Amendment to Ex-Servicemen (Re-employment in Central Services and Posts) Rules, 1979

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This document details amendments to the Ex-Servicemen (Re-employment in Central Services and Posts) Rules, 1979. Key changes include a revised definition of ‘ex-serviceman’ to encompass individuals who have served in various capacities and were released under different circumstances, including medical grounds or due to establishment reduction. It also clarifies provisions for reservation of vacancies for ex-servicemen in Group ‘C’ and ‘D’ posts, specifying that 10% of vacancies in Group ‘C’ and 20% in Group ‘D’ will be reserved. Furthermore, the amendments address the adjustment of reserved category candidates within ex-servicemen vacancies and vice-versa. The upper age limit for recruitment to Group ‘B’ (non-gazetted), ‘C’, and ‘D’ posts is relaxed by subtracting the actual military service rendered, ensuring the resulting age does not exceed the maximum age limit by more than three years. A similar relaxation of up to five years is provided for recruitment to Group ‘A’ and ‘B’ services/posts through the All India Open Competitive Examination for ex-servicemen and retired officers who have completed at least five years of service and were released from service otherwise than by dismissal for misconduct or inefficiency, or due to physical disability.

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भारत का राजपत्र The Gazette of India

असाधारण

EXTRAORDINARY

भाग II—खण्ड 3—उप-खण्ड (i)

PART II—Section 3—Sub-section (i)

प्राधिकार से प्रकाशित

PUBLISHED BY AUTHORITY

सं. 518] नई दिल्ली, बुधवार, अक्तूबर 10, 2012/आश्विन 18, 1934
No. 518] NEW DELHI, WEDNESDAY, OCTOBER 10, 2012/ASVINA 18, 1934

कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय

अधिसूचना

नई दिल्ली, 4 अक्तूबर, 2012

साआ.नि. 757(अ) राष्ट्रपति, संविधान के अनुच्छेद 309 के परंतुक द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भूतपूर्व सैनिक (केंद्रीय सिविल सेवा और पद पुनर्नियोजन) नियम, 1979 का और संशोधन करने के लिए निम्नलिखित नियम बनाई है, अर्थात् :-

  1. (1) इउ नियमों का संक्षिप्त नाम भूतपूर्व सैनिक (केंद्रीय सिविल सेवा और पद पुनर्नियोजन) संशोधन नियम, 2012 है।

(2) ये राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से प्रदत्त होंगे।

  1. भूतपूर्व सैनिक (केंद्रीय सिविल सेवा और पद पुनर्नियोजन) नियम, 1979 में,—
  2. (1) नियम 2 में, खंड (ग) के स्थान पर, निम्नलिखित खंड रखा जाएगा, अर्थात् :—

“(ग) ‘भूतपूर्व सैनिक’ से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है,—

(i) जिसने भारत संघ की नियमित सशस्त्र सेना, नौ सेना और वायु सेना में किसी भी रैंक में, चाहे योधक के रूप में या गैर-योधक के रूप में सेवा की है, और

(क) जो अपनी पेंशन अर्जित करने के पश्चात् ऐसी सेवा से, चाहे स्वानुरोध पर या नियोजक द्वारा कार्यमुक्त किए जाने पर, सेवानिवृत्त, अयमुक्त या सेवोन्मुक्त हो गया है या हो गई है; या

(ख) जिसे सैनिक सेवा के कारण चिकित्सा आधार पर अथवा उसके नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों के कारण ऐसी सैनिक सेवा से कार्यमुक्त किया गया हो और जिसे चिकित्सा अथवा अन्य निःशक्तता पेंशन दी गई हो; या

(ग) जिसे संस्थापना में कटौती हो जाने के परिणामस्वरूप ऐसी सेवा से मुक्त किया गया हो; या

(ii) जिसे सेवा की विशिष्ट अवधि पूरी करने के पश्चात् उसके स्वयं के अनुरोध के सिवाय ऐसी सेवा से सेवानुक्त किया गया है अथवा कवाचार या अकुशलता के कारण सेवा से बर्खास्त अथवा


सेवामुक्त किया गया हो और जिसे कोई उपदान दिया गया हो तथा इसके अंतर्गत प्रादेशिक सेना की निम्नलिखित श्रेणियां, अर्थात् निरंतर अंगीभूत (एम्बोडीड) सेवा या अर्हक सेवा की खंडित अवधियों के पेंशनधारक, भी हैं ;

या
(iii) सैन्य डाक सेवा के ऐसे कार्मिक, जो नियमित सेना के भाग है और जो, सैन्य डाक सेवा के पेंशन सहित अपनी मूल सेवा में प्रतिवर्तन के बिना सैन्य डाक से सेवानिवृत्त हुए हैं’ या जिन्हें सैनिक सेवा के कारण या सैनिक सेवा की वजह से गुरूवर होने के कारण चिकित्सीय आधार पर या उसके नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों के कारण सैन्य डाक सेवा से कार्यमुक्त किया गया हो और जिन्हें चिकित्सा या अन्य निःशक्त पेंशन दी गई हो ;

या
(iv) ऐसा कार्मिक, पृढ़े 14 अप्रैल, 1987 से पूर्व छह मास से अधिक की अवधि से सैन्य डाक से प्रतिनियुक्ति पर है ; या

या
(v) सशस्त्र बलों के, जिसके अंतर्गत प्रादेशिक सेना के कार्मिक भी हैं, वीरता पुरस्कार विजेता

या
(vi) ऐसे भूतपूर्व रंगरूट, जिन्हें चिकित्सा आधार पर अशक्त होने के कारण पृथक् या कार्यमुक्त किया गया है और जिन्हें चिकित्सा निःशक्त पेंशन दी गई हो !”।
(2) नियम 3 के स्थान पर, निम्नलिखित नियम रखा जाएगा, अर्थात् :-
“3. लागू होना-ये नियम केंद्रीय सिविल सेवाओं और पदों तथा सभी अर्थसैन्य बलों में सहायक कमान्डेण्ट के स्तर के पदों तक लागू होंगे !”।
(3) नियम 4 में-
(क) उपनियम (1) के स्थान पर, निम्नलिखित उपनियम रखा जाएगा, अर्थात् :-
“(1) रिक्तियों का आख्यण- सभी अर्थसैन्य बलों में सहायक कमान्डेण्ट तक के स्तर के पदों के रिक्तियों का दस प्रतिशत, समूह ‘ग’ पदों में रिक्तियों का दस प्रतिशत ; और समूह ‘घ’ पदों में रिक्तियों का, जिसके अंतर्गत किसी वर्ष में सीधी भर्ती द्वारा भरी जाने वाली अस्थायी आधार पर आरंभ में भरी गई स्थायी रिक्तियां और ऐसी अस्थायी रिक्तियां भी हैं, जिनके स्थायी किए जाने की संभावना है या जिनके तीन मास और उससे अधिक समय तक बने रहने की संभावना है, बीस प्रतिशत भूतपूर्व सैनिकों द्वारा भरे जाने के लिए आरक्षित होंगे !”।
(ख) उपनियम (2) के स्थान पर, निम्नलिखित उपनियम रखा जाएगा, अर्थात् :-
“(2) भूतपूर्व सैनिकों के लिए आरक्षित रिक्तियों पर चयनित अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के अभ्यर्थियों को क्रमशः अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित रिक्तियों पर समायोजित किया जाएगा :

परंतु यदि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़े वर्ग के भूतपूर्व सैनिक का भूतपूर्व सैनिकों के लिए आरक्षित रिक्ति पर चयन किया जाता है और, यथास्थिति, अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों या अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित रिक्ति ऐसे भूतपूर्व सैनिक को समायोजित करने के लिए उपलब्ध नहीं है तो उसे भविष्य में, यथास्थिति, अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों या अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित अगली उपलब्ध रिक्ति पर समायोजित किया जाएगा !”।


(ग) उपनियम (3) के पश्चात्, निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
“परंतु केंद्रीय अर्थ सैन्य बलों में भूतपूर्व सैनिकों के लिए आरक्षित रिक्ति पर भर्ती की दशा में पात्र या अहित अभ्यर्थी की अनुपलब्धता के कारण आरक्षित रिक्ति नहीं भरे जाने पर, उसे गैर-भूतपूर्व सैनिक, प्रवर्ग के अभ्यर्थियों द्वारा भरा जाएगा।”।
(4) नियम 5 के स्थान पर, निम्नलिखित नियम रखा जाएगा, अर्थात् :-
“5 (क) केंद्रीय सरकार में समूह ‘ख’ (अराजपत्रित), समूह ‘ग’ या समूह ‘घ’ पदों की,रिक्तियों पर नियुक्ति के लिए ऐसे भूतपूर्व सैनिक को उसकी वास्तविक आयु में से वास्तविक सैनिक सेवा की अवधि की घटाने की अनुजा दी जाएगी और यदि पारिणामिक आयु उस पद के लिए जिस पर वह नियुक्ति चाहता है, विहित अधिकतम आयु सीमा से, तीन वर्ष से अधिक नही होती है तो यह समझा जाएगा कि वह आयु सीमा संबंधी शर्तों को पूरा करता है।
(ख) अखिल भारतीय खुली प्रतियोगिता परीक्षा के परिणामों के आधार से भिन्न सीधी भर्ती द्वारा भरी गई समूह क और समूह ख सेवाएं यी आफिसर पदों में, किसी रिक्ति पर नियुक्ति के लिए उच्चतर आयु सीमा को भूतपूर्व सैनिकों की और आयुक आफिसरों, जिसके अंतर्गत ‘आपात आयुक आफिसर या शार्ट सर्विस आयुक आफिसर भी हैं, की दशा में तीन वर्ष तक बढ़ाकर सैन्य सेवा काल तक शिथिल किया जाएगा।
(ग) अखिल भारतीय प्रतियोगिता परीक्षा के परिणामों के आधार पर सीधी भर्ती द्वारा भरी गई समूह क और समूह ख सेवाएं या पदों में किसी रिक्ति पर नियुक्ति के लिए, ऐसे भूतपूर्व सैनिकों और आयुक आफिसरों को, जिसके अंतर्गत आपात आयुक आफिसर या शार्ट सर्विस आयुक आफिसर भी हैं, जिन्होंने कम से कम पांच वर्ष सेवा की है और जिन्हें-
(i) कदाचार या अकुशलता के कारण सेवा से बर्खास्तगी या सेवा मुक्ति से भिन्न, कर्तव्य भार पूरा हो जाने पर कार्यमुक किया गया है, जिसके अंतर्गत वे भी है, जिनका कर्तव्य भार एक वर्ष के भीतर पूरा होना है); या
(ii) सैनिक सेवा के कारण शारीरिक निःशक्तता के आधार पर या असमर्थता के आधार पर कार्यमुक कर दिया गया है,

उच्चतर आयु सीमा में अधिकतम पांच वर्ष तक शिथिल करने की अनुजा दी जाएगी।”
[फा. सं. 36034/1/2006-स्थापना (आरक्षण)]
मनोज जोशी, संयुक्त सचिव

टिप्पणः मूल नियम भारत के राजपत्र, असाधारण, भाग 2, खंड 3, उपखंड (i) में सा.का.नि 1530 तारीख 15 दिसंबर, 1979 द्वारा प्रकाशित किए गए थे और उनमें पश्चातवर्ती संशोधन सा.का.नि 973, तारीख 27 अकूबर, 1986 द्वारा तथा अंतिम संशोधन अधिसूचना सं. सा.का.नि 333(अ), तारीख 27 मार्च, 1986 द्वारा किया गया था।