी प्रकार की छुट्टी की कुल अवधि के समान तुलनात्मक अवधि के लिए विस्तार प्रदान किया जाएगा ।और बाध्यताधारी श्री/श्रीमती/कुमारी……………………और अथवा उपर्युक्त जमानती श्री/श्रीमती/कुमारी……………………और अथवा श्री/श्रीमती/कुमारी……………………द्वारा इस राशि का भुगतान किए जाने पर उपर्युक्त बाध्यता समाप्त और निष्प्रभावी हो जाएगी, अन्यथा यह पूरी तरह से लागू एवं प्रभावी रहेगी ।

सर्वदा बशर्ते कि इसके अधीन जमानतियों की देखताएं, समयावधि प्रदान करने या किसी अन्य सहिष्णुता द्वारा या सरकार अथवा उसके द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति (चाहे जमानतियों की सहमति या ज्ञान से हो या अन्यथा) द्वारा छोड़ देने के कारण क्षीण या निष्पादित नहीं होगी, यह भी आवश्यक नहीं होगा कि जमानतियों श्री/श्रीमती/कुमारी…………………… और श्री/श्रीमती/कुमारी……………………या उनमें से किसी एक पर इसके अधीन राशि हेतु अभियोग चलाने से पहले बाध्यताधारी पर अभियोग चलाया जाए ।

यह बंधपत्र सभी प्रकार से भारत के तत्कालीन प्रभावी नियमों द्वारा शासित होगा और इसके अधीन सभी अधिकार एवं बाध्यताएं, जहां भी अपेक्षित हो, भारत में उचित न्यायालयों द्वारा तदनुसार निर्धारित की जाएंगी ।

दो हजार……………………..के…………………………….के……………………….दिन को

उपर्युक्त श्री/श्रीमती/कुमारी…………………….. दिवारा हस्ताक्षरित एवं सुपुर्द

………………………………की उपस्थिति में
गवाह: 1…………………………………………………….
2…………………………………………………….
उपर्युक्त श्री/श्रीमती/कुमारी…………………….. दिवारा हस्ताक्षरित एवं सुपुर्द

………………………………की उपस्थिति में
गवाह: 1…………………………………………………….
2…………………………………………………….
उपर्युक्त श्री/श्रीमती/कुमारी…………………….. दिवारा हस्ताक्षरित एवं सुपुर्द

………………………………की उपस्थिति में
गवाह: 1…………………………………………………….
2…………………………………………………….

स्वीकृत भारत के राष्ट्रपति के लिए और की तरफ से

स्पष्टीकरण: ‘करेन्सी ऑफ बंधपत्र’ शब्द का आशय है. उस अवधि के दौरान जिसमें सरकारी सेवक की बाध्यताएं सक्रिय की गई थी और अपनी बाध्यता का निष्पादन करने में असफल होने वाले सरकारी सेवक से पूर्व निर्धारित राशि का दावा करने का सरकार का अधिकार प्रभावी है ।